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चर्चा में श्रीराम मंदिर 

June 13, 2026

चर्चा में श्रीराम मंदिर 

Editorial 13.06.2026 Saturday, by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

प्रभु श्रीराम का अयोध्या में नवनिर्मित मंदिर चर्चा में है। चर्चा किसी नए निर्माण, नए आयोजन को लेकर नहीं है। बल्कि एक नकारात्मक और कष्टप्रद संदर्भ में है। ये संदर्भ मंदिर व्यवस्था में संलग्न भक्तों और सेवायतों की निष्ठा और सुचिता को लेकर है। चर्चा है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दानपात्र से निकलने वाली धनराशि और अमूल्य वस्तुओं के रखरखाव से लेकर बैंक में जमा करने तक कदाचार हुआ है। हालांकि अभी इन आरोपों की कोई पुष्टि नहीं हुई है और ये आरोप अफवाह भी हो सकते है। अगर ऐसा ही हो तो बहुत अच्छा होगा।

लेकिन मीडिया में दानराशि की चोरी की खबरें प्रकाशित हो रही है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज है। मंदिर व्यवस्थापकों और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर शिथिल पर्यवेक्षण के लिए दोषारोपण हो रहा है। हालांकि इस मामले में ट्रस्ट के जिम्मेदारों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संज्ञान लिया है। जांच की आंतरिक प्रक्रिया अपनाई जा रही है। इस मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपतराय ने एक बयान जारी कर कोई उल्लेखनीय बात सामने नहीं आने का स्पष्टीकरण दिया था। किंतु इसे पर्याप्त नहीं मानना गया और जांच की मांग तेज होती चली गई। पता चला है कि ट्रस्ट ने सेवानिवृत न्यायाधीशों की समिति से जांच कराने और व्यवस्था में परिवर्तन का निर्णय लिया है, जोकि उपयुक्त ही है।

इस प्रकरण पर राजनीति होना चिंताजनक है। कई राजनीतिक दलों के नेता,कार्यकर्ता इस मामले में टिप्पणी कर रहे है। बगैर किसी प्रमाण या कदाचार की पुष्टि के ट्रस्ट पदाधिकारियों की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे है। ये लोग तपस्वी जैसा जीवन जीने वाले और राममंदिर के लिए जीवन अर्पण करने वाले चंपतराय पर भी अनर्गल आरोप लगा कर टिप्पणियां कर रहे है। जबकि उन्होंने तो इस मंदिर के आंदोलन और निर्माण के लिए अपना जीवन होम कर दिया। खैर जांच होगी तो स्थिति स्वत: स्पष्ट हो जाएगी।

कुल मिलाकर ये चर्चा होना दुखदाई है। सवाल करोड़ों भक्तों की अटूट आस्था का है। उसे हर हाल में बनाए रखना चाहिए। यदि कहीं व्यवस्था में चूक हुई हो तो हमे दक्षिण के मंदिरों की व्यवस्था से सीख लेनी चाहिए या उसे ही अपनाना चाहिए।

The newly built temple of Lord Shri Ram in Ayodhya is in the news. The discussion is not about any new construction, new event. Rather, it is in a negative and hurtful context. The reference is to the loyalty and integrity of the devotees and sevayats engaged in the temple system. There is talk that there has been malpractice in the Sri Ram Janmabhoomi temple, from the maintenance of money and valuables coming out of the donation box to depositing them in the bank. However, there is no confirmation on these allegations yet and these allegations could be rumours as well. If so, that would be great. But reports of the theft of donations are being published in the media. The debate has been going on social media. Temple administrators and office-bearers of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust are being blamed for lax supervision. However, in this case, the responsibilities of the trust and the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) have taken notice. The internal process of investigation is being followed. In this case, trust general secretary Champat Rai had issued a statement clarifying that nothing remarkable had come to light. But this was not considered enough and the demand for an inquiry grew louder. It is learnt that the trust has decided to get the inquiry done by a committee of retired judges and make changes in the system, which is appropriate. It is worrisome to have politics over this issue. Leaders, activists of many political parties are commenting in this matter. Without any proof or corroboration of malpractice,  is trying to tarnish the image of the office bearers. These people are also making wild allegations against Champat Rai, who led an ascetic life and sacrificed his life for the Ram temple.

