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जातियों पर टिप्पणी से बचें नेता

May 18, 2026

जातियों पर टिप्पणी से बचें नेता

सम्पादकीय 18.05.2026, Time 07.36 PM, Monday, by Sarvesh Kumar Singh, Editor UP Web News, Lucknow

राजनीति अब समाज का अभिन्न अंग बन चुकी है। यह केवल कुछ लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। मीडिया के बदलते स्वरूप में इसका जहां स्वरूप व्यापक हुआ है वहीं नेताओं की हर बात तत्काल डिजिटल माध्यमों से जनता तक पहुंच रही है। इसके दोनों पक्ष हैं लाभकारी भी है और हानिकर भी। सोशल मीडिया के युग में नेताओं के लिए जुबान पर नियंत्रण करना समय की मांग है। अन्यथा वे अपने बयानों के कारण अपनी ही पार्टी और अपना वयक्तिगत नुकसान भी कर रहे हैं। वैसे भी एक पुरानी कहावत है कि “मुंह से निकली बात परायी हो जाती है”, जुबान से निकलने के बाद इस पर बोलने वाला का कोई नियंत्रण नहीं रहता। फिर दूसरे लोग इसकी व्याख्या और प्रचार प्रसार अपने ढंग से करते हैं।

ताजा मामला समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी से जुड़ा है। ये दो कार्यक्रमों में जातियों पर टिप्पणी करके फंस गए हैं। इनकी देशभर में न केवल आलोचना हो रही है, बल्कि मामला एफआईआर तक पहुंच गया है। इन्होंने मई महीने में ही पहले ब्राह्मण समाज पर प्रतिकूल टिप्पणी की, इसके एक सप्ताह बाद ही जाटों और खुद की जाति गुर्जरों पर प्रतिकूल टिप्पणी कर दी। दोनों टिप्पणियां न केवल अशोभनीय हैं बल्कि मानहानि कारक हैं और बगैर किसी संदर्भ की गई थीं। लेकिन विवाद गर्मा गया है। अब उनके पुतले जलाये जा रहे हैं। इन अनियंत्रित बयानों का असर समाजवादी पार्टी की राजनीति पर भी पडना अवश्यमभावी है, हालांकि अभी तक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व कोई संज्ञान नहीं लिया है। इस पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है।

भाटी ने पहली टिप्पणी 5 मई को दिल्ली में जवाहर भवन में एक पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में ब्राह्मणों पर की। यह पुस्तक दो लेखकों डा.रफ रफ शकील अंसारी और जावेद अनवर लिखित है। इसका विषय है-“जाति और साम्प्रयादिकता के विषाणु” । पुस्तक विमोचन समारोह में राजकुमार भाटी के अलावा कई अन्य प्रमुख वयक्ति मौजूद थे। इनमें वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष, अभय कुमार दूबे, प्रो. रतन लाल, शीबा असलम, डा. हिलाल अहमद प्रमुख थे।

यहां राजकुमार भाटी ने जातियों में मुहावरे और दोहे बाले जाने की प्रवृत्ति की जिक्र किया और एक ऐसा दोहा सुना दिया जो ब्राह्मण समाज के लिए अपमान जनक था। दोहा इस प्रकार है-“ब्राह्मण भला न वेश्या, इनमें भला न कोय। और कोई कोई वेश्या तो भली, ब्राह्मण भला न कोय”। कार्यक्रम में जब यह दोहा सुनाया गया तो उपस्थित श्रोताओं और मंचस्थ विशिष्ट अतिथियों ने जोरदार ठहाका भी लगाया। खास बात यह भी रही कि मंच पर बैठे अभय कुमार दुबे और आशुतोष भी मौन साधे रहे।

