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महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने जूना अखाड़े के श्रीमहंतों पर लगाए गंभीर आरोप

March 15, 2026

महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने जूना अखाड़े के श्रीमहंतों पर लगाए गंभीर आरोप

हरिद्वार, 15 जनवरी। हिंदू रक्षा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं भारत साधु समाज के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरि महाराज ने जूना अखाड़े के चार श्रीमहंतों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस क्लब में पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी प्रबोधानंद गिरी ने अखाड़े के चार श्रीमहंतों पर अखाड़े और सनातन परम्परा को नष्ट करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 30 नवंबर को जूना अखाड़े ने एक पत्र जारी कर उन्हें और उनके गुरु को अखाड़े से निष्कासित कर दिया था। सोशल मीडिया से इसकी जानकारी मिलने पर उन्होंने निष्कासन के आरोपों का जवाब एक करोड़ की मानहानि के साथ अधिवक्ता के माध्यम से अखाड़े के पदाधिकारियों को भेजा था। लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अखाड़े द्वारा उन पर लगाए गए सभी आरोप झूठे, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी जूना अखाड़े में नागा दीक्षा और अखाड़े की सदस्यता नहीं ली। वर्ष 2007 में प्रयागराज में संतों द्वारा उन्हें महामंडलेश्वर के रूप में सम्मानित किया गया था। वर्ष 2021 में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी द्वारा उनका अभिषेक किया गया था और इस प्रक्रिया को किसी अन्य पदाधिकारी द्वारा निरस्त नहीं किया जा सकता। ना ही किसी को उन्हें निष्कासित करने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखाड़े में महामंडलेश्वर बनाने के नाम पर लाखों रूपए की धनराशि ली जाती है। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने यह आरोप भी लगाया कि कुंभ मेले में कुछ लोगों को अस्थायी रूप से नागा साधु बनाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिसका उन्होंने विरोध किया है। फर्जी नागा के रूप में उन्होंने अपनी ही संस्था हिन्दू रक्षा सेना के लोगों को पकड़ा है। पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरि गिरी, श्रीमहंत मोहन भारती, श्रीमहंत प्रेम गिरी और श्रीमहंत नारायण गिरी पर आरोप लगाते हुए उनका पंक्ति पत्तल वहिष्कार किए जाने की घोषणा करते हुए कहा कि वह इन चारों को अपने यहां पंक्ति में नहीं बुलाएंगे और न ही उनके यहां जाएंगे। स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने श्रीमहंत हरि गिरी से अखाड़े की आय-व्यय का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग करते हुए जिस व्यक्ति को फर्जी संत और कालनेमि बताकर पूर्व में जिसका निष्कासन किया गया था। अखाड़े के पदाधिकारी आज उसी को जगद्गुरु बना रहे हैं। जबकि उन्हें जगद्गुरु बनाने का कोई अधिकार ही नहीं है। उन्होंने अखाड़े के पदाधिकारियों पर इस्लामिक जेहादियों से सांठगांठ का आरोप भी लगाया और कहा कि उनकी हत्या करायी जा सकती है। केंद्र सरकार से संबंधित लोगों की संपत्ति और गतिविधियों की विशेष जांच एजेंसी से जांच कराने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित मांग करते हुए स्वामी प्रबोधानंद गिरि ने कहा कि वह जीवन भर सनातन धर्म, गौसेवा और संतों की सेवा के लिए कार्य करते रहेंगे तथा देशभर में धर्म जागरण के लिए निरंतर अभियान चलाते रहेंगे। प्रैसवार्ता के दौरान स्वामी सत्यव्रतानंद सरस्वती, स्वामी ओमानंद, प्रकाशानंद सरस्वती, वीरेन्द्र स्वरूप, प्रज्ञानंद गिरि, लक्की वर्मा, अमित वर्मा व लक्की राठौर आदि मौजूद रहे।

पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा, 9 से 29 अप्रैल तक मतदान

नई दिल्ली, 15 मार्च 26, (पीबी समाचार) भारत निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। मतदान 9 से 29 अप्रैल तक अलग अलग राज्यों में अलग अलग तरीकों में होंगे।

निर्वाचन आयोग ने आज सायं असम, केरल, पुद्दुचेरी और तमिलनाडु में एक चरण में विधानसभा चुनाव कराने की घोषणा की, जबकि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव होंगे। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए आज दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि असम, केरल और पुद्दुचेरी में मतदान 9 अप्रैल को होगा। तमिलनाडु में मतदान 23 अप्रैल को होगा। पश्चिम बंगाल में मतदान 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 142 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। सभी चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में मतगणना 4 मई को होगी। श्री कुमार ने कहा कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।

श्री कुमार ने बताया कि पांच विधानसभाओं के 824 निर्वाचन क्षेत्रों के चुनावों में लगभग 17 करोड़ 40 लाख लोग मतदान के पात्र हैं। इनमें पश्चिम बंगाल के लगभग 6 करोड़ 44 लाख, तमिलनाडु के 5 करोड़ 67 लाख, केरल के 2 करोड़ 70 लाख, असम के ढाई करोड़ और पुडुचेरी के 9 लाख 44 हजार मतदाता शामिल हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चार राज्‍यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में कुल 2 लाख 19 हजार मतदान केंद्र होंगे और कुल 25 लाख चुनाव कर्मियों को तैनात किया जाएगा।

मुख्‍य निर्वाचन आयुक्‍त ने कहा कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर पेयजल, शौचालय और साइनबोर्ड जैसी न्यूनतम सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में चुनाव को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए चुनाव आयोग ने 30 नई पहल की हैं। श्री कुमार ने कहा कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम बारह सौ मतदाता ही मतदान कर सकेंगे। सभी मतदान केंद्रों पर निगरानी के लिए शत प्रतिशत वेबकास्टिंग होगी।

पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है, असम की 126 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 20 मई को समाप्त हो रहा है और केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 23 मई को समाप्त हो रहा है। वहीं, तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 10 मई को और पुद्दुचेरी की 30 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 15 जून को समाप्त हो रहा है।

नेपाल में बस दुर्घटना, 7 भारतीयों की मृत्यु

काठमांडू, (नेपाल) 15 मार्च 26, गोरखा जिले में कल शाम एक बस दुर्घटना में सात भारतीय तीर्थयात्रियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। पुलिस के अनुसार बस में सोलह लोग सवार थे, जिनमें चौदह भारतीय तीर्थयात्री शामिल थे जो मनकामना मंदिर से लौट रहे थे। पुलिस ने बताया कि मृतकों में दो महिलाएं और पांच पुरुष शामिल थे। घायलों का उपचार किया जा रहा है। बस का चालक बच गया है, जबकि उसका सहायक घायल हो गया। अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है और आगे की जांच जारी है।

भागवत कथा में नंदोत्सव की धूम, जमकर थिरके श्रद्धालु

News Posted on 15.03.2026 Sunday Time 06.26 PM, Mathura,  Vrandavan Report by Atul Kumar
बलदेव, 15 मार्च 26 (उप्र समाचार सेवा) कस्बा स्थित रीढ़ा मोहल्ला में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में भागवत प्रवक्ता आचार्य मनीष गर्गाचार्य  ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और नंदोत्सव का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि कंस के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया। कथा स्थल पर  नंदोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया, जिसमें भक्तजन भजनों की धुन पर झूमते नजर आए।
इस दौरान भगवान के बाल रूप की सजीव झांकी सजाई गई थी। भगवान के जन्म पर बधाई गीत भी गाए गए। पूरे समय श्रद्धालु भजनों पर झूमते रहे।
इस अवसर पर परीक्षित श्याम सुन्दर अग्रवाल,रेखा अग्रवाल,अमन अग्रवाल,रवेंद्र सिंह,उमेश अग्रवाल,पूर्व ब्लॉक प्रमुख यतेंद्र सिकरवार,चंद्रभान प्रधान,विनय अग्रवाल,अखिलेश पाठक,अवधेश दुबे,रिंकू सोनी, हरिओम सेठ,देवकीनंदन ,हरिमोहन , विनोद कुमार,बांकेलाल,रवि अग्रवाल,देव अग्रवाल,सतेंद्र ,संजीव अग्रवाल,योगेंद्र आचार्य,धीरज आचार्य,बच्चू सिंह,पवन गोयल,युवा समाजसेवी सुजीत वर्मा आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

