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रेलवे की रीढ़ रनिंग स्टाफ, अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि -महामंत्री

April 24, 2026

रेलवे की रीढ़ रनिंग स्टाफ, अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि -महामंत्री

-शुक्रवार को मनोरंजन सदन में हुई लोको एवं ट्रैफिक रनिंग स्टाफ हुईं काँफ्रेंस

-एनआरएमयू की ओर से आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय महामंत्री के अलावा डीआरएम, समेत तमाम पदाधिकारी और रेल कर्मी
Post on 25.4.26
Friday Moradabad
Rajesh Bhatia

मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
लोको एवं ट्रैफिक रनिंग स्टाफ की बैठक में रनिंग स्टाफ की समस्याओं और उसके निदान का हल तलाशने का संकल्प लिया गया। शुक्रवार को एनआरएमयू की ओर से आयोजित कार्यक्रम मनोरंजन सदन में हुआ।

कार्यक्रम में एआईआरएफ के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा और डीआरएम समेत अधिकारी और मंडल भर से रेल कर्मियों ने हिस्सा लिया। मुख्य वक्ता महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि रनिंग स्टाफ रेलवे की रीढ़ है। उन्होंने उनके अधिकारों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता करार दिया। कहा कि रनिंग स्टाफ की आवाज ही संगठन की असली ताकत है।इसे कोई नजरअंदाज नहीं कर सका।
इस दौरान मौजूद डीआरएम विनीता श्रीवास्तव ने भी रनिंग स्टाफ की रेलवे में भूमिका को अहम मानते हुए कहा कि स्टाफ रेल संचालन व्यवस्था कीधुरी है। आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर हरसंभव प्रयास को कहा।
कार्यक्रम में प्रवीणा सिंह, सुहैल खालिद, अमित भागवत, मनोज शर्मा, मोहित गुप्ता आदि ने विचार व्यक्त किए।
नरमू के मंडल अध्यक्ष राजेश चौबे ने हमारी एकता ही ताकत है। संगठित होकर अपने अधिकारों की मजबूत आवाज बने।
कार्यक्रम में कर्मचारियों ने कैडर, से जुड़ी समस्याएं और प्रमुख बिंदुओं को रखा। तीस सूत्रीय मांगों में ड्यूटी पर काम का दबाव,पर्याप्त रेस्ट की कमी,48 घंटे कासाप्ताहिक अवकाश देने समेत अन्य बिंदु रहे।
महामंत्री ने इससे पहले रेलवे प्राइमरी कोआपरेटिव बैंक के नवीनीकृत भवन का उद्घाटन भी किया।
कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय महामंत्री, डीआरएम,ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशनकी राष्ट्रीय महिला संयोजिका प्रवीणा सिंह के अलावा एडीआरएम, सीनियर डीओएम, सीनियर डीईई के अलावा केंद्रीय उपाध्यक्ष एमपी चौबे,आर के बाली,शिवराज सिंह, दीपक यादव,नरेंद्र त्यागी, विजयंत शर्मा,पंकज सक्सेना,
नफीस खां,आरके कन्नौजिया, डायरेक्टर सुनील सिंह, संजय वर्मा और आईवन एडिशन, राजेश दुबे,राजपाल सिंह, सलीम सौरभ,नरेश गुरुंग, अनिल सोनी रहे। कार्यक्रम का संचालन मंडल अध्यक्ष मनोज शर्मा ने किया।

