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Moradabad : दुष्कर्म में दोषी को बीस साल की सजा

January 29, 2026

Moradabad : दुष्कर्म में दोषी को बीस साल की सजा

Published on 29.01.2026, Thursday, 08:48 PM by Rajesh Bhatia , Moradabad 

मुरादाबाद, 29 जनवरी (उप्र समाचार सेवा)। आठ साल पहले घर में घुसकर नाबालिग से दुष्कर्म में दोषी को बीस साल की सजा मिली है। गुरुवार को विशेष न्यायाधीश (पाँक्सो कोर्ट) अविनाश चंद्र मिश्र ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने दोषी पर 48 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
मुरादाबाद जिले में डिलारी में चार अगस्त, 2018 की घटना में पीड़िता के पिता की ओर से तहरीर दर्ज कराईं गई। दर्ज रिपोर्ट में कहा कि शाम को घर में उसकी पुत्री अकेली थी। शाम को पीड़िता को घर में अकेला पाकर डिलारी का युवक मोनू घर में घुस आया। युवक ने नाबालिग से जोर-जबरदस्ती करते हुए पकड़ लिया और दुष्कर्म किया। इस बीच शोर शराबा सुनकर पीड़िता की मां वहां पहुंच गई। मामला खुलने पर आरोपी धक्का देते हुए भाग गया। पीड़िता के पिता की ओर से दर्ज रिपोर्ट के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
विशेष लोक अभियोजक अभिषेक भटनागर ने बताया कि दुष्कर्म मामले में पीड़िता ने बयान दर्ज कराएं। कोर्ट विवेचक, वादी समेत आठ ने गवाही दी। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मोनू को दोषी करार दिया। दोषी को बीस साल की सजा और 48 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई है।

यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक

नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026, विवादित यूजीसी नियमों पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।

नियमों के खिलाफ दायर रिट याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमालया बागची ने की। अग्रिम निर्णय तक यूजीसी के 2012 में अधिसूचित नियम ही लागू रहेंगे। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है।

ज्ञातव्य है कि 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विनियम 2026 जारी किए थे। इनकी धारा 3 सी पर विवाद था। इस मामले को लेकर अधिवक्ता विनीत जिंदल ने याचिका दायर की थी।

UGC Rules stayed by Supreme court

January 28, 2026

उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज),लोकतंत्र के प्रहरी, पत्रकारों की सशक्त आवाज