दूसरा प्रकरण जाटों और गूर्जरों पर टिप्पणी से जुडा है। यह भी एक कार्यक्रम में ही हुआ। यह कार्यक्रम चौधरी चरण सिंह और चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत की पुण्य तिथि मनाने के लिए 14 मई को अन्तराष्ट्रीय जाट महासभा द्वारा दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित किया गया था। इसमें भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत और हरियाणा के प्रमुख जाट नेता सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा भी मौजूद थे। यहां राजकुमार भाटी ने जाटों और गूर्जरों के बीच एक प्रथा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह तो सुना जाता है कि राजा महाराजाओं की कई-कई पत्नियां होती थीं, किन्तु एक पत्नी के कई-कई पति हों यह प्रथा जाटों और गूर्जरों में रही है। उन्होंने इसका संदर्भ महाभारत काल से जोडने की कोशिश की और बताया कि द्रोपदी के भी कई पति थे। यादव, जाट और गूर्जर महाभारत काल में एक ही जाति के थे। इस टिप्पणी से भी माहौल गर्मा गया। जाटों और गूर्जरों में भाटी के बयान से भारी नाराजगी है। उन्होंने इनके बयान को पूरी तरह से खारिज किया है और इसे समाज की महिलाओं का अपमान करने वाला बताया है। अब राजकुमार भाटी अपने दोनों बयानों के लिए सफाई दे रहे हैं। लेकिन, आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

राजकुमार भाटी की इस बयानबाजी से पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश की राजनीति गर्मायी हुई है। खासकर जाट समाज में बहुत नाराजगी है। क्योंकि राकेश टिकैत खुद उस मंच पर उपस्थित थे, जहां जाटों की महिलाओं पर अभद्र और अशोभनीय टिप्पणी की गई थी। उनसे पूछा जा रहा है कि उन्होंने उसी समय इस बात का प्रतिवाद क्यों नहीं किया।

ऐसी ही एक टिप्पणी गत लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के गुजरात के राजकोट प्रत्याशी और पूर्व केन्द्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने 22 मार्च 2024 को एक जनसभा में की थी। य़हां उन्होंने राजा महाराजाओं और क्षत्रियों की नारियों पर अभद्र टिप्पणी कर दी थी। इससे उनके खिलाफ भी भारी आक्रोश पैदा हुआ था। उन्हें भी माफी मांगनी पडी थी।

अतः आश्यकता इस बात की है कि नेताओं को अपनी वाणी पर नियंत्रण और संयम रखना चाहिए। खासकर जाति और धर्म के मामले में टिप्पण करते समय, अन्यथा वे अपने और अपने दल की उन्नति करने के बजाय अवनति के कारक ही बनेंगे।

May 17, 2026

हेग से प्रधानमंत्री का संदेश

Narendra Modi Prime Minister

सम्पादकीय 17.05.2026 by Sarvesh Kumar Singh, Editor, UP Web News

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी छह दिनी विदेश यात्रा के दूसरे दिन नीदरलैंड के हेग में भारतीय समुदाय के साथ संवाद किया। यहां उन्होंने विश्व परिदृश्य और आसन्न चुनौतियों को न केवल रेखांकित किया, बल्कि भारतवासियों को आगाह भी किया। उनकी बातों में स्पष्ट रूप से उन्नत भारत के भविष्य की लालसा और विकसित भारत का सपना समाया हुआ है। हेग का संदेश केवल भारत के लिए ही नहीं बल्कि समुची दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। आज जो ऊर्जा संकट खडा हुआ है उससे केवल भारत ही नहीं समूची दुनिया को प्रभावित होना है। इसका समाधान भी खोजना है और अपनी जरूरतों को भी पूरा करना है।

पीएम मोदी ने हेग में कहा कि यह दशक आपदाओं के लिए जाना जा रहा है। पहले कोराना का दंश, फिर युद्धों का सिलसिला इससे पूरी दुनिया प्रभावित हो रही है। श्री मोदी ने भारत की प्रगति की चर्चा करते हुए कहा कि यदि हम अभी नहीं चेते और उपायों को नहीं अपनाया गया तो कई दशक के प्रगति के प्रयासों पर पानी फिर जाएगा और दुनिया की एक बडी आबादी फिर से गरीबी की ओर लौट जाएगी। उनका इशारा साफ था। ईरान-अमेरिका के युद्ध ने जो गंभीर ऊर्जा संकट खडा किया है। उससे विश्व के सामने गतिशील विकास को बनाये रखना निश्चित रूप से मुश्किल हो रहा है।