यूपी में कृषि विकास दर 8 से बढ़कर 18 प्रतिशत हुई: योगी आदित्यनाथ

लखनऊ : 24 अप्रैल, 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं केन्द्रीय कृषि, किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज यहां कृषि उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण एवं विपणन को गति प्रदान कर अन्नदाता किसान की आय में वृद्धि हेतु 09 राज्यों एवं संघ राज्य क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, कृषक उत्पादक संगठन एवं प्रगतिशील किसानों के महासंगम क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन (उत्तर क्षेत्र) का शुभारम्भ किया।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन एक व्याहारिक दृष्टिकोण स्थापित कर रहा है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों के एग्रोक्लाइमेटिक जोन व भौगोलिक तथा क्षेत्रीय परिस्थितयों के अनुसार कृषि क्षेत्र के लिये लक्ष्य तय करना अत्यन्त आवश्यक है। इस प्रकार की संगोष्ठियों के माध्यम से कृषि क्षेत्र के कल्याण के लिये व्यापक रोडमैप तैयार करने सहायता मिलती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गत वर्ष ‘विकसित कृषि अभियान’ और ‘खेती की बात खेत में’ कार्यक्रम के दौरान विभिन्न जनपदों में किसानों का उत्साह तथा कृषि वैज्ञानिकों व कृषि शिक्षा से जुड़े प्रशिक्षुओं के मन में बेहतरीन जिज्ञासा देखने को मिली। इस दौरान किसानों को पहली बार इनोवेशन को व्यवहारिक धरातल पर उतारने का बेहतरीन अवसर प्राप्त हुआ। लैब को लैण्ड तक पहुँचाने का अभिनव प्रयास पहली बार हुआ है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने इस अभियान को देश के धरातल पर व्यवहारिक रूप से उतारने का कार्य किया है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश में 69 कृषि विज्ञान केन्द्र थे। ज्यादातर कृषि विज्ञान केन्द्र बन्दी के कगार पर थे। आज प्रदेश में 89 कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित हो चुके हैं। प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र में इनोवेशन हो रहे हैं। कृषि विज्ञान केन्द्रों ने प्रदेश के सभी एग्रोक्लाइमेटिक जोन में सेन्टर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से बहुत कुछ बेहतरीन करने का कार्य किया है। इनसे जुड़े वैज्ञानिक स्थानीय स्तर पर किसानों के साथ बैठते हैं। परिणामस्वरूप, उत्तर प्रदेश में कृषि विकास की दर 08 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत पहुंच गयी है। हम इससे भी बेहतर परिणाम दे सकते हैं।
आजादी के समय भारत की अर्थव्यवस्था में एग्रीकल्चर का योगदान लगभग 41 से 42 प्रतिशत था। कृषि का योगदान लगातार कम होता गया। एग्रीकल्चर और मैन्युफैक्चरिंग में बेहतर समन्वय हो, तो विकास तेजी से होता है। हमारे यहां अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का योगदान अभी भी 15 से 16 प्रतिशत है, लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था में एग्रीकल्चर का योगदान 41 से 42 प्रतिशत से घटकर 20 से 21 प्रतिशत हो गया। प्रदेश सरकार ने इसको वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की पहल को मजबूती से आगे बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज के समय में तकनीक बहुत ही निर्णायक साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश में अलग-अलग प्रोडक्ट के कुछ इण्टरनेशनल सेण्टर उपलब्ध कराए हैं। वाराणसी में इण्टरनेशनल राइस रिसर्च इन्स्टीट्यूट का साउथ एशिया रीजनल सेण्टर बेहतर परिणाम दे रहा है। इस संस्थान ने चावल की कई नई प्रजातियां दी हैं। प्रदेश के अलग-अलग क्लाइमेटिक जोन में कौन सी प्रजाति प्रभावी हो सकती है और कौन सी तकनीक अपनाई जानी है, तकनीक का क्या प्रभाव हो सकता है, समय पर बुआई का उत्पादन पर क्या असर पड़ता है, और क्वालिटी सीड उत्पादन को कैसे आगे बढ़ा सकता है, यह सारे परिणाम हमें देखने को मिले हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में धान का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 100 कुन्तल तक पहुंचा है, जो पहले 50 से 60 कुन्तल तक सीमित था। अल-नीनो के नाते गेहूं की फसल पर असर पड़ा है। औद्यानिकी में आम की फसल को भी