AJAY CHAUDHRY, JOURNALIST MEERUT

अजय चौधरी,  उपज प्रदेश उपाध्यक्ष, अध्यक्ष जिला मेरठ

Posted on : 28.01.2026, Wednesday Time: 09:53 PM,  Source:  Ajay Chaudhry
#UPAJ #ASSOCIATION #MEDIA #UP ASSOCIATION OF JOURNALISTS
अजय चौधरी
लोकतंत्र की आत्मा स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता में बसती है। जब तक प्रेस स्वतंत्र है, तब तक सत्ता जवाबदेह है और समाज सच से जुड़ा रहता है। पत्रकार केवल समाचारों के संवाहक नहीं होते, वे सत्ता और जनता के बीच वह सेतु हैं, जो सच को सामने लाता है और अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाता है। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना केवल किसी संगठन की नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र की जिम्मेदारी है। इसी दायित्वबोध के साथ उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज) राज्य में पत्रकारों के हितों के लिए एक सशक्त और प्रतिबद्ध मंच के रूप में कार्य कर रहा है।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल, संवेदनशील और सामाजिक-राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य में पत्रकारिता करना आसान नहीं है। कम मानदेय, असुरक्षित कार्य परिस्थितियाँ, प्रशासनिक दबाव, उत्पीड़न और कई बार जानलेवा हमले—ये आज पत्रकारों की दैनिक चुनौतियाँ बन चुकी हैं। ऐसे समय में उपज ने पत्रकारों के लिए एक मजबूत ढाल की भूमिका निभाई है। यह संगठन न केवल समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि उनके समाधान के लिए संगठित और निरंतर संघर्ष भी करता है।
पत्रकारों की सुरक्षा उपज के एजेंडे का केंद्र बिंदु है। संगठन राज्य में पत्रकार सुरक्षा बिल को लागू कराने के लिए सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है। उपज का स्पष्ट और दो-टूक मत है कि बिना कानूनी संरक्षण के निर्भीक पत्रकारिता संभव नहीं है। यदि पत्रकार भय के माहौल में काम करेंगे, तो सच दबेगा और लोकतंत्र कमजोर होगा। इसलिए पत्रकारों को सुरक्षा देना किसी वर्ग विशेष का नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र के हित का प्रश्न है।
उपज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता और एकजुटता है। संगठन ने प्रदेश भर के पत्रकारों को एक साझा मंच पर जोड़ने का कार्य किया है, जहाँ उनकी आवाज़ सुनी जाती है और उनके अधिकारों के लिए सामूहिक संघर्ष किया जाता है। यही कारण है कि आज उपज प्रदेश के सबसे प्रभावशाली और भरोसेमंद पत्रकार संगठनों में गिना जाता है।
व्यावसायिक स्वतंत्रता पत्रकारिता की रीढ़ है। उपज पत्रकारों को बिना किसी भय, दबाव या लालच के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए प्रेरित करता है। संगठन उन्हें नैतिक, वैचारिक और संगठनात्मक समर्थन प्रदान करता है और यह संदेश देता है कि सत्ता से सवाल पूछना अपराध नहीं, बल्कि पत्रकार का संवैधानिक कर्तव्य है।
आज, जब पत्रकारिता कई स्तरों पर संकट से गुजर रही है—चाहे वह आर्थिक दबाव हो, राजनीतिक हस्तक्षेप हो या बढ़ती असहिष्णुता—ऐसे दौर में उपज जैसी संस्थाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह संगठन न केवल पत्रकारों के अधिकारों की रक्षा कर रहा है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की लड़ाई भी मजबूती से लड़ रहा है।
एक सुरक्षित, सम्मानित और स्वतंत्र पत्रकार ही सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला होता है। उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (उपज) उसी आधारशिला को मजबूत करने के संकल्प के साथ निरंतर आगे बढ़ रहा है—पत्रकारों के साथ, पत्रकारों के लिए और लोकतंत्र के हित में है।

यूजीसी कानून के विरोध में सर्वण समाज का प्रदर्शन, खून से लिखा ज्ञापन सौंपा

Posted on : 28.01.2026, Wednesday Time: 08:14 PM,  Source:  Neeraj Chakrapani

हाथरस। यूजीसी कानून के विरोध में सर्वण समाज का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। बुधवार को भारतीय किसान यूनियन (भानु) के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने सर्वण समाज के लोगों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन के मंडल अध्यक्ष राम जादौन ने किया।
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा, जिसे राम जादौन ने अपने खून से लिखा। ज्ञापन में यूजीसी कानून को तत्काल समाप्त करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे छात्रों के हित में खड़े हैं और किसी भी प्रकार के जातिगत भेदभाव के विरोधी हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस कानून में शीघ्र संशोधन की मांग की।
धरना-प्रदर्शन के दौरान शिवा ठाकुर, रजत ठाकुर, दिनेश ठाकुर, अमरसिंह, केके शर्मा, सत्येंद्र सिंह, आशीष कुमार सिंह, अभय गौतम, अमन गौतम, मोहित चौधरी, विशाल उपाध्याय, वंश सोनी, हेमंत शर्मा, रंश प्रभाकर सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

मुरादाबादः जाट आरक्षण मामले में 38 आंदोलनकारी बरी 

Amroha Jat Reservation case

अमरोहा के जाट आरक्षण आंदोलन से बरी हुए आंदोलनकारी मुरादाबाद जिला न्यायालय परिसर में

