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संघ ने सौ वर्ष में सांस्कृतिक पुनर्जागरण किया: राधाकृष्णनन

July 17, 2026

संघ ने सौ वर्ष में सांस्कृतिक पुनर्जागरण किया: राधाकृष्णनन

RSS

#RSS News New Delhi Posted on 17.07.2026, Time 10.35 PM Friday

नई दिल्ली, 17 जुलाई 2026, उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने आज कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS का सफर संगठित स्वैच्छिक कार्यों की शक्ति और निस्वार्थ सेवा के चिरस्थायी मूल्यों का प्रमाण है। नई दिल्ली में श्याम जाजू और अनुपम त्रिवेदी की पुस्तक ‘आरएसएस@100: सेवा, एकता और बलिदान की एक शताब्दी’ का विमोचन करते हुए उन्होंने यह बात कही।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने निःस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण के माध्यम से एकता और राष्ट्रीय चेतना के आदर्शों को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि संगठन की एक शताब्दी की यात्रा दर्शाती है कि स्थायी राष्ट्रीय प्रगति केवल सरकारी संस्थानों के माध्यम से ही नहीं बल्कि नागरिक कर्तव्यों के निर्वहन और स्वैच्छिक सेवा के माध्यम से भी प्राप्त की जा सकती है। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि संघ का सफर भारत की सांस्कृतिक जड़ों, विरासत और परंपराओं को पुनर्जीवित करने, मजबूत करने और पुनर्निर्माण करने का रहा है।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आरएसएस ने हर प्रतिकूल परिस्थिति में राष्ट्रीय हितों, सेवा और लोकतंत्र की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। श्री सिंह ने कहा कि संघ किसी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके धर्म से नहीं बल्कि राष्ट्र के प्रति उसके समर्पण से करता है। रक्षा मंत्री ने कहा कि संघ ने हमेशा ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना से काम किया है।

#CPRadhakrishnan #Rajnathsingh #ShyamJaju

Vice President C.P. Radhakrishnan today said that the journey of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) stands as a testament to the power of organized voluntary action and the enduring value of service before self. The Vice President said this while releasing a book titled, ‘RSS@100: A Century of Service, Unity and Sacrifice,’ authoured by Shyam Jaju and Anupam Trivedi, in New Delhi. Addressing the gathering, the Vice President said that the RSS has strengthened the ideals of service, unity and national consciousness, inspiring generations through selfless service and nation-building. He highlighted that the organisation’s century-long journey demonstrates that lasting national progress is achieved not only through institutions of government, but also through active citizenship and voluntary service.

Appreciating the authors for capturing the ethos of RSS, the Vice President said that the Sangh’s journey has been one of reviving, reinforcing and rebuilding India’s cultural roots, heritage and traditions. Quoting from the book, Mr Radhakrishnan described the Shakha as a workshop of the soul where the raw energy of youth is chiselled into national character. He further added that the essence of a Swayamsevak lies in enhancing the dignity of every responsibility entrusted to an individual by performing it with dedication and excellence.

Addressing the gathering, Defence Minister Rajnath Singh said that the RSS has played a crucial role in safeguarding national interests, service, and democracy in every adverse circumstance. Mr Singh noted that the Sangh evaluates an individual not by his religion, but by his dedication to the nation. The Defence Minister further emphasized that the RSS has always worked with the spirit of ‘Nation First, Always First’, and noted that this commitment has made it the world’s largest and economically self-reliant voluntary organization.

Delhi Assembly Speaker Vijender Gupta, Indira Gandhi National Centre for the Arts Ram Bahadur Rai, RSS Kshetra Sanghchalak Pawan Jindal, co-authors Shyam Jaju and Anupam Trivedi, Managing Director of Prabhat Prakashan Prabhat Kumar and other distinguished guests were present during the occasion.

PM Modi addressed a massive public rally in Jalandhar

Jalandhar (Punjab), July 17, 2026, Prime Minister Natendra Modi addressed here a massive public rally today. in , He highlighted  the transformation of India’s railway infrastructure, outlined the BJP’s vision for a Viksit Punjab and called for a double-engine government to unlock the state’s full potential. He also spoke about the growing opportunities for Punjab’s youth through India’s emerging sports economy.

The PM said Indian Railways, which serves millions of poor and middle-class families every day, had long suffered neglect under previous governments. He noted that while earlier governments limited themselves to announcing new trains, the BJP government has focused on modernising railway infrastructure across the country. He said the newly inaugurated Jalandhar Cantt station, alongside other stations, reflects the vision of a Viksit Bharat while also celebrating Punjab’s cultural heritage. He added that these stations are becoming centres of commerce by creating opportunities for local artisans, Vishwakarma beneficiaries and women SHGs. He also recalled that the BJP government renamed Adampur Airport after Shri Guru Ravidass Maharaj Ji and Chandigarh International Airport after Shaheed Bhagat Singh, honouring India’s great icons.

PM Modi strongly criticised the Punjab government over law and order, corruption and misgovernance. He said rising gang wars, extortion, attacks on police stations and the growing drug menace have put Punjab’s future at risk. He alleged that corruption and criminal cases involving leaders of the ruling party have eroded public trust, while funds provided by the Centre for roads, irrigation, markets and welfare have not been utilised effectively. He further stated that central schemes were being rebranded instead of being implemented honestly, adding that even the Ayushman Bharat scheme had been subjected to political branding.

