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अनुज चौधरी प्रकरण: सम्भल सीजेएम के आदेश पर high court ne lagai रोक

February 10, 2026

अनुज चौधरी प्रकरण: सम्भल सीजेएम के आदेश पर high court ne lagai रोक

Posted on 10.02.2026 Tuesday Time 07.35 PM, Prayagraj, Allahabad High court, Sambhal CJM Court, Anuj Choudhary 

प्रयागराज; संभल सीजेएम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक,तीन सप्ताह बाद हाईकोर्ट अब मामले में अगली सुनवाई करेगा। अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट ने सीजीएम की एफआईआर के आदेश पर रोक लगाई गई। एएसपी अनुज चौधरी और राज्य सरकार ने संभल सीजेएम कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सीजेएम कोर्ट के आदेश को नियम विरुद्ध बताते हुए रद्द करने की मांग हाईकोर्ट से की थी, हाईकोर्ट ने फिलहाल एफआईआर के आदेश पर रोक लगाई ।

प्रयागराज, 10 फरवरी। संभल सीजेएम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक,तीन सप्ताह बाद हाईकोर्ट अब मामले में अगली सुनवाई करेगा। अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट ने सीजीएम की एफआईआर के आदेश पर रोक लगाई गई। एएसपी अनुज चौधरी और राज्य सरकार ने संभल सीजेएम कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। सीजेएम कोर्ट के आदेश को नियम विरुद्ध बताते हुए रद्द करने की मांग हाईकोर्ट से की थी, हाईकोर्ट ने फिलहाल एफआईआर के आदेश पर रोक लगाई ।

January 16, 2026

माघ मेला के टेंट में आग से युवक की मृत्यु

प्रयागराज। माघ मेला क्षेत्र में गुरुवार देर रात सेक्टर-5 स्थित अन्नपूर्णा मार्ग पर बने एक टेंट में अचानक आग लग गई, जिसमें अंदर सो रहे एक युवक की झुलसकर मृत्यु हो गई।
मृतक की पहचान सराय इनायत थाना क्षेत्र के लीलापुर कलां निवासी मानस मिश्रा (22) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि मानस मिश्रा के रूप में हुई है। गुरुवार रात करीब 9:30 बजे टेंट में आग लगी, जिसने कुछ ही पलों में विकराल रूप ले लिया। उस समय मानस मिश्रा टेंट के अंदर सो रहे थे और आग की चपेट में आने से बाहर नहीं निकल सके। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया।
फायर कर्मियों ने गंभीर हालत में मानस मिश्रा को टेंट से बाहर निकाला। पुलिस की मदद से उन्हें तत्काल एसआरएन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें लगभग 90 प्रतिशत झुलसा हुआ बताया। इलाज के दौरान 2 से 3 घंटे बाद उनकी मौत हो गई।

मकर संक्रांति पर माघ मेला में एक करोड़ ने किया स्नान

Magh Mela Prayagraj, Makar Sankranti Snnan

माघ मेला में मकर संक्रांति पर स्नान के लिए उमड़ा जन समुदाय

प्रयागराज, 15 जनवरी 2026, मकर संक्रांति पर माघ मेला में स्नान के लिए भारी जनसमूह उमड़ा। एक अनुमान के अनुसार संगम में एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया।

हालांकि 13 जनवरी से ही श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचने लगे थे। 13 और 14 जनवरी को भी लाखों लोगों में आस्था की डुबकी लगाई। लेकिन इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी को घोषित होने के कारण इस अवसर पर भारी भीड़ उमड़ी।

प्रशासन ने मकर संक्रांति स्नान पर्व के लिए भागी सुरक्षा इंतजाम और व्यवस्थाएं की थीं। मेला और संगम क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश 12 जनवती की रात से ही प्रतिबंधित कर लिया गया था।

One crore devoties got Makar Sankranti Snnan at Magh Mela Prayagraj

January 13, 2026

प्रयागराज के संगम तट पर बसाई गई आधुनिक टेंट कॉलोनी

 

  • माननीय मुख्यमंत्री योगी जी के परिकल्पना के अनुसार तैयार की गई हैं टेंट सिटी – जयवीर सिंह

लखनऊ: 13 जनवरी, 2026, मकर संक्रांति सहित अन्य प्रमुख स्नान पर्व पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए संगम तट पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त टेंट सिटी बसाई गई है। संगम की पुण्य धारा में डुबकी लगाने देश-दुनिया से श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन हो रहा है। इसी क्रम में आगंतुकों को सुरक्षित और यादगार अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) द्वारा संगम तट की रेत पर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित टेंट कॉलोनी बसाई गई है, जो कल्पवासियों और पर्यटकों के लिए आस्था के साथ-साथ आकर्षण का नया केंद्र बनकर उभरी है। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।

