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निगम-व्यापारियों में नहीं बनीं अंतिम सहमति

February 8, 2026

निगम-व्यापारियों में नहीं बनीं अंतिम सहमति

दुकानों का किराया विवाद

अपर नगर आयुक्त से हुई किराया वृद्धि पर वार्ता

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 07.28 PM

Moradabad Samachar

मुरादाबाद समाचार

मुरादाबाद, 8 फरवरी(उप्र समाचार सेवा)।
नगर निगम की दुकानों का किराया बढ़ाए जाने का विरोध दूसरे दिन भी कायम रहा। शहर में बाजार बंद के चलते मेयर विनोद अग्रवाल और अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह की मौजूदगी में व्यापारियों में वार्ता शुरू हुईं। काफी देर चलीं वार्ता में अंतिम सहमति नहीं बन सकीं हालांकि विवाद को देखते हुए हर मार्केट से एक दो व्यापारियों संग सोमवार को निगम से वार्ता होगी।
शहर में नगर निगम की 488 दुकानें हैं। निगम प्रशासन ने सरकार के निर्देश के बाद दुकानों का किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा। अपर नगर आयुक्त अजीत कुमार सिंह ने बताया कि 2015-16 में दुकानों के किराए में 12.5 प्रतिशत की वृद्धि के प्रस्ताव पर व्यापारी राजी नहीं हुए। लंबे समय से किराए में अब बढ़ोतरी की गई। पर व्यापारियों ने विरोध कर बाजार बंद कर दिया। किराया वृद्धि विवाद के निपटारे के लिए
रविवार को निगम प्रशासन व व्यापारियों के बीच वार्ता का हुईं। मेयर के हस्तक्षेप के बाद पीली कोठी पर मेयर कैंप हुईं वार्ता में तमाम व्यापारी और निगम अधिकारी रहे।
व्यापारी नितिन राज का कहना है कि दुकानों के किराए में अप्रत्याक्षित वृद्धि की गई। कई मार्केट में किराया कम है। दुकानों का किराया सर्किल रेट के हिसाब से लिया जा रहा है। 15 साल तक किराए के बाद नए सिरे से किराया निर्धारित होगा। हालांकि निगम ने किराया निर्धारण का आश्वासन दिया है।
मेयर विनोद अग्रवाल का कहना है कि 25 साल बाद किराए में वृद्धि की गई है। दुकानदारों को किराए में छूट का प्रस्ताव रखा गया है। तीस प्रतिशत की छूट दी गई है।

47 वर्षीय कलम सिंह बिष्ट ने जीती  120 किलोमीटर लम्बी ओमान  रेस !

Kalam Singh Bist, Chamoli, Ex Army Person

लंबी दूरी की दौड़ का विश्व विजेता कलम सिंह बिष्ट पूर्व सैनिक

  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक ने विश्व मंच पर भारत और  उत्तराखंड का परचम  लहराया 
  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक नायक कलम सिंह बिष्ट ने ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर कीर्तिमान बनाया है।
  • लम्बी दौड़ की श्रेणी में अभी तक मैराथन 42 किलोमीटर को सबसे लम्बी दौड़ माना जाता रहा है और यह सामान्य रोड़ पर आयोजित की जाती है। 

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 09.13 AM, Report Bhupat Singh Bist, Dehradun 

देहरादून, 08 फरवरी। ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर उत्तराखंड के कलम सिंह बिष्ट ने रिकॉर्ड बनाया है। बिष्ट पूर्व सैनिक हैं, वे गढ़वाल राइफल्स से सेवानिवृत हुए हैं।

अल्ट्रा ट्रेल रेस का मार्ग पथरीला और रेगिस्तान की दुर्गमता लिए है जाना जाता है। ये दूरी नापने में नायक कलम सिंह बिष्ट ने 18 घंटे और 18 मिनट का समय दर्ज किया। इस दुर्गम रोमांचक दौड़ में 68 देश के हजारों धावक शामिल थे। चमोली गढ़वाल के मुन्दोली ग्राम निवासी कलम सिंह बचपन में 12 किलोमीटर रोजाना स्कूल की दूरी नापा करते थे।

जीवन में अभाव ने संघर्ष की प्रेरणा दी। पिता ने जोश भरा – जीतने से पहले छोड़ना नहीं है। 