विदेश यात्रा पर जाने से पहले प्रधानमंत्री ने हैदराबाद और दिल्ली के कार्यक्रमों में देशवासियों से संयमित ऊर्जा के उपभोग का आग्रह किया था। उन्होंने पेट्रोलियम उत्पादों का कम से कम उयोग करने के लिए कोराना काल जैसी व्यवस्थाएं अपनाने की अपील की थी। इसमें कारों का कम प्रयोग, वर्क फ्राम होम, डिजिटल माध्यमों से मीटिंगें। कार्यालयों में दो दिन का वर्क फ्राम होम, एक दिन नो वेहिकल डे मानने के साथ साथ, एक साल तक सोना नहीं खरीदने, किसानों से कम उर्वरकों का उपयोग करने की अपील भी शामिल है। इस मुहिम का व्यापक असर हुआ है। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पीएम की अपील के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी शुरु कर दी हैं।

प्रधानमंत्री का हेग का संदेश महत्वपूर्ण है। क्योंकि यह जहां भारत के स्पष्ट सपनों को उजागर करता है वहीं बाधाओं को रेखांकित करता है और समाधान भी बताता है। इस दौरे में प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड सरकार के साथ कई समझौते किये हैं। ये समझौते भारत के विकास में मील का पत्थर साबित होंगे।

May 14, 2026

सनातन के अपमान का दुस्साहस 

Editorial

Editorial 14.05.2026, Thursday,Time 07.34 PM, by Sarvesh Kumar Singh, Editor From Lucknow 

सनातन के अपमान का फिर दुस्साहस हुआ है। वहीं जहां सितंबर 2023 में हुआ था। वही उदयनिधि स्टालिन जिसने तब कहा था। सनातन डेंगू और मलेरिया है। इसे खत्म करना होगा। थोड़ा विरोध, हल्ला गुल्ला हुआ। मामला शांत हो गया। अब फिर सनातन पर हमला। वही व्यक्ति उदयनिधि जब तमिलनाडु विधान सभा में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) विधायक दल का नेता चुना जाता है, और नेता विरोधी दल बनता है, तो पहले भाषण में ही सनातन को खत्म करने की बात कहता है। वह कहता है सनातन समाज को बांटता है। इसलिए इसे समाप्त करना जरूरी है।

जब तमिलनाडु विधान सभा में सनातन के अपमान का दुस्साहस होता है, तो विरोध का कोई स्वर सुनाई नहीं देता। यहां तक कि मुख्यमंत्री टी जोसेफ विजय भी कोई प्रतिक्रिया नहीं देते। न ही प्रतिकार और न ही रोकने की कोई कोशिश। ऐसा लगता है कि तमिलनाडु विधानसभा सनातन विरोध का केंद्र बन गई है। दो बार उदयनिधि दुस्साहस कर चुके है। ये पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और द्रमुक संस्थापक के करुणानिधि के पौत्र हैं। इस परिवार ने दीर्घ काल तक तमिलनाडु में सरकार चलाई है। ईसाई मतावलंबी होने के बावजूद इस परिवार को तमिल हिंदुओं का समर्थन मिलता रहा है। लेकिन इस परिवार के आचार,व्यवहार और सोच में सहिष्णुता और सर्वधर्म समभाव का पूर्णतः अभाव है। अगर ऐसा नहीं होता तो एमके स्टालिन अपने बेटे को रोकते, टोकते और भारत की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत की रक्षा की कोशिश करते मगर उन्होंने ऐसा कोई प्रयास नहीं किया। न अब जब 11 मई को उनके पुत्र ने सनातन का अपमान किया और न ही वर्ष 2023 में जब सनातन को डेंगू कहा गया।

भारत के सांस्कृतिक विकास क्रम में तमिल संस्कृति का अनूठा और अनुपम योगदान है। तमिल भाषा विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। इस गौरव से संपूर्ण भारत गौरवान्वित है। तमिल संस्कृति के महत्व को देखते हुए ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में काशी-तमिल संगमम आयोजन किए। ये आयोजन उतर और दक्षिण की सनातन संस्कृति का मिलन ही नहीं। भारत की एकरूपता का संदेश है। लेकिन पीएम मोदी की इस भावना को समझने के लिए स्टालिन परिवार तैयार नहीं है।

आज आवश्यकता है कि सनातन संस्कृति पर बढ़ रहे आक्रमणों और नियोजित, प्रायोजित अपमान का संगठित रूप से लोकतांत्रिक मर्यादाओं में रहकर प्रतिकार किया जाए, अन्यथा ये दुस्साहस बढ़ता जाएगा।

May 13, 2026

सपा नेताओं की हिमाकत

Posted on 13.05.2026 Thursday, Time 21.07 PM, Editorial by Sarvesh Kumar Singh, SP Leader statements

समाजवादी पार्टी के नेता लगातार गैर जिम्मेदाराना और  विघटन पैदा करने वाले बयान देने की हिमाकत कर रहे हैं। सपा यूं तो खुद को लोहिया की विचारधारा और समाजवादी सिद्धान्तों का झंडावरदार कहते नहीं थकती किन्तु उसके नेताओं का कार्यों में बयानों में कहीं भी समाजवाद और लोहिया के विचार की झलक दिखायी नहीं देती। डा राममनोहर लोहिया जाति तोडने की बात करते थे किन्तु सपा नेता हर समया जातिवाद को बढ़ावा देने वाले बयान देते हैं और जातिवादी सोच से ग्रसित होकर ही राजनीति कर रहे हैं। इसके साथ ही वे पीडीए के नाम अन्य जातियों का अपमान कर रहे हैं। इस स्थिति से सपा का राष्ट्रीय नेतृत्व भी असहज तो है किन्तु वह कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

हाल का मामला दो घटनाओं का है। पहला समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी के उस बयान का है जिसमें उन्होंने ब्राह्मण समाज का घनघोर अपमान किया है। उन्होंने पांच मई को दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित राजीव फाउण्डेशन के पुस्तक विमोचन समारोह में अपना भाषण देते हुए ब्राह्मण समाज पर अपमानजनक टिप्पणी की। उन्होंने ब्राह्मणों के लिए बोला जाने वाला एक मुहावरा इस कार्यक्रम में सुनाया। इसमें ब्राह्मणों की तुलना वेश्या से की गई। उनके भाषण के अंश सोशल मीडिया में जारी होने के बाद और वीडियो वायरल होने से देशभर के ब्राह्मण समाज में आक्रोश फैल गया है। हालांकि उन्होंने ब्राह्मण समाज से माफी मांग ली है। किन्तु ब्राह्मण समाज में बहुत आक्रोश है। इसी मामले को लेकर मंगलवार 12 मई को उनके खिलाफ गाजियाबाद के कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज हो गई है।

दूसरा मामला महोबा का है जहां समाजवादी पार्टी के हमीरपुर-महोबा के सांसद अजेन्द्र सिंह लोधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी कर दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के अपमानजनक शब्द बोले यहां तक की उन्हें गाली भी दी। इस मामले में भी महोबा कोतवाली में सांसद अजेन्द्र सिंह लोधी के खिलाफ एफआईआर हो गई है। दोनों मामले जातीय वैमनस्य और अशिष्ट व्यवहार के हैं। खास बात यह कि ये दोनों घटनाएं ऐसे व्यक्तियों द्वारा अजाम दी गई हैं जो जिम्मेदार पदों पर एक सांसद हैं दूसरे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। इस पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं का यह व्यवहार आम है। ये किसी भी नेता या समाज पर कोई भी अभद्र टिप्पणी कर देते हैं।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दोनों घटनाओं के बाद सपा का राष्ट्रीय नेतृत्व मौन है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव या किसी अन्य नेता की तरफ से दोनों मामलों पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है। न तो इन नेताओं को कोई नसीहत दी गई है और न ही इसके लिए राष्ट्रीय नेतृत्व ने खेद व्यक्त किया है। ऐसा लगता है कि सपा के वरिष्ठ नेताओं ने ऐसी घटनाओं से आंखें मूंद कर उनके कृत्यों को मौन सहमति प्रदान की है। इस प्रवृत्ति के कारण ही सपा के नेता इस तरह की गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी करने की हिमाकत कर पा रहे हैं। लेकिन, इन जातीय बयानों और राजनीतिक अशिष्टता भरे बयानों को जनता देख रही है। वह समय पर बखूबी इन्हें जवाब देगी।

