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सिविल चिकित्सालय में पहली बार गंभीर न्यूरोसर्जरी सफलतापूर्वक प्रारंभ

August 11, 2026

सिविल चिकित्सालय में पहली बार गंभीर न्यूरोसर्जरी सफलतापूर्वक प्रारंभ

लखनऊ, 10 अगस्त 2026 डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) चिकित्सालय, लखनऊ में न्यूरोसर्जन की तैनाती के बाद पहली बार गंभीर न्यूरोसर्जरी का सफलतापूर्वक शुभारंभ हुआ। चिकित्सालय में न्यूरोसर्जरी की यह उपलब्धि गंभीर एवं जटिल रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

चिकित्सालय के निदेशक एवं प्रमुख अधीक्षक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने सफल शल्यक्रिया के लिए पूरी शल्य टीम को बधाई देते हुए कहा कि सिविल चिकित्सालय पीड़ित मानवता की सेवा के लिए पूरी तरह तत्पर है। उन्होंने कहा कि सरकारी चिकित्सालय में इस प्रकार की जटिल न्यूरोसर्जरी का सफल होना मरीजों को बेहतर एवं सुलभ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

रीढ़ की हड्डी में टीबी के कारण स्पाइनल कॉर्ड पर था दबाव

जनपद सिद्धार्थनगर के मधुकरपुर गांव निवासी विनय तिवारी (37 वर्ष) पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से कमर में गंभीर दर्द से पीड़ित थे। मरीज को टीबी की बीमारी भी थी। लगातार समस्या बने रहने पर उन्होंने सिविल चिकित्सालय में न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी से परामर्श लिया।

मरीज की जांच एवं MRI में रीढ़ की हड्डी के L3 vertebra में TB infection के कारण स्पाइनल कॉर्ड/न्यूरल संरचनाओं पर गंभीर दबाव पाया गया। इसके कारण मरीज के बाएं पैर की जांघ एवं घुटने के नीचे की मांसपेशियों की ताकत काफी कम हो रही थी। चिकित्सकों के अनुसार, यदि समय रहते उचित उपचार नहीं किया जाता तो मरीज के दोनों पैरों में स्थायी कमजोरी अथवा पैरालिसिस का गंभीर खतरा हो सकता था।

डॉ. विनोद कुमार तिवारी के अनुसार, ऐसी स्थिति में शल्यक्रिया अत्यंत सावधानी एवं विशेषज्ञता के साथ करना आवश्यक होता है, क्योंकि स्पाइनल कॉर्ड एवं संबंधित न्यूरल संरचनाओं को किसी भी प्रकार की अतिरिक्त क्षति होने पर होने वाली न्यूरोलॉजिकल कमजोरी स्थायी भी हो सकती है।

टाइटेनियम स्क्रू एवं रॉड से किया गया फिक्सेशन

मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए न्यूरोसर्जन डॉ. विनोद कुमार तिवारी के नेतृत्व में शल्यक्रिया की तैयारी की गई। अनुभवी एनेस्थीसिया टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया गया। शल्यक्रिया के दौरान L2-L4 spinal fixation करते हुए Titanium screws एवं rods का उपयोग किया गया।

ऑपरेशन लगभग दो घंटे चला और इसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

डॉ. तिवारी ने बताया कि इसी प्रकार की जटिल शल्यक्रिया निजी क्षेत्र में कराने पर लगभग 3 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है, जो सामान्य परिवारों के लिए वहन करना कठिन होता है। सिविल चिकित्सालय में यह उपचार उपलब्ध होने से मरीजों को अत्यंत महत्वपूर्ण राहत मिलेगी।

ऑपरेशन के बाद मरीज के पैरों में ताकत में सुधार

ऑपरेशन के बाद मरीज विनय तिवारी की स्थिति संतोषजनक है। वर्तमान में उनका उपचार सिविल चिकित्सालय के न्यूरोसर्जरी वार्ड में जारी है। चिकित्सकों के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज के पैरों में ताकत आनी शुरू हो गई है तथा वह दोनों पैरों को चला पा रहा है।

मरीज की पत्नी श्रीमती सोनी तिवारी ने समय पर उपचार एवं सफल शल्यक्रिया के लिए सिविल चिकित्सालय के चिकित्सकों एवं पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