नई युवा पीढ़ी को ड्रग और मोबाइल की लत से छुड़ाने के लिए पूर्व फौजी नायक कलम सिंह बिष्ट अब प्रशिक्षक की भूमिका में सुदूर गांवो में शिविर आयोजित कर रहें हैं अल्ट्रा ट्रेल रेस विजेता उत्तराखंड के युवाओं को अंतर -राष्ट्रीय खेलों में सफल देखना चाहते हैं।

प्रस्तुति – भूपत सिंह बिष्ट

दुकानों का किराए बढ़ाने के विरोध में कटरानाज में बाजार बंद

दुकान सील करने की चेतावनी से भड़के दुकानदार

मुरादाबाद, 7 फरवरी (उप्र समाचार सेवा)।
शनिवार को नगर निगम के किराया बढ़ाए जाने का विरोध शुरू हो गया है। टाउन हॉल समेत अन्य दुकानदारों ने निगम के फैसले पर आपत्ति जताते हुए बाजार बंद दिया। दोपहर बाद से विरोध गर्माया तो तमाम व्यापारी एकजुट हो गए और कई घंटे दुकानें नहीं खोली। मामले में कड़ा विरोध जताने के देर रात व्यापारियों ने बैठक भी बुलाई है।
नगर निगम की दुकानों का किराया बढ़ाए जाने पर तमाम व्यापारी नाराज है। व्यापारियों का कहना है कि दुकानों के किराया कई गुना ज्यादा बढ़ा दिया गया। एक हफ्ते पहले निगम ने दुकानदारों से नया किराया जमा करने को कहा। पर शनिवार को मामले ने तूल पकड़ा। निगम की दुकान सील करने की चेतावनी से व्यापारी खफा हो गए और दुकानों को बंद करने का निर्णय ले लिया। दोपहर दो बजे से कटरानाज, पटेल मार्केट, टाउन हॉल, अंबेडकर पार्क समेत अन्य दुकानों पर विरोध शुरू हो गया। व्यापारियों ने दुकानों के शटर गिरा दिए और विरोध स्वरूप प्रदर्शन किया। शाम तक दुकानें बंद रहीं। अब व्यापारी इस मुद्दे पर लंबी लड़ाई लड़ने की तैयारी में है। देर रात व्यापारियों की बैठक भी बुलाई गई जिसमें अगली रणनीति पर विचार विमर्श किया जाएगा।

February 7, 2026

Hathras UGC  बिल के विरोध में पदयात्रा रोकी, अलंकार अग्निहोत्री धरने पर

  • अपने आवास के बाहर धरने पर बैठे  पंकज धवरिया व सस्पेंड पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री Alankar Agnihotri
DHARNA BY ALANKAR AGNIHOTRI IN HATHRAS

हाथरस में दिल्ली यात्रा रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे बरेली के निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्रिनोहोत्री

Posted on : 07.02.2026 Saturday, Time: 08.35 PM,
हाथरस।यूजीसी बिल के विरोध में राष्ट्रीय सवर्ण परिषद द्वारा प्रस्तावित पदयात्रा को पुलिस ने रोक दिया। प्रशासन के अनुसार जिले में धारा 144 लागू होने के कारण किसी भी प्रकार के जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसके बावजूद परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज धवरिया ने अकेले झंडा लेकर पदयात्रा शुरू करने का प्रयास किया, जिस पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान तीखी नोकझोंक हुई।
पदयात्रा रोकने की सूचना पर सस्पेंड पीसीएस अधिकारी Alankar Agnihotri अलंकार अग्निहोत्री भी हाथरस पहुंचे और पंकज धवरिया Pankaj Dhavariya के कंचन नगर स्थित आवास के बाहर उनके साथ जमीन पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया। अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार डरी हुई है और उसका कोर वोटर उससे दूर हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि असल मुद्दों को उठाने वालों को रोका जा रहा है, जबकि कथित हिंदू सम्मेलनों को अनुमति दी जा रही है।
हाथरस से दिल्ली तक प्रस्तावित थी यात्रा
सवर्ण संगठनों की यह पदयात्रा हाथरस से दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास तक प्रस्तावित थी। सुबह से ही इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा और एसडीएम सदर राजबहादुर मौके पर मौजूद रहे। पदयात्रा में शामिल होने की घोषणा करने वाले कई संगठनों के पदाधिकारियों को पहले ही नजरबंद कर दिया गया था।
पदयात्रा रोके जाने के बाद पंकज धवरिया अपने आवास के बाहर धरने पर बैठ गए और प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी बिल और एससी/एसटी एक्ट के नाम पर समाज को बांटा जा रहा है और सरकार के इशारे पर पदयात्रा को जबरन रोका गया।