  • अमरोहा में 2011 में काफूरपुर में रेल ट्रैक पर चला 19 दिन धरना, इस दौरान बंद रहा मुरादाबाद दिल्ली रेल मार्ग
  • जाट आरक्षण समिति के अध्यक्ष यशपाल सिंह, सपा विधायक समरपाल सिंह समेत प्रमुख नेताओं को राहत
Posted on : 28.01.2026, Wednesday Time: 08:14 PM,  Source:  Rajesh Bhatia
मुरादाबाद,28 जनवरी (उप्र समाचार सेवा)। अमरोहा में रेलवे ट्रैक जाम के मामले में सभी आरोपियों को राहत मिली है। 15 साल पुराने केस में 38 आंदोलनकारी बरी हो गए। इनमें केंद्रीय जाट आरक्षण समिति समेत के अध्यक्ष चौ यशपाल सिंह, सपा विधायक समरपाल सिंह, काफूरपुर में किसान आदर्श विद्यालय में आंदोलन के आयोजक भगत सिंह उर्फ बाँबी समेत सभी प्रमुख नेता है।
बुधवार को मुरादाबाद में एमपी एमएलए की स्पेशल कोर्ट एसीजेएम एमपी सिंह ने आंदोलनकारियो को दोष मुक्त करार दिया। रेलवे पुलिस ने रेल मार्ग बाधित में 53 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
2011 में बसपा सरकार में जाटों ने केंद्र में आरक्षण के लिए विरोध जताया। जाट संघर्ष समिति ने एक स्वर में विरोध जताते हुए काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर धरना प्रदर्शन शुरू किया। मुरादाबाद दिल्ली रूट बाधित रहा। अमरोहा जिले में काफूरपुर रेलवे स्टेशन पर किसान और जाट समुदाय के प्रदर्शन को लेकर आरपीएफ ने मुकदमा दर्ज किया।  गजरौला में थाना जीआरपी में 11 मार्च, 2011 तत्कालीन स्टेशन अधीक्षक सरदार सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई।  काफूरपुर में 4 से 22 मार्च के बीच हुए प्रदर्शन से  मुरादाबाद से दिल्ली के बीच रेल मार्ग पूरी तरह से बाधित रहा। किसानों ने ट्रैक पर टैंट लगा दिए और पशुओं को बांध दिया।
इस मामले की सुनवाई पहले गजरौला में रेलवे कोर्ट में चलीं। पर इस बीच आरोपी समरपाल सिंह के नौगांवा से विधायक चुने जाने से केस की सुनवाई एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट में शुरु हुईं।

मुरादाबाद कोर्ट में तीन साल से चल रही सुनवाई, आठ ने दी गवाही 

केस में आरोपी समरपाल सिंह के विधायक बनने के बाद केस यहां अदालत में स्थानांतरित हो गया। मुरादाबाद कोर्ट में सुनवाई तीन साल चलीं।  केस में आठ गवाहों ने कोर्ट में बयान दर्ज कराएं। लंबी सुनवाई और बयान पर बहस के बाद अदालत ने फैसले का निर्णय लिया। 20 जनवरी को जाट आंदोलन में सुनवाई हुई। बुधवार को एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट एसीजेएम प्रथम एमपी सिंह ने सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को दोष मुक्त करार दिया।
विशेष लोक अभियोजक मोहनलाल विश्नोई ने बताया कि काफूरपुर में रेलवे ट्रैक बाधित के मामले में अदालत ने सभी को दोष मुक्त करार दिया। आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य साबित नहीं हो सकें। इनमें 12 आरोपियों का सुनवाई के दौरान निधन हो गया जबकि तीन हाजिर नहीं हुए। हालांकि अदालती आदेश नहीं मिला है।
दोष मुक्त नेताओं में आरक्षण समिति के अध्यक्ष चौ यशपाल सिंह, सपा विधायक समरपाल सिंह, किसान नेता भगत सिंह, अमरोहा में अधिवक्ता शैलेंद्र सीनू, बाबू सिंह, नरेंद्र सिंह, अरुण सिंह, अरविंद,विजय पाल सिंह, राजेश सिंह, राजेश अग्रवाल, महेंद्र सिंह, मुकेश चौधरी, राजपाल राजू, सत्यपाल सिंह, कविता चौधरी आदि।
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