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श्री राम चन्द्र मिशन आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब

April 29, 2026

श्री राम चन्द्र मिशन आश्रम में उमड़ा आस्था का सैलाब

महात्मा रामचन्द्र जी महाराज की 127 वीं जयंती समारोह में गूंजी आध्यात्मिक चेतना
हजारों अभ्यासियों ने ध्यान साधना कर की विश्व कल्याण की कामना
( संजीव गुप्त द्वारा )
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के मार्गदर्शन में राम चन्द्र मिशन आश्रम में महात्मा रामचन्द्र जी महाराज बाबूजी की 127 वीं जयंती समारोह का शुभारंभ ध्यान-साधना से हुआ।
हजारों अभ्यासियों ने एकात्म भाव से सामूहिक ध्यान कर मानव कल्याण एवं विश्व शांति के लिए मंगल की कामना कीं। संपूर्ण आश्रम परिसर शांति, श्रद्धा और साधना की दिव्य तरंगों से आलोकित हो उठा।
इस अवसर पर पूज्य दाजी ने वर्चुअल माध्यम से दिये अपने संदेश में कहा कि
हर वह स्वप्न जो बिना प्रयास किए ही मर जाता हैै, वह स्वप्न देेखनेे वालेे को उस
स्वप्न की तुुलना मेंं कहींं अधिक निरंंतरता सेे सताता हैै जिसेे पूूरा करनेे की कोोशिश
की गई और वह नाकाम रहीी। यही वह ज्ञान हैै, जिसेे परंंपरााएँँ सदा सेे सिखाती आई
हैंं – अपूूर्णता केे संंस्कार, असफलता केे संंस्कारोंं सेे अधिक गहरेे घाव देेतेे हैंं। एक
पूूर्ण किया गया कार्य, चाहेे उसका अंंत दुु:खद ही क्योंं न हो, उसमेंं ऐसी सच्चाई
होती हैै जो शांंति प्रदान करती हैै जबकि छोड़ेे गए स्वप्न मेंं ऐसी कोई सच्चाई नहींं
होती। वह चेेतनाा मेंं जीवित रहता हैै, अनसुुलझा जोो निरंंतर वही प्रश्न पूूछता रहता
हैै, जिसका उत्तर देेनेे सेे भय हमेंं रोकता हैै। सहज मार्ग साधना पद्धति और हार्टफुुलनेेस केे अभ्यास मेंं जब हम शाम की सफ़ाई करतेे हैंं तब हम बैैठकर दिन भर केे संंस्कारोंं को पीछेे सेे बाहर निकल जानेे देेतेे हैंं। हमनेे जो किया, जो कहा, जो अनुुभव किया, उसेे हम अपनेे तंंत्र सेे निकाल देेतेे हैंं। लेेकिन उन संंस्कारोंं का क्या जो न किए गए कर्मोंं सेे
बनतेे हैंं? वह संंवाद, जिसेे हमनेे टाल दिया, वह सत्य जिसेे हमनेे कहा नहींं, वह
कदम जिसेे हमनेे उठाया नहींं, वह प्रेेम जिसेे हमनेे व्यक्त नहींं किया येे सभी
अकर्म भीअपनेे पीछेे छापेंं छोड़तेे हैंं। उन्होंने बताया कि दिव्य प्राणाहुति की जीवंत धारा अल्प समय में ही निष्ठापूर्ण दैनिक अभ्यास द्वारा साधक को समाधि की अवस्थाओं तक पहुँचा देती है। यह अमूल्य विद्या कालांतर में लुप्तप्राय हो गई थी, जिसे मिशन के आदि गुरु लाला जी महाराज ने पुनः खोजकर मानवता को प्रदान किया। इस पावन परंपरा को पूज्य बाबूजी महाराज ने जन–जन तक पहुँचाकर हृदय से हृदय तक आध्यात्मिक चेतना का वास्तविक संप्रेषण किया।
पूज्य दाजी ने अभ्यासियों का आवाहन किया कि वे अपने भीतर की जड़ताओं को त्यागकर प्रेम, करुणा और शांति के पथ पर अग्रसर हों तथा अपने जीवन को साधना का सजीव माध्यम बनाएं।


सायंकालीन ध्यान सत्र में भी साधकों ने ध्यान साधना कर वातावरण और अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण कर दिया। आयोजन में उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, केंद्र प्रभारी सर्वेश चंद्रा, ए के गर्ग, आश्रम प्रबंधक प्रमोद कुमार सिंह, राजगोपाल अग्रवाल,श्री गोपाल अग्रवाल, ममता सिंह, सुयश सिन्हा, कृष्णा भारद्वाज, हर्षवर्धन अग्रवाल, सुनील अग्रवाल, राजीव श्रीवास्तव, सुरेंद्र मोहन सिन्हा, माया सिंह, अभिषेक आदि का विशेष सहयोग रहा।

April 28, 2026

डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने राया मंडी के गेहूं क्रय केंद्रों का किया औचक निरीक्षण

