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आगरा: 48 अश्लील वीडियो से दहला गांव

March 31, 2026

आगरा: 48 अश्लील वीडियो से दहला गांव

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नाबालिगों की हरकतों से मचा हड़कंप, समाज पर लगा कलंक

— पुलिस तैनात, माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

आगरा 31 मार्च 26,  थाना खंदौली क्षेत्र के एक गांव से सामने आए 48 आपत्तिजनक वीडियो ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इन वीडियो के वायरल होने के बाद गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्र में भी हड़कंप और शर्मिंदगी का माहौल है। सबसे गंभीर बात यह है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे लड़के-लड़कियां नाबालिग बताए जा रहे हैं, जिससे मामला सिर्फ अश्लीलता तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह बाल संरक्षण, साइबर अपराध और सामाजिक विघटन का बेहद संवेदनशील विषय बन जाता है।

सूत्रों के अनुसार, वायरल वीडियो में तीन से चार किशोर और किशोरियों के चेहरे साफ तौर पर कैमरे में दिखाई दे रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि ये सभी एक ही गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वीडियो की संख्या अधिक होने और उनमें एक ही क्षेत्र के नाबालिगों की मौजूदगी ने ग्रामीणों के बीच गुस्सा, दहशत और अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है।

गांव में स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि माहौल खराब करने, वीडियो फैलाने, अफवाह फैलाने या सोशल मीडिया पर इसे भड़काऊ तरीके से प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एक साथ 48 आपत्तिजनक वीडियो का सामने आना कोई सामान्य घटना नहीं मानी जा रही। ग्रामीणों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में वीडियो कैसे बने?

यह मामला सिर्फ कुछ वीडियो का नहीं, बल्कि ग्रामीण सामाजिक संरचना में बढ़ती डिजिटल अराजकता का संकेत है। जब नाबालिग लड़के-लड़कियां इस तरह कैमरे के सामने दिख रहे हों और वीडियो की संख्या दर्जनों में हो, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बच्चों तक अश्लील कंटेंट की आसान पहुंच है? क्या कोई उन्हें उकसा, फुसला, या रिकॉर्ड कर रहा था? क्या यह सहमति से बनी सामग्री थी या दबाव/ब्लैकमेल का मामला? क्या वीडियो को किसी ने बाजारू कंटेंट की तरह तैयार कर फैलाया? क्या यह मामला सिर्फ गांव तक सीमित है या इसके तार बाहर तक जुड़े हो सकते हैं?

हालांकि, जब तक पुलिस जांच में पुष्टि न हो, तब तक किसी पोर्नोग्राफी गिरोह या अश्लील फिल्म नेटवर्क से सीधा संबंध बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन जांच का यह एंगल बेहद गंभीर और अनिवार्य माना जा रहा है।

—–नाबालिगों का मामला, कानून बेहद सख्त

क्योंकि वीडियो में कथित रूप से नाबालिग शामिल हैं, इसलिए यह मामला बेहद गंभीर कानूनी दायरे में आता है। यदि जांच में पुष्टि होती है, तो पोक्सो एक्ट, आईटी एक्ट की संबंधित धाराएं, अश्लील सामग्री प्रसारण/वितरण से जुड़ी धाराएं, बाल अश्लीलता से जुड़े प्रावधान और वीडियो वायरल करने, शेयर करने, सेव करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। जो लोग ऐसे वीडियो देखते, डाउनलोड करते, फॉरवर्ड करते या सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, वे भी गंभीर अपराध की जद में आ सकते हैं।

——पुलिस की चुनौती, सच, साजिश या साइबर शोषण?