उन्होंने बताया कि प्रयागराज के अरैल सेक्टर-7 में त्रिवेणी पुष्प से पहले विकसित टेंट कॉलोनी में कुल 50 अत्याधुनिक कॉटेज बनाए गए हैं, जिनकी ऑनलाइन बुकिंग यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट के माध्यम से की जा सकती है। टेंट कॉलोनी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें 15 हजार रुपए किराए वाला प्रीमियम, 11 हजार 500 रुपए का लग्जरी और 7 हजार 500 रुपए का डीलक्स कॉटेज शामिल है। यहां कुल 12 प्रीमियम, 8 लग्जरी और 30 डीलक्स टेंट बने हैं। जिनमें ठहरने वाले श्रद्धालुओं के लिए उसी शुल्क में सात्विक भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। टेंट कॉलोनी परिसर में यज्ञशालाएं बनाई गई हैं, जहां लगातार भजन-कीर्तन हो रहा है। सांस्कृतिक रंग देने के लिए कलाग्राम भी विकसित किया गया है, जहां स्थानीय शिल्प और लोककला को बढ़ावा दिया जा रहा है।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि माघ मेले में रोजगार और नवाचार को विशेष बढ़ावा मिला है, जहां संगम टेंट कॉलोनी में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदर्शनी के जरिए प्रयागराज की पारंपरिक मूंज कला के भी स्टॉल लगे हैं। यहां के कारीगरों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। माघ मेला 2026 न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहा है, बल्कि उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के लिए व्यापार का बड़ा मंच भी बन गया है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मूंज से बने डलिया, पेन स्टैंड, रोटी रखने के बर्तन, गमले और सजावटी सामान जैसे उत्पाद पसंद कर रहे हैं। नैनी क्षेत्र के महेवा इलाके की यह पारंपरिक कला, जिसे चांद जैसी कारीगर वर्षों से आगे बढ़ा रही हैं, अब आधुनिक रूप में सामने आकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना पा रही है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के विजन के अनुरूप माघ मेला केवल आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि पर्यटन, रोजगार और स्थानीय कला को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम बन रहा है। यूपीएसटीडीसी द्वारा विकसित संगम टेंट कॉलोनी इसका बेहतरीन उदाहरण है, जहां श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव मिल रहा है। उन्होंने कहा कि एक जिला एक उत्पाद के तहत मूंज कला जैसे पारंपरिक शिल्प को मंच देकर स्थानीय कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। योगी जी की सोच है कि प्रदेश का हर आयोजन रोजगार, नवाचार और संस्कृति से जुड़े, और माघ मेला 2026 इसी सोच को जमीन पर उतारता हुआ दिखाई दे रहा है।

January 10, 2026

महानता के लिए दिव्य गुणों को स्वयं में आत्मसात करने का सामर्थ्य आवश्यकः योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रयागराज में महान संत श्रीरामानन्दाचार्य के 726वेें प्राकट्य उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए

  • मुख्यमंत्री जगद्गुरु श्रीरामानन्दाचार्य के 726वें प्राकट्योत्सव समारोह में सम्मिलित हुए
  • जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी के प्राकट्य स्थल पर उनका स्मारक और
  • मंदिर बनना चाहिए, प्रदेश सरकार इस कार्य में पूरा सहयोग करेगी

लखनऊ,10 जनवरी, 2026  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई व्यक्ति अचानक महान नहीं बन जाता है। महानता के लिए दिव्य गुणों को स्वयं में आत्मसात करने का सामर्थ्य, दृढ़ संकल्प व दिव्य दृष्टि होना आवश्यक है। एक सामान्य मनुष्य की दृष्टि सीमित होती है। उसकी दुनिया उसके परिवार तक सीमित रहती है। लेकिन एक महामानव की दृष्टि ईश्वरीय गुणों से भरपूर, दिव्य तथा कल्याणमयी होती है। उनका भाव स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि परमार्थ के लिए होता है। यही कार्य इस धराधाम पर प्रकट होकर पूज्यपाद श्रीमद् जगद्गुरु रामानंदाचार्य भगवान ने किया था।