महंत पीर गणेश नाथ के स्मृति समारोह में शामिल हुए यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ

कैथल (हरियाणा) : 14 मार्च, 2026 , मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ब्रह्मलीन श्री मंहत पीर गणेश नाथ जी के आठ मान भण्डारा, देशमेल एवं शंखाढाल कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह कार्यक्रम पूज्य श्री महंत पीर गणेश नाथ जी महाराज के शिष्य महंत देवनाथ जी महाराज द्वारा अपने गुरु की स्मृति में आयोजित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीते जी सम्मान प्रदान करने के साथ ही भौतिक रूप से अपने मध्य न रहने के बाद भी अपने गुरुओं और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करना सनातन परम्परा का हिस्सा है। इसी भाव के तहत हम सब यहां एकत्रित हैं। ‘कृते च प्रति कर्तव्यम् एष धर्मः सनातनः’ अर्थात यदि किसी ने हमारे प्रति कोई योगदान दिया है, तो उस योगदान के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करना वास्तविक सनातन धर्म की पहचान है। हम सनातनी इसलिए हैं, क्योंकि हम बड़ों का सम्मान करते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की भूमि वीरता  और भक्ति की भूमि रही है। इसके रज-रज में सिक्खों का प्रभाव देखने को मिलता है। कहा जाता है कि जब सिकन्दर विश्व विजेता बनने का सपना लेकर भारत पर हमला करने आया, उस समय उसके मन में यह अहंकार था कि वह विश्व विजेता बन जाएगा। वह जिस देश में जाता था, उस देश का शासक उसके समक्ष नत्मस्तक हो जाता था। इसी गलत फहमी में उसने भारत पर हमला करने का दुस्साहस किया।
मुख्यमंत्री  ने कहा कि जब सिकन्दर के सैनिक हमला करने के लिए भारत में घुसे तो उसको बताया गया कि यहां एक चमत्कारिक सिद्ध योगी है। वह जो बोल देता है, वह सिद्ध हो जाता है। सिकन्दर ने कहा कि उस योगी को बुलाकर लाओ। उसके सिपहसालारों ने योगी के समक्ष जाकर कहा कि आपको विश्व विजेता सिकन्दर ने बुलाया है। उस योगी ने कहा कि कौन सिकन्दर। विश्व विजेता मनुष्य नहीं हो सकता है। गलत फहमी मत पालो। हम किसी सिकन्दर को नहीं मानते। सिकन्दर के सिपहसालारों ने वापस जाकर बताया कि यह योगी चमत्कारिक है, लेकिन कहते हैं कि वह सिकन्दर को नहीं मानते। यदि आपका आदेश हो तो बल प्रयोग से उस योगी को लाया जाए। सिकन्दर ने मना किया और कहा कि वह स्वयं जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिकन्दर यह मानता था कि जिस प्रकार अनेक राजाओं ने उसके समक्ष नतमस्तक होकर उसकी अधीनता स्वीकार की, उसी प्रकार यह योगी भी करेगा। सिकन्दर के उस योगी के सामने आने पर सिपहसालार उस योगी को बताते हैं कि सिकन्दर आए हैं। उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। योगेश्वर अपने आसन पर जमे रहे। सिकन्दर को लगा कि वह योगी उनका अपमान कर रहा है। तो उन्होंने पूछा कि मैं सिकन्दर हूं, क्या आप मुझे नहीं पहचानते। योगेश्वर ने जवाब दिया कि वह केवल मनुष्य को पहचानते हैं। ईश्वर के अलावा वह किसी को नहीं मानते हैं। ईश्वर सबसे महान है। वह अपनी कृपा सब पर समान रूप से बरसाता है। आप ईश्वर से बड़े नहीं हो सकते हैं और जो ईश्वर से बड़ा नहीं हो सकता उसे मैं महान नहीं मानता। सिकन्दर