एनेस्थीसिया एवं नर्सिंग टीम का महत्वपूर्ण योगदान

सफल शल्यक्रिया में एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में डॉ. राजेश, डॉ. कासिम की अनुभवी टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके साथ ही सिस्टर पूजा एवं सिस्टर किरण ने भी शल्यक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी.सी. पांडे एवं अधीक्षक डॉ. शिवराज सिंह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि सिविल चिकित्सालय में गंभीर एवं जटिल रोगों का उपचार उपलब्ध होना मरीजों के लिए बड़ी राहत है।

निदेशक डॉ. जी.पी. गुप्ता ने कहा कि रीढ़ की हड्डी की टीबी जैसी गंभीर बीमारी में समय पर जांच एवं उपचार अत्यंत आवश्यक है। उपचार में देरी होने पर न्यूरोलॉजिकल कमजोरी बढ़ सकती है और दोनों पैरों में पैरालिसिस का खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने चिकित्सालय की पूरी टीम को इस चुनौतीपूर्ण शल्यक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न करने के लिए बधाई दी।

17 अगस्त को श्री कोतवालेश्वर महादेव की नगर भ्रमण यात्रा

लखनऊ। चौक स्थित श्री कोतवालेश्वर महादेव सावन के तीसरे सोमवार 17 अगस्त को शाम 4 बजे चांदी की पालकी में बैठकर नगर का भ्रमण यात्रा करेंगे। यह जानकारी मंदिर में आयोजित प्रेस वार्ता में देते हुए श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री विशाल गौड़ ने देते हुए बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी कोतवालेश्वर महादेव यात्रा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। महंत ने बताया मंदिर से निकलते ही श्री कोतवालेश्वर महादेव जी को लखनऊ प्रशासन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया जाएगा यात्रा चौक कोतवाली स्थिति श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर चौक चौराहा, खुन-खुन जी रोड कोनेश्वर मंदिर में हरिहर का दिव्य एव अद्भुत मिलन होगा। तत्पश्चात यात्रा कोणेश्वर चौराहा घूम कर, चौक चौराहा, कंचन मार्केट, चरक चौराहा, कमला नेहरू मार्ग होते हुए, श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर में संपन्न होगी,वह विशेष पूजन किया जाएगा। श्री कोतवालेश्वर महादेव मंदिर आकर प्रसाद आरती और वितरण से सम्पन्न होगी। यात्रा में यमराज भूत प्रेत गंधर्व रंगोलिया लखनऊ बनारस की झांकियां रथ ब्रास बैंड प्रशासनिक बैंड होंगे। सभी महिलाएं और पुरुष पीले वस्त्र धारण करेंगे। इस अवसर पर शासन प्रशासन के समस्त अधिकारी, उपमुख्यमंत्री मंत्री, विधायक भक्त और नगर वासी भारी संख्या मे उपस्थित रहेंगे।