धर्म-निरपेक्षता गलत शब्द, पंथ-निरपेक्षता होना चाहिएः डा मोहन भागवत

DR MOHAN BHAGWAT SRSANGHCHALAK RSS

मुम्बई में संघ यात्रा के सौ वर्ष नए क्षितिज व्याख्यान माला के पहले सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष के उपलक्ष्य में शताब्दी संवाद

Posted on : 07.02.2026 Saturday, Time: 07.59 PM, Mumbai, RSS, Dr Mohan Bhagwat #RSS100YEAR

मुम्बई, 07 फरवरी 2026, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत ने कहा है कि धर्मनिरपेक्ष शब्द गलत है। हमें इसके स्थान पर पंथ निरपेक्षता शब्द का उपयोग करना चाहिए। वे आज शनिवार को यहां “संघ यात्रा के सौ वर्ष – नए क्षितिज” व्याख्यानमाला के उपलक्ष्य में आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

डा. मोहन भागवत ने कहा संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है। अब तो यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है। संघ कार्य और इसके इतिहास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अपने देश के इतिहास में तथागत बुद्ध के बाद संघ जैसा काम नहीं हुआ है। संघ के स्वयंसेवक संचलन करते हैं, लेकिन संघ पैरा-मिलिट्री संस्था नहीं है। संघ को जानना है तो संघ के अंदर आकर देखिये। संघ को जानना है तो यह जानना पड़ेगा कि संघ क्या नहीं है। संघ संगीतशाला नहीं, पोलिटिकल नहीं,.. संघ अनुभव का विषय है। संघ किसी की प्रतिक्रिया में नहीं, किसी के विरोध हेतु नहीं, अपने प्रचार के लिए नहीं, पावर के लिए नहीं. देश  में अच्छा होने के लिए संघ बना है। संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है। संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए। संघ को पावर नहीं चाहिए। जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएँ—उन्हें करने के लिए संघ है।

ब्रिटिश सरकार की सेफ्टी वाल योजना से बनी कांग्रेस

संघ का जो काम है, वह पूरे देश—भारतवर्ष के लिए है। उन्होने बताया कि ब्रिटिश सरकार की योजना से एक सेफ़्टी वाल के रूप में इंडियन नेशनल कांग्रेस बनी। उसी को हमारे लोगों ने आज़ादी की लड़ाई का प्रभावी हथियार बनाया। एक समाज के नाते हम एक समाज हैं क्या? इतने भेद, दकियानूसी, रूढ़ि-कुरीतियों का बोलबाला है। अशिक्षा है। इन सब से उबारकर अपने समाज को एक स्वस्थ समाज के नाते खड़ा करने की जब तक कोशिश नहीं करते, हमारे प्रयास अधूरे रहेंगे। संघ निर्माता डॉ. हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। बहुत कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा—एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था, उसमें सक्रियता से भाग लेना। ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे डा हेडगेवार

स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका और डा हेडगेवार के योगदान की चर्चा करते हुए श्री भागवत ने कहा कि डॉ. हेडगेवार अनुशीलन समिति के कोर मेंबर बने। उनका कोड नाम ‘कोकीन’ था। असहयोग आंदोलन में डॉ. हेडगेवार ने हिस्सा लिया, तो उन पर राजद्रोह का केस चला। एक वर्ष सश्रम कारावास की सज़ा उन्हें हुई। न्यायाधीश ने उनके बारे में अपने फैसले में लिखा, “उनके बचाव का भाषण उनके दिए गए भाषणों से ज़्यादा ‘सेडिशियस’ था।” उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ पहले आक्रमणकर्ता नहीं थे। वे सातवें–आठवें थे।  सिकंदर के समय से ऐसा होता आ रहा है। वे मुट्ठीभर लोग हमसे श्रेष्ठ नहीं थे, फिर भी हम बार-बार मार खाते रहे। अपने समाज में कुछ कमियाँ हैं—हम अपनी एकता भूल गए, स्वार्थी बन गए। इन सब को ठीक किए बिना, समाज को एक संगठित किए बिना यह रुकेगा नहीं। इसलिए डॉ. हेडगेवार ने सोचा, “मैं एक प्रयोग करता हूँ।” विविधताओं से भरे हुए समाज को गुणवत्ता के साथ खड़ा करने के प्रयोग उन्होंने किये। जब उन्हें वह सूत्र और पद्धति मिल गई, तो उन्होंने विजयादशमी 1925 के दिन अपने घर में बैठक बुलाई और कहा—आज से अपने संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन करने वाला संघ आरंभ हो रहा है।