किसानों से संवाद कर जानी समस्याएं, पारदर्शी व समयबद्ध खरीद के दिए निर्देश
मथुरा। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने सोमवार को राया मंडी में संचालित गेहूं क्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने किसानों को मिल रही सुविधाओं की जानकारी ली और केंद्र प्रभारियों को निर्देश दिए कि खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध ढंग से संचालित की जाए, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने तौल व्यवस्था, भुगतान प्रक्रिया और साफ-सफाई की स्थिति का गहन अवलोकन किया। उन्होंने मौके पर मौजूद किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं भी सुनीं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप जनपद में 28 गेहूं क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां समर्थन मूल्य पर खरीद की जा रही है। सरकार द्वारा गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है, जबकि मंडी में 2300 से 2400 रुपये प्रति कुंतल की दर से खरीद हो रही है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अधिक से अधिक क्रय केंद्रों पर ही अपना गेहूं बेचें, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य मिल सके।
उन्होंने यह भी बताया कि क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के 24 घंटे के भीतर भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में कर दिया जाता है। सरकार का उद्देश्य है कि किसानों की उपज समय पर और उचित मूल्य पर खरीदी जाए तथा उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा न होने दी जाए।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर मंत्री संदीप सिंह की प्रेस वार्ता, विपक्ष पर साधा निशाना

महिलाओं की भागीदारी उनका अधिकार, विरोध करने वालों को चुनाव में मिलेगा जवाब
मथुरा, 26 अप्रैल 2026।  प्रभारी मंत्री एवं राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बेसिक शिक्षा विभाग  संदीप सिंह ने वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान (यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय) में नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 और महिला जन-आक्रोश के संबंध में प्रेस वार्ता की।
उन्होंने कहा कि 16 और 17 अप्रैल 2026 को संसद में महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर विपक्षी दलों ने देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात किया है और अपनी महिला-विरोधी मानसिकता को उजागर किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए कहा कि नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी उनका स्वाभाविक अधिकार है, कोई उपकार नहीं।
मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि जो दल इस ऐतिहासिक अवसर में बाधा बने हैं, उन्हें आने वाले चुनावों में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल कोटा के भीतर धर्म आधारित आरक्षण की मांग उठाकर प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं, जो तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रेस वार्ता में राज्यसभा सांसद तेजवीर सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी, विधायक गोवर्धन मेघश्याम सिंह, एमएलसी ठाकुर ओम प्रकाश सिंह और महानगर अध्यक्ष हरिशंकर राजू यादव सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

UP Election 2027 से पहले हाथरस की जमीनी हकीकत पर घिरती सत्तारूढ़ पार्टी

Posted on 28.04.2026 Time 10.58, Tuesday, UP Vidhan Sabha Election 2027, Neeraj Chakrapani  Hathras

हाथरस में अफसर-नेता गठजोड़ पर उठे सवाल, चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल

हाथरस, आगामी 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। राज्य की सत्ता में वापसी की चुनौती के बीच सत्तारूढ़ दल के सामने जमीनी स्तर पर संगठन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। खासतौर पर ब्रज क्षेत्र के हाथरस जनपद को लेकर उठ रही चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में ध्यान आकर्षित कर रही हैं।
प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों वाले इस जनपद में फिलहाल दो सीटों पर भाजपा और एक पर सहयोगी दल का कब्जा है। जिला पंचायत से लेकर नगर निकायों तक सत्ता पक्ष की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर जनसमस्याओं और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर असंतोष की स्थिति सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि जिले में प्रशासनिक अधिकारियों और कुछ जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल जनहित के बजाय निजी हितों की पूर्ति की ओर झुका हुआ है। आरोप हैं कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही, जिससे भूमाफिया सक्रिय बने हुए हैं। कई मामलों में सांठगांठ की आशंका भी जताई जा रही है।
विकास कार्यों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। लंबे समय से लंबित यातायात सुधार, मेडिकल सुविधाओं के विस्तार और ट्रांसपोर्ट नगर जैसी परियोजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हो पाई है। जनसुविधाओं की कमी और अव्यवस्था को लेकर आम नागरिकों में नाराजगी देखी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ विभागों जैसे लोक निर्माण, बिजली, जल निगम,वन विभाग ,समाज कल्याण , स्वास्थ्य सेवाएं, उप निबंधन कार्यालय,जिला उद्योग  और परिवहन विभाग सहित आदि में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इन विभागों में कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश से मिले संकेतों के बाद सत्तारूढ़ दल के लिए आगामी विधानसभा चुनाव आसान नहीं होंगे। ऐसे में यदि स्थानीय स्तर पर संगठन और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया, तो इसका असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है।
विपक्षी दल भी इन मुद्दों को लेकर सक्रिय हो गए हैं और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में चुनावी माहौल और तेज होने के साथ ही हाथरस जैसे जनपदों की स्थिति प्रदेश की व्यापक राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।फिलहाल नजर इस बात पर है कि सरकार प्रशासनिक स्तर पर उठ रहे आरोपों और जन असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती है।

सूचना विभाग बनाता है सरकार की छवि: रोहित नंदन

Smarika RIJWA vimochan by Ritered Information Officers in Lucknow

Posted on 27.04.2026 Time 09.12 Tuesday, Lucknow, UP Information Department, RIJWA

लखनऊ में मोबाइल फोन सूचना निदेशक के नाम लिया गया था, सूचना विभाग का रहा है स्वर्णिम इतिहास

लखनऊ, 27 अप्रैल 2026, । मोबाइल फोन की आमद1995 में हुई थी और लखनऊ में पहला मोबाइल फोन कनेक्शन जुलाई 1996 में सूचना निदेशक के नाम लिया गया। इसी तरह इंटरनेट का मामला है। इंटरनेट का लखनऊ में पहला कनेक्शन सूचना विभाग के नाम लिया गया। सूचना विभाग सरकार की आँख और कान हुआ करता था, अब भी है, तकनीक और लेखनी दोनों के सम्मिश्रण से सूचना विभाग आज भी अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखे हुए है।
यूपी के तीन बार सूचना निदेशक रहे वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी रोहित नंदन ने यह बातें आज सूचना भवन आडिटोरियम में आयोजित सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पूर्व अधिकारियों के हाल ही में बनाए गए संगठन “रिटायर्ड इन्फ़ॉर्मेशन जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन” के पहले सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए कहीं।इस अवसर पर पूर्व सूचना निदेशक, सुधेश ओझा, अजय उपाध्याय और पूर्व अपर निदेशक रहे डॉक्टर अनिल पाठक भी मौजूद रहे।
रोहित नंदन एकमात्र अधिकारी हैं जो सूचना निदेशक पद पर तीन बार तैनात हुए हालाँकि वह इस पद पर पहले आना नहीं चाहते थे, लेकिन आज वह जब याद कर रहे थे कि कैसे उन्होंने उस समय इस पद पर सबसे लम्बे कार्यकाल का निर्वहन किया, तो बताया कि इस पद की गरिमा इसके वर्चस्व से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सूचना विभाग के अधिकारी जो काम करते हैं उससे सरकार की छवि बनती है और सरकार की छवि आम आदमी के दिमाग़ में बेहतर से बेहतर बनाना आसान काम नहीं होता। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन हो या इंटरनेट, सबसे पहले सूचना विभाग के पास आता है तो इससे समझा जा सकता है कि यह विभाग कितना महत्वपूर्ण है।
चुनाव आयुक्त रहे पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्री अनूप चंद्र पांडेय भी दो बार यूपी के सूचना निदेशक पद पर रहे। उन्होंने कहा कि उनकी बहुत बड़े बड़े पदों पर तैनाती हुई। यूपी के मुख्य सचिव से लेकर चुनाव आयुक्त तक, लेकिन सूचना निदेशक के कार्यकाल को वह सबसे ज्यादा याद करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका वो कार्यकाल अविस्मरणीय है। श्री पांडेय ने बताया कि कैसे एक बार बजट पेश किए जाने के समय प्रेस विज्ञप्ति में जो लिखा गया था वह बजट में था ही नहीं। विधानसभा में इस पर बहस हो गई तो सरकार ने सूचना विभाग के प्रेस नोट की बात स्वीकार कर ली। उन्होंने कहा कि सूचना निदेशक का पद सरकारी सिस्टम में शक्ति का केंद्र माना जाता है और सूचना निदेशक ही वह अधिकारी होता है जिसकी पहुंच मुख्यमंत्री तक सीधे होती है और कभी भी किसी भी समय वह मुख्यमंत्री से सीधे बात कर सकता है। श्री पांडेय ने कहा कि अखबारों की स्क्रुटनी भी इस विभाग का एक विशेष कार्य रहा है और सूचना विभाग के अधिकारियों की बौद्धिक क्षमता का सरकार के पक्ष में बेहतर इस्तेमाल का लंबा इतिहास रहा है।


सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति राघवेंद्र कुमार ने इस अवसर पर कहा कि सूचना विभाग के कार्य वास्तव में बड़े महत्वपूर्ण और सराहनीय रहे हैं। उन्होंने बताया कि किस तरह न्यायालयों के कार्यों का भी सूचना विभाग ने प्रचार कर आम आदमी के मन में न्यायपालिका के प्रति विश्वास को पुख्ता करने का कार्य किया है। इस अवसर पर रिटायर्ड इन्फ़ॉर्मेशन जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन की पत्रिका “रिज़वा” का भी लोकार्पण किया गया और रोहित नंदन को अशोक प्रियदर्शी स्मृति सूचना सम्मान और अनूप चन्द्र पांडेय को उमेश कुमार सिंह चौहान स्मृति सम्मान से नवाज़ा गया। इस अवसर पर सूचना विभाग के पूर्व अधिकारियों में श्री विजय राय, राजगोपाल सिंह वर्मा, हामिद अली खां, ज्ञानवती, दिनेश सहगल, अशोक कुमार शर्मा, अशोक बनर्जी, अमजद हुसैन सहित ग्यारह लोगों को भी सम्मानित किया गया।

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