August 10, 2026

क्रान्तिकारियों का उद्देश्य गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर, भारत को स्वतंत्र कराना था : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ पर
काकोरी शहीद स्मारक में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए
लखनऊ : 09 अगस्त, 2026  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि आज काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं पावन तिथि है। 09 अगस्त, 1925 को भारत माता के महान सपूतों ने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी थी कि भारत की धरती गुलामी को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। महान क्रान्तिकारियों ने सन् 1857 के प्रथम स्वातंत्र्य समर से भारत छोड़ो आन्दोलन तक आजादी की लड़ाई के लिए कार्यक्रमों की लम्बी श्रृंखला खड़ी की थी। मुख्यमंत्री जी ने क्रान्तिकारियों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृतियों को नमन करते हुए काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े हुए सभी महानायकों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री जी आज यहाँ काकोरी शहीद स्मारक में काकोरी ट्रेन एक्शन की 101वीं वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने काकोरी शहीद स्मारक में स्थित शहीदों की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री जी ने वन्दे मातरम् तथा काकोरी के शहीदों पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री जी ने काकोरी ट्रेन एक्शन पर आधारित चित्र एवं अभिलेख प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने शहीद स्मारक प्रांगण में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत पौधरोपण किया तथा फोटो बूथ पर सेल्फी ली। कार्यक्रम के दौरान भारतेन्दु नाट्य अकादमी के कलाकारों ने नाट्य प्रस्तुति दी।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 09 अगस्त, 1925 को काकोरी में पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खाँ, चन्द्रशेखर आजाद, राजेन्द्र प्रसाद लाहिड़ी जैसे महान क्रान्तिकारियों ने उस खजाने को अपने कब्जे में लेने का कार्य किया, जिस गाढ़ी कमाई को अंग्रेजों ने हड़प लिया था। जिन क्रान्तिकारियों ने अपना पूरा जीवन भारत माता के लिए समर्पित कर दिया था, उनमें काशी में जन्में श्री शचीन्द्रनाथ बख्शी तथा श्री मनमोहननाथ गुप्त को आजीवन कारावास की सजा हुई। उनकी जागीर ब्रिटिश शासन ने जब्त कर ली थी। पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खाँ और राजेन्द्र प्रसाद लाहिड़ी, इन सभी महान क्रान्तिकारियों को क्रमशः गोरखपुर, प्रयागराज, फैजाबाद तथा गोण्डा में फांसी दी गई।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद ने कहा था कि ‘आजाद हमेशा आजाद रहेगा।’ वह अंतिम दम तक वे अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते प्रयागराज की धरती पर शहादत को प्राप्त हुए। क्रान्तिकारियों का उद्देश्य गुलामी की बेड़ियों को तोड़कर, भारत को स्वतंत्र कराना था। काकोरी में घटित इस घटना को ब्रिटिश शासन ने डकैती कहा था। दुर्भाग्य से स्वतंत्र भारत में भी जिन लोगों के हाथों में सत्ता आयी, उन्होंने भी काकोरी डकैती काण्ड के नाम पर इस घटना के क्रान्तिकारियों को अपमानित करने का काम किया था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारत ऐसे ही गुलाम नहीं हुआ। भारत की गुलामी के कारण हमारी आपसी फूट व षड्यंत्र थे। आज भारत को कमजोर करने वाली ताकतें जाति, क्षेत्र, भाषा के नाम पर लगातार फूट डालने का कार्य कर रही हैं। इन राष्ट्र विरोधी ताकतों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जिन लोगों ने आपको अपने क्रांतिकारियों व नायकों से दूर रखा, उन्होंने भारत की युवा पीढ़ी के साथ सबसे बड़ा अन्याय किया। नायकों पर गौरव की अनुभूति का अवसर न देना युवा पीढ़ी को आदर्श, गौरव और प्रेरणा से विमुख करने जैसा है। आजादी के बाद जिन लोगों ने सत्ता सम्भाली, उन लोगों ने क्रान्तिकारियों को अपमानित करने का पाप किया। काकोरी के शहीदों के अलावा चन्द्रशेखर आजाद, वीर सावरकर, भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, रानी लक्ष्मीबाई, वीरांगना ऊदादेवी पासी, अवन्तीबाई, झलकारीबाई के नाम पर कोई स्मारक न बने, लोग इनका नाम भी न जानने पाएं, इसलिए इन क्रान्तिकारियों के नाम पर संस्थाओं का नाम नहीं रखा गया। आजादी के बाद भी इसके लिए लगातार साजिशें की गईं।
मुख्यमंत्री जी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने आजादी के नायकों को सम्मान देने का कार्य किया। बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर से जुड़े पंच तीर्थ, वीर सावरकर, रामप्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खाँ के स्मारकों से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया गया। काकोरी की घटना को काकोरी ट्रेन एक्शन नाम देकर क्रान्तिकारियों को सम्मान दिया। इन क्रान्तिकारियों के नाम पर अब डाक टिकट जारी हो रहे और संस्थाओं के नाम रखे जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने जनता का आह्वान किया कि हम सभी क्रान्तिकारियों को खोजें। हमारे गाँव, क्षेत्र, जनपद आदि में अनेक गुमनाम नायक होंगे, जिन्होंने ‘तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें’ के भाव के साथ आजादी के लिए सर्वस्व समर्पित किया। आजादी के बाद सत्तालोलुप लोगों ने अपने वैभव को देखा। क्रान्तिकारियों को भुला दिया गया, उन्हें पाठ्यक्रमों में स्थान नहीं दिया गया। देश, समाज के खिलाफ षड्यंत्र हुआ और फिर से बाँटने की साजिश प्रारम्भ कर दी गई। मुख्यमंत्री जी ने अपील की कि क्रान्तिकारियों तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों से जुड़ी बिखरी सामग्री को एकत्र करें। उनसे जुड़े स्मारकों की मरम्मत-सौन्दर्यीकरण से जुड़ें और पुष्पांजलि देकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करें।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि क्रान्तिकारियों के लिए देश की आजादी की लड़ाई सर्वोपरि थी। उनकी स्मृति को जीवन्त बनाए रखने के लिए काकोरी में शताब्दी महोत्सव का आयोजन किया गया। एक वर्ष में क्रान्तिकारियों की स्मृतियों में अनेक कार्यक्रम किए गए। काकोरी ट्रेन एक्शन से जुड़े परिवारों की वर्तमान पीढ़ी और देश की सुरक्षा के लिए बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के परिजनों को भी सम्मान दिया गया है।
मुख्यमंत्री जी ने आह्वान किया कि विकसित व आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना तब साकार होगी, जब सभी के मन में राष्ट्र सर्वोपरि का भाव होगा। अपनी मातृभूमि, भाषा, स्वदेशी उत्पादों को लेकर लोगों को जागरूक करें। 15 अगस्त को स्वाधीनता दिवस है। इस दौरान हर घर में तिरंगा फहराना चाहिए और प्रत्येक संस्था में वन्दे मातरम् का गान होना चाहिए।
उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों और सेनानियों के संघर्ष और बलिदान के कारण ही देश अंग्रेजों की पराधीनता से मुक्त हुआ है। 09 अगस्त सम्पूर्ण क्रान्ति की शुरुआत का दिन है। अनेक बलिदानों की श्रृंखला इसी दिन से प्रारम्भ हुई।
उप मुख्यमंत्री श्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि आजादी के लिए सर्व समाज के लोगों ने बलिदान दिया। काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस के इस भव्य एवं गरिमामय समारोह में उपस्थित सभी लोगों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के त्याग का स्मरण करना चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने अपनी जान की बाजी लगाकर देश को आजादी दिलाई। प्रत्येक बच्चे और विद्यार्थी को यहां से यह प्रण लेकर जाना चाहिए कि जिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूमकर देश को आजादी दिलाई, उनके बलिदान को हमेशा याद रखा जाए।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह ने कहा कि काकोरी की यह वही पवित्र भूमि है, जहाँ अमर बलिदानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया था। काकोरी ट्रेन एक्शन में देश के सपूतों ने भारत को अंग्रेजों की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया। नई पीढ़ी तक राष्ट्रीय गौरव और महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का संदेश पहुंचाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रतिवर्ष 09 अगस्त को इस पावन धरती पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को सम्मान देने का कार्य किया जाता है।
इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण, शहीदों के परिजन, छात्र-छात्राएँ सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