June 7, 2026

धरातल पर उतरते ही भटका आंदोलन

Editorial 07.06.2026 by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

एक खास मुद्दे और टिप्पणी को लेकर डिजिटल मीडिया में शुरू हुआ आंदोलन जमीन पर उतरते ही दिशा भटक गया। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और उनके सोशल मीडिया समर्थकों ने 6 जून को जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। लगभग एक हजार लोग देशव्यापी आह्वान के बाद प्रदर्शन में जुटे। लगभग इतने ही पुलिसकर्मी और मीडिया, सोशल मीडिया, यूट्यूबर और तमाशबीन भी थे। आंदोलन के लिए दिल्ली पुलिस ने 8 घंटे की अनुमति दी थी किंतु यह 6 घंटे में खत्म हो गया।

संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस प्रदर्शन की घोषणा सिर्फ एक सूत्रीय मांग के लिए की थी। यह मांग थी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र। प्रदर्शन के दौरान इस मांग की यहां औपचारिकता पूरी की गई। सरकार को 7 दिन का समय देकर अल्टीमेटम जारी कर दिया गया। किंतु इससे भी बड़ी तस्वीर जो आंदोलन में उभरी वह ये थी कि पूरा आंदोलन एक खास विचारधारा के लोगों के हाथों हाइजैक हो गया। इसमें परंपरागत मोदी विरोधी, भाजपा विरोधी, भारत विरोधी विमर्श गढ़ने वाले समूह हावी हो गए। इन्होंने वही सब करना शुरू कर दिया जो सीएए विरोधी आंदोलन में हुआ। ये ग्रुप अपनी ढ़पली लेकर आंदोलन स्थल पर पहले से ही मौजूद था। इन्होंने आजादी -आजादी के नारे लगाए। मीडिया ने जब प्रश्न किया कि आंदोलन नीट यूजी की गड़बड़ियों और प्रधान के इस्तीफे को लेकर है तो आजादी के नारे का क्या औचित्य है, इस पर ये लोग भड़क गए और गोदी मीडिया कहकर उन्हें वहां से भगाने लगे। इससे पूरा आंदोलन रास्ते से भटकता नजर आया। आंदोलन में तमाम लोग ऐसे थे जिन्हें न तो नीट की कोई जानकारी थी और न ही वे मुद्दे को जानते थे। बस वे तो इस लिए आए कि एक आंदोलन मोदी सरकार के खिलाफ है। आंदोलन के मंच पर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी पहुंचे। उन्होंने पूरी शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की बात की।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आंदोलन शुरू करने का ये भारत में पहला प्रयोग है। इसीलिए शायद सरकार ने इस आंदोलन और प्रदर्शन को आसानी से अनुमति दे दी। क्योंकि सरकार इसे एक प्रयोग के रूप में भी परखना चाहती होगी, की क्या सोशल मीडिया पर किसी मुद्दे पर एकजुट हुए लोग यथार्थ में धरातल पर भी सफल हो सकते हैं या नहीं। अथवा सोशल मीडिया पर उभरे समूह और फॉलोअर्स समुद्र के पानी पर उभरे बुलबुले साबित होते है, जो समय के साथ स्वत: ही फूट जाते है ।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की स्थापना को अभी 21 दिन ही हुए है। इस दौरान इसके लाखों सोशल मीडिया फॉलोअर्स हो गए। इंस्टाग्राम पर सीजेपी का अकाउंट बनने के 2 दिन के भीतर ही, 140 लाख फॉलोअर्स हो गए थे। पार्टी एक व्यंग्यात्मक अभियान के रूप में 16 मई को अमेरिका में बैठे पूर्व आम आदमी पार्टी कार्यकर्ता और मीडिया एक्सपर्ट अभिजीत दीपके ने बनाई। क्योंकि 15 मई को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी। उन्हें कॉकरोच की तरह बताकर सिस्टम को नुकसान पहुंचाने वाला बताया था। टिप्पणी वास्तव में अपमानजनक और गैर जरूरी थी। इससे युवाओं को भावनात्मक ठेस पहुंची और अपमानित भी हुए। इस आक्रोश का आकलन करके अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया अभियान शुरू कर दिया। जो अब धरना,प्रदर्शन में बदलने लगा है।

सवाल फिर वहीं है कि क्या आंदोलन अपने उद्देश्य के अनुरूप है और क्या सही दिशा में है। क्या आंदोलन उसके संस्थापकों के हाथों में है या स्वार्थी तत्वों ने इसे हाइजैक कर लिया है। इन प्रश्नों का उत्तर सिर्फ अभिजीत दीपके को तलाशना होगा। वरना सही मांग के बावजूद ये अभियान युवाओं की सहानुभूति खो देगा।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

June 6, 2026

दिल्ली होटल अग्निकांड जिम्मेदार कौन

Editorial 06.06.2026 Time 09.51 AM, by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

संपादकीय

दिल्ली होटल अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। आखिर 21 लोगों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार कौन है? लापरवाही कहां कहा हुई, किस किस ने नियमों की अनदेखी की । नियमों का पालन कराने वाले क्या कर रहे थे। ये अनेक प्रश्न है। जांचे होंगी, रिपोर्टें आएंगी, लेकिन क्या इन पर सख्ती से अमल होगा। दिल्ली के अग्निकांड वाले होटल में नियमों का उल्लंघन साफ दिखाई दे रहा है। होटल निर्माण से लेकर, अग्नि सुरक्षा मानकों तक घनघोर लापरवाही हुई है। बिल्डिंग में सिर्फ एक निकास होना, एक लिफ्ट और एक ही जीना होना, पर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपकरणों का न होना बताता है कि जिम्मेदार कितनी गहरी नींद में सोए थे। डीडीए और दिल्ली नगर निगम ने कैसे निर्माण और होटल चलाने का लाइसेंस दे दिया। फायर ब्रिगेड विभाग ने पहले से कोई चेकिंग अभियान क्यों नहीं चलाया। इस अग्निकांड में मृतकों की संख्या में 13 विदेशी भी शामिल है। एक परिवार के 8 सदस्यों का जिंदा जल जाना हृदय विदारक है। एक महिला का बच्चे को सीने से चिपका कर खिड़की से कूद जाना सिहरन पैदा करता है।

दिल्ली के मालवीय नगर में होटल फ्लोरिस स्टे में 3 जून को लगी आग साधारण नहीं है। ये आग वहां लगी है, जहां तीन सरकारें बैठी हैं। दिल्ली नगर निगम, दिल्ली प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार सभी का मुख्यालय भी दिल्ली ही है। सभी में भारतीय जनता पार्टी सत्तारूढ़ है। इसलिए लापरवाही का अंदाजा लगाइये किस हद तक है। दिल्ली में ये अकेला होटल नहीं है जिसमें नियमों की धज्जियां उड़ी है। कई हजार होटल ऐसी तंग गलियों में चल रहे हैं जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकती। इनमें इमरजेंसी एग्जिट नहीं है। फायर फाइटिंग के पुख्ता इंतजाम नहीं है। हालांकि ये स्थिति कमोवेश पूरे देश के होटलों की है। बेसमेंट में एक साथ किचेन और डाइनिंग की व्यवस्था आम हो गई है जो बेहद खतरनाक है। दिल्ली ने कभी अग्निकांडों से सबक नहीं लिया , 1997 में ग्रीनपार्क का उपहार सिनेमा अग्नि कांड हुआ। इसमें 46 दर्शकों की जिंदा जलकर मृत्यु हुई थी। इसके बाद एक बिल्डिंग में आग से 27 लोग जल गए थे। बड़ी बड़ी बातें हुई, रिजल्ट वही ढाक के तीन पात। एक साथ फिर 21 की जिंदा जलने की घटना की पुनरावृत्ति।

होटल में आग के बाद गिरफ्तार मालिक का बयान देखिए, कहता है दिल्ली में सब चलता है। दिल्ली सरकार, प्रशासन, नगर निगम की घनघोर लापरवाही और कुछ हद तक मिलीभगत को उजागर करता है। चलता है मतलब, इसे चलाने में सब शामिल है। पुलिस ने इस मामले में गैर इरादत्तन हत्या का मुकदमा कायम किया है। इसे सीधे हत्या में तरमीम किया जाना चाहिए। मुकदमे में लापरवाह अफसरों, कर्मचारियों को भी शामिल किया जाए तो सिस्टम कुछ सचेत होगा।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

June 3, 2026

सुरक्षा के स्वदेशी अस्त्र

Editorial 03.06.2026 Wednesday by Sarvesh Kumar Singh Editor, UP Web News

संपादकीय

सर्वेश कुमार सिंह

भारत रक्षा अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में नित्य नवीन उपलब्धियां हासिल कर रहा है। अपनी सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ साथ मित्र देशों को स्वदेशी अस्त्र शस्त्रों का निर्यात भी कर रहा है। हमारे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड जैसे संस्थानों और कुछ निजी क्षेत्र की उच्च तकनीकी में दक्ष कंपनियां उल्लेखनीय सफलता अर्जित कर रही है। इनके दम पर भारत अब रक्षा उपकरणों के आयातक के स्थान पर निर्यातक देश के रूप में पहचान बना रहा है।

भारत ने 30 मई को ब्रह्मोस मिसाइल वियतनाम को निर्यात करने का समझौता किया है। ये क्रूज मिसाइल है, जिसने ऑपरेशन सिंदूर में अपनी श्रेष्ठता साबित की है। सभी लक्ष्य सटीकता के साथ भेद दिए थे। ब्रह्मोस के प्रहार से पाकिस्तान युद्ध विराम के लिए गिड़गिड़ाने लगा था। कई अन्य देशों ने ब्रह्मोस प्राप्त करने के लिए भारत को प्रस्ताव दिए है।

दो जून को चांदीपुर रेंज में डीआरडीओ में विकसित सुपरसोनिक मिसाइल “रुद्रम 2” RudraM-II Air-to-Surface Missile का सफल परीक्षण हुआ है। इसका परीक्षण वायु सेना के सहयोग से सुखोई 30 लड़ाकू विमान से किया गया। ये ऐसी मिसाइल है जो भविष्य के किसी भी युद्ध का परिदृश्य बदल देगी। ये मिसाइल 300 से 350 किमी तक की दूरी का लक्ष्य सटीकता से भेद सकती है। ये हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है। इस मिसाइल की खास खूबी ये है कि ये दुश्मन के रडार सिस्टम, एयर डिफेंस सिस्टम और संचार सिस्टम को अंधा कर देगी और सटीकता से लक्ष्य को भेद देगी। ये मिसाइल दूर से रडार के सिग्नल पकड़ेगी। रुद्रम 2 हवा से जमीन पर मार करने वाली सर्वश्रेष्ठ विश्व स्तरीय मिसाइल होगी।

एक ही दिन पहले भारत ने पूर्ण स्वदेशी ड्रोन “दिव्यास्त्र” का परीक्षण किया। एक जून को राजस्थान के जोधपुर में उच्च तापमान में दिव्यास्त्र एम के 2 का परीक्षण हुआ। ये ड्रोन 500 किमी दूर तक जाकर लक्ष्य को भेद सकता है। इसको निजी कंपनी होवर इट ने बनाया है।

भारत के रक्षा विशेषज्ञ और अनुसंधानकर्ताओं ने रूस यूक्रेन युद्ध, ऑपरेशन सिंदूर और हाल के ईरान अमेरिका, इजराइल युद्ध के बाद अपने रक्षा उत्पादन को मिसाइल और उन्नत ड्रोन पर केंद्रित किया है। क्योंकि इन युद्धों में परंपरा से हटकर आक्रमण और बचाव के उपाय किए गए। जमीनी युद्ध के स्थान पर आकाशीय आक्रमण हुए। इनमें मिसाइल और ड्रोन की भूमिका प्रमुख रही। इसीलिए ड्रोन का भारी संख्य में निर्माण करने के लिए भारत निजी क्षेत्र की भी मदद ले रहा है। वहीं नवीन तकनीक के साथ मिसाइल निर्माण बढ़ाया गया है।

