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इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव नेपाल में लखीमपुर के डॉ.अनुपम मौर्य को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

June 18, 2026

इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव नेपाल में लखीमपुर के डॉ.अनुपम मौर्य को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

Posted on 17.06.2026, Lakhimpur Kheri, Kathmandu Nepal, International Ayush Concave

कमलजीत सिंह

काठमांडू / लखीमपुर खीरी। काउंसिल ऑफ इंटेग्रेटिव वैद्य इन्नोवेशन एंड कोलेब्रेशन इंडिया एवं नेपाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के संयुक्त तत्वावधान में नेपाल के काठमांडू में इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव आयोजित 4.0 नेपाल एडिशन आयोजित किया गया। जहां उत्तर प्रदेश के लखीमपुर शहर के प्रतिष्ठित आयुष विशेषज्ञ डॉ. अनुपम मौर्य को आयुष क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड से सम्मानित किया गया।

नेपाल के काठमांडू में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेपाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल रहे, जबकि भारतीय दूतावास नेपाल के प्रतिनिधि सुमन शेखर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त लीजेंड वर्ल्ड रिकॉर्ड दुबई (यूएई) के प्रतिनिधि कुलदीप चतुर्वेदी ने भी कार्यक्रम में विशेष सहभागिता की।
इस अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत के 25 से अधिक राज्यों के साथ-साथ नेपाल, मलेशिया, कनाडा, यूएई, बांग्लादेश और सिंगापुर से आए आयुष चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, उद्यमियों एवं मैन्युफैक्चरर्स सहित कुल 254 प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। सम्मेलन का प्रमुख आकर्षण “ मोस्ट आयुआयुष डॉक्टर्स इन क्लीनिकल डायग्नोसिस सेशन” विषय पर आयोजित लीजेंड्स वर्ल्ड रिकॉर्डस अटेम्प्ट रहा, जिसे सफलतापूर्वक पूर्ण कर एक ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया गया। इस उपलब्धि ने वैश्विक स्तर पर आयुष चिकित्सा प्रणाली की क्षमता, प्रभावशीलता और बढ़ती स्वीकार्यता को नई पहचान प्रदान की।
सम्मेलन के दौरान आयुष क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशेषज्ञों को आयुष लीजेंड अवार्ड, आयुष एक्सीलेंस अवार्ड तथा आयुष राइजिंग अवार्ड से सम्मानित किया गया।
इसमें लखीमपुर खीरी के डॉ. अनुपम मौर्य को यह सम्मान आयुष चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, शोध, नवाचार एवं समाज सेवा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रदान किया गया। उन्हें यह सम्मान नेपाल चैम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष कमलेश अग्रवाल, सिविक के संस्थापक डॉ. एम. एम. कुरैशी तथा लीजेंड्स वर्ल्ड रिकॉर्डस दुबई के प्रतिनिधि कुलदीप चतुर्वेदी द्वारा संयुक्त रूप से प्रदान किया गया। इस अवसर पर सिविक के संस्थापक डॉ. एम. एम. कुरैशी ने कहा कि इंटरनेशनल आयुष कॉन्क्लेव का उद्देश्य विश्वभर के आयुष विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को एक साझा मंच पर लाकर ज्ञान, शोध, नवाचार और वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि नेपाल संस्करण की सफलता और विश्व रिकॉर्ड की उपलब्धि आयुष के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।
यह सम्मान प्राप्त करने पर लखीमपुर खीरी के डॉ. अनुपम मौर्य ने आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें आयुष चिकित्सा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में और अधिक समर्पण एवं प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करेगा।