को पूरी सेना के सामने उस योगी के समक्ष नत्मस्तक होना पड़ा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सन्यासी ने सिकन्दर से कहा कि यह भारत भूमि है। अभी तो यह पहला मुकाबला है, आगे बढ़ोगे, तो वापस नहीं जा पाओगे। अच्छा होगा कि वापस चले जाओ, नहीं तो वापस जाने का मौका भी नहीं मिलेगा। यह भारत के संतो व सन्यासियों की वह परम्परा है, जिसने सदैव सदाचार व कर्तव्य को राष्ट्र के प्रति समर्पण के भाव को सर्वोच्च मान्यता दी तथा स्वयं के अहंकार से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए अपने आपको समर्पित किया है। इसीलिए गांव या शहर में रहने वाला भारत का प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी आज भी  सन्यासियों के प्रति आदर का भाव रखता है। यही आदर का भाव उसकी ताकत व संस्कार बनता है। यही संस्कार हम सभी को आगे बढ़ने तथा फलने-फूलने का अवसर उपलब्ध कराता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी चाहता था कि अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मन्दिर का निर्माण हो तथा गुलामी की बेड़ियां टूटें। करोड़ों लोग अयोध्या नहीं गये होंगे, लेकिन उनके मन में भाव था कि भगवान श्रीराम भारत के सनातन के प्रतीक व आधार स्तम्भ हैं। 500 वर्ष पूर्व एक विदेशी आक्रांता ने श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु श्रीराम मन्दिर को अपवित्र करते हुए क्षतिग्रस्त कर दिया था। दिन व वर्ष बीतते रहे तथा हिन्दू संघर्ष करता रहा। कोई भी हिन्दू की बात को सुनने वाला नहीं था।
भगवान श्रीराम के भव्य मन्दिर के निर्माण की पहल को उस समय नई ऊंचाइयां प्राप्त हुईं, जब श्री नरेन्द्र मोदी जी देश के प्रधानमंत्री बने। आज उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान श्रीराम मन्दिर मुक्त ही नहीं हुआ, बल्कि दुनिया का सबसे भव्यतम मन्दिर बनकर तैयार हो गया तथा रामलला विराजमान हो गये।
आजादी के उपरान्त अनेक सरकारें आयीं और गयीं। लेकिन किसी ने लोगों की आस्था के बारे में नहीं सोचा। उनके पास तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति से फुर्सत नहीं थी। केन्द्र व प्रदेश में एक जैसी सरकार होने से राम मन्दिर का निर्माण हुआ। आज उत्तर प्रदेशवासियों को सुरक्षा की गारण्टी मिली है तथा अयोध्या ने देशवासियों को आस्था की गारण्टी दी है। इसी प्रकार काशी में श्री काशी विश्वनाथ धाम तथा महाकाल में महालोक का निर्माण हुआ है। उत्तराखण्ड के बद्रीनाथ धाम और केदारनाथ धाम में भव्य मन्दिर का निर्माण हो चुका है। यह तब सम्भव होता है, जब उसके बारे में सोचने वाली सरकारें होती हैं। सनातन विरोधी सरकारें रहेंगी, तो वह तुष्टीकरण करेंगी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत का दुश्मन हमेशा इस फिराक में रहता है कि कैसे हम इस देश को कमजोर करें। दुश्मन पाकिस्तान भारत में नशे कारोबार को बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। हम अपनी युवा पीढ़ी व समाज को जागरूक करें। नशे के खिलाफ अभियान चलायें, क्योंकि नशा नाश का कारण है। नशे के खिलाफ हमारे द्वारा किये गये प्रयास, देश की सेवा है। हमें नशे के खिलाफ एक आन्दोलन को आगे बढ़ाना होगा। नशे के सौदागर