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G 7 के सत्र को पीएम मोदी ने संबोधित किया

June 18, 2026

G 7 के सत्र को पीएम मोदी ने संबोधित किया

प्रधानमंत्री ने फ्रांस में जी7 शिखर सम्मेलन में “नई साझेदारियां बनाने और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से कायम करने” पर आयोजित सत्र को संबोधित किया

Posted Date:- Jun 16, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन में ‘नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से कायम करना’ विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज की आपस में जुड़ी हुई दुनिया में, जहां ऊर्जा, भोजन, स्वास्थ्य, साइबर और आर्थिक सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हैं, मानवता की प्रगति और समृद्धि के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां बनाना जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि अनिश्चितता से भरी इस दुनिया में, व्यापार और तकनीक का इस्तेमाल संकीर्ण हितों के लिए किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भरोसे की कमी पैदा हो रही है। कोविड महामारी से मिले सबक का उल्लेख करते हुए, उन्होंने देशों से वैश्विक साझेदारियों में भरोसा और पारदर्शिता बढ़ाने पर ध्यान देने का आह्वान किया।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत के नजरिए के बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने हमेशा “मानवता सबसे पहले” के सिद्धांत का पालन किया है। यह सोच भारत की सभी कोशिशों के केंद्र में रही है, चाहे वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल बायो-फ्यूल अलायंस, मिशन लाइफ या ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत काम करना हो। उन्होंने आगे कहा कि इसी समावेशी नजरिए की वजह से, चाहे वह श्रीलंका में चक्रवात हो, अफ़गानिस्तान में भूकंप, मोजाम्बिक में बाढ़ या जमैका में तूफान हो, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं के समय भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आया है।

भारत की समावेशी और टिकाऊ विकास यात्रा के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि “सर्व जन हिताय, सर्व जन सुखाय” (सभी का कल्याण और खुशी) के मंत्र ने वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल पहचान, तकनीक के जरिए लोगों के सशक्तिकरण और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने में सराहनीय परिणाम दिए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को ‘दाता-प्राप्तकर्ता’ (डोनर-रिसीपेंट) वाली सोच से आगे बढ़कर एकजुटता और समान हिस्सेदारी की ओर बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान न करना अंतरराष्ट्रीय एकजुटता बनाने में सबसे बड़ी बाधा है और इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात की

Posted Date:- Jun 16, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 16 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मुलाकात की।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-कनाडा संबंधों में आई सकारात्मक गति का स्वागत किया और मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सफल भारत यात्रा के बाद हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

एक भविष्योन्मुखी रणनीतिक साझेदारी बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, दोनों नेताओं ने भारतीय और कनाडाई अर्थव्यवस्थाओं के बीच एक-दूसरे के पूरक होने की बात पर जोर दिया और वैश्विक ऊर्जा व खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में लचीली तथा विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व पर प्रकाश डाला।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की, जिसमें एलएनजी, एलपीजी और कोकिंग कोल से जुड़े व्यावसायिक समझौतों में हुए घटनाक्रम शामिल हैं।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय दौरों के आदान-प्रदान में जारी सकारात्मक गति का स्वागत किया। उन्होंने भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल की हालिया कनाडा यात्रा का उल्लेख किया और वर्ष 2026 में ही आगे चलकर कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री के नेतृत्व में भारत आने वाले कनाडाई व्यापार प्रतिनिधिमंडल की प्रतीक्षा है ।

दोनों पक्षों ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते(सीईपीए) की दिशा में जारी वार्ता में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और वर्ष 2026 में इन वार्ताओं को सफलतापूर्वक संपन्न करने के अपने साझा उद्देश्य को पुन: दोहराया।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोनों सरकारों के बीच संस्थागत स्तर पर बढ़ते सहयोग का स्वागत किया, जिसमें संयुक्त विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी समिति और कांसुलर डायलॉग की हालिया बैठकें शामिल हैं। उन्होंने रक्षा, वित्त और प्रवासन के क्षेत्रों में आगामी वार्ताओं के प्रति भी उत्सुकता जताई।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए, दोनों प्रधानमंत्रियों ने ‘जनरल सिक्योरिटी ऑफ इंफॉर्मेशन एग्रीमेंट'(जीएसओआईए) पर बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई। उन्होंने रक्षा संस्थानों के बीच हाल के आदान-प्रदान का भी स्वागत किया, जिसमें भारत के नेशनल डिफेंस कॉलेज की कनाडा यात्रा भी शामिल है।