कॉलेज गई छात्रा बेहोशी की हालत में खेत से बरामद, इलाज के दौरान हुई मौत

Posted on 18.06.2026 , Lakhimpur Kheri News, Up news

परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप, पुलिस जांच में जुटी

खमरिया खीरी। थाना ईसानगर क्षेत्र के फूलपुर गांव से सी बी एल डिग्री कॉलेज रसूलपुर स्थित कालेज गई बीए की छात्रा संदिग्ध अवस्था में लापता हो गई। दूसरे दिन भरेहटा गांव के निकट खेत में बेहोशी की हालत में पाई गई। परिजनों के मुताबिक सूचना पाकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने गंभीर हालत के चलते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खमरिया पहुंचाया जहां चिकित्सकों ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया । दूसरे दिन इलाज के दौरान ओयल हॉस्पिटल में छात्रा की मौत हो गई। छात्र की मौत के बाद ईसानगर पुलिस ने शव को पीएम के लिए भेज दिया। फिलहाल घटना के बाद परिजनो का रो रो कर बुरा हाल है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार थाना ईसानगर क्षेत्र के फूलपुर निवासी शिवरतन पुत्र मल्लू की 22 वर्षीय पुत्री नीलम 15 जून 2026 की सुबह 10:00 बजे घर से रसूलपुर स्थित सीबीएल डिग्री कॉलेज गई थी। शिवरतन के मुताबिक नीलम देर शाम तक घर नहीं लौटी तो परिजनों ने खोज बीन शुरू कर दी लेकिन कहीं पता नहीं चल सका। 16 जून 2026 की सुबह करीब 7:00 बजे भरेहटा गांव निवासी खेत गए किसानों ने बेहोशी की हालत में नीलम के खेत में पड़े होने की सूचना परिजनों को दी। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने गंभीर हालत के चलते नीलम को थाना ईसानगर पहुंचाया जहां पुलिस को सूचना देते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खमरिया में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने जिला अस्पताल ओयल रेफर कर दिया जहां इलाज के दौरान नीलम की मौत हो गई परिजनों का आरोप है कि नीलम के शरीर पर चोट के निशान मौजूद है। नीलम की हत्या की गई है।

नीलम की हत्या के बाद महिला सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवाल

छात्रा नीलम का कॉलेज जाने के बाद गायब होना और बेहोशी की हालत में खेत में मिलना और इलाज के दौरान नीलम की मौत होना बड़े अपराध की तरफ इशारा कर रहा है परिजनों का आरोप है की नीलम को अगवा कर नीलम की हत्या की गई है। फिलहाल छात्रा नीलम के साथ हुए हादसे ने महिला सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए है। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद ईसानगर पुलिस हत्यारों तक पहुंचती है या नीलम की मौत का रहस्य फाइलों में ही दफन हो जाएगा।

June 17, 2026

पाक अधिकृत कश्मीर में हस्तक्षेप की जरूरत

Editorial 17.06.2026 Sunday by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News 

एक पखवाड़े से पाकिस्तान के बलात कब्जे वाला कश्मीर अशांत है। पुलिस और पाकिसनी रेंजरों की क्रूर और दमनात्मक कार्रवाई से अब तक 53 नागरिक मरे जा चुके है। दमन चक्र इसके बाद भी जारी है। कश्मीर के इस हिस्से के लोग जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएसी) के नेतृत्व में आंदोलनरत है। हम भारतवासी और हमारी सरकार का स्पष्ट मत है और यह तथ्यात्मक सच्चाई भी है कि संपूर्ण जम्मू कश्मीर, लद्दाख क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है। हम संयुक्त राष्ट्र महासभा में अनेक बार पाकिस्तान को इस विषय पर लताड़ चुके है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थाई प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान को फिर इस मुद्दे पर लताड़ा था। जब पाकिस्तान ने कश्मीर का राग अलाप दिया था।  भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पीओके में हो रहीं घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने हिंसा और दमन की निंदा की तथा खा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ये सब देख रहा है।  ये बयान मात्र औपचारिकता है। वास्तव में पाक अधिकृत कश्मीर के नागरिकों को भारत से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा है। उनकी उम्मीद की किरण सिर्फ भारत है। आखिर जब समूचा जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो वहां के नागरिक भी भारतीय है। उनकी रक्षा करना हमारा धर्म है। इस धर्म को निभाने के लिए हमें सक्रिय हस्तक्षेप करना चाहिए। 

पाकिस्तान इस क्षेत्र की शासन व्यवस्था बदलना चाहता है। वह इस इलाके की सरकार को हटाकर सीधे इस्लामाबाद का नियंत्रण चाहता है। एक तरह से पूरा शासन सैन्य सरकार के रूप में स्थापित करने के प्रयास में है। पाक अधिकृत कश्मीर बेहद गरीबी,बेरोजगारी की मार झेल रहा है। मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव है। पाकिस्तान ने इस 78 हजार वर्ग किमी के क्षेत्र पर कब्जा तो कर लिया पर इसका विकास नहीं किया। शिक्षा,सड़क,उद्योग सभी का अभाव है। इन मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर और जुलाई के चुनाव के विरोध में ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी आंदोलनरत है। पाकिस्तान के कब्जे के बाद इस क्षेत्र के लिए ऐसा कानून बनाया गया, जिससे विधान सभा में बाहरी हस्तक्षेप बना रहे। यहां की विधानसभा में 45 सीटे है इन्हें 12 शरणार्थियों के लिए आरक्षित है। इन सीटों पर मनोनयन करके पाकिस्तान सरकार अन्य प्रांतों और गैर कश्मीरियों को घुसा देती है। इससे यहां के लोगों में भारी आक्रोश है। आंदोलन का एक मुख्य मुद्दा ये भी है। 

जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी पर पाकिस्तान ने प्रतिबंध लगा दिया है। इसे आतंकवाद विरोधी कानून में प्रतिबंधित किया है। इस संगठन ने गत मंगलवार को लॉक डाउन का आह्वान किया था। इसके एक दिन पहले 8 जून को ही पुलिस ने रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी, जिससे 11 लोग मौके पर ही मारे गए और 50 लोग घायल हुए। अभी तक एक सप्ताह में 53 निर्दोष लोग पुलिस ने मार दिए हैं। पिछले साल अक्टूबर 2025 में प्रदर्शन में 6 लोग मारे गए। मई 2924 में लांग मार्च के दौरान भी पुलिस ने गोली चलाई इसमें 3 लोगों की मृत्यु हुई। पाकिस्तान के सुरक्षा बल कश्मीरियों को विदेशी मानकर उनका जनसंहार कर रहे है। उन्हें उनके जान मॉल से कोई सहानुभूति नहीं है। क्योंकि वे मानते है कि ये सब भारतीय ही है।

ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। अत: पाक अधिकृत कश्मीर के भारतीय नागरिकों को नैतिक समर्थन के साथ साथ, प्रत्यक्ष और सार्थक समर्थन भी दिया जाय। आवश्यकता सीधे हस्तक्षेप कर अपना कश्मीर वापस लेने की है। 

 

अमेरिका-ईरान समझौता और भारत के हित

Posted on 17.06.2026 Time 10.18 AM, Wednesday, by Sarvesh Kumar Singh

सर्वेश कुमार सिंह

सोमवार को अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की सहमति बन गई। इसकी घोषणा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से उनके मीडिया प्लेटफार्म सोशल ट्रूथ पर हो गई है। अभी समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर हुए हैं यानिकि भौतिक हस्ताक्षर होना बाकी है। भौतिक हस्ताक्षर होने के बाद ही समझौते को अंतिम माना जाएगा। ये हस्ताक्षर 19 जून को जिनेवा में होंगे। लेकिन, डिजिटल हस्ताक्षर वाले समझौते को अस्थायी समझौता माना जा सकता है। इसे यह भी माना जा सकता है कि दोनों देश सैद्धान्तिक रूप से युद्धविराम और एक व्यापक समझौते के लिए सहमत हो गए हैं।

प्रारंभिक समझौते का दुनिया के अधिकाश देशों ने स्वागत किया है। अलबत्ता इस्राइल ने समझौता मानने और इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। इस्राइल के अपने हित हैं, वह उनकी अनदेखी नहीं कर सकता है। लेकिन, डोनाल्ड ट्रंप इस्राइल पर समझौता मानने का दवाब बना रहे हैं, जिसे इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होने कहा है कि हमें अपने हित देखने हैं। इस्राइल लेबनान, गाजा और सीरिया से पीछे नही हटेगा। जबकि ईरान चाहता है कि समझौते में इस्राइल को भी शामिल किया जाए और वह लेबनान में हमले बंद करे, वहां कब्जा की गई जमीन को छोड़े। लेकिन, इस्राइल ने साफ कह दिया है कि यह समझौता इस्राइल के लिए बाध्यकारी नहीं है। हालांकि इस्राइल ने जो मुद्दे उठाये हैं वे भी अहम हैं जैसे उसने कहा है कि आरंभिक समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने या उसके नियंत्रण की कोई बात शामिल नहीं है। क्योंकि इस्राइल इस बात के लिए कटिबद्ध है कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उधर ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए भी अमेरिका ने कोई शर्त नहीं लगाई है।  बैंजामिन ने कहा है कि न तो आज और न ही कल हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। इसलिए समझौते को इस्राइल ने सिरे से खारिज कर दिया है। उसने अमेरिका को साफ बता दिया है क उसे इस्राइल के आंतरिक और सैन्य मामलों में हस्तक्षेप करने का उसे कोई अधिकार नहीं है। इतना कड़ा रुख अपनाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यह समझौता आधा अधूरा ही है और युद्ध की आशंका आगे भी बनी रहेगी। इस्राइल और ईरान के बीच फिर किसी भी समय युद्ध छिड़ सकता है।