Calling for a double-engine government in Punjab, the PM said the state has immense potential through its farmers, youth and entrepreneurs. Drawing comparisons with BJP-governed states, he said double-engine governments have accelerated development, strengthened welfare delivery and ensured better support for farmers and employees. He alleged that promises made to women in Punjab remain unfulfilled, while Congress and other regional parties remain occupied with internal politics instead of serving the people. He said only the BJP can bring lasting development, attract fresh investment, generate employment and make Punjab a stronger and more self-reliant state.

Addressing the youth, he noted Jalandhar’s globally recognised sports manufacturing ecosystem and said it is at the heart of India’s emerging sports economy. He said initiatives such as ‘Khelo India’ are creating new opportunities across sports manufacturing, coaching, sports science, sports medicine, universities, centres of excellence and sports startups. Referring to his recent visits to Australia and New Zealand, he said several agreements had been signed to strengthen India’s sports ecosystem and encouraged Punjab’s youth to seize these opportunities and make the country proud on the global stage.

#PMModi #NarendraModi

PM Modi Chandigarh Visit: 4700 करोड़ की योजनाओं की आधारशिला रखी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सड़क अवसंरचना सहित 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया

चंडीगढ़ में आज स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कनेक्टिविटी में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल रही है; प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां इन परियोजनाओं का शुभारंभ करते हुए मुझे खुशी हो रही है

प्रधानमंत्री ने कहा: स्वच्छता एक दिन का काम नहीं, बल्कि एक जीवन शैली है

प्रधानमंत्री ने कहा: जब कोविड-19 महामारी आई, तो भारत मदद मांगने वाला देश नहीं, बल्कि दुनिया को मदद देने वाला देश था

प्रधानमंत्री ने कहा: भारत में स्वास्थ्य सेवा अब विशेषाधिकार की जगह एक अधिकार बन रही है

Posted Date:- Jul 17, 2026

चंडीगढ़, 17 जुलाई 2026, प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज चंडीगढ़ में 4,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और इन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और सड़क अवसंरचना शामिल हैं। राष्ट्र की प्रगति के लिए एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में शहर की अनूठी स्थिति को रेखांकित करते हुए, उन्होंने बेहतर जीवन शैली और सुगम जीवन सुनिश्चित करने के लिए इसकी प्रतिष्ठा पर बल दिया। क्षेत्र पर मां चंडी की दिव्य कृपा को स्वीकार करते हुए, उन्होंने इसके निरंतर, सुनियोजित विकास के लिए सत्तारूढ़ प्रशासन की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। श्री मोदी ने कहा, “चंडीगढ़ का विकास हमेशा से हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।”

प्रधानमंत्री ने डेढ़ साल पहले लागू किए गए देश की न्याय व्यवस्था के ऐतिहासिक और व्यापक सुधार को याद करते हुए दंडात्मक औपनिवेशिक कानूनों से न्यायोचित ढांचे की ओर हुए बदलाव  के बारे में बताया। श्री मोदी ने कहा, “भारतीय न्याय संहिता का कार्यान्वयन चंडीगढ़ से ही शुरू हुआ।”

शहरी परिदृश्य के आधुनिकीकरण के लिए किए गए वित्तीय निवेशों के बारे में बताते हुए प्रधानमंत्री ने एकीकृत कमान एवं नियंत्रण केंद्र, स्मार्ट यातायात प्रबंधन और डिजिटल शासन जैसी परिवर्तनकारी पहलों का उल्लेख किया। स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसंरचना परियोजनाओं के उद्घाटन पर निवासियों को बधाई देते हुए, उन्होंने इन भविष्योन्मुखी उन्नयनों को गति देने वाले भारी पूंजी निवेश के बारे में बताया। श्री मोदी ने कहा, “शहर को उच्च तकनीक वाला बनाने के इस मिशन पर ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।”

क्षेत्रीय विकास के लिए समर्पित विस्तृत दैनिक कार्यक्रम का विवरण देते हुए, प्रधानमंत्री ने हरियाणा के जींद में अपने पूर्व कार्यक्रम और पंजाब के जालंधर की आगामी यात्रा के बारे में बताया। उन्होंने अपने चंडीगढ़ को दोनों पड़ोसी राज्यों को निर्बाध रूप से जोड़ने वाले एक महत्वपूर्ण भौगोलिक और प्रशासनिक सेतु के रूप में प्रस्तुत किया। श्री मोदी ने कहा, “हमारा चंडीगढ़ हरियाणा और पंजाब दोनों को प्रभावी ढंग से जोड़ता है।”

प्रधानमंत्री ने स्थानीय शहरी विकास के व्यापक क्षेत्रीय प्रभाव पर बल देते हुए कहा कि शहर में हुए सुधार किस प्रकार हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पड़ोसी क्षेत्रों की आबादी के जीवन स्तर को सीधे तौर पर बेहतर बनाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवा वितरण में शहर की अपरिहार्य और केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। श्री मोदी ने कहा, “चिकित्सा सेवाओं के लिए, चंडीगढ़ इस पूरे क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र है।”

स्थानीय चिकित्सा संस्थान में उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं के व्यापक विस्तार की घोषणा करते हुए, प्रधानमंत्री ने तंत्रिका विज्ञान केंद्र, मातृ एवं शिशु केंद्र और गहन चिकित्सा अस्पताल ब्लॉक सहित कई महत्वपूर्ण नई सुविधाओं की जानकारी साझा की। श्री मोदी ने कहा, “इन परियोजनाओं से लाखों लोगों को और भी बेहतर उपचार सुविधाएं मिलेंगी।”