इसने प्रभावित किया है। हमें लागत को कम करके उत्पादन को बढ़ाना है। अच्छा सीड समय पर उपलब्ध कराना है। केमिकल फर्टिलाइजर एण्ड पेस्टिसाइड की खपत को कम करते हुए नेचुरल फार्मिंग को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास करना है। विकसित कृषि अभियान के अन्तर्गत गत वर्ष बाराबंकी निवासी प्रगतिशील किसान पद्म श्री रामसरन वर्मा के खेत में जाने का अवसर मिला था। इनके खेत में पूरी तरह व्यवहारिक चीजें देखने को मिलती हैं। रामसरन जी ने वैज्ञानिक पद्धति से खेती करके कम लागत में अच्छा उत्पादन प्राप्त करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत सरकार की पहल के परिणामस्वरूप, प्रदेश के जिन क्षेत्रों में पहले वर्ष में एक फसल होती थी, वहां तीन-तीन फसलें हो रही हैं। उत्तर प्रदेश की भूमि अत्यन्त उर्वरा है। यहां 85 से 86 प्रतिशत भूमि सिंचित है। यहां बेहतरीन कनेक्टिविटी है। प्रदेश सरकार किसानों के खेतों में 10 से 12 घण्टे बिजली उपलब्ध करा रही है। यह स्थितियां हमारे लिए बेहतरीन अवसर हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अकेले उत्तर प्रदेश में 425 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 211 लाख मीट्रिक टन धान, 245 लाख मीट्रिक टन आलू का उत्पादन हो रहा है। दलहन और तिलहन के उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश ने प्रगति की है। आज उत्तर प्रदेश में लगभग 48 लाख मीट्रिक टन तिलहन का उत्पादन हो रहा है। इसी प्रकार सब्जी, अलसी, जौ, बाजरा के उत्पादन में भी प्रदेश ने ऊंची छलांग लगाई है। प्रधानमंत्री जी ने आगरा के लिए इण्टरनेशनल पोटैटो सेण्टर स्वीकृत किया है, जो शीघ्र ही प्रारम्भ होने वाला है। सेण्ट्रल यू0पी0 का पूरा क्षेत्र आलू उत्पादन के लिए जाना जाता है। किसान यहां दो फसलों के साथ आलू का अच्छा उत्पादन करता है। उसको वैल्यू एडिशन के साथ जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि डिमाण्ड के अनुसार मांग की आपूर्ति में अन्नदाता किसान सहभागी बन सके। इण्टरनेशनल पोटैटो सेण्टर से सेण्ट्रल यू0पी0 के जनपदों में फूड प्रोसेसिंग की अनेक यूनिट लगनी प्रारम्भ हो गयी हैं। इन प्रयासों से अब किसान को उनके उत्पाद का बेहतरीन दाम स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से मिलना प्रारम्भ होगा।
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश के कर्मठ और यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेश में विकास और जन कल्याण का एक नया इतिहास रचा है। आज उत्तर प्रदेश अनेक क्षेत्रों में देश में नम्बर वन राज्य है। यह दूसरी रीजनल कॉन्फ्रेंस है। पहली जयपुर में हुई थी। यह कॉन्फ्रेंस हमारे लिये अत्यन्त उपयोगी है। एक तरफ यहां पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के प्रतिनिधि हैं, हरित क्रांति की शुरुआत इन्हीं राज्यों से हुई थी। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश देश में खाद्यान्न उत्पादन में नम्बर एक पर है। यहां की माटी, जलवायु और मेहनती किसान इस राज्य की शोभा बढ़ाते हैं।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि प्रत्येक राज्य का कृषि रोड मैप बनना चाहिये, क्योंकि जब तक लक्ष्य तय नहीं होगा और लक्ष्य की पूर्ति के लिए हम रोड मैप नहीं बनाएंगे तब तक हम पूरी तरह से खेती और किसान का भला नहीं कर पाएंगे। देश में फार्मर आई0डी0 बनाने का काम तेजी से चल रहा है। कुछ राज्य बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। फार्मर आई0डी0 किसान की अलग पहचान बनाती है। इस आई0डी0 के माध्यम से किसान विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे।
इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर व भागीरथ चौधरी, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री  सूर्य प्रताप शाही, उद्यान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह ओलख, हिमाचल प्रदेश के उद्यान मंत्री जगत सिंह नेगी, जम्मू कश्मीर के कृषि उत्पादन मंत्री जाविद अहमद डार, पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, पंजाब के उद्यान मंत्री मोहिन्दर भगत एवं उत्तराखण्ड के कृषि मंत्री गणेश जोशी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