देश के दुश्मन हैं, इन्हें किसी भी परिस्थिति में प्रश्रय नहीं देना चाहिये। यह मौत के सौदागर देश की सुरक्षा से भी खिलवाड़ कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी ऊर्जा और क्षमता से भरपूर है। अवसर मिलने पर युवा पीढ़ी ने देश व दुनिया के सामने अपनी प्रतिभा व ऊर्जा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस युवा पीढ़ी से किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने देना चाहिये। धर्मसभाओं के माध्यम से हमें आम जनमानस को जागरूक करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिये। प्रत्येक सनातन धर्मावलम्बी को सनातन धर्म स्थलां पर जाकर बिना भेद-भाव के दर्शन-पूजन व अन्य अनुष्ठान करने चाहिये। भारत को नयी ऊंचाईयां तक पहुंचाने में योगदान देने के लिये सभी को एक साथ मिलकर इन स्थलों पर आना होगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमारे धर्म स्थल पूजा मात्र के स्थल नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की चेतना के भी केन्द्र होते हैं। यह केन्द्र आस्था के साथ-साथ समरसता के प्रतिनिधि भी बनने चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को बिना भेद-भाव अपनी आस्था व्यक्त करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिये। यह देश उस समय कमजोर हो गया था, जब यह जातियों के नाम पर बंटा हुआ था। आपसी मतभेदों में उलझा हुआ था। एक-दूसरे को नीचा दिखाने की दुष्प्रवृत्ति हावी हो रही थी। जब यह देश कमजोर हुआ, तो विदेशी आक्रान्ताओं ने यहा आकर धर्म स्थलों को नष्ट किया। बहन-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वतंत्र भारत में आज किसी प्रकार की अराजकता नहीं है। हम सभी को नये भारत का दर्शन हो रहा है। वर्तमान भारत पर हम सभी को गौरव की अनुभूति करनी चाहिये। यह देश दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनने की ओर अग्रसर है। आज यहां इतना बड़ा आयोजन चल रहा है। दुनिया में अन्यत्र इतना बड़ा आयोजन सम्भव नहीं है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आप सभी को पता होगा कि खाड़ी देशों में युद्ध चल रहा है। दुनिया में अराजकता है, लेकिन भारत अन्नदाता किसानों के पुरुषार्थ व देश के यशस्वी नेतृत्व के मार्ग-दर्शन में विकास की यात्रा में निरन्तर आगे बढ़ रहा है। यह समय है, जब 145 करोड़ देशवासी अपने नेतृत्व पर विश्वास जताकर मजबूती से देश के साथ खड़े हों। देश के नेतृत्व का जो भी आदेश हो, उसका पालन करें। कुछ लोग अफवाह के नाम पर अराजकता फैला रहे हैं। जनता जिन लोगों पर अपना विश्वास खो चुकी है, वह लोग अफवाह का सहारा ले रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमें मिलकर कार्य करना होगा। अव्यवस्था व अफवाह पर अंकुश लगाना होगा। ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के निर्माण में हम सबको मजबूती के साथ कार्य करना होगा। देश सुरक्षित रहेगा, तो सनातन भी सुरक्षित रहेगा। यदि सनातन सुरक्षित रहेगा, देश भी सुरक्षित रहेगा। यह दोनों एक दूसरे के पूरक हैं।
इस अवसर पर सन्तगण तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे
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