दोनों नेताओं ने ‘कनाडा-भारत प्रतिभा एवं नवाचार रणनीति’ (कनाडा-इंडिया टैलेंट एंड इनोवेशन स्ट्रेटजी) के अंतर्गत जारी सहयोग की उल्लेख किया, जिसमें दोनों देशों के संस्थानों के बीच कौशल विकास, नवाचार साझेदारी और शैक्षिक सहयोग को मजबूत करने की पहल शामिल है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन’ (आईओआरए) का संवाद भागीदार बनने के लिए कनाडा को भारत के समर्थन का आश्वासन दिया।

दोनों नेताओं ने बातचीत, आदान-प्रदान और सहयोग को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए एक मंच के रूप में ‘रायसीना अमेरिकाज’ की स्थापना की घोषणा की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2026 में कनाडा आने के निमंत्रण के लिए प्रधानमंत्री कार्नी को धन्यवाद दिया। दोनों पक्ष इस यात्रा के लिए आपसी सहमति से सुविधाजनक तारीख तय करने की दिशा में राजनयिक माध्यम से संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए।

इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव नेपाल में लखीमपुर के डॉ.अनुपम मौर्य को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

Posted on 17.06.2026, Lakhimpur Kheri, Kathmandu Nepal, International Ayush Concave

कमलजीत सिंह

काठमांडू / लखीमपुर खीरी। काउंसिल ऑफ इंटेग्रेटिव वैद्य इन्नोवेशन एंड कोलेब्रेशन इंडिया एवं नेपाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के संयुक्त तत्वावधान में नेपाल के काठमांडू में इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव आयोजित 4.0 नेपाल एडिशन आयोजित किया गया। जहां उत्तर प्रदेश के लखीमपुर शहर के प्रतिष्ठित आयुष विशेषज्ञ डॉ. अनुपम मौर्य को आयुष क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया।

नेपाल के काठमांडू में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेपाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल रहे, जबकि भारतीय दूतावास नेपाल के प्रतिनिधि सुमन शेखर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त लीजेंड वर्ल्ड रिकॉर्ड दुबई (यूएई) के प्रतिनिधि कुलदीप चतुर्वेदी ने भी कार्यक्रम में विशेष सहभागिता की।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के 25 से अधिक राज्यों के साथ-साथ नेपाल, मलेशिया, कनाडा, यूएई, बांग्लादेश और सिंगापुर से आए आयुष चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, उद्यमियों एवं मैन्युफैक्चरर्स सहित कुल 254 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण “ मोस्ट आयुआयुष डॉक्टर्स इन क्लीनिकल डायग्नोसिस सेशन” विषय पर आयोजित लीजेंड्स वर्ल्ड रिकॉर्डस अटेम्प्ट रहा, जिसे सफलतापूर्वक पूर्ण कर एक ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया गया। इस उपलब्धि ने वैश्विक स्तर पर आयुष चिकित्सा प्रणाली की क्षमता, प्रभावशीलता और बढ़ती स्वीकार्यता को नई पहचान प्रदान की।
सम्मेलन के दौरान आयुष क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशेषज्ञों को आयुष लीजेंड अवार्ड, आयुष एक्सीलेंस अवार्ड तथा आयुष राइजिंग अवार्ड से सम्मानित किया गया।
इसमें लखीमपुर खीरी के डॉ. अनुपम मौर्य को यह सम्मान आयुष चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, शोध, नवाचार एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान नेपाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल, सिविक के संस्थापक डॉ. एम. एम. कुरैशी तथा लीजेंड्स वर्ल्ड रिकॉर्डस दुबई के प्रतिनिधि कुलदीप चतुर्वेदी द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। इस अवसर पर सिविक के संस्थापक डॉ. एम. एम. कुरैशी ने कहा कि इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव का उद्देश्य विश्वभर के आयुष विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को एक साझा मंच पर लाकर ज्ञान, शोध, नवाचार और वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि नेपाल संस्करण की सफलता और विश्व रिकॉर्ड की उपलब्धि आयुष के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
यह सम्मान प्राप्त करने पर लखीमपुर खीरी के डॉ. अनुपम मौर्य ने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें आयुष चिकित्सा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में और अधिक समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।