March 30, 2026

वेस्ट यूपी राज्य की मांग, कितना समर्थन

Editorial Posted on 30.03.2026, Time 06.26 AM , Monday, By Editor Sarvesh Kumar Singh 

West UP State

पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने की बात एक बार फिर से उठी है और यह बात उठाई है बसपा की अध्यक्ष बहन मायावती ने। तो यह प्रश्न एक बार फिर यह चर्चा में आ गया है कि क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव जो 2027 में होना है उसमें पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का मुद्दा अहम रूप से उठेगा और क्या यह एक खास मुद्दा बन पाएगा।

बहन मायावती ने एक ट्वीट किया है। वैसे यह ट्वीट तो जो कल प्रधानमंत्री का भाषण हुआ, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कल उद्घाटन हुआ । उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,  राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और तमाम नेता वहां मौजूद थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बहन मायावती ने ट्वीट में यह कहा है कि इस एयरपोर्ट का पूरा प्रोजेक्ट , नक्शा और इसकी भूमिका सब कुछ हमारी सरकार में बन चुकी थी। अगर केंद्र सरकार ने उस समय जो केंद्र में यूपीए की सरकार थी, कांग्रेस के नेतृत्व की सरकार थी, अगर उसने अड़ंगा ना लगाया होता और हमारा सहयोग किया होता, तो यह पहले ही बन चुका होता। यह जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट दरअसल बहुजन समाज पार्टी की कल्पना है और उसने ही इसकी भूमिका तैयार की थी। उसने ही निर्माण के लिए पहल भी की थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से आगरा एक्सप्रेसवे बना उसी तरह से यह भी अब तक बन चुका होता। इसके साथ ही उन्होंने समाजवादी पार्टी पर भी कटाक्ष किए। उन्होंने कह समाजवादी पार्टी की सरकार आई 2012 में और उसने हमारी सरकार द्वारा शुरू किए गए जन कल्याण के कार्य गरीबों के उत्थान के लिए कार्य और योजनाएं बंद करने का उन्हें पलटने का नाम बदलने का काम किया।  तमाम जो महापुरुषों के नाम पर हमने नगरों का नामकरण किया उन्हें बदल diya।

समाजवादी पार्टी सरकार ने दलित महापुरुषों के नाम हटा दिए गए और वह केवल बदले की भावना से ही काम करते रहे। इसके साथ ही मायावती ने जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही है वह सबसे आखिर में अपने ट्वीट में कही है।मायावती जी ने कहा है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य बनाने का मुद्दा भी अहम है और यह बनना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच की स्थापना की बात को भी बल दिया। यह दो मांगे बहुत लंबे समय से या कहा जाए तीन से चार दशक से चली आ रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की बेंच पश्चिम उत्तर प्रदेश में बने इसकी मांग तो लगभग 40 साल पुरानी है। लेकिन आज तक उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई है। बड़ा राज्य होने के कारण दो या तीन राज्य बनाने की बात भी बार-बार होती रही है। पश्चिम उत्तर प्रदेश अलग राज्य होना चाहिए। यह मांग कई मंचों से उठी लेकिन कभी भी प्रभावी रूप से इसकी ना तो पैरवी हो पाई और ना ही कोई दल इसे प्रभावी रूप से उठाने के लिए तैयार हो पाया। हां, यह बात जरूर है कि बीच-बीच में समय-समय पर हरित प्रदेश के नाम पर इस मांग को राष्ट्रीय लोकदल उठाता रहा। लेकिन अब राष्ट्रीय लोकदल भी इसके बारे में कोई बात नहीं करता।