बीजेपी में शामिल हुए सांसद राघव चड्ढा, नितिन नवीन ने खिलाई मिठाई

नऐ दिल्ली। दिल्ली की राजनीति में आज एक बड़ा धमाका हुआ है. आम आदमी पार्टी के संसदीय दल में बड़ी टूट की खबर सामने आई है. AAP के संस्थापक सदस्य और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पार्टी से अलग होने का एलान कर दिया है. उनके साथ फेहरिस्त में कई सांसद और भी हैं. मात्र 12 साल की आम आदमी पार्टी देश की राजनीति में जो भूचाल लाई थी वो दूध के उफान जैसा साबित हो रहा है..
साल 2013 में अन्ना हज़ारे के इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन से पैदा हुई आम आदमी पार्टी आज अंदरूनी कलह के चलते खत्म होने की कगार पर है..
पार्टी के नेताओं में आपसी सामंजस्य, समझ और भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है..
यही वजह है, आम आदमी पार्टी में बड़ी टूट हो गई है.. पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल के काफी करीबी रहे राज्यसभा सदस्य राघव चढ्ढा ने दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस करके सियासी भूचाल मचा दिया है..
राघव चड्ढा ने दावा किया कि पार्टी के 10 में से आठ सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो रहे हैं.. इनमें खुद राघव चढ्ढा के अलावा अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल और राजेन्द्र गुप्ता शमिल हैं..
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राघव चड्ढा लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पढ़ाई कर के भारत लौटे थे और अरविंद केजरीवाल के साथ आम आदमी पार्टी की राजनीति शुरू की थी..
राघव चड्ढा ने कहा, “आम आदमी पार्टी, जिसे मैंने अपने खून पसीने से सींचा.. और जिसे मैंने अपनी युवावस्था के 15 साल दिए.. वो अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और बुनियादी नैतिकताओं से पूरी तरह भटक चुकी है.. अब ये पार्टी देश या राष्ट्रीय हित के लिए काम नहीं कर रही बल्कि निजी स्वार्थ के लिए काम कर रही है..”

बरेली: उप मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जन-आक्रोश महिला सम्मेलन कार्यक्रम हुआ आयोजन

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर सरकार का बड़ा संदेश, महिलाओं को अधिकार दिलाने की प्रतिबद्धता*

*प्रधानमंत्री के संकल्प का जिक्र, “मातृ शक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण दिलाकर रहेंगे”*

बरेली, 24 अप्रैल। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में आज जन-आक्रोश महिला सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन इनवर्टिस यूनिवर्सिटी में किया गया ।

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह एकता और एकजुटता का विषय है और बताया कि 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद का सत्र बुलाकर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रयास किया गया, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह संभव नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष का सहयोग मिलता और पर्याप्त सांसद समर्थन में होते तो यह ऐतिहासिक बिल पास हो सकता था। उन्होंने पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को मिले आरक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी का परिणाम है कि आज बरेली में जिला पंचायत अध्यक्ष के रूप में एक महिला नेतृत्व कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जब राष्ट्र के नाम सम्बोधन दिया कि ना मैं हिम्मत हारा हूँ, ना मेरा हौसला टूटा है, मैं मातृ शक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण दिला कर रहूँगा। उन्होंने कहा कि महिलाएं जिस भी क्षेत्र में अवसर पाती हैं, वहां उत्कृष्ट कार्य करती हैं लेकिन मुख्य बात है अवसर मिलना चाहिए और यह मौका भाजपा देगी। लेकिन विपक्ष ने माखौल उड़ाने का कार्य किया है उन्हें आधी आबादी का श्राप लगेगा और भाजपा को आधी आबादी का आर्शीवाद मिलेगा।

उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वह है जो सती के रूप में यमराज से अपने पति के प्राण वापस ले आयी थी और रानी लक्ष्मी बाई के रूप में अपने दुध मुंहे बच्चे को पीठ में बांधकर अंग्रेजों से लड़ी थी तथा सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं को पढ़ने का अधिकार दिया।

उन्होंने बताया हमारी सरकार ने 40 करोड़ महिलाओं का बैंक खाता खुलवाया, 10 करोड़ घरों में शौचालय बनवाया, 07 करोड़ गरीब परिवारों को आवास दिये जिनमे 90 प्रतिशत महिलाओं के नाम है, आयुष्मान कार्ड, 10 करोड़ महिलाओं को उज्जवला योजना के तहत सिलेण्डर, 03 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाया तथा 06 करोड़ महिलाओं का लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य पुनः लिया गया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का नारा है ”बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और बेटी को आगे बढ़ाओ।”
उन्होंने कहा कि देश की नारी शक्ति का सम्मान अगर किसी ने किया है तो भाजपा ने किया है। हमारे देश की राष्ट्रपति व प्रदेश की राज्यपाल भी महिला हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने 2026 में जो पाप किया है उसका परिणाम 2027 में उसे भुगतान पड़ेगा। यह विरोध इस परिसर का नहीं रहना चाहिए इसे घर-घर तक पहुंचाना है।

इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण कुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भाजपा महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहती थी लेकिन विपक्ष के कारण यह संभव नहीं हो पाया।
महापौर ने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं के सपनों को कुचलने का कार्य किया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि नारी का उत्थान और नारी का सम्मान यही है भाजपा की पहचान लेकिन विपक्ष ने महिलाओं के साथ छल किया है।
सांसद ने कहा कि महिलाओं के सम्मान के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण देने की बारी जब आयी तो लेकिन विपक्ष के कारण यह संभव नहीं हुआ, यह आक्रोश जन-जन तक जाए।
क्षेत्रीय अध्यक्ष भा0ज0पा0 दूरविजय सिंह शाक्य
ने कहा कि देश के मा0 प्रधानमंत्री ने 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने का सपना देखा, जिसके लिए महिलाओं की सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रयास किया गया था, जिसे विपक्ष ने रोक दिया।

इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ0 अरुण कुमार, महापौर डॉ0 उमेश गौतम, जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल, सांसद बरेली छत्रपाल गंगवार, विधान परिषद सदस्य कुंवर महाराज सिंह व बहोरन लाल मौर्य, विधायक मीरगंज डॉ0 डी0सी0 वर्मा, विधायक नवाबगंज डॉ0 एम0पी0 आर्य, विधायक बिथरी चैनपुर डॉ0 राघवेन्द्र शर्मा, जिला अध्यक्ष सोमपाल शर्मा, आंवला जिला अध्यक्ष आदेश प्रताप सिंह, महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना, महिला ब्लाक प्रमुख /सभासदगण सहित अन्य जनप्रतिनिधि गण मौजूद रहे।

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जातिवाद के नाम पर देश को लूटने वाले राष्ट्रद्रोहियों से सावधान रहें: योगी

तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को सीएम ने किया संबोधित

*राष्ट्रकवि दिनकर की कृति आज भी राष्ट्र चेतना की मशाल, साहित्य समाज का दर्पण: मुख्यमंत्री*

*मुख्यमंत्री ने देखा रश्मिरथी का मंचन, कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति की सराहना की*

*तीन दिवसीय आयोजन में स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और अटल जी पर भी होंगे विशेष नाट्य कार्यक्रम*