प्रधानमंत्री ने 2015 में संस्थान के दीक्षांत समारोह में अपनी पिछली यात्रा को याद करते हुए, पिछले एक दशक में हासिल की गई असाधारण क्षमता निर्माण की सराहना की। उन्होंने इस प्रगति को निरंतर आगे बढ़ाने में लगे प्रशासनिक दल, शैक्षणिक कर्मचारियों और चिकित्सकों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। श्री मोदी ने कहा, “संस्थान की क्षमताओं को बढ़ाने के लिए मैं यहां के प्रोफेसरों और युवा डॉक्टरों की बहुत सराहना करता हूं।”

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और स्वच्छता मानकों के बीच सीधा सम्‍बंध बताते हुए स्वच्छ भारत मिशन के राष्ट्रव्यापी शुभारंभ को याद किया। उन्होंने करोड़ों शौचालयों के निर्माण से लेकर खुले में शौच की प्रथा के उन्मूलन तक लागू किए गए व्यापक संरचनात्मक परिवर्तनों का विस्तृत विवरण दिया और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार के लिए शहर के प्रयासों की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “विभिन्न पहलें शुरू की गईं ताकि स्वच्छता हमारे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बन जाए।”

प्रधानमंत्री ने असाधारण नागरिक समर्पण के लिए झाड़ू योद्धा के नाम से जाने जाने वाले स्थानीय सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी इंदरजीत सिंह सिद्धू जी की जमीनी स्तर पर स्वच्छता आंदोलन शुरू करने के लिए प्रशंसा की। उन्होंने इन प्रेरणादायक सामुदायिक प्रयासों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करने के सरकार के निर्णय पर गर्व व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “नई जागरूकता पैदा करने के लिए, हमारी सरकार ने उन्हें इस वर्ष पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया है।”

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक स्वच्छता को एक बार का आयोजन नहीं बल्कि निरंतर जीवनशैली का हिस्सा बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि आज के कार्यक्रम में विशेष ‘स्वच्छता से स्वागत’ अभियान को शामिल किया गया है। उन्होंने इस पहल को अपनाने के लिए स्थानीय नागरिकों की सराहना की और रोग निवारण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा, “स्वच्छता अभियान देश भर में अनेक बीमारियों की रोकथाम में बेहद सहायक साबित हुए हैं।”

प्रधानमंत्री ने देश की स्वास्थ्य सेवा क्षमता को लेकर अतीत में फैली वैश्विक चिंताओं का उल्‍लेख करते हुए कई बार संकट के दौरान व्याप्त संदेह की तुलना करते हुए ऐतिहासिक कोरोना महामारी के दौरान देश के सक्रिय नेतृत्व के बारे में बताया। उन्होंने गर्वपूर्वक कहा कि सहायता मांगने के बजाय, देश ने सहायता प्रदान की और अब जटिल चिकित्सा उपचारों के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन गया है। श्री मोदी ने कहा, “हमारी सरकार ने भारत की क्षमता को पूरी तरह से बदल दिया और दुनिया के दृष्टिकोण में आमूलचूल परिवर्तन किया।”

इस क्रांतिकारी बदलाव का श्रेय बारह वर्षों के समर्पित नीतिगत क्रियान्वयन को देते हुए, प्रधानमंत्री ने चिकित्सा सुविधाएं सभी के लिए मुहैया कराने और सभी नागरिकों के लिए सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली देखभाल सुनिश्चित करने के मूलभूत संकल्प को याद किया। श्री मोदी ने कहा, “पिछले बारह वर्षों में देश की सफलता इसी संकल्प का प्रत्यक्ष परिणाम है।”

प्रधानमंत्री ने चिकित्सा अवसंरचना के देशव्यापी आक्रामक विस्तार का विवरण देते हुए 2014 के बाद 15 नए एम्स की मंजूरी, सैकड़ों मेडिकल कॉलेजों की स्थापना और विशिष्ट अस्पतालों की तेजी से बढ़ती संख्या के बारे में बताया। उन्होंने गर्व से चंडीगढ़ में होमी भाभा कैंसर अस्पताल के 2022 में उद्घाटन का उल्लेख किया, जो अब हजारों मरीजों की कुशलतापूर्वक सेवा कर रहा है। श्री मोदी ने कहा, “हाल के वर्षों में, भारत ने अपनी स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना का तेजी से और व्यापक रूप से विस्तार किया है।”

जमीनी स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन की भूमिका का विस्तार से वर्णन किया। इसके तहत गहन चिकित्सा केंद्रों और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग 17.5 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर वर्तमान में शहरी, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जांच और व्यापक स्वास्थ्य पैकेज प्रदान कर रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “प्रत्येक गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के तेजी से विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”

प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक स्वास्थ्य में डिजिटल तकनीक के क्रांतिकारी एकीकरण के बारे में बताते हुए, विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए ई-संजीवनी मिशन की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब कठिन यात्रा किए बिना आसानी से शीर्ष स्तर के विशेषज्ञों से जुड़ सकते हैं। श्री मोदी ने कहा, “आज देश भर में 48 करोड़ से अधिक टेलीमेडिसिन परामर्श सफलतापूर्वक संपन्न हो चुके हैं।”