June 16, 2026

पीएम स्तरीय वार्ता: स्लोवाकिया और भारत बढ़ाएंगे सहयोग

Posted on 15.06.2026

ब्रातिस्लावा, आज ऐतिहासिक ब्रातिस्लावा महल में स्लोवाक गणराज्य के प्रधानमंत्री श्री रॉबर्ट फिको ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का हार्दिक स्वागत किया। आगमन पर उनका समारोहपूर्वक स्वागत किया गया।

दोनों नेताओं ने आमने-सामने और प्रतिनिधिमंडल स्तर पर बातचीत की। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किए जाने का स्वागत किया, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत होने के साथ-साथ दोनों देशों के साझा मूल्यों और सदियों पुरानी मित्रता को दर्शाता है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, अंतरिक्ष, असैनिक परमाणु ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल नवाचार, अकादमिक आदान-प्रदान, संस्कृति और प्रतिभा के आदान-प्रदान सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की। उन्होंने नई और उभरती प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सुपरकम्प्यूटरों जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं की भी पड़ताल की।

प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत को स्लोवाकिया द्वारा एकजुटता और समर्थन के लिए प्रधानमंत्री फिको को धन्यवाद दिया। यह आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने के लिए दोनों देशों की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। दोनों नेताओं ने पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। उन्होंने बहुपक्षवाद और वैश्विक शासन संस्थानों के सुधार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

दोनों नेताओं ने हाल ही में हुए भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के उत्साहजनक परिणामों पर गहरी संतुष्टि व्यक्त की। उन्होंने ऐतिहासिक भारत- यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के सफल समापन और संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा को अपनाने का भी स्वागत किया, जो प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और भी अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वार्ता के बाद, डिजिटल प्रौद्योगिकी, श्रम प्रवासन, उच्च शिक्षा और अनुसंधान तथा ऑडियो-विजुअल के सृजन के क्षेत्र में सहयोग हेतु समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान हुआ। रक्षा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने हेतु एक आशय पत्र का भी आदान-प्रदान हुआ। यह भी सहमति बनी कि भारत कोसिसे टेक्नीकल यूनिवर्सिटी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की प्रथम चेयर स्थापित करेगा।

प्रधानमंत्री श्री फिको ने प्रधानमंत्री श्री मोदी के सम्मान में भोज का आयोजन किया। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने मेजबान को आपसी सहमति से तय की गई तारीख पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

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स्लोवाकिया में पीएम ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

ब्रातिसस्लोवा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री फ़ित्सो के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।

श्री मोदी ने कहा हमारे आत्मीयता भरे स्वागत के लिए मैं Prime Minister फ़ित्सो का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ। वे अनुभवी लीडर होने के साथ-साथ भारत के सच्चे मित्र हैं। भारत-स्लोवाकिया संबंधों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में उनकी मित्रता और अटूट प्रतिबद्धता का विशेष महत्व रहा है। मुझे खुशी है कि आज उनसे मिलकर, मुझे हमारे संबंधों में एक ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने का सुअवसर मिला।

मेरी यह यात्रा किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया की पहली यात्रा है। मुझे खुशी है कि इस ऐतिहासिक अवसर पर हमने अपने संबंधों को Comprehensive Partnership का दर्जा देने का निर्णय लिया है। यह हमारे साझा विश्वास, साझा प्राथमिकताओं और साझा भविष्य का प्रतीक है।

