Posted on 27.04.2026 Time 09.12 Tuesday, Lucknow, UP Information Department, RIJWA
लखनऊ में मोबाइल फोन सूचना निदेशक के नाम लिया गया था, सूचना विभाग का रहा है स्वर्णिम इतिहास
लखनऊ, 27 अप्रैल 2026, । मोबाइल फोन की आमद1995 में हुई थी और लखनऊ में पहला मोबाइल फोन कनेक्शन जुलाई 1996 में सूचना निदेशक के नाम लिया गया। इसी तरह इंटरनेट का मामला है। इंटरनेट का लखनऊ में पहला कनेक्शन सूचना विभाग के नाम लिया गया। सूचना विभाग सरकार की आँख और कान हुआ करता था, अब भी है, तकनीक और लेखनी दोनों के सम्मिश्रण से सूचना विभाग आज भी अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखे हुए है।
यूपी के तीन बार सूचना निदेशक रहे वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी रोहित नंदन ने यह बातें आज सूचना भवन आडिटोरियम में आयोजित सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के पूर्व अधिकारियों के हाल ही में बनाए गए संगठन “रिटायर्ड इन्फ़ॉर्मेशन जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन” के पहले सम्मान समारोह को सम्बोधित करते हुए कहीं।इस अवसर पर पूर्व सूचना निदेशक, सुधेश ओझा, अजय उपाध्याय और पूर्व अपर निदेशक रहे डॉक्टर अनिल पाठक भी मौजूद रहे।
रोहित नंदन एकमात्र अधिकारी हैं जो सूचना निदेशक पद पर तीन बार तैनात हुए हालाँकि वह इस पद पर पहले आना नहीं चाहते थे, लेकिन आज वह जब याद कर रहे थे कि कैसे उन्होंने उस समय इस पद पर सबसे लम्बे कार्यकाल का निर्वहन किया, तो बताया कि इस पद की गरिमा इसके वर्चस्व से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि सूचना विभाग के अधिकारी जो काम करते हैं उससे सरकार की छवि बनती है और सरकार की छवि आम आदमी के दिमाग़ में बेहतर से बेहतर बनाना आसान काम नहीं होता। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन हो या इंटरनेट, सबसे पहले सूचना विभाग के पास आता है तो इससे समझा जा सकता है कि यह विभाग कितना महत्वपूर्ण है।
चुनाव आयुक्त रहे पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्री अनूप चंद्र पांडेय भी दो बार यूपी के सूचना निदेशक पद पर रहे। उन्होंने कहा कि उनकी बहुत बड़े बड़े पदों पर तैनाती हुई। यूपी के मुख्य सचिव से लेकर चुनाव आयुक्त तक, लेकिन सूचना निदेशक के कार्यकाल को वह सबसे ज्यादा याद करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका वो कार्यकाल अविस्मरणीय है। श्री पांडेय ने बताया कि कैसे एक बार बजट पेश किए जाने के समय प्रेस विज्ञप्ति में जो लिखा गया था वह बजट में था ही नहीं। विधानसभा में इस पर बहस हो गई तो सरकार ने सूचना विभाग के प्रेस नोट की बात स्वीकार कर ली। उन्होंने कहा कि सूचना निदेशक का पद सरकारी सिस्टम में शक्ति का केंद्र माना जाता है और सूचना निदेशक ही वह अधिकारी होता है जिसकी पहुंच मुख्यमंत्री तक सीधे होती है और कभी भी किसी भी समय वह मुख्यमंत्री से सीधे बात कर सकता है। श्री पांडेय ने कहा कि अखबारों की स्क्रुटनी भी इस विभाग का एक विशेष कार्य रहा है और सूचना विभाग के अधिकारियों की बौद्धिक क्षमता का सरकार के पक्ष में बेहतर इस्तेमाल का लंबा इतिहास रहा है।

सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति राघवेंद्र कुमार ने इस अवसर पर कहा कि सूचना विभाग के कार्य वास्तव में बड़े महत्वपूर्ण और सराहनीय रहे हैं। उन्होंने बताया कि किस तरह न्यायालयों के कार्यों का भी सूचना विभाग ने प्रचार कर आम आदमी के मन में न्यायपालिका के प्रति विश्वास को पुख्ता करने का कार्य किया है। इस अवसर पर रिटायर्ड इन्फ़ॉर्मेशन जर्नलिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन की पत्रिका “रिज़वा” का भी लोकार्पण किया गया और रोहित नंदन को अशोक प्रियदर्शी स्मृति सूचना सम्मान और अनूप चन्द्र पांडेय को उमेश कुमार सिंह चौहान स्मृति सम्मान से नवाज़ा गया। इस अवसर पर सूचना विभाग के पूर्व अधिकारियों में श्री विजय राय, राजगोपाल सिंह वर्मा, हामिद अली खां, ज्ञानवती, दिनेश सहगल, अशोक कुमार शर्मा, अशोक बनर्जी, अमजद हुसैन सहित ग्यारह लोगों को भी सम्मानित किया गया।
मंदिर से हटाए महंत राम गिरि ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया
-बनारस पंचदशनाम,हरिद्वार जूना अखाड़ा व मंदिर में नियुक्त महाकाल गिरि और हितेश्वर गिरि जी महाराज को प्रतिवादी
सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में 7 मई को सुनवाई
Post on 27.4.26
Monday Moradabad
Rajesh Bhatia
मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)।
मुरादाबाद के प्राचीन मंदिर श्री माता मंदिर और श्रीसिद्ध पीठ मंदिर का विवाद अब अदालत पहुंच गया है। मंदिर से हटाए महंत सज्जन गिरि और राम गिरि महाराज ने कोर्ट की शरण ली है।सोमवार को महंत राम गिरि महाराज की ओर से कोर्ट में जूना अखाड़े के फैसले को चुनौती दी गई है।सिविल जज सीनियर डिवीजन में वाद दायर किया गया है।अदालत में मामले की अगली सुनवाई 7 मई को होगी।
मुरादाबाद में प्रसिद्ध लाल बाग स्थित श्रीकाली माता मंदिर और श्रीसिद्ध पीठ मंदिर के दोनों महंतों को पिछले दिनों पद से हटा दिया गया। श्रीपंच पंचनामा
जूना अखाड़े ने महंत सज्जन गिरि और राम गिरि को जनता की शिकायतों के बाद प्रयागराज में स्थानांतरण कर दिया। उनके स्थान पर मंदिर के नए पुजारी और व्यवस्थापकों की नियुक्ति की गई।
मुरादाबाद में मंदिर प्रकरण में अब नया मोड़ आया है। महंत रामगिरी कीओर से जूना अखाड़े के फैसले को चुनौती दी गई है।महंत राम गिरि सोमवार को कचहरी पहुंचे और अदालत में वाद दायर किया।महंत राम गिरि के अधिवक्ता राकेश जौहरी का कहना है कि वाद में तीन बिंदुओं को लेकर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा बड़ा हनुमान घाट काशी, बनारस केमहंत सभापति मोहन भारती और हरिद्वार में जूना अखाड़ा के महंत हरि गिरी के अलावा काली मंदिर के महंत महाकाल गिरि महाराज व महंत हितेश्वर गिरी जी महाराज के खिलाफ वाद दायर किया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश जौहरी के अनुसार दायर वाद में कहा गया कि हरिद्वार में पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महंत हरि गिरि की ओर से काली माता मंदिर के महंत रामगिरी को हटाए जाने का पत्र 8 अप्रैल का दर्शाया गया है।वह कथित तौर पर फर्जी और दुर्भावना से प्रेरित है। सोशल मीडिया पर जारी जिस पत्र में जिन दो महंत महाकाल गिरी व महंत हितेश्वर गिरी की नियुक्ति काली माता मंदिर लालबाग मुरादाबाद में बताई गई। वह गैरकानूनी है।उसका
प्रभाव महंत रामगिरी पर नहीं पड़ता। वाद में कहा कि श्री काली माता मंदिर व श्रीसिद्ध पीठ नौदेवी चार सौ साल पुराना मठ मंदिर है।इसे नागा स्वामी श्रीमिश्री गिरिराज जी ने स्थापित किया। लिहाजा मठ में गुरु – शिष्य की परंपरा है। परंपरा के आधार पर ही महंत चुने जाते।
यानी गुरु के बाद शिष्य ही उत्तराधिकारी के रूप में नियुक्त किया जाएगा। परिवार से बाहर का कोई भी साधु मंहत के रूप में कार्य नहीं कर सकता।
यहीं नहीं श्रीकाली माता मंदिर पंचदशनाम जूना अखाड़ा बड़ा हनुमान घाट काशी, बनारस से
संबद्ध है। बनारस जूना अखाड़े ने महंत की नियुक्तियों के बदलाव में कोई आदेश नहीं दिए। न ही ऐसी कोई महासभा हुई है। अधिवक्ता का कहना है कि वाद के बाद अदालत में 7 मई को मामले में सुनवाई होगी
*यह हुआ घटनाक्रम*
दस अप्रैल की शाम को मंदिर पहुंची जूना अखाड़े की टीम ने महंत हटाकर नए व्यवस्थापक नियुक्त कर दिए।जूना अखाड़े के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत हरि गिरि एवं जूना अखाड़े के प्रवक्ता नारायण गिरि ने जानकारी दी कि काली माता मंदिर के महंत सज्जन गिरि एवं सिद्धपीठ नौ देवी काली माता मंदिर के महंत राम गिरि के खिलाफ काफी समय से शिकायतें मिल रही थीं। नोटिस दिया गया। पर सुधार नहीं हुआ।अखाड़ा कार्यकारिणी ने सज्जन गिरि का स्थानांतरण प्रयागराज स्थित दशाश्वमेध घाट और राम गिरि का स्थानांतरण भी प्रयागराज स्थित दशाश्वमेध मंदिर किया है। उनकी जगह काली माता मंदिर में महंत महाकाल गिरि को प्रबंधक एवं हितेश्वर गिरि महाराज को सहायक प्रबंधक बनाया गया है। महंत वशिष्ठ गिरि एवं इच्छा गिरि महाराज को मुख्य पुजारी बनाया गया है।
मंदिरों में नए महंत की नियुक्ति को लेकर जिला प्रशासन सतर्क रहा। तीन दिन तक मंदिर क्षेत्र पुलिस छावनी बना रहा। हालांकि यहां से स्थानांतरित महंत प्रयागराज नहीं पहुंचे।