इन व्यापक चिकित्सा सुधारों के जीवनरक्षक प्रभाव को दर्शाते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि अब 90 प्रतिशत से अधिक प्रसव अत्यंत सुरक्षित संस्थागत व्यवस्थाओं में होते हैं। उन्होंने चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए, जो मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की भारी गिरावट और देश भर में शिशु मृत्यु दर में भारी कमी को दर्शाते हैं। श्री मोदी ने कहा, “स्वास्थ्य सेवाओं के इस व्यापक विस्तार के कारण शिशु मृत्यु दर में भी भारी कमी आई है।”

प्रधानमंत्री ने चिकित्सा सम्‍बंधी प्रगति और सक्रिय स्वास्थ्य रणनीतियों के बीच संतुलन स्थापित करते हुए, प्रशासन के निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर दोहरे ध्‍यानाकर्षण पर बल दिया। उन्होंने पोषण अभियान, मिशन इंद्रधनुष, योग प्रोत्साहन, एचपीवी टीकाकरण अभियान और यू-विन प्लेटफॉर्म जैसी समग्र पहलों को संभावित स्वास्थ्य चुनौतियों से विशाल आबादी को सक्रिय रूप से सुरक्षित रखने का श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा, “इन अनेक महत्वपूर्ण प्रयासों के कारण करोड़ों लोगों का जीवन निरंतर सुरक्षित हो रहा है।”

तपेदिक के खिलाफ चलाए जा रहे सक्रिय राष्ट्रीय अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए, प्रधानमंत्री ने समुदाय-आधारित टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत समय पर जांच और उपचार पर दिए जा रहे विशेष बल के बारे में विस्तार से बताया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने पिछले दशक में संक्रमण में 21 प्रतिशत की कमी और 90 प्रतिशत से अधिक उपचार कवरेज की उपलब्धि की सराहना की। श्री मोदी ने कहा, “जन की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को अत्यधिक जागरूक बनाया जा रहा है।”

इस स्वास्थ्य सेवा क्रांति के प्राथमिक लाभार्थियों की पहचान करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवार सबसे अधिक लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने समान चिकित्सा पहुंच के प्रति राष्ट्र के दृष्टिकोण में एक मौलिक दार्शनिक परिवर्तन पर बल दिया। श्री मोदी ने कहा, “भारत में स्वास्थ्य सेवाएं अब विशेषाधिकार नहीं रहीं, बल्कि पूर्ण अधिकार बन रही हैं।”

चिकित्सा शिक्षा में ऐतिहासिक रूप से चली आ रही बाधाओं को दूर करते हुए, प्रधानमंत्री ने शैक्षणिक सीटों की गंभीर कमी का उल्‍लेख किया, जिसने पहले युवा छात्रों की आकांक्षाओं को चकनाचूर कर दिया था। उन्होंने घोषणा की कि मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है, स्नातकोत्तर सीटों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और हाल ही में स्थानीय संस्थान में एमबीबीएस कॉलेज को बहुप्रतीक्षित मंजूरी मिली है। श्री मोदी ने कहा, “यह व्यापक विस्तार प्रतिभाशाली युवाओं को शीर्ष संस्थानों में अध्ययन करने का अवसर देगा और देश को सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर प्रदान करेगा।”

प्रधानमंत्री ने शहर में मौजूद शिक्षा, इंजीनियरिंग और चिकित्सा अनुसंधान संस्थानों के अनूठे संगम की प्रशंसा करते हुए, स्टार्टअप और तकनीकी नवाचार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में इसके तीव्र विकास की भविष्यवाणी की। इस शैक्षणिक यात्रा को गति देने के लिए, उन्होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज में कुरुक्षेत्र बॉयज़ हॉस्टल का उद्घाटन और नए शोधार्थियों के आवास की आधारशिला रखी। श्री मोदी ने कहा, “हमारा प्रयास है कि हमारे युवाओं को उन्नत अनुसंधान के लिए सर्वोत्तम प्रयोगशालाएं और बेहतर संकाय उपलब्ध हों।”

प्रधानमंत्री ने कठोर शैक्षणिक वातावरण को तकनीकी प्रगति से सीधे जोड़ते हुए एआई, सेमीकंडक्टर और डीप-टेक में प्रगति को गति देने के लिए एक मजबूत अनुसंधान तंत्र की परम आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय शिक्षकों और छात्रों पर अटूट विश्वास व्यक्त किया। श्री मोदी ने कहा, “जब अनुसंधान वातावरण वास्तव में मजबूत होगा तभी नवाचार में तेजी आएगी।”

प्रधानमंत्री ने सुदृढ़ अवसंरचना को आर्थिक समृद्धि का अंतिम खाका बताते हुए सरकार के नवीन समग्र विकास दृष्टिकोण का समर्थन किया। उन्होंने आईटी सिटी से कुराली तक छह लेन वाले नए राजमार्ग का उद्घाटन किया। इससे हवाई अड्डे की सड़क पर भीड़भाड़ कम होगी और क्षेत्रीय यात्रियों के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करने हेतु ‘पीआर सेवन स्पर’ की आधारशिला रखी। श्री मोदी ने कहा, “इन सभी रणनीतिक विकास कार्यों से उद्योग और व्यापार को अभूतपूर्व गति प्राप्त होगी।”