हिन्दू समाज के संगठन के अलावा संघ कुछ नहीं करेगा

संघ की कार्य पद्यति को बताते हुए डा मोहन भागवत ने आगे कहा कि संघ ने पहले से तय किया – सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है। देश में जितने अच्छे काम हो रहे हैं, वो ठीक से चलें और गतंव्य तक पहुंचे इसीलिए संघ है। एक लाख तीस हज़ार से अधिक छोटे-बड़े सेवा कार्य बिना सरकारी पैसा लिए, समाज के सहयोग से अपना पैसा खर्च करके स्वयंसेवक करते हैं। शाखा क्या है? एक घंटे का समय निकालना, सब भूलकर भगवा झंडे के तले अपने भारत का विचार मन में रखते हुए, उसके प्रति भक्ति मन में रखते हुए खड़े होना. जो शाखा में आए हैं, वे कौन हैं, किस जात-पात के हैं, क्या नाम है, कितना कमाते हैं, कितना पढ़े हैं—इस पर विचार नहीं नहीं करना; बल्कि ये मानना कि वे हमारे अपने हैं। ऐसे उनके साथ मिलकर शरीर, मन, बुद्धि को शक्तिशाली बनाने वाले व्यायाम प्रतिदिन करना।

गुरु नानक देव जी ने हिन्दुस्थान शब्द का प्रयोग अपनी वाणी में किया

संघ का मानना है कि भारत में सब हिंदू ही हैं और कोई नहीं है। हिंदू यानी क्या है? हिंदू कहने से हम इसे रिलिजन न मानें; यह किसी विशेष समुदाय का नाम नहीं है। इसे पूजा-कर्मकांड न मानें। हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि विशेषण है। बाबर का पंजाब पर आक्रमण हुआ। श्री गुरु नानक देव जी ने देश में सब अत्याचार देखा, तो उन्होंने लिखा, “खुरासान खसमाना कीआ, हिंदुस्तानु डराइआ। आपै दोसु न देई करता, जमु करि मुगलु चड़ाइआ॥” गुरु नानक जी ने अपनी वाणी में ‘हिंदुस्थान’ का प्रयोग किया है। उन्होंने लिखा है कि इतने अत्याचार हुए कि न हिंदू महिलाओं का शील बचा, न मुस्लिम महिलाओं की अस्मत बची। बाकी सब बदल जाता है, लेकिन हिंदुस्थान का सनातन स्वभाव नहीं बदला।

सबसे प्राचीन होने के नाते हम अग्रज हैं

भारत धर्म-प्राण देश है। हम जानते हैं सब एक हैं। सबको साथ चलना है, किसी को छोड़ना नहीं है। धर्म-निरपेक्षता गलत शब्द है; पंथ-निरपेक्षता होना चाहिए। दुनिया को धर्म देकर, देश का उपकार करने के लिए, बिना अहंकार के भारत का जन्म है। संस्कृति हम सबको जोड़ती है। भाषाएँ अनेक हैं, देवी-देवता अनेक हैं। खान-पान, रीति-रिवाज अलग-अलग हैं। दस हजार–पंद्रह हजार वर्षों से यह चलता आ रहा है, आधुनिक दौर में भी। परंतु उसके ऊपर, इसके परे हम सबकी एक पहचान है—उसे हम हिंदू कहते हैं। भारत भूगोल का नाम नहीं, स्वभाव का नाम है। सबसे प्राचीन होने के नाते हम अग्रज हैं। दुनिया के लोग आएँगे और हमारा चरित्र देखेंगे, हमसे सीखेंगे। हम दुनिया की महाशक्ति नहीं बनेंगे; हम विश्वगुरु बनेंगे। हम भाषण और दादागिरी से नहीं, बल्कि नेतृत्व से सिखाएँगे। हम शिवाजी नहीं हो सकते, लेकिन शिवाजी महाराज के नक्शेकदम पर चल सकते हैं।

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