August 9, 2026

सावन की मल्हार पर झूमा आमोद आश्रम, “झूलैं राम जी हिंडोरा” कार्यशाला का समापन

अवधी लोकगीतों की सुरमयी यात्रा संपन्न, महिलाओं ने बांधा समां*

*लोकसंस्कृति के संरक्षण की मिसाल बनी सावनी सुर कार्यशाला*

लखनऊ, 9 अगस्त। राजधानी के गोमती नगर स्थित संस्था आमोद आश्रम द्वारा आयोजित सावनी सुर की कार्यशाला “झूलैं राम जी हिंडोरा” का शनिवार को भव्य समापन हुआ। आश्रम परिसर में विगत 2 अगस्त से चल रही इस साप्ताहिक कार्यशाला में सावन मास की परंपरागत झूला गीतों, कजरी और लोकधुनों का प्रशिक्षण दिया गया, जिसने प्रतिभागियों को अवध की समृद्ध लोकसंस्कृति से रूबरू कराया।

कार्यशाला के प्रशिक्षक प्रसिद्ध अवधी लोकगायक श्री शिवपूजन शुक्ल रहे, जिन्होंने पूरे सप्ताह प्रतिभागियों को स्वर, ताल और भाव की बारीकियां सिखाईं। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्रीमती श्रद्धा मिश्रा उपस्थित रहीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं हमारी लोक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं और महिलाओं की इतनी उत्साहपूर्ण भागीदारी देखकर उन्हें विशेष प्रसन्नता हुई।

गुरु शिवपूजन शुक्ल ने भी इस अवसर पर प्रतिभागियों की लगन की सराहना करते हुए कहा कि मात्र एक सप्ताह में महिलाओं ने जिस तन्मयता से सावनी गीतों को आत्मसात किया, वह अवधी लोकसंगीत के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है।