क्षेत्रीय संपर्क के विषय को आगे बढ़ाते हुए, प्रधानमंत्री ने जालंधर में एक साथ रेलवे परियोजनाओं के शुभारंभ और जींद को सोनीपत से जोड़ने वाली देश की पहली स्वच्छ ईंधन से चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन के ऐतिहासिक शुभारंभ की घोषणा की। उन्होंने सतत, हरित परिवहन में इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि पर जनता को बधाई दी। श्री मोदी ने कहा, “स्वच्छ ईंधन से चलने वाली यह ट्रेन देश के लिए एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।”

अपने सम्‍बोधन का समापन एक विकसित भारत के दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ करते हुए, प्रधानमंत्री ने भविष्य के लिए तैयार प्रौद्योगिकियों, परिवहन प्रणालियों और स्वास्थ्य सेवा संरचनाओं पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के लोगों को आश्वासन दिया कि वर्तमान प्रशासन आने वाली पीढ़ियों की सेवा करने वाली स्थायी संस्थाओं के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। श्री मोदी ने कहा, “हमें ऐसे साहसिक निर्णय लेने होंगे जिनका अधिकतम लाभ हमारी आने वाली सभी पीढ़ियों तक सहजता से पहुंचे।”

#NarendraModi #PMModi

PM Modi Visit Jeend: 14700 करोड की परियोजनाओं का शिलान्यास

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हरियाणा के जींद में लगभग 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया
  • श्री मोदी ने कहा आज जींद और हरियाणा ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है, आज यहीं से देश को अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उपहार मिला है
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की हाइड्रोजन ट्रेन पूर्णतया प्रदूषण मुक्त होने के साथ ही, ‘मेक इन इंडिया’ की एक उल्लेखनीय सफलता का प्रमाण है
    Posted Date:- Jul 17, 2026, Friday

जींद (हरियाणा), 17 जुलाई 2026, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज हरियाणा के जींद में लगभग 14,700 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और इन्हें राष्ट्र को समर्पित किया।

श्री मोदी ने दशकों पहले संगठन के कार्यों से शहर की अपनी प्रारंभिक यात्राओं का स्मरण करते हुए, मुर्रा भैंस के दूध, देसी बूरा और घेवर जैसे स्थानीय व्यंजनों से जुड़े अविस्मरणीय स्नेहिल घटनाओं को याद किया। श्री मोदी ने कहा, यह साधारण भूमि नहीं, बल्कि इतिहास, वीरता, धर्म और अपार गौरव की समृद्ध भूमि है।

प्रधानमंत्री ने देश की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेन के शुभारंभ की घोषणा करते हुए कहा कि इस क्षेत्र का नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो हो जाएगा। मुंबई और ठाणे के बीच ऐतिहासिक पहली ट्रेन यात्रा से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की पीढ़ियों की उन्नत हरित परिवहन की चर्चा में भी यह कॉरिडोर अमर हो जाएगा। श्री मोदी ने कहा कि भारतीय रेल के अत्याधुनिकीकरण के महत्वपूर्ण कदम के लिए मैं आप सभी को और पूरे देश को बधाई देता हूं। उन्होंने भिवानी में पंडित नेकी राम शर्मा मेडिकल कॉलेज और महर्षि च्यवन मेडिकल कॉलेज के साथ ही नारनौल में राव तुलाराम अस्पताल राष्ट्र को समर्पित किया।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक रेल क्षेत्र के तकनीकी विकास का उल्लेख करते हुए स्मरण दिलाया कि कैसे 19वीं शताब्दी की रेलगाड़ियां मुख्य रूप से भाप इंजनों द्वारा चालित थीं, जबकि 20वीं शताब्दी ये विद्युत शक्ति से चालित बन गईं। भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण दर्शाते हुए उन्होंने जोर देकर कहा कि 21वीं शताब्दी की रेलगाड़ियां हाइड्रोजन परिवहन द्वारा चालित होंगी, और इसी की आधिकारिक शुरुआत जींद और सोनीपत के बीच नवनिर्मित 90 किलोमीटर लंबे मार्ग से हो रही है। श्री मोदी ने कहा कि आज भारतीय रेल ने 21वीं सदी की इस तकनीक में एक बड़ी छलांग लगाई है, जिसे भविष्य में विस्तारित किये जाने की अपार संभावनाएं हैं।

प्रधानमंत्री ने वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देश की इस उपलब्धि को रखते हुए कहा कि हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक विश्व स्तर पर व्यावहारिक रूप से केवल 7-8 वर्ष पहले ही अस्तित्व में आई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी केवल कुछ ही गिने-चुने देशों के पास ऐसी रेलगाड़ियां चलाने की क्षमता है और वे भी अभी प्रारंभिक चरण में ही हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस नवनिर्मित भारतीय हाइड्रोजन ट्रेन की वास्तविक क्षमताओं के बारे में सुनकर आपको अत्यंत गर्व होगा।

प्रधानमंत्री ने इस नए परिवहन चमत्कार की तकनीकी विशेषताओं के बारे में बताते हुए कहा कि नई लॉन्च की गई ट्रेन विश्व स्तर पर अपनी तरह की सबसे शक्तिशाली ट्रेन है, जिसकी क्षमता 3,200 हॉर्सपावर है और जिसमें दस कोच लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी रेलगाड़ियों में जिनमें आमतौर पर केवल तीन से चार कोच होते हैं, उनसे तुलना करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि देश ने अपने पहले ही प्रयास में यह साहसिक परिचालन क्षमता हासिल की है। श्री मोदी ने कहा कि भारत ने दस डिब्बे वाली हाइड्रोजन ट्रेन सफलतापूर्वक चलाकर अपनी क्षमता प्रदर्शित की है।