सोशल ट्रूथ पर डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया है कि अब होर्मुज खुल गया है। तेल की स्वतंत्र रूप से आवाजाही होगी। कोई टोल नही लगेगा। ईरान होर्मुज से बारूदी सुरंगें हटाएगा और अमेरिका ईरान के समुद्री तटों की नाकेबंदी खत्म करेगा। इससे दुनिया को राहत मिलेगी। स्वतंत्र रूप से तेल के टैंकर वाले जहाज होर्मुज से निर्बाध आवाजाही कर सकेंगे। साथ ही ईरान से भी तेल खरीदा जा सकेगा। लेकिन ट्रंप इस बात पर मौन हैं कि ईरान के 60 प्रतिशत संबर्धित यूरेनियम का क्या होगा। उस पर किसका निंयत्रण होगा। क्या उसे ईरान नष्ट करेगा। क्योंकि ऊर्जा क्षेत्र के लिए सिर्फ 5 प्रतिशत संबंर्धित यूरेनियम की ही आवश्यकता होती है। हालांकि ईरान ने यह भी कहा है कि अगले दौर की बातचीत में परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को शामिल किया जा सकता है। फिलहाल यह समझौता अगले साठ दिन के लिए लागू होने जा रहा है। इन साठ दिनों में अमेरिका और ईरान एक दूसरे पर हमले नहीं करेंगे। यह युद्ध एक तरह से 108 दिन बाद समाप्ति की ओर है। माना जाना चाहिए कि अब दोनों के बीच हवाई और मिसाइल हमले नहीं होंगे।

समझौते का विश्व के अन्य देशों और खासकर भारत पर क्या प्रभाव होगा। यह जानना भी जरूरी है। विश्व के सभी देश तेल की आवश्यकता की पूर्ति के लिए मुख्य रूप से खाड़ी देशों पर निर्भर हैं, जिनमें भारत भी शामिल है। भारत कौ गैस और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति खाडी के देशो से होती है। इस युद्द के कारण यह आपूर्ति प्रभावित हुई। क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान ने बंद कर दिया था। उधर अमेरिका ने ईरान के समुद्री तटों की नाकेबंदी कर दी थी। इसी नाकेबंदी के कारण भारत के तीन नाविकों की मृत्यु अमेरिकी हमले में हो गई थी। अमेरिका ने तीन विदेशी जहाजों पर ओमान के तट पर हमले किये थे, जिनपर भारतीय क्रू सवार थे। अब समझौते के बाद सभी तरह के प्रतिबंध हट जाएंगे। इससे भारतीय जहाजों को तेल और गैस लाने में कोई रोक टोक नहीं होगी। इसका असर पर देश में कच्चे तेल की कीमतो पर पड़ेगा। भारत का आयता बिल घटेगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। कीमतें घटेंगीं तो घऱेलू बाजार में भी सरकार मूल्य घटाएगी। साथ ही आपूर्ति में कटौती और प्रतिंबध भी समाप्त हो जाएंगे। भारत को यूरिया की संभावित कमी का सामना भी नही करना पडेगा। कुल मिलाकर भारत के लिए और शेष विश्व के लिए यह समझौता लाभकारी है। हमें इस चर्चा में जाने की कोई जरूरत नहीं है कि इस समझौते में जीत अमेरिका की हुई है या ईरान की। विश्व के हित सुरक्षित हुए हैं यह संतोषजनक है।

June 16, 2026

नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना से पशुपालकों को मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान

Posted on 16.06.2026 Time 10.33 PM Mathura Vrandavan
मथुरा। प्रदेश सरकार द्वारा गोवंशीय पशुओं में नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि तथा पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से “नन्द बाबा दुग्ध मिशन” के अंतर्गत “नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना” संचालित की जा रही है। योजना का उद्देश्य उच्च उत्पादन क्षमता वाले गोवंश का संवर्धन, रोजगार सृजन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है।
योजना के अंतर्गत लाभार्थी का स्थानीय निवासी होना, आधार एवं पहचान पत्र होना तथा गोपालन अथवा महिषपालन का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। इकाई स्थापना के लिए लगभग आधा एकड़ भूमि तथा चारा उत्पादन हेतु लगभग 1.5 एकड़ भूमि स्वयं की, पैतृक साझेदारी अथवा न्यूनतम सात वर्ष के अनुबंध पर होना अनिवार्य है।
योजना के तहत स्वदेशी नस्लों साहीवाल, थारपारकर, गिर अथवा गंगातीरी नस्ल के 25 गोवंशों की इकाई स्थापित की जाएगी। योजना की कुल लागत साहीवाल, थारपारकर एवं गिर नस्ल के लिए 62.50 लाख रुपये तथा गंगातीरी नस्ल (20+05 इकाई) के लिए 61 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें प्रदेश सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा।
गोवंश का क्रय प्रदेश के बाहर चयनित नस्लों के ब्रीडिंग ट्रैक्ट से कराया जाएगा, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले पशुओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।
योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन 15 जून 2026 से 15 जुलाई 2026 तक किए जा सकते हैं। इच्छुक पशुपालक नन्द बाबा पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। योजना की विस्तृत जानकारी के लिए वेबसाइट www.nandbaba.gov.in का अवलोकन किया जा सकता है।
पशुपालन विभाग ने पात्र पशुपालकों से योजना का लाभ उठाकर अपनी आय बढ़ाने और आधुनिक दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने की अपील की है।

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