कार्यक्रम में नगर की लगभग 50 महिलाओं ने सक्रिय प्रतिभाग किया और समापन अवसर पर सामूहिक रूप से सावनी गीतों व झूला गीतों की मनमोहक प्रस्तुति देकर सभी को भावविभोर कर दिया। एक प्रतिभागी ने कहा कि इस कार्यशाला ने उन्हें बचपन की सावन की यादें फिर से जीने का अवसर दिया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य अतिथियों ने भी अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और आयोजकों को बधाई दी।

आमोद आश्रम की सचिव श्रीमती अनिता श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों, प्रशिक्षक और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था भविष्य में भी लोक कला और संस्कृति के संरक्षण हेतु इस तरह के आयोजन निरंतर करती रहेगी।

August 8, 2026

सन्त कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना’ में चयनित बुनकर सम्मानित 

Posted on 07.08.2026
लखनऊ : 07 अगस्त, 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि प्रदेश के हथकरघा उद्योग से जुड़े हस्तशिल्पियों एवं बुनकरों ने अपने कौशल एवं परिश्रम से भारत की विरासत को नई ऊचाइयों तक पहुंचाया है। प्रदेश सरकार हस्तशिल्पियों एवं बुनकरों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस’ केवल एक दिवस नहीं, बल्कि भारत के स्वाधीनता आन्दोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। 07 अगस्त, 1905 को भारत के स्वाधीनता आन्दोलन को नई दिशा मिली थी। इसी दिन आजादी के आन्दोलन में स्वदेशी की भावना ने पदार्पण किया था। स्वदेशी के मंत्र ने भारत को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के संकल्प को आगे बढ़ाया था।
मुख्यमंत्री जी आज यहां ‘राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह-2026’ को मुख्य अतिथि के तौर पर सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने सन्त कबीर राज्य हथकरघा पुरस्कार योजना के अन्तर्गत राज्य स्तर पर चयनित बुनकरों को सम्मानित किया तथा मुख्यमंत्री हथकरघा एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना, झलकारी बाई कोरी हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना के लाभार्थियों को प्रतीकात्मक चेक प्रदान किये। इसके पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने ओ0डी0ओ0पी0 उत्पादों तथा हथकरघा उद्योग पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री जी के समक्ष हथकरघा उत्पादों के प्रमुख क्रेताओं एवं संस्थागत भागीदारों-हैण्डलूम प्रमोशन एक्सपोर्ट काउंसिल चेन्नई, तनैरा बेंगलुरु, कारिगो डी0टी0डी0सी0, इन्टरनेशनल फैशन बिजनेस एक्सचेंज काउंसिल तथा फूल कानपुर के मध्य एम0ओ0यू0 का आदान-प्रदान किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि महात्मा गांधी ने खादी, स्वदेशी तथा हथकरघा को आजादी के आन्दोलन का सबसे बड़ा शस्त्र बनाया था। स्वदेशी उत्पाद को नया जीवन देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 07 अगस्त की तिथि को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। यह दिवस वर्ष 2015 से देश में प्रत्येक वर्ष मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री जी का यह निर्णय हथकरघा से जुड़े देश के लाखों उद्यमियों, व्यवसायियों तथा हस्तशिल्पियांं का सम्मान है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि स्वदेशी हमारी विरासत है। हमारे हस्तशिल्पी एवं हथकरघा उद्यमी बड़ी मेहनत एवं परिश्रम से अपना कार्य करते हैं। प्रदेश के 2.5 लाख परिवारों के 14-15 लाख लोग हथकरघा उद्योग से जुड़े हैं। पावरलूम को जोड़ देने पर यह संख्या बढ़कर लगभग 30 लाख हो जाती है। यह उद्योग 30 लाख लोगों की आजीविका तथा स्वावलम्बन का आधार है। इसके माध्यम से वह आत्मनिर्भरता के साथ निरन्तर आगे बढ़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार हस्तशिल्पियों व बुनकरों को प्रत्येक सुविधा सम्मानपूर्वक प्रदान कर रही है। लगभग 40,000 बुनकरों को मुख्यमंत्री हथकरघा उद्योग विकास योजना, झलकारी बाई कोरी हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना तथा विद्युत दर रियायत जैसी योजनाओं के माध्यम से 109 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध करयी गई है। आज का समय प्रतिस्पर्धा का है, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा में हम तब टिक पाएंगे, जब आज की मांग के अनुरूप डिजाइन तथा वस्त्र तैयार करेंगे। आज यहां लगायी गयी प्रदर्शनी बुनकरों एवं हस्तशिल्पियों के कौशल को प्रदर्शित करने का मंच व उत्पादों की ब्राण्डिंग का आधार है। यह मंच उत्पादों को बाजार से जोड़ने का माध्यम व लाखों लोगों के जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मेरठ, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा तथा बरेली आदि जनपदों के हस्तशिल्पी व कारीगर अपने उत्पादों के माध्यम से देश-दुनिया को आकर्षित कर रहे हैं। लखनऊ की चिकनकारी का काम अत्यन्त उत्कृष्ट है। व्यापारी और हस्तशिल्पी के बीच में विश्वास का रिश्ता होता है। बाराबंकी, अम्बेडकर नगर, संत कबीर नगर, गोरखपुर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही, मीरजापुर आदि जनपदों के हस्तशिल्पियों के उत्पादों को वैश्विक मान्यता प्राप्त हुई है। भदोही का कालीन उद्योग वर्ष 2017 से पूर्व मृतप्राय हो गया था। आज वहां से सैकड़ों करोड़ रुपए का निर्यात हो रहा है। भदोही की कालीन दुनिया के बाजार में छा गई है। देश की नई संसद में जब कालीन बिछाने की बात आयी, तो प्रधानमंत्री जी ने भदोही की कालीन को प्राथमिकता दी। कालीन के माध्यम से संसद में उत्तर प्रदेश के कारीगरों का सम्मान हो रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हम जब स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देंगे तथा उन्हें प्रोत्साहित करेंगे, तो देश का पैसा देश में ही लगेगा। हस्तशिल्पियों के चेहरे पर खुशहाली तथा जीवन में समृद्धि आएगी। यह पूरे देश की समृद्धि का कारण बनेगा। प्रदेश सरकार इस दिशा में अनेक प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से भदोही में कालीन एक्सपो सेन्टर बनाया गया है। वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटेशन सेन्टर स्थापित हो चुका है, इससे वहां के उत्पाद को वैश्विक मान्यता मिलेगी। प्रदेश सरकार सिल्क क्लस्टर्स को वैश्विक मान्यता दिलाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उत्पादों को टेक्नोलॉजी, डिजाइन, पैकेजिंग, एक्सपोर्ट तथा बाजार से जोड़ा जा रहा है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश सरकार हस्तशिल्पियों तथा बुनकरों के साथ सदैव खड़ी है। राज्य सरकार द्वारा वाराणसी के फैसिलिटेशन सेन्टर से जुड़े विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप प्रदान की जा रही है। गत वर्ष लगभग 450 विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप प्रदान की गई। उन्हें डिजाइनिंग, टेक्नोलॉजी तथा पैकेजिंग आदि के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। टेक्सटाइल उद्योग को मजबूती प्रदान करने के लिए लखनऊ तथा हरदोई के बीच 1,000 एकड़ क्षेत्रफल में पी0एम0 मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की जा रही है। वस्त्र उद्योग कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि युवाओं को रोजगार मिलने से उनके चेहरे पर खुशहाली आती है। वह अपनी सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग देश व प्रदेश के विकास में कर पाते हैं। इस प्रयास को नई दिशा देने की आवश्यकता है। प्रदेश के पांच स्थानों पर सन्त कबीरदास के नाम पर टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की जा रही है। इससे बुनकरों व हस्तशिल्पियों को नया प्लेटफार्म उपलब्ध होगा। यह कार्य 2017 से पूर्व हो जाने चाहिए थे, लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों में विज़न व सकारात्मक सोच का अभाव था। प्रत्येक कार्य को केवल वोट बैंक की दृष्टि से देखने पर गरीबों, कारीगरों तथा हस्तशिल्पियों का सम्मान पिछड़ जाता है। वर्ष 2017 से पूर्व प्रदेश में बिजली तथा सड़क आदि का अभाव था। प्रदेश की बदहाल कानून व्यवस्था के कारण बेटी, व्यापारी, हस्तशिल्पी तथा कारीगर सुरक्षित नहीं थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हथकरघा ऐसा क्षेत्र है, जिसमें 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं कार्य कर रही हैं। वर्ष 2017 के पश्चात हमने परम्परागत