इस हरित परिवहन उपलब्धि की स्वदेशी प्रकृति पर गर्व वयक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्णतया धुआं रहित यह ट्रेन घरेलू विनिर्माण पहल की ठोस और उल्लेखनीय सफलता है। इस उन्नत प्रणाली का डिजाइन करने वाले प्रतिभाशाली घरेलू इंजीनियरों और इसके त्रुटिहीन निर्माण के लिए स्थानीय विनिर्माण कंपनियों को उन्होंने इसका श्रेय दिया। श्री मोदी ने कहा कि यह मेक इन इंडिया पहल का एक अत्यंत सफल और गौरवपूर्ण उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने इस उन्नत तकनीक की विशिष्ट परिचालन आवश्यकताओं को समझाते हुए बताया कि हाइड्रोजन ट्रेनों के लिए पूरी तरह अलग बुनियादी ढांचे और विशेष, सहायक प्रणालियों की आवश्यकता होती है। निकट भविष्य में इन विशिष्ट नेटवर्क की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए नए कारखाने और संबंधित सुविधाएं तेजी से स्थापित किए जाने की संभावना देखते हुए उन्होंने व्यापक स्थानीय आर्थिक लाभ की भविष्यवाणी की। श्री मोदी ने कहा कि यह उन्नत ट्रेन नेटवर्क हरियाणा के युवाओं के लिए रोजगार के अनेक नए अवसर उत्पन्न करने की गारंटी है।

प्रधानमंत्री ने प्रमुख भू-राजनीतिक चुनौतियों की चर्चा करते हुए, पिछले बारह वर्षों में भारतीय रेल में हुए व्यापक बदलाव से हासिल किए गए प्रचालन लाभों का उल्लेख किया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि पेट्रोलियम, डीजल, एलपीजी और उर्वरकों की आपूर्ति के लिए आवश्यक समुद्री मार्ग महीनों से गंभीर रूप से लगातार बाधित हैं। श्री मोदी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से भारत बड़ी मात्रा में आवश्यक ईंधन और कृषि सामग्री आयात करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले अगर ऐसा वैश्विक ईंधन संकट आया होता तो इसके विनाशकारी प्रभाव से डीजल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण राष्ट्रीय रेल नेटवर्क पूरी तरह ठप्प हो जाता। उन्होंने कहा कि जहां 1925 से 2014 के बीच केवल 30 प्रतिशत रेल मार्गों का विद्युतीकरण हुआ था, वहीं सरकार के प्रयासों से अब राष्ट्रीय रेल ग्रिड का लगभग 99 प्रतिशत और राज्य के सभी ट्रैक का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण हो गया है। श्री मोदी ने कहा कि पूर्ण विद्युतीकरण से गंभीर वैश्विक तेल संकट के बाद भी हमारी रेलगाड़ियां निर्बाध रूप से चलती रहीं।

प्रधानमंत्री ने बेहतर संपर्क साधनों के दोहरे सामाजिक-आर्थिक लाभों पर जोर देते हुए कहा कि विस्तृत सड़क और रेल नेटवर्क लोगों की सुविधा बढ़ाते हुए क्षेत्रीय विकास को तेजी से गति देते हैं। दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के स्थानीय खंड, जींद-गोहाना राष्ट्रीय राजमार्ग और अंबाला-काला अंब चार-लेन परियोजना का आधिकारिक शुभारंभ करते हुए, उन्होंने इन अंतरराज्यीय प्रचालनों से कई लाभों की चर्चा की। श्री मोदी ने कहा कि इस तरह के व्यापक संपर्क मार्गों से अपार सुविधा के साथ ही समग्र विकास की गति में भी काफी वृद्धि होती है।

प्रधानमंत्री ने जींद जिले के संभार-तंत्र संबंधी बदलावों का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि शहर अब महत्वपूर्ण रूप से पांच अलग-अलग राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ गया है। इसके अपार आर्थिक लाभों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि किसान और पशुपालक अब कम किराए में प्रमुख वाणिज्यिक बाजारों तक आसानी से पहुंच पाएंगे। श्री मोदी ने कहा कि ये सुदृढ़ संपर्क साधन उद्योगों को सक्रिय रूप से सशक्त बनाएंगे, पर्यटन को बढ़ावा देंगे और व्यापक तौर पर नए रोजगार उत्पन्न करेंगे।

प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की अपनी हाल की सफल यात्रा की चर्चा करते हुए, भारत द्वारा किए गए कई अंतरराष्ट्रीय द्विपक्षीय समझौतों का उल्लेख किया। उन्होंने एक महत्वपूर्ण, लेकिन कम चर्चित रणनीतिक विषय पर विशेष ध्यान दिलाया, जिससे क्षेत्र की युवा आबादी प्रत्यक्ष और गहराई से जुड़ी है। श्री मोदी ने कहा कि हरियाणा के युवाओं से संबंधित एक विशिष्ट विषय है खेल, जिस पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई है।