भारत ने स्वदेशी के दम पर ऐसा सुरक्षा कवच बना लिया है कि इसे भेदना किसी भी दुश्मन के लिए संभव नहीं होगा। बल्कि हमारी मिसाइल दुश्मन के घर में घुसकर शत्रु को तबाह कर देंगी।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

May 27, 2026

जनसांख्यिकी परिवर्तन पर समिति: समय की मांग

Editorial

Editorial 27.05.2026 Wednesday by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

सही समय पर उचित निर्णय है, जनसांख्यिकी परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति। यह समय की मांग है। भारत के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पिछले लगभग 5 दशक से जनसंख्या का धार्मिक और सामाजिक अनुपात गड़बड़ा रहा है, या कहा जा रहा है संतुलन बिगड़ रहा है। ये कई तरह से ही रहा है, घुसपैठ से, कुछ खास क्षेत्रों में रणनीतिक पलायन से, कुछ खास वर्गों और धार्मिक विश्वासों को अपनाने वाले समाज द्वारा सीमित परिवार की अवधारणा को नकार कर, आबादी बढ़ाने की सुनियोजित योजना के द्वारा। कुल मिलकर राज्यों, महानगरों, नगरों, कस्बों और गांवों में जनसांख्यिकी अनुपात तेजी से असंतुलित हो रहा है। इस स्थिति ने जहां कई तरह की आंतरिक सुरक्षा की समस्याएं खड़ी की हैं, वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती खड़ी हुई है।

हमें इस तथ्य को स्पष्टता और दृढ़ता के साथ स्वीकारना चाहिए कि जम्मू और कश्मीर की समस्या सिर्फ और सिर्फ जनसांख्यिकी परिवर्तन का परिणाम है। वहां जब से हिन्दू अल्पसंख्यक हुए और मुस्लिम बहुसंख्यक कश्मीर में समस्याएं आने लगीं। पूर्वोत्तर की समस्याएं भी कुछ ऐसी ही हैं। चिंता की बात ये है कि क्षेत्र विशेष में जनसंख्या का धार्मिक अनुपात बदलने से आस्थाएं भी बदल रही है। अच्छी बात यह है कि भारत सरकार ने इस खतरे को समय रहते भांप लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को स्वतंत्रता दिवस समारोह में लालकिले से इस पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने वहीं से घोषणा कर दी थी कि एक उच्च स्तरीय डेमोग्राफिक चेंज कमेटी बनेगी, जोकि इस परिवर्तन का अध्ययन करेगी और इसे रोकने के उपायों पर सुझाव देगी।

सरकार ने इस दिशा में सार्थक प्रयास करते हुए 11 सितंबर 2025 को ही केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक में समिति गठन के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी थी। कल 26 मई को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने समिति की घोषणा कर दी। उन्होंने एक्स (पूर्ववर्ती ट्विटर) पर समिति के अध्यक्ष और सदस्यों के नाम घोषित कर दिए। समिति सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में गठित हुई है। इसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यसचिव दुर्गाशंकर मिश्र, जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण, आईपीएस (सेवानिवृत) बाला जी श्रीवास्तव, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य डॉ शामिका रवि, और सदस्य सचिव ग्रह मंत्रालय के संयुक्त सचिव(विदेश मामले) को शामिल किया गया है। समिति एक वर्ष में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

इस समिति की संस्तुतियों पर भारत सरकार नीति बनाएगी और जनसांख्यिकी असंतुलन रोकने के प्रयास करेगी। ये न केवल सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी, बल्कि भारत की सनातन चेतना को अक्षुण्ण बनाए रखने में भी सहायक होगी।

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