पुलिस के सामने इस मामले में कई बड़े सवाल हैं। वीडियो कब और कैसे रिकॉर्ड किए गए?
वीडियो किस डिवाइस से बने? सबसे पहले किसने वायरल किए? क्या किसी ने जानबूझकर गांव की छवि खराब करने के लिए फैलाया? क्या कोई बाहरी व्यक्ति या गिरोह बच्चों तक पहुंचा? क्या नाबालिगों को ब्लैकमेल किया गया? क्या वीडियो पहले से किसी प्राइवेट ग्रुप/ऐप पर शेयर हो रहे थे? अगर पुलिस डिजिटल फॉरेंसिक जांच गहराई से करती है, तो यह मामला सिर्फ गांव की बदनामी से आगे बढ़कर एक बड़े साइबर-यौन शोषण नेटवर्क तक भी पहुँच सकता है।

—-समाज के लिए कलंक, परिवारों के लिए त्रासदी

यह घटना सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक पतन का गंभीर संकेत है।
गांव की चौपाल से लेकर घर-घर तक चर्चा है। परिवारों में शर्म, तनाव, गुस्सा और भय का माहौल है। जिन बच्चों के चेहरे वायरल वीडियो में बताए जा रहे हैं, उनके परिवारों पर मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक दबाव कई गुना बढ़ गया है।

बच्चों की काउंसलिंग, अभिभावकों की डिजिटल निगरानी, स्कूल स्तर पर साइबर जागरूकता, सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर कड़ी रोक, गांव स्तर पर सामुदायिक हस्तक्षेप, ऐसे मामलों को रोकने के लिए सबसे बड़ी जरूरत है।
इस मामले में सिर्फ एफआईआर और पुलिस बल तैनात करना काफी नहीं होगा। इसके लिए साइबर सेल को तुरंत लगाया जाए। वीडियो की डिजिटल ट्रेल निकाली जाए। वायरल करने वाले सभी मोबाइल नंबर/आईडी ट्रैक हों। नाबालिगों की पहचान गोपनीय रखी जाए। पीड़ित/संबंधित परिवारों की काउंसलिंग हो। गांव में अफवाह नियंत्रण और शांति समिति बैठक कराई जाए। स्कूल-कॉलेज स्तर पर मोबाइल और सोशल मीडिया उपयोग पर जागरूकता अभियान चले।

बिहार के मंदिर में भगदड़, 8 महिलाओं की मृत्यु कई घायल

Posted on 31.03.2026 Time 03.24 PM Tuesday, Bihar, Patna, Mandir stempad

पटना, 31 मार्च 26, नालंदा जिले के बिहार शरीफ स्थित मघडा शीतलाष्टमी मंदिर में भगदड़ मच गई। मंदिर में भगदड़ से 8 महिला श्रद्धालुओं की मृत्यु हो गई और कई लोग घायल हो गए।

जानकारी के अनुसार एक अफवाह फैल गई इस के कारण भीड़ में अफरा-तफरी मच गई। मृतकों की संख्या बढ़ सकती  है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर में हुई दुर्घटना में जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया है।श्री मोदी ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को पचास-पचास हजार रुपये दिए जाएंगे।

एटा में उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना पर डीपीआरओ मोहम्मद राशिद सस्पेंड

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एटा 31 मार्च उप्रससे। जनपद में डीपीआरओ मोहम्मद राशिद को शासन के कार्यों में लापरवाही और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग ने यह कार्रवाई की है।

शासन ने डीपीआरओ के निलंबन के संबंध में एक पत्र जारी कर जानकारी दी। इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। राशिद पर माननीय समिति के निर्देशों के बावजूद कार्य में लापरवाही बरतने और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने का आरोप है। यह मामला सेवानिवृत्त सहायक विकास अधिकारी रूपलाल के वेतन से जुड़ा है। पदोन्नति के बाद उनके वेतन निर्धारण का मामला लंबे समय से लंबित था, जिसकी शिकायत उन्होंने विभाग के आलाधिकारियों से की थी। यह प्रकरण उत्तर प्रदेश विधान परिषद की वित्तीय एवं प्रशासनिक विलंब समिति की साक्ष्य बैठक में उठा था। समिति ने वेतन निर्धारण संबंधी मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए थे। हालांकि, शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद डीपीआरओ एटा द्वारा इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। उत्तर प्रदेश शासन ने इस प्रकरण का संज्ञान लिया और मोहम्मद राशिद को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया।

निदेशक, पंचायती राज विभाग, एटा द्वारा निलंबन का आदेश जारी किया गया है। डीपीआरओ के निलंबित होने के बाद जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह ने अतिरिक्त उपजिलाधिकारी पीयूष रावत को एटा का नया जिला पंचायत राज अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है।

एटा में 23 वाहनों के चालान काट 50 हजार का किया जुर्माना, वाहनों से उतरवाई काली फिल्म

एटा 31 मार्च उप्रससे। जनपद में कोतवाली अलीगंज क्षेत्र में यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस ने मंगलवार की सुबह सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। नगला पड़ाव और कैल्ठा चौराहा पर चलाए गए इस अभियान के दौरान 23 वाहनों के चालान किए गए और लगभग 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया।

पुलिस ने दोपहिया और चारपहिया वाहनों को रोककर उनके कागजातों की गहन जांच की। इसमें ड्राइविंग लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन, फिटनेस और बीमा जैसे आवश्यक दस्तावेज शामिल थे। इसके साथ ही, काली फिल्म लगे वाहनों पर विशेष नजर रखी गई और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई की गई। चेकिंग के दौरान कई वाहन चालक बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट और अधूरे कागजातों के साथ वाहन चलाते पाए गए। इन सभी के खिलाफ पुलिस ने मौके पर ही चालान की कार्रवाई की। अचानक चले इस अभियान से वाहन चालकों में हड़कंप मच गया। कई लोग चेकिंग से बचने के लिए रास्ते बदलते भी देखे गए, लेकिन पुलिस टीम ने सख्ती के साथ अभियान को सफलतापूर्वक संचालित किया।
थाना अध्यक्ष ने वाहन चालकों से अपील की कि दोपहिया वाहन चालक हमेशा हेलमेट लगाकर चलें और चारपहिया वाहन चालक सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में जोखिम को कम किया जा सके। और भविष्य में भी इस तरह के अभियान लगातार जारी रहेंगे और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राजकुमार सिंह कोतवाली प्रभारी अलीगंज ने बताया कि यह अभियान एसएसपी श्याम नारायण सिंह के निर्देशन में चलाया गया है। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत वाहनों के कागजात, फिटनेस, ड्राइविंग लाइसेंस और काली फिल्म की जांच की गई।

BSNL की कई रूटों पर ओएफसी कटीं, संचार सेवा गड़बड़ाई

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अमरोहा,मेरठ, बिजनौर और आगरा रूटों पर संचार सेवा बाधित
Post on 31.3.26
Tuesday Moradabad
Rajesh Bhatia

मुरादाबाद।
वित्तीय वर्ष का अंतिम दिन हजारों मोबाइल धारकों के लिए खासी परेशानी भरा रहा।बीएसएनएल व अन्य कंपनियों के उपभोक्ता कई घंटे नेटवर्किंग से जूझते रहे। अमरोहा,बिजनौर मेरठ,आगरा रुटों पर ओएफसी कट गई। परेशानी मोबाइल फोन उठानी पड़ी।
मंगलवार को कई रूटों पर ओएफसी कटने से BSNL बीएसएनएल की नेटवर्किंग बुरी तरह से धड़ाम रहीं। मुरादाबाद से अमरोहा, बिजनौर व मेरठ और आगरा रुट ज्यादा प्रभावित रहा। साल के अंतिम कामकाज के चलते संचार सेवाओं पर असर पड़ा। भूमिगत कार्यों से ओएफसी कटने से संचार सेवा बाधित हुईं। बीएसएनएल की मोबाइल सेवा बाधित होने से उपभोक्ता आपस में बातचीत के लिए जूझते नजर आएं। इंटरनेट बाधित होने का असर व्हाट्स एप पर आने जाने वाले संदेशों पर भी पड़ा। बड़ी संख्या में तमाम मैसेज डिलीवर्ड नहीं हुए।

वर्जन–
बीएसएनएल के डीजीएम एस एस बर्थवाल का कहना है कि कुछ स्थानों पर ओएफसी कटने से संचार सेवा कुछ देर बाधित हुईं। पर अब ओएफसी जुड़ने से विभागीय सेवा बहाल हो गई।

एयरटेल, जियो समेत आदि के मोबाइल फोन उपभोक्ता खराब नेटवर्क से जूझते रहे

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