*लखनऊ, 24 अप्रैल।* “राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति ‘रश्मिरथी’ आज भी समाज और राष्ट्र को दिशा देने वाली प्रेरणा है। यदि भारत को मजबूत, आत्मनिर्भर और विकसित बनाना है तो जातिवाद के नाम पर समाज को बांटने वाली शक्तियों से सावधान रहना होगा।” ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में तीन दिवसीय ‘रश्मिरथी पर्व’ के शुभारंभ एवं ‘रश्मिरथी से संवाद’ स्मारिका के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर की कालजयी काव्यकृति ‘रश्मिरथी’ के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। साहित्य के ऐसे सशक्त साधक के प्रति हम सब अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए प्रदेश की राजधानी में एकत्र हैं। यहां हम उनकी कालजयी काव्यकृति पर आधारित नाट्य-श्रृंखला का मंचन देखेंगे। हम देखेंगे कि किस प्रकार मां सरस्वती दिनकर जी की जिह्वा पर विराजती थीं और उनकी लेखनी शब्दों को पिरोती थी। यह सब ‘रश्मिरथी’ के इस मंचन के माध्यम से हम सभी को देखने-सुनने को मिलेगा। इस अवसर पर दिनकर जी की स्मृतियों को नमन करते हुए मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

*दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं*
सीएम योगी ने कहा कि जब इस कार्यक्रम का पत्र मिला, तो सबसे पहले मैंने कहा कि यह कार्यक्रम उसी दिन रखिए, जिस दिन मैं भी इसका भागीदार बन सकूं, क्योंकि मैं अक्सर दिनकर जी की कृतियों के कुछ अंश लेकर विरोधियों पर प्रहार भी करता हूं। भारत धन-धान्य से परिपूर्ण रहा है, दुनिया की बड़ी ताकत रहा है, लेकिन भारत ने सैकड़ों वर्षों की गुलामी भी सही है। बल और बुद्धि में भारत का कोई मुकाबला नहीं कर सकता था, लेकिन हमारी कुछ कमियां भी थीं। दिनकर जी ने इन कमियों पर जिस प्रकार प्रहार किया है, उसे देखकर मुझे अच्छा लगता है। आप इस नाट्य मंचन के माध्यम से भी देखेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने ‘रश्मिरथी’ में लिखा है-
“ऊंच-नीच का भेद न जाने, वही श्रेष्ठ ज्ञानी है,
दया-धर्म जिसमें हो, सबसे वही पूज्य प्राणी है।”
जातिवाद पर भी उन्होंने कितना सशक्त प्रहार किया है-
“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का,
धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता रणधीरों का।
पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर,
जाति-जाति का शोर मचाते केवल कायर क्रूर।”

सीएम योगी ने कहा कि यदि हमें अपनी आजादी को लंबे समय तक अक्षुण्ण बनाए रखना है और विकसित व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करना है, तो जातिवाद के नाम पर देश को लूटने और समाज को कमजोर करने वाले राष्ट्रदोहियों से सावधान रहना होगा। युवा वर्ग के लिए दिनकर जी इस बात की प्रेरणा इन पंक्तियों के माध्यम से दशकों पहले ही दे चुके हैं-
“सच है, विपत्ति जब आती है,
कायर को ही दहलाती है,
सूरमा नहीं विचलित होते,
क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं,
कांटों में राह बनाते हैं।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिनकर जी ने समाज की चेतना को जिस रूप में जागरूक किया और पूरे समाज को एकजुट किया, वह अद्वितीय है। अपनी कृतियों के माध्यम से वह अलग-अलग स्तरों पर लोगों को जागृत करते रहे और देश की चेतना को निरंतर सशक्त करते रहे। जब भारत के लोकतंत्र को दबाने का प्रयास हुआ, तब भी दिनकर जी ने आह्वान किया- “सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।” शब्द किस प्रकार मंत्र बन जाएं और हर व्यक्ति के मन में राष्ट्र के लिए त्याग, चेतना और समर्पण की भावना को जागृत करें, यह गुण महान कवि में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘रश्मिरथी’ ऐसे पात्र के बारे में है, जो अपनी पहचान के लिए मोहताज रहा। उसकी गाथा को दिनकर जी ने जिस प्रकार प्रस्तुत किया और उसके गुणों की व्याख्या की, उसने हर व्यक्ति को सोचने के लिए मजबूर किया कि कौन किस स्थान पर हो सकता है और हमें किसी की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ में उन्होंने लिखा है-
“जब किसी जाति का अहम चोट खाता है,
पावक प्रचण्ड हो कर बाहर आता है।
यह वही चोट खाये स्वदेश का बल है,
आहत भुजंग है, सुलगा हुआ अनल है।”

*स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद लखनऊ, अयोध्या, काशी की यात्राएं की*
सीएम ने बताया कि उन्होंने संस्कृति विभाग से कहा है कि ऐसी साहित्यिक कृतियों पर आधारित कार्यक्रम आज की पीढ़ी के लिए नई प्रेरणा हैं। इस प्रेरणा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। कल यहीं पर स्वामी विवेकानंद पर आधारित एक नाट्य मंचन का कार्यक्रम है। स्वामी विवेकानंद हर भारतीय के लिए प्रेरणा हैं। वह एक संन्यासी थे, लेकिन हर युवा के लिए मार्गदर्शक बने। उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत की वैदिक और सनातन परंपरा को सम्मान दिलाया। उन्होंने ज्ञान को विज्ञान के साथ जोड़कर तत्कालीन समाज को उसके अनुरूप तैयार करने का कार्य किया और भारत की चेतना को जागरूक करने के लिए पूरी शक्ति के साथ समर्पित रहे। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो की धर्मसभा के बाद भारत में जो यात्राएं कीं, उनमें लखनऊ, अयोध्या, काशी सहित उत्तर प्रदेश के कई स्थान शामिल थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 अप्रैल को यहां लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक पर आधारित कार्यक्रम होगा। तिलक जी ने भारत की स्वाधीनता के लिए “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा” का उद्घोष इसी लखनऊ में किया था, जो भारत की आजादी का एक प्रमुख केंद्र बना। इसी दिन ‘अटल स्वरांजलि’ कार्यक्रम भी आयोजित होगा, जिसमें भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविताओं पर आधारित एक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। अटल जी का शताब्दी वर्ष हाल में संपन्न हुआ है, और इस अवसर पर लखनऊ में राष्ट्रप्रेरणा स्थल का निर्माण भी किया गया है। लखनऊ लंबे समय तक अटल जी की कर्मभूमि रहा है।

सीएम योगी ने कहा कि भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय तथा अन्य संस्थानों के युवाओं को भी इस कार्यक्रम में सहभागी बनाया जाए। जिनकी परीक्षाएं नहीं हैं, वे आएं और इस कार्यक्रम को देखें। उनके आने-जाने की व्यवस्था भी की जानी चाहिए और इसके लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। वे साहित्य के बारे में जानें, क्योंकि साहित्य वास्तव में समाज का दर्पण होता है। दर्पण जैसा होता है, वैसा ही चित्र दिखाई देता है। हम राष्ट्र को कैसा बनाना चाहते हैं, ये साहित्यिक कृतियां उसका आधार बनती हैं और उनसे हम प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

सीएम योगी ने कहा कि मैं स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों को नमन करता हूं और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को भी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, जिन्होंने महाराष्ट्र में गणपति महोत्सव के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना को राष्ट्रीय चेतना से जोड़कर उसे नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। यही चेतना 1916 में लखनऊ में भी गूंजी, जब तिलक जी ने “स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है” का उद्घोष किया। उनकी स्मृति में वर्ष 2017 में लखनऊ में कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसके लिए तत्कालीन राज्यपाल ने प्रेरणा दी थी। उस अवसर पर तिलक जी के परिवार के सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया था।

*मुख्यमंत्री ने देखा रश्मिरथी का मंचन*
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रश्मिरथी का मंचन भी देखा। उन्होंने कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने संस्कृति विभाग को निर्देश दिया कि आमजन को ऐसी कृतियों से अवगत कराएं।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे, डॉ. सत्यपाल सिंह, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, कार्यक्रम संयोजक प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, संस्कृति/पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह, महापौर सुषमा खर्कवाल, भाजपा नेता नीरज सिंह, दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के सुपौत्र ऋत्विक उदयन आदि मौजूद रहे।

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