मायावती जी की जब सरकार थी तो उन्होंने तीन बार पश्चिम उत्तर प्रदेश को अलग करके एक नया राज्य बनाने की और पूरे उत्तर प्रदेश के विभाजन की की मांग रखी थी। उन्होंने इसके लिए विधानसभा से प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार के पास भेजे भी थे। उन प्रस्तावों में पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ-साथ एक पूर्वांचल राज्य और बुंदेलखंड राज्य को अलग से बनाने की मांग की गई थी। लेकिन उस समय की केंद्र सरकारों ने इन प्रस्तावों पर भी कोई ध्यान नहीं दिया।

अब मायावती ने विधानसभा चुनाव से ऐन पहले इस मुद्दे को फिर से उठाकर अपनी मंशा स्पष्ट कर दी है और यह उम्मीद भी जगा दी है पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों में कि उनको एक नया राज्य मिल सकता है अगर बहुजन समाज पार्टी का साथ दें तो। इसके साथ ही बुंदेलखंड में भी यह मांग उठती रही है कि अलग राज्य बने। पूर्वांचल में भी इसकी मांग होती रही है।

भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी चर्चा होती है। भारतीय जनता पार्टी भी यूं तो अलग राज्य के मुद्दे पर सैद्धांतिक रूप से सहमत है। लेकिन उत्तर प्रदेश को अलग करने के लिए अभी तक कोई निर्णय नहीं ले सकी है। पश्चिम उत्तर प्रदेश अगर बनता है तो ये पश्चिम की जनता के लिए एक बड़ा ही लाभकारी और सुविधाजनक राज्य होगा क्योंकि उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की दूरी भी बहुत ज्यादा है। तमाम वादकारियों को इलाहाबाद पहुंचने में बहुत कष्ट होता है। तो यूं तो इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच संभवत नहीं मिलेगी जब तक कि राज्य नहीं बनेगा। जब राज्य बनेगा तो स्वाभाविक रूप से हर राज्य का एक हाई कोर्ट होता है और वह हाई कोर्ट फिर पश्चिम उत्तर प्रदेश को स्वाभाविक रूप से मिल जाएगा। अब देखना पड़ेगा कि कितना समर्थन होता है। क्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता मायावती जी की इस मांग के साथ खड़ी होती है और इस मांग के साथ ही इसको बल मिलता है।

यह बात भी स्पष्ट है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग करने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी कभी भी साथ नहीं आई है। समाजवादी पार्टी नीतिगत रूप से यह मानती है कि राज्य का विभाजन उचित नहीं है। यह बात मुलायम सिंह यादव जी ने भी स्पष्ट कर दी थी कि वह राज्य के विभाजन के पक्ष में नहीं है। देखना है कि राज्य का विभाजन होता है या नहीं होता है या यह चुनावी मुद्दा बनकर रह जाएगा और अगर चुनावी मुद्दा बनेगा भी तो यह कितना प्रभावी मुद्दा बनेगा आने वाले विधानसभा चुनाव में। लेकिन बहन मायावती ने एक बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मुद्दे पर बहस छेड़ दी  चर्चा छेड़ दी है। इसके लिए जरूरी है,  जनमानस तैयार हो। लोग खड़े हो और लोग इस मांग को प्रभावी रूप से उठाएं तब शायद राजनीतिक निर्णय हो सकता है।

सर्वेश कुमार सिंह

The demand for a separate state for western Uttar Pradesh has been raised once again by BSP president Mayawati. So the question has once again come up as to whether the issue of western Uttar Pradesh as a separate state will figure prominently in the Uttar Pradesh Assembly elections to be held in 2027 and whether it will be able to become a major issue.

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