प्रधानमंत्री ने स्थानीय शासन प्रणाली की सराहना की। उन्होंने मुख्यमंत्री के नेतृत्व में समावेशी विकास के मंत्र का कड़ाई से पालन करने के लिए राज्य प्रशासन की भी प्रशंसा की। रिश्वतखोरी या भाई-भतीजावाद से मुक्त, पारदर्शी और योग्यता-आधारित रोजगार प्रक्रियाओं के कड़ाई से कार्यान्वयन को ज़रूरी बताते हुए उन्होंने इस तरह के प्रणालीगत सुधार लागू करने में आने वाली अपार राजनीतिक बाधाओं की भी चर्चा की।

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July 13, 2026

टीएमयू के डॉ. मुकुल सैन का पेटेंट बदल देगा ऊंटों की सूरत-सीरत

Posted on 13.07.2026 Time 07.21 PM, Monday, Teerthankar Mahaveer University (TMU) Moradabad, Dr Mukul Sain, College of Agriculture Sciences, Patent on Camel, News Source Prof Shyam Sundar Bhatia

मुरादाबाद, 13 जुलाई 2026, तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज के डॉ. मुकुल सैन प्रतिभा के धनी, नवाचार के प्रति उनका नज़रिया बेमिसाल, 2024 से लेकर 2026 तक 12 आईपीआर ग्रांटेड, इनमें से 10 आईपीआर भारतीय हैं, कनाडा से 01 कॉपीराइट भी उनकी उपलब्धियों में शुमार, डॉ. सैन की झोली में आधा दर्जन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस है, देश-विदेश में 28 शोध पत्रों के संग-संग अब तक दो किताबें भी हो चुकी हैं प्रकाशित

Dr. Mukul Sen of TMU will change the patent of camels Surat-Seerat

तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज के डॉ. मुकुल सैन ने नवाचार में ऊंची छलांग लगाई है। डॉ. सैन ने घुमन्तू ऊंट पालकों के लिए जीवनदायिनी सरीखा डिजाइन पेटेंट यूके से प्राप्त किया है। उल्लेखनीय है, इन दिनों राजस्थान में न केवल ऊंटों का जीवन संकट में है, बल्कि घुमन्तू पालकों की रोजी-रोटी पर भी दांव लगा है। यूं तो ऊंटों की संख्या राजस्थान में सर्वाधिक है। एक आंकड़ें के मुताबिक हिन्दुस्तान में कुल ऊंटों का 85 प्रतिशत ऊंट केवल राजस्थान में पाए जाते हैं। यह बात दीगर है, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, यूपी आदि में भी ऊंटों का पालन किया जाता है। एक दर्जन पेटेंट अपनी झोली में रखने वाले डॉ. सैन ने इनके दर्द को संजीदगी से समझा है। इस पेटेंट से उन्होंने रेगिस्तान का जहाज कहे जाने वाले ऊंटों और उनके कारोबारियों के लिए आशा की किरण जगा दी है। डॉ. सैन को सोलर असिसटेड मोबाइल कैमल डेयरी मिल्किंग मशीन का यूके के इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी राइट्स ऑफिस से डिजाइन पेटेंट मिला है। यदि यह जमीनी हकीकत में बदलता है तो डिजाइन की गई इस मशीन में रेगिस्तान में भी 04 डिग्री तापमान तक घुमन्तू ऊंटों का दूध स्टोर किया जा सकता है। 20 लीटर क्षमता के डिजाइन की लागत करीब 1 से 1.5 लाख तक रहेगी। इस मशीन में चराई के दौरान मिल्किंग के बाद दूध ऑटोमेटिक ही ठंडा और स्टोर हो जाएगा। यह सौर ऊर्जा पर आधारित है, जोकि रेगिस्तान में भरपूर मात्रा में मिलती है। टीएमयू के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन इस एक्सक्लूसिव पेटेंट डिजाइन पर डॉ. मुकुल सैन को बधाई देते हुए कहते हैं, यह पेटेंट ऊंटों और ऊंट पालकों के लिए बेशकीमती सौगात है। उन्होंने उम्मीद जताई, इस नवाचार से ऊंट के दूध का गुणवत्तापूर्ण संरक्षण के संग-संग बाजार का भी विस्तार होगा। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद के कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज़ के डीन प्रो. प्रवीन कुमार जैन कहते हैं, कॉलेज के लिए यह गौरव का विषय है। ऐसे प्रसंस्करण भविष्य में दूध के क्षेत्र में नई संभावनाएं और नवाचार के द्वार खोलेंगे।