आज प्रधानमंत्री जी और मैंने हमारे सहयोग को नई दिशा और नई ऊर्जा देने पर विस्तृत रूप से चर्चा की। हमारे द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग में हो रही प्रगति हमारे लिए संतोष का विषय है।

लेकिन हमारी क्षमताएँ विशाल हैं। हमारी आकांक्षाएँ उससे भी बड़ी हैं। Automobile, रेल्वे, advanced manufacturing और green technologies हमारे लिए विशेष रुचि के क्षेत्र हैं। इन सभी विषयों में आज हमने अपनी ताकतों को जोड़कर दोनों देशों के लोगों की भलाई के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

India-EU FTA को अंतिम रूप देने में स्लोवाकिया से मिले सहयोग के लिए मैं प्रधानमंत्री जी का विशेष आभार व्यक्त करता हूँ। हम इसके जल्द से जल्द implementation के लिए काम करेंगे ताकि दोनों देशों के उद्योग, स्टार्टअप्स और traders इसका अधिकतम लाभ उठा सकें।

Technology हमारी भावी साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ है। Digital technology पर आज किए गए MOU से Digital Public Infrastructure में सहयोग की नई संभावनाएं बनेंगी।

मुझे खुशी है कि स्लोवाकिया की एक यूनिवर्सिटी में AI के विषय पर India Chair स्थापित की जा रही है। AI मानवता की सेवा और प्रगति का सशक्त माध्यम बने, यही हमारी साझा सोच है। हमारा मानना है कि AI का भविष्य केवल innovation से नहीं, बल्कि trust, responsibility और human dignity पर आधारित होना चाहिए।

हमारे बीच स्पेस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का बहुत बड़ा potential है। 2017 में स्लोवाकिया की पहली satellite भारत द्वारा लॉन्च की गई थी। आज भारत में स्पेस सेक्टर अभूतपूर्व गति से नई ऊँचाइयाँ छू रहा है। मैं स्लोवाकिया की कंपनियों को इस विकास यात्रा में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता हूँ।

Civil Nuclear Energy भी दोनों देशों के लिए मुख्य प्राथमिकता का क्षेत्र है। हमने इस क्षेत्र में दोनों देशों की इंडस्ट्रीज़ और experts के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया।

रक्षा सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और strategic convergence का प्रमाण है। मुझे खुशी है कि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में आज हमने Letter of Intent sign किया। इससे joint development, joint production और defence industries के बीच सहयोग को नई गति मिलेगी।

वैश्विक मंच पर भी भारत और स्लोवाकिया करीबी सामंजस्य से आगे बढ़ रहे हैं। हम सहमत हैं कि सभी विवादों और तनावों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए। हम सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।

हम इस बात पर भी सहमत हैं कि वैश्विक संस्थानों को इक्कीसवीं सदी की वास्तविकताओं और चुनौतियों के अनुरूप खुद को redefine करना होगा। इस विषय पर हम वैश्विक प्रयासों को सशक्त बनाने की दिशा में काम करेंगे।

दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और people-to-people ties हमारे संबंधों को मज़बूत आधार प्रदान करते हैं। भारत के प्राचीन उपनिषदों का “स्लोवाक” भाषा में अनुवाद किया जाना हमारी सांस्कृतिक निकटता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग यहाँ की economy और society में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच professionals और skilled workers की mobility बढ़ाने के लिए आज हमने labour migration पर MOU की घोषणा की है। हम शीघ्र ही social security पर MOU को भी अंतिम स्वरूप देंगे।

आज की अत्यंत सार्थक चर्चा और भारत के लिए आपकी सकारात्मक सोच के लिए मैं एक बार फिर आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।

मैं 140 करोड़ भारतवासियों की तरफ से आपको भारत आने का निमंत्रण देता हूँ। और मुझे ख़ुशी हैं की आपने सार्वजनिक रूप से भी इस निमंत्रण का स्वीकार किया है। हम आपका स्वागत करने के लिए बहुत ही उत्सुक हैं।

मुझे विश्वास है कि हमारी Comprehensive Partnership आने वाले वर्षों में नए अवसरों, साझा समृद्धि और हमारे लोगों के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनेगी।

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