उद्यम को प्रोत्साहित किया। ‘एक जनपद एक उत्पाद योजना’ के माध्यम से उत्पादों की ब्राण्डिंग की गई। प्रधानमंत्री जी जब किसी देश के दौरे पर जाते हैं, तो वहां के राष्ट्राध्यक्ष को उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्पियों और कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पाद को प्रदान करते हैं। यह हस्तशिल्पियों और कारीगरों का सम्मान है। प्रदेश में 96 लाख एम0एस0एम0ई0 इकाईयां कार्य कर रही हैं। हथकरघा प्रदेश में सबसे बड़ा कुटीर उद्योग है। सभी एम0एस0एम0ई0 उत्पादों का रजिस्ट्रेशन करने के साथ ही प्रत्येक एम0एस0एम0ई0 इकाई को 05 लाख रुपये का सुरक्षा बीमा का कवर उपलब्ध कराया जाता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हथकरघा विभाग हस्तशिल्पियों और कारीगरों द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार की मांग के अनुसार टेक्नोलॉजी, डिजाइनिंग आदि से जोड़े। प्रदेश सरकार ने हस्तशिल्पियों व कारीगरों को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और पी0एम0 विश्वकर्मा योजना के माध्यम से टूलकिट तथा ट्रेनिंग प्रदान करने की व्यवस्था की है। इस क्षेत्र में कुछ नया करने वाले लोगों को आज यहां संत कबीर हथकरघा पुरस्कार योजना से सम्मानित किया गया है। दीपावली, होली तथा ईद आदि त्योहारों पर हमें प्रदेश के कारीगरों और हस्तशिल्पियों द्वारा निर्मित उत्पाद को अपने सगे-सम्बन्धियों को गिफ्ट के रूप में उपलब्ध कराना चाहिए। इन उपहारों में भदोही की कालीन, फिरोजाबाद की मूर्ति, मुरादाबाद की पीतल की वस्तु तथा मेरठ का खेल का सामान आदि हो सकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज मेरठ स्पोर्ट्स आइटम का केन्द्र बिन्दु बना है। वर्ष 2017 से पूर्व पहले यह उद्योग दम तोड़ रहा था। भट्टियों में पारम्परिक ईंधन प्रयोग करने से पर्यावरण प्रदूषित होता था। आज प्रदेश सरकार वहां पी0एन0जी0 पाइप लाइन पहुंचा दी है। बिजली के कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। उत्पादों को टेक्नोलॉजी तथा पैकेजिंग आदि से जोड़ा गया है। उन्हें निर्यात हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार ने सरकारी विभागों में हथकरघा से जुड़े उत्पाद को खरीदने की व्यवस्था बनाई है। विभाग तत्काल इस पर कार्यवाही आगे बढ़ाए। अस्पतालों तथा गेस्टहाउस में स्थानीय हस्तशिल्पियों तथा कारीगरों द्वारा निर्मित बेडशीट तथा तौलिए आदि के प्रयोग को बढ़ावा देना चाहिए। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। उत्पादों की ब्राण्डिंग का अवसर मिलेगा।
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री श्री राकेश सचान ने कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की हजारों वर्ष पुरानी बुनकर परम्परा तथा स्वदेशी अवधारणा को सम्मान प्रदान करने का उत्सव है। मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार हथकरघा उद्योग को निरन्तर प्रोत्साहित कर रही है। हस्तशिल्पियों एवं कारीगरों को शासन की योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है। उत्पादों को ब्राण्डिंग, तकनीक, पैकेजिंग तथा मार्केट आदि से जोड़ा जा रहा है। उत्सवों और त्योहारों आदि पर हमें प्रदेश के बुनकरों और हस्तशिल्पियों द्वारा निर्मित उत्पादों की खरीद को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान हथकरघा उद्योग की उपलब्धियों पर आधारित एक लघु फिल्म प्रदर्शित की गई तथा मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जी द्वारा हथकरघा दिवस पर दिये गए संदेश का प्रसारण किया गया।
इस अवसर पर विधान परिषद सदस्य श्री मुकेश शर्मा, डॉ0 लालजी प्रसाद निर्मल, विधायक श्रीमती जयदेवी, श्री नीरज बोरा, लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त श्री दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के सलाहकार श्री अवनीश कुमार अवस्थी, प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग श्री अनिल कुमार सागर, आयुक्त एवं निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग श्री के0 विजयेन्द्र पांडियन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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