पंजाब के अबोहर में जन्मे डॉ. सैन ने ऊंटों और ऊंट पालकों के दर्द को करीब से देखा है। छोटूपन में यह दंश तो वह नहीं समझ पाए लेकिन एग्रीकल्चर और डेयरी में उच्च शिक्षा-दीक्षा के दौरान उन्होंने ऊंटों के जीवन कल्याण की ठानी। सोचा एक ऐसा डिजाइन ईजाद किया जाए, जिससे इनके दिन बहुर जाएं। डॉ. सैन नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टिटयूट- एनडीआरआई, करनाल से डेयरी इंजीनियरिंग में पीएचडी हैं। राजस्थान के बीकानेर में प्रवास के दौरान उन्होंने ऊंट के दूध की गुणवत्ता के संरक्षण की ठानी, क्योंकि इसमें औषधीय गुण हैं। जैसे ऊंट का दूध बेनिफिसियल एक्टिव प्रोटीन से भरपूर है। डायबिटीज और पेट के रोगों में वरदान है। इसका प्रयोग ऑटिज़्म रोगियों के लिए भी किया जाता है। अब तक इसका सर्वाधिक बाजार मिल्क पाउडर के रूप में है। अब उम्मीद की जाती है, यह लिक्विड रूप में भी मिल जाएगा। डॉ. सैन प्रतिभा के धनी हैं। नवाचार के प्रति उनका नज़रिया बेमिसाल है। 2024 से लेकर 2026 तक 12 आईपीआर ग्रांटेड हैं। इनमें से 10 आईपीआर भारतीय हैं, कनाडा से 01 कॉपीराइट भी उनकी उपलब्धियों में शुमार हैं। डॉ. सैन की झोली में आधा दर्जन इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस हैं। 28 शोध पत्र देश-विदेश में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. सैन की 2020 में नेचुरल फाइबर कंपोजिस्ट्स, 2023 में फ्यूचरिस्टिक ट्रेंड्स इन एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग एंड फूड साइंसेज़ पब्लिश हो चुकी हैं। इसके अलावा वेलेराइजेशन ऑफ वेस्ट राइस स्ट्रा और एडवांसेज़ इन इंडीजीनियस डेयरी प्रोडक्ट्स की पांडुलिपियां प्रकाशकों के पास हैं। इन पुस्तकों को स्प्रिंजर सरीखे इंटरनेशलन पब्लिशर्स प्रकाशित करेंगे। इसके अलावा आठ इंटरनेशनल बुक चौप्टर समेत एक लैब मैन्युअल भी उनकी झोली में है। डॉ. सैन भविष्य की प्लानिंग बताते हुए कहते हैं, दूध हमेशा से उनके चिंतन और मनन का विषय है। वह अब दूध के उत्पादों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की तकनीकों पर भी रिसर्च करेंगे।

हकीकत यह है, ऊंटों और पालकों की दुश्वारियां जग जाहिर हैं। देश में सर्वाधिक ऊंटों की संख्या राजस्थान में है। राजस्थान के ख़ासकर बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर सरीखे जिलों में पुरसा हाल नहीं है। कड़वी सच्चाई यह है, राजस्थान सरकार की आंख मूंदु नीति के चलते ऊंट पालन कारोबार मुनाफे का सौदा कभी नहीं रहा है। इस पेटेंट के बाद न केवल ऊंट पालक अपना दूध बेच सकेंगे, बल्कि इनके प्रति मुहब्बत में भी इजाफा होगा, क्योंकि सरकार की मौजूदा नीति के मुताबिक ऊंट को न तो वध के लिए नहीं बेचा जा सकता है और न ही अवैध ट्रैफिकिंग की जा सकती है। राजस्थान की रीढ़ की हड्डी समझे जाने वाले ऊंट मशीनीकरण और परिवहन के आधुनिक साधनों के चलते ऊंटों की उपयोगिता में भारी गिरावट आई है। शोध रिपोर्टस के मुताबिक साढ़े चार दशक में राजस्थान में ऊंटों की संख्या 15 लाख से घटकर केवल एक लाख ही रह गई है। अंदेशा है, डायनासोर की मानिंद एक दिन ऊंट भी कागजों तक सिमट कर रह जाएंगे। ऐसे में डॉ. मुकुल सैन का पेटेंट ऊंटों और उनके पालकों के लिए भगवान सरीखा है। इस पेटेंट के बाद ऊंट से लेकर घुमन्तू पालकों तक की सूरत-सीरत बदल जाएगी। ऑटोमिल्किंग के संग-संग इमिडेट कूलिंग मिलेगी। हयूमन टच एक्सक्लूड हो जाएगा और दूध हाइजीन रहेगा। कोल्ड चेन मैनेजमेंट के कारण दूध की गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी। दूध उपलब्धता में बेहतर वृद्धि हो जाएगी। ऊंट के दूध में थैरेप्यूटिक गुण होने के कारण एक्सपोर्ट के वैश्विक द्वार खुल जाएंगे। अंततः ऊंटों की तेजी से गिरती संख्या का ग्राफ भी रूक जाएगा।

Exclusive News

Dr. Mukul Sen of College of Agricultural Sciences, Tirthankar Mahavir University, Moradabad, is a man of talent, his approach to innovation is unparalleled, 12 IPRs granted from 2024 to 2026, out of which 10 IPRs are Indian, 01 copyright from Canada is also among his achievements, Dr. Sen has half a dozen international conferences in his pocket, 28 research papers published at home and abroad as well as two books so far. Dr. Mukul Sen of College of Agricultural Sciences, Tirthankar Mahavir University, Moradabad has taken a leap in innovation. Dr. Sain has received a design patent from the UK for a lifeline for nomadic camel herders. Significantly, these days not only the life of camels is in crisis in Rajasthan, but the livelihood of nomadic herders is also at stake. Rajasthan has the highest number of camels. According to a statistic, 85% of the total camels in India are found in Rajasthan alone. Camels are also reared in Gujarat, Haryana, Punjab, UP, etc. Dr. Sain, who holds a dozen patents in his pocket, has understood their pain intimately. With this patent, he has given a ray of hope to the camels and their traders who are called the ship of the desert. Dr. San has received a design patent for a solar assisted mobile camel dairy milking machine from the Intellectual Property Rights Office, UK. The designed machine can store milk of nomadic camels up to 04 ° C even in the desert if it changes to the ground reality. 20 liters capacity

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