मुख्यमंत्री आज जनपद प्रयागराज में श्रीमद् जगद्गुरु श्री रामानन्दाचार्य भगवान के 726वें प्राकट्योत्सव समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 726 वर्ष पूर्व जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी जब इस धरा पर जन्में थे, तब उस कालखण्ड में विदेशी हमले हो रहे थे। आक्रमणकारी सनातन धर्म को रौंदना चाहते थे। इसके लिए विदेशी आक्रान्ताओं ने साजिश रची थी। सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने की साजिशें हो रही थीं। जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी ने उस समय सबसे पहले मत और सम्प्रदायों को एकजुट करने का आह्वान करते हुए कहा था कि ‘सर्वे प्रपत्तेरधिकारिणो मताः’ यानी सभी जन ईश्वर के चरणों में शरणागति के अधिकारी हैं। मत और सम्प्रदाय के आधार पर किसी को मत बांटो।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी ने अलग-अलग जाति के द्वादश शिष्य बनाए। इन शिष्यों में श्री अनन्ताचार्य जी महाराज, श्री कबीरदास जी महाराज, सतगुरु रविदास जी महाराज, सतगुरु पीपाजी महाराज, श्री सुरसरानन्द जी महाराज, स्वामी सुखानन्द जी महाराज, स्वामी नरहर्यानन्द जी महाराज, स्वामी भावानन्द जी महाराज, श्री धन्ना जी, श्री सेन जी, श्री गालवानन्द जी, श्री योगानन्द जी सम्मिलित हैं। इन सभी शिष्यों में समाज को जोड़ने का कार्य किया। रामानन्द परम्परा से निकली हुई अलग-अलग धाराएं आज भी समाज को जोड़ने का अद्भुत कार्य कर रही हैं। यह अद्भुत संयोग है कि यह शिष्य सगुण व निर्गुण दोनों उपासना विधियों से जुड़े हुए हैं।

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि रविदासी परम्परा से जुड़े सन्त सात्विक भाव से कुटिया बनाकर तथा केवल कंठी धारण कर प्रभु की उपासना के लिए स्वयं को समर्पित करते हैं। कबीरदासी परम्परा से जुड़े सन्तों ने जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी की परम्परा को मजबूती के साथ आगे बढ़ाया। जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी ने कहा था कि ‘जाति-पांति पूछे नहिं कोई, हरि को भजे सो हरि का होई’। यह मंत्र समाज को जोड़ने वाला है। हमने सतुआ बाबा तथा अन्य सन्तों से कहा है कि दारागंज में जिस स्थल पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य जी का प्राकट्य हुआ था वहां उनका स्मारक और मंदिर बनना चाहिए। प्रदेश सरकार इस कार्य में पूरा सहयोग करेगी।

उन्होने ने कहा कि प्रयागराज आज फिर उद्घोष कर रहा है कि जाति, मत और सम्प्रदाय के आधार पर विभाजन हमारे लिए उसी प्रकार से सर्वनाश का कारण बन जाएगा जैसे बांग्लादेश में देख रहे हैं। सेकुलरिज्म का ठेका लेने वाले लोग, जिनकी दुकानें सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश पर चलती है, बांग्लादेश की घटना पर उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा है। कोई कैंडल मार्च नहीं निकाला जा रहा है। यह घटना हम सभी के लिए चेतावनी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमारा सन्त समाज, समाज को जोड़ने के लिए पूरी युक्ति करता है। जब सन्त समाज एक मंच पर आकर उद्घोष करता है तो उसके अच्छे परिणाम दिखायी देते हैं। उदाहरण के लिए अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण पूज्य सन्तों की उसी साधना और एकता का परिणाम है, जिसे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने मूर्त रूप देकर भारत की परम्परा को गौरवान्वित किया है। अब तक देश में कई प्रधानमंत्री हुए सभी ने देश के विकास में अपना योगदान दिया। लेकिन भारत की मूल आत्मा हो सम्मान दिलाने का कार्य के केवल प्रधानमंत्री जी ने ही किया। मोदी जी पहले प्रधानमंत्री हैं जो श्रीराम जन्मभूमि में दर्शन करने गए थे। वह श्रीराम मंदिर के शिलान्यास तथा श्रीरामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में सम्मिलित हुए। प्रधानमंत्री जी सनातन धर्म की ध्वजा पताका के मंदिर शिखर पर आरोहण के समारोह में स्वयं भागीदार बने।
मुख्यमंत्री जी ने कहा प्रधानमंत्री जी ने नमामि गंगे परियोजना के माध्यम से माँ गंगा के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए उन्हें स्वच्छ व निर्मल बनाने का कार्य किया है। इस अवसर पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी महाराज, जगद्गुरु विदेहवल्लभ देवाचार्य, पूज्य जगद्गुरु विष्णुस्वामी सम्प्रदायाचार्य, स्वामी सन्तोषाचार्य (सतुआ बाबा) जी महाराज, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज, दिगम्बर अखाड़ा के श्री महंत श्री वैष्णोदास जी महाराज, निर्मोही अखाड़ा के श्री महंत राजेंद्रदास जी महाराज, महंत मोहनदास जी महाराज, महामण्डलेश्वर जनार्दन दास जी महाराज, बाघम्बरी पीठ के पीठाधीश्वर श्री महंत बलवीर गिरी जी महाराज, बड़ा भक्तमाल अयोध्या के पूज्य महंत श्री अवधेश दास जी महाराज, रसिक पीठ के श्री महंत जन्मेजय शरण जी महाराज सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

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