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दिल्ली होटल अग्निकांड जिम्मेदार कौन

June 6, 2026

दिल्ली होटल अग्निकांड जिम्मेदार कौन

Editorial 06.06.2026 Time 09.51 AM, by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

संपादकीय

दिल्ली होटल अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया है। आखिर 21 लोगों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार कौन है? लापरवाही कहां कहा हुई, किस किस ने नियमों की अनदेखी की । नियमों का पालन कराने वाले क्या कर रहे थे। ये अनेक प्रश्न है। जांचे होंगी, रिपोर्टें आएंगी, लेकिन क्या इन पर सख्ती से अमल होगा। दिल्ली के अग्निकांड वाले होटल में नियमों का उल्लंघन साफ दिखाई दे रहा है। होटल निर्माण से लेकर, अग्नि सुरक्षा मानकों तक घनघोर लापरवाही हुई है। बिल्डिंग में सिर्फ एक निकास होना, एक लिफ्ट और एक ही जीना होना, पर्याप्त अग्नि सुरक्षा उपकरणों का न होना बताता है कि जिम्मेदार कितनी गहरी नींद में सोए थे। डीडीए और दिल्ली नगर निगम ने कैसे निर्माण और होटल चलाने का लाइसेंस दे दिया। फायर ब्रिगेड विभाग ने पहले से कोई चेकिंग अभियान क्यों नहीं चलाया। इस अग्निकांड में मृतकों की संख्या में 13 विदेशी भी शामिल है। एक परिवार के 8 सदस्यों का जिंदा जल जाना हृदय विदारक है। एक महिला का बच्चे को सीने से चिपका कर खिड़की से कूद जाना सिहरन पैदा करता है।

दिल्ली के मालवीय नगर में होटल फ्लोरिस स्टे में 3 जून को लगी आग साधारण नहीं है। ये आग वहां लगी है, जहां तीन सरकारें बैठी हैं। दिल्ली नगर निगम, दिल्ली प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार सभी का मुख्यालय भी दिल्ली ही है। सभी में भारतीय जनता पार्टी सत्तारूढ़ है। इसलिए लापरवाही का अंदाजा लगाइये किस हद तक है। दिल्ली में ये अकेला होटल नहीं है जिसमें नियमों की धज्जियां उड़ी है। कई हजार होटल ऐसी तंग गलियों में चल रहे हैं जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी नहीं पहुंच सकती। इनमें इमरजेंसी एग्जिट नहीं है। फायर फाइटिंग के पुख्ता इंतजाम नहीं है। हालांकि ये स्थिति कमोवेश पूरे देश के होटलों की है। बेसमेंट में एक साथ किचेन और डाइनिंग की व्यवस्था आम हो गई है जो बेहद खतरनाक है। दिल्ली ने कभी अग्निकांडों से सबक नहीं लिया , 1997 में ग्रीनपार्क का उपहार सिनेमा अग्नि कांड हुआ। इसमें 46 दर्शकों की जिंदा जलकर मृत्यु हुई थी। इसके बाद एक बिल्डिंग में आग से 27 लोग जल गए थे। बड़ी बड़ी बातें हुई, रिजल्ट वही ढाक के तीन पात। एक साथ फिर 21 की जिंदा जलने की घटना की पुनरावृत्ति।

होटल में आग के बाद गिरफ्तार मालिक का बयान देखिए, कहता है दिल्ली में सब चलता है। दिल्ली सरकार, प्रशासन, नगर निगम की घनघोर लापरवाही और कुछ हद तक मिलीभगत को उजागर करता है। चलता है मतलब, इसे चलाने में सब शामिल है। पुलिस ने इस मामले में गैर इरादत्तन हत्या का मुकदमा कायम किया है। इसे सीधे हत्या में तरमीम किया जाना चाहिए। मुकदमे में लापरवाह अफसरों, कर्मचारियों को भी शामिल किया जाए तो सिस्टम कुछ सचेत होगा।

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh