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लखनऊ में आग से 250 झोपड़ियां राख, दो बच्चों की मृत्यु

April 16, 2026

लखनऊ में आग से 250 झोपड़ियां राख, दो बच्चों की मृत्यु

लखनऊ, 16 अप्रैल 26। विकास नगर इलाके में बुधवार को एक भीषण अग्निकांड में 250 से अधिक झुग्गी-झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। इस अग्निकांड में दो बच्चों की जिंदा जलकर मृत्यु हो गई, जबकि कई लोग झुलस गए।
जानकारी के अनुसार आग लगने के बाद झोपड़ियों में रखे गैस सिलेंडर, फ्रिज और एसी के कंप्रेसर तेज धमाकों के साथ फटने लगे। इन धमाकों से इलाके में दहशत फैल गई और लोग अपनी जान बचाकर भागने लगे। आग से उठता घना काला धुआं करीब 10 किलोमीटर दूर तक देखा गया।

फायरब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया ।
प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और आग के असली कारणों का पता लगाने के लिए टीम गठित की गई है। वहीं, प्रभावित परिवारों के लिए राहत शिविर और आवश्यक सहायता की व्यवस्था की जा रही है।

April 15, 2026

लखनऊ के मशहूर रेस्टोरेंट में आग से हड़कंप

लखनऊ, 15 अप्रैल 26, राजधानी के मशहूर रेस्टोरेंट में सुबह आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची फायरब्रिगेड ने आग पर काबू पाया।

आशियाना के पावर हाउस चौराहे के पास विवेक प्लाजा के तीसरे तल पर संचालित मोती महल डीलक्स रेस्टोरेंट में बुधवार सुबह भीषण आग लग गई और काले धुएं के गुब्बार फ्लोर से फैलने आग। इस दौरान एसी का कंप्रेशर भी फटा,तेज धमाके से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।

April 14, 2026

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण

लखनऊ : 14 अप्रैल, 2026 प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आज देहरादून, उत्तराखण्ड से 12,000 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित दिल्ली-उत्तर प्रदेश-उत्तराखण्ड को जोड़ने वाले दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण किया। इसके पूर्व, प्रधानमंत्री जी ने जनपद सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के अन्तर्गत निर्मित वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर का निरीक्षण किया तथा माँ डाट काली मन्दिर में दर्शन-पूजन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी तथा केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री पंकज चौधरी सम्मिलित हुए।
प्रधानमंत्री जी ने कार्यक्रम को देहरादून से वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित करते हुए कहा कि दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को पूरा करने में माँ डाट काली का आशीर्वाद बहुत बड़ी शक्ति के रूप में रहा। इस एक्सप्रेस-वे का बहुत बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। इससे गाजियाबाद, बागपत, शामली और सहारनपुर जैसे अनेक शहरों को लाभ होगा। पर्यटन के दृष्टिकोण से यह प्रोजेक्ट काफी अहम है। आज बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर जी की पावन जयन्ती भी है। बीते दशक में सरकार की नीतियां व निर्णय संविधान की गरिमा को पुनर्स्थापित करने वाले रहे। अनुच्छेद-370 हटने के बाद सम्पूर्ण देश में भारत का संविधान लागू है। जिन जिलों में माओवाद व नक्सलवाद का खात्मा हुआ है, वहां भी संविधान की भावना के अनुरूप कार्य हो रहा है। देश में समान नागरिक संहिता लागू करना संविधान की अपेक्षा है।
प्रधानमंत्री जी ने कहा कि बाबा साहब का जीवन गरीबों, वंचितों, शोषितों को न्यायपूर्ण व्यवस्था देने के लिए समर्पित था। हमारी सरकार उसी भावना के साथ प्रत्येक गरीब व वंचित को सच्चा सामाजिक न्याय देने में जुटी हुई है। देश का संतुलित विकास सामाजिक न्याय का बहुत बड़ा माध्यम है। बाबा साहब आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगीकरण की वकालत करते थे। भविष्य की दशा और दिशा के लिए अक्सर लोग हस्तरेखाएं दिखाते हैं। यदि इसे राष्ट्र के सन्दर्भ में देखा जाए, तो राष्ट्र की भाग्य रेखाएं सड़कें, हाई-वे, एक्सप्रेस-वे, एयर-वे, रेलवे, वॉटर-वे होती हैं। बीते एक दशक से देश विकसित भारत बनाने के लिए अभूतपूर्व निवेश कर विकास की ऐसी ही भाग्य रेखाओं के निर्माण में जुटा हुआ है। विकास की यह भाग्य रेखाएं सिर्फ आज की सुविधाएं नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि की गारण्टी हैं।
प्रधानमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2014 से पूर्व, ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए पूरे देश में प्रतिवर्ष 02 लाख करोड़ रुपये भी खर्च नहीं होते थे। आज यह आंकड़ा 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। 21वीं सदी का भारत आज जिस स्पीड व स्केल पर कार्य कर रहा है, उसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। कुछ सप्ताह पूर्व दिल्ली मे मेट्रो का विस्तार हुआ। मेरठ में मेट्रो की शुरूआत हुई। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल देश को समर्पित की गयी। नोएडा इण्टरनेशनल एयरपोर्ट की शुरूआत हुई। हवाई जहाजों के लिए एम0आर0ओ0 फैसिलिटी पर कार्य शुरू हुआ। आज देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे शुरू हो रहा है। 21वीं सदी का भारत आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के जिस युग में प्रवेश कर रहा है, वह अभूतपूर्व व अकल्पनीय है। आज भारत के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाले अनेक इकोनॉमिक कॉरिडोर यथा- दिल्ली-मुम्बई इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर, बेंगलूरू-मुम्बई इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर, ईस्ट-कोस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर, अमृतसर-कोलकाता इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर पर काम चल रहा है।
प्रधानमंत्री जी ने कहा कि यह इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रगति के नये द्वार हैं। इनसे उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई हैं। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर सड़क के अतिरिक्त नये-नये व्यापार और कारोबार का मार्ग बनाते हैं। फैक्ट्रियों, गोदामों के नेटवर्क का आधार तैयार करते हैं। देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर से भी सम्पूर्ण क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है। इससे समय बचेगा, आवागमन सस्ता व तेज होगा और रोजगार में वृद्धि होगी। किसानों और पशुपालकों की उपज अब तेज गति से मण्डियों और बड़े बाजारों तक पहुंचेगी। इसके निर्माण में 12 हजार करोड़ रुपये व्यय हुए। हजारों श्रमिकों, इंजीनियरों व अन्य स्किल्ड वर्कफोर्स तथा ट्रान्सपोर्ट से जुड़े लोगों को बहुत बड़ी मात्रा में काम मिला।
प्रधानमंत्री जी ने कहा कि हम ऐसा भारत बनाने में जुटे हुए हैं, जहां प्रगति, प्रकृति व संस्कृति की त्रिवेणी हो। आज होने वाले हर निर्माण को इसी त्रिवेणी के मूल्यों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। इन्फ्रास्ट्रक्चर से इंसान को भी सुविधा मिले और वहां रहने वाले वन्य जीवों को भी असुविधा न हो, यही सरकार का प्रयास है। इसलिए इस एक्सप्रेस-वे पर लगभग 12 किलोमीटर लम्बा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर बनाया गया है, जिससे हाथियों को असुविधा न हो।
प्रधानमंत्री जी ने कहा कि दुनिया में बड़ा संकट आया है। इससे दुनिया के विकसित देशों में भी हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे मुश्किल हालात में भी सरकार का निरन्तर प्रयास है कि हमारी बहनों को कम से कम परेशानी हो। बहन-बेटियों की भागीदारी का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव देश के सामने है। चार दशकों के इन्तजार के बाद संसद ने नारी शक्ति वन्दन अधिनियम पारित किया था। इससे विधानसभा व लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तय हो गया। सभी दलों ने आगे आकर इस महत्वपूर्ण कानून का समर्थन किया। महिलाओं को मिले इस हक को लागू करने में अब देर नहीं होनी चाहिए। वर्ष 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव और आगे होने वाले विधानसभा चुनावों में यह लागू हो जाना चाहिए। यह देश की भावना तथा प्रत्येक बहन-बेटी की इच्छा है। मातृशक्ति की इसी इच्छा को नमन करते हुए आगामी 16 अप्रैल से संसद में विशेष चर्चा तय की गयी है। मैंने देश की माताओं-बहनों को खुला पत्र लिखकर इस कार्य में भागीदार बनने के लिए निमंत्रित किया है।
प्रधानमंत्री जी ने कहा कि सरकार सेना की सामर्थ्य को सशक्त करने तथा सैनिक परिवारों की सुविधा के लिए निरन्तर प्रयासरत है। ‘वन रैंक-वन पेंशन‘ के माध्यम से सरकार ने अब तक लगभग सवा लाख करोड़ रुपये पूर्व फौजियों के खाते में जमा किए हैं। इस वर्ष पूर्व सैनिकों के लिए हेल्थ स्कीम का बजट 36 प्रतिशत बढ़ाया गया है। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के पूर्व सैनिकों के लिए दवाइयों की डोर-स्टेप होम डिलीवरी शुरू की गयी है। पूर्व सैनिकों के बच्चों की एजुकेशन ग्राण्ट दोगुनी तथा बेटियों के विवाह की सहायता राशि 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 01 लाख रुपये की गयी है। हमें देशभक्ति, देवभक्ति और प्रगति जैसे प्रत्येक आयाम को जोड़ते हुए देश को विकसित बनाना है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जनपद सहारनपुर से कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए कहा कि सहारनपुर से दिल्ली की जो दूरी पहले 05 से 06 घण्टे में पूरी होती थी, अब इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से 2.5 घण्टे में पूरी की जा सकेगी। यह इकोनॉमिक कॉरिडोर अन्नदाता किसानों के गुड़ की मिठास, सब्जी तथा फल, सहारनपुर की काष्ठ कला एवं शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत में बनने वाले उत्पादों को राष्ट्रीय राजधानी के साथ-साथ दुनिया के बाजारों में पहुंचाने का माध्यम बनेगा।
आज भारत में सामाजिक न्याय को धरातल पर उतारने वाले संविधान शिल्पी बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर जी की 135वीं पावन जयन्ती है। उन्होंने संविधान के माध्यम से भारत के प्रत्येक नागरिक, चाहे वह किसी भी जाति, सम्प्रदाय, क्षेत्र, लिंग या आयु का हो, को एकसमान अधिकार देकर सशक्त भारत की नींव रखी थी। बाबा साहब के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए प्रधानमंत्री जी ने देश में पंचतीर्थ बनवाए। आज उनकी प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने तय किया है कि बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर, सद्गुरु रविदास जी महाराज, महर्षि वाल्मीकि और सामाजिक न्याय के महापुरुषों की मूर्तियां जहां स्थापित हैं, यदि वहां बाउण्ड्रीवॉल नहीं है और मूर्तियों के ऊपर छत्र नहीं है, तो प्रदेश सरकार धनराशि देकर इस कार्य को कराएगी। यह कार्य प्रारम्भ होने जा रहा है। यह सम्मान का भाव आने वाली पीढ़ी को एकसूत्र में जोड़कर प्रधानमंत्री जी के ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के अभियान को आगे बढ़ाएगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बाबा साहब की जयन्ती के अवसर पर सहारनपुर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेशवासियों को प्रधानमंत्री जी कर-कमलों से यह इकोनॉमिक कॉरिडोर प्राप्त हो रहा है। आज प्रधानमंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए हम सब यहां उपस्थित हुए हैं। पहले माँ डाट काली के स्थान से जब उत्तराखण्ड में प्रवेश करते थे, तो रोड ब्लॉक हो जाती थी। बरसात के दिनों में आवागमन बन्द हो जाता था। सहारनपुर व अन्य जनपदों के लोग इस मार्ग से देहरादून नहीं पहुँच पाते थे। उन्हें हरिद्वार मार्ग का सहारा लेना पड़ता था।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में नया भारत विकास, सुशासन तथा सेवा का जो मॉडल खड़ा कर रहा है, उस मॉडल को इकोनॉमिक कॉरिडोर के माध्यम से हम सभी देख रहे हैं। आज उत्तर प्रदेश सुरक्षा, सुशासन, इन्फ्रास्ट्रक्चर, रोजगार और निवेश का एक नया केन्द्र बनकर उभरा है। यह डबल इंजन सरकार की ताकत है कि अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड और दिल्ली में बड़े से बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को लाने में कोई दुविधा नहीं है। अब सहारनपुर में माता शाकुम्भरी के नाम पर विश्वविद्यालय बन चुका है। सरसावां में सिविल टर्मिनल व एयरपोर्ट बन रहा है। जेवर में एशिया का सबसे बड़ा इण्टरनेशनल एयरपोर्ट प्रारम्भ हो चुका है। वहां फिल्म सिटी का निर्माण किया जा रहा है। यह कला एवं कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा को समाज के समक्ष प्रस्तुत करने का एक माध्यम है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि माता शाकुम्भरी देवी का भव्य कॉरिडोर बन रहा है। यह तभी सम्भव होता है, जब सरकार विरासत के संरक्षण के साथ विकास कार्यों को बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके आगे बढ़ाती है। सहारनपुर, मेरठ, बागपत में अधिकारियों को इण्डस्ट्रियल तथा हाउसिंग क्लस्टर तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं। इससे रोजगार के अनेक अवसर सृजित होंगे। यहां के किसानों के उत्पाद को देश की राजधानी दिल्ली के साथ गंगा एक्सप्रेस-वे के माध्यम से लखनऊ व अन्य वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। अन्नदाता किसानों को उपज की अच्छी कीमत मिलेगी।
इसके पूर्व, राज्यपाल जी तथा मुख्यमंत्री जी ने बाबा साहब डॉ0 भीमराव आम्बेडकर जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम को केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी ने देहरादून से वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित किया। केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री श्री पंकज चौधरी, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री द्वय श्री केशव प्रसाद मौर्य व श्री ब्रजेश पाठक ने सहारनपुर में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित किया।
इस अवसर पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रोद्योगिकी मंत्री श्री सुनील कुमार शर्मा, संसदीय कार्य तथा औद्योगिक विकास राज्यमंत्री श्री जसवन्त सिंह सैनी, लोक निर्माण राज्यमंत्री श्री ब्रजेश सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर जी का पूरा जीवन ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए समर्पित था

लखनऊ : 14 अप्रैल, 2026 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि आज पूरा देश भारत माता के महान सपूत बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर जी का स्मरण कर रहा है। उनका पूरा जीवन ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना को साकार करने तथा वंचितों, शोषितों, गरीबों व महिलाओं को न्याय प्रदान करने के लिए समर्पित था। आज देश बाबा साहब के इन्हीं कार्यों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहा है।
मुख्यमंत्री जी आज यहां बाबा साहब डॉ0 भीमराव रामजी आंबेडकर की 135वीं जयन्ती के अवसर पर भारत रत्न बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ0 भीमराव आंबेडकर महासभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने डॉ0 भीमराव रामजी आंबेडकर मूर्ति विकास योजना के अन्तर्गत प्रदेश के समस्त 75 जनपदों में स्थापित डॉ0 आंबेडकर की 75 मूर्तियों के सौन्दर्यीकरण एवं संरक्षण कार्यों का शिलान्यास किया। उन्होंने महासभा परिसर में स्थापित तथागत बुद्ध एवं डॉ0 भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा डॉ0 आंबेडकर के अस्थि कलश पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम में डॉ0 भीमराव आंबेडकर महासभा द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया गया। मुख्यमंत्री जी को भारतीय संविधान की प्रति तथा स्मृति चिन्ह के रूप में डॉ0 आंबेडकर की प्रतिमा भेंट की गयी। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने जी0पी0ओ0, हजरतगंज स्थित डॉ0 भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
मुख्यमंत्री जी ने महान न्यायविद्, भारतीय संविधान के शिल्पी, महान अर्थशास्त्री बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर जी की स्मृतियों को नमन करते हुए कहा कि हर वंचित, शोषित, गरीब व महिला को बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर जी में न्याय की रोशनी दिखायी देती है। बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर जी की 135वीं जयन्ती के अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़े कार्यक्रम को अपने हाथों में लिया है। आज प्रदेश के सभी 75 जनपदों में, जहां किसी सार्वजनिक भूमि पर बाबा साहब की प्रतिमा होगी, यदि वहां बाउण्ड्रीवॉल तथा मूर्ति के ऊपर छत्र नहीं है, वहां बाउण्ड्रीवॉल तथा मूर्ति के ऊपर छत्र बनाने के कार्यों का शिलान्यास हुआ है।
पहले चरण में सभी 75 जनपदों में एक-एक स्थान पर यह कार्य किये जाएंगे। इसके उपरान्त अन्य सभी ऐसे स्थानों पर यह कार्य होंगे। समाज कल्याण विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी गयी है। इसके अन्तर्गत बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर, सन्त रविदास जी महाराज, महर्षि वाल्मीकि, महात्मा ज्योतिबा फुले, महाराजा बिजली पासी, महाराजा सातन पासी सहित सामाजिक न्याय के लिए कार्य करने वाले प्रत्येक उन महापुरुषों को सम्मान देने का कार्य किया जाएगा, जिनके कारण यह समाज मजबूती के साथ जुड़ा हुआ है। गरीब, वंचित सहित समाज के हर तबके का व्यक्ति यहां पर जाकर अपना सम्मान व्यक्त कर सके, कोई भी अराजक तत्व इन मूर्तियों को क्षतिग्रस्त न कर सके, इस दिशा में यह कार्य किये जा रहे हैं।
डबल इंजन सरकार प्रत्येक वंचित तथा अति पिछड़ों के विकास तथा सम्मान को प्राथमिकता दे रही है। यह कार्य लगातार आगे बढ़ेंगे। सरकार यह सुनिश्चित कराएगी कि गांव में बने सामुदायिक शौचालयों में स्वच्छता के कार्यक्रमों से जुड़ी बहनों को समय पर मानदेय मिले।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमारी सरकार ने गोरखपुर में वीरांगना झलकारी बाई कोरी, बदायूं में वीरांगना अवन्तीबाई लोधी तथा लखनऊ में वीरांगना ऊदा देवी पासी के नाम पर पी0ए0सी0 की तीन महिला बटालियनों का गठन किया है। यह सामाजिक न्याय का उदाहरण है, जहां हर एक का सम्मान होता है। हमने समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री असीम अरूण की पहल पर कन्नौज के सरकारी मेडिकल कॉलेज का नाम पुनः बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर के नाम पर किया है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि सन्त रविदास जी महाराज की पावन जन्मभूमि वाराणसी में माघी पूर्णिमा पर लाखों लोग एकत्रित होते हैं। पहले वहां कार्यक्रमों के लिए जगह नहीं मिल पाती थी। सिंगल लेन की सड़क थी। डबल इंजन सरकार ने वहां दो लाख लोगों के कार्यक्रम के लिए पार्क विकसित किया तथा वहां सन्त रविदास जी महाराज की भव्य प्रतिमा स्थापित करायी। सिंगल लेन सड़क को 04-लेन की सड़क में बदल दिया गया। अन्न क्षेत्र तथा अतिथि क्षेत्र के लिए भवन बनाये गये। यह उस महापुरुष के प्रति हमारी कृतज्ञता है, जिसने भारत की भक्ति परम्परा को बहुत ऊंचाईयां दी हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पहले महर्षि वाल्मीकि जी की पावन साधना स्थली लालापुर, चित्रकूट पर कब्जा किया जा रहा था। हमने वहां रोपवे का विकास किया है। वहां सड़क का निर्माण हो चुका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में बने इण्टरनेशनल एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। इन महापुरुषों ने समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। बाबा साहब की जयन्ती पर आयोजित आज का यह कार्यक्रम इन्हीं महापुरुषों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का अवसर है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि लखनऊ में हमारी सरकार ने तत्कालीन राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविन्द जी के माध्यम से भारत रत्न डॉ0 भीमराव आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केन्द्र बनाने के कार्य को आगे बढ़ाया है। इसके प्रथम चरण का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। द्वितीय चरण के कार्यां को जुलाई, 2026 तक पूर्ण किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। यहां पर वंचित वर्गों के बच्चों के लिए बाबा साहब के जीवन-दर्शन पर शोध करने का प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। यह सामाजिक न्याय के प्रति जनचेतना जागृत करने का केन्द्र होगा। इसमें छात्रावास, शोध केन्द्र, ऑडिटोरियम, बाबा साहब की भव्य प्रतिमा का निर्माण हो रहा है। इसके माध्यम से समाज अपने महापुरुषों के योगदान के विषय में जानकर गौरव की अनुभूति कर सकेगा।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी ने बाबा साहब से जुड़े पांच स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित किया है। इनमें महु, मध्य प्रदेश स्थित उनकी जन्मस्थली पर बाबा साहब का भव्य स्मारक बना है। बाबा साहब ने लन्दन, ब्रिटेन में जिस भवन में रहकर उच्च शिक्षा ग्रहण की थी, उस भवन को खरीदकर बाबा साहब का स्मारक बनाकर अनुसूचित जाति/जनजाति के छात्रों के लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था की गयी है। दिल्ली में जहां बाबा साहब ने अपना सार्वजनिक जीवन व्यतीत किया, वहां डॉ0 भीमराव आंबेडकर अन्तरराष्ट्रीय एवं सास्कृतिक केन्द्र का निर्माण किया गया है। बाबा साहब की दीक्षा भूमि नागपुर तथा चैत्य भूमि मुम्बई में भी भव्य स्मारक बनाये गये हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर के दर्शन के अनुरूप आज डबल इंजन सरकार द्वारा प्रत्येक गरीब तथा वंचित वर्ग के लोगों को निःशुल्क राशन, आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन, निःशुल्क विद्युत कनेक्शन, प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास व शौचालय आदि का लाभ दिया जा रहा है। डबल इंजन सरकार प्रत्येक वंचित, अति पिछड़े, गरीब, नौजवान तथा महिला के साथ मजबूती से खड़ी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि हमें बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर के व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए। उनका कहना था कि वह शुरु से अन्त तक भारतीय रहेंगे। बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर अपने परिश्रम और पुरुषार्थ से वंचितों के मसीहा बन गये। हमें भारत माता तथा देश की एकता और अखण्डता के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार्य नहीं करना चाहिए। जब कोई भारत के संविधान, तिरंगे, राष्ट्रगीत तथा राष्ट्रगान का अपमान करता है, तो वह बाबा साहब का अपमान करता है। हम ऐसी कोई भी बात स्वीकार्य नहीं करें, जो बाबा साहब के दर्शन के अनुरूप न हो।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज कुछ स्वार्थी ताकतें बाबा साहब के नाम का स्मरण कर रही हैं। यह वही लोग हैं, जिन्हें वंचितों, गरीबों और महिलाओं के उत्थान से हमेशा नफरत रही है। ऐसे लोगों ने सामाजिक न्याय के पुरोधाओं का हमेशा अपमान किया है। आज यह लोग नये तरीके से लोगों को गुमराह करने का प्र्रयास कर रहे हैं। बाबा साहब को चुनाव से वंचित करने का प्रयास किया गया। उन्हें भारतरत्न न मिले, इसके लिए हर प्रकार के षड्यंत्र रचे गये। आज ऐसे लोग संविधान की प्रति लेकर घूम रहे हैं। इनकी वास्तविकता को समझने की आवश्यकता है। बाबा साहब डॉ0 भीमराव आंबेडकर के नाम पर राजनीति करने वाले लोगों के वास्तविक चरित्र को अब जनता जान चुकी है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ऐसे लोगों से पूछा जाना चाहिए कि बाबा साहब तथा संत रविदास जी महाराज के नाम पर बने जनपदों का नाम क्यों बदला गया। प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान के0जी0एम0यू0 का नाम जिन महापुरुष के नाम पर था, उसे क्यों बदला गया। लखनऊ के भाषा विश्वविद्यालय तथा कन्नौज के सरकारी मेडिकल कॉलेज का नाम क्यों बदला गया। कौन लोग थे, जो गरीबों, वंचितों के हक पर डाका डाल रहे थे और इन्हें मिलने वाले जमीन के पट्टे के अधिकार से वंचित कर रहे थे। ऐसे लोगों ने स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत मिलने वाले शौचालयों पर रोक लगायी तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब को मिलने वाले आवास की योजना को लागू नहीं करने दिया। इन्हांने गरीबों तथा वंचितों की पीड़ा को कभी महसूस नहीं किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि तीन दिन पूर्व उन्हें जनपद लखीमपुर खीरी जाने का अवसर मिला था। वहां थारू जनजाति के वंचितों को अब तक नागरिकता नहीं मिल पायी थी। हमने ऐसे 4,356 वंचित लोगों को भौमिक अधिकार प्रदान किये हैं। वर्ष 1971 में पूर्वी पाकिस्तान/बांग्लादेश से लखीमपुर खीरी में विस्थापित परिवारों को भी भौमिक अधिकार दिए गये हैं। 56 वर्षां से उन्हें कोई अधिकार नहीं मिला था।
इस अवसर पर महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार मंत्री श्रीमती बेबी रानी मौर्य, समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री असीम अरुण, सांसद श्री ब्रजलाल, विधान परिषद सदस्य डॉ0 लालजी प्रसाद निर्मल, लखनऊ की महापौर श्रीमती सुषमा खर्कवाल सहित शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

April 8, 2026

मुख्यमंत्री ने तीन दिवसीय उ0प्र0 कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 का शुभारम्भ किया

 
मुख्यमंत्री ने उ0प्र0 कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26
के अन्तर्गत चयनित वैज्ञानिकों को सम्मानित किया
 
उ0प्र0 में कृषि और कृषि से सम्बन्धित क्षेत्र में असीमित सम्भावनाएं, विगत 09 वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा किये गये प्रयासों के बेहतर परिणाम प्राप्त हुए : मुख्यमंत्री
 
कृषि विकास दर को 08 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत पहुंचाने में सफलता प्राप्त
 
प्रदेश के अन्नदाता किसानों में कृषि क्षेत्र की सम्भावनाओं को धरातल पर
उतारकर दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने का सामर्थ्य, राज्य
सरकार ने किसानों और कृषि को एजेण्डे का हिस्सा बनाया
 
गन्ना किसानों के खाते में अब तक 02 लाख 90 हजार करोड़ रु0 से अधिक
धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से प्रेषित की जा चुकी, प्रदेश की
चीनी मिलें सुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में काम कर रहीं
 
देश के कुल गन्ना का 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उ0प्र0 कर रहा
 
अच्छे बीज आने, समय पर बीमारी चिन्हित कर समाधान का रास्ता निकालने
तथा टिश्यू कल्चर जैसी नई तकनीक अपनाने से प्रदेश में गन्ना उत्पादन बढ़ा
 
प्रदेश सरकार के प्रयासों से कृषि तथा किसानों के हित में स्पष्ट नीति बनायी
गयी, किसान को बीज प्रदान करने से लेकर उसके उत्पाद को खरीदने
तथा उसे वैल्यू एडीशन के साथ जोड़ने का कार्य कर रही
 
प्रदेश सरकार द्वारा सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को वर्ष 2021 में पूर्ण कराया
गया, इसके माध्यम से 14 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध
 
खेती प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग कर कई कार्यों को आसान किया जा सकता
 
इण्टरनेट ऑफ थिंग्स‘ के माध्यम से मिट्टी की नमी और पोषण का डाटा एकत्र
कर किसान लाभान्वित हो सकते, कृषि में आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस उपयोगी
हो सकती, प्रदेश में ‘वन नेशन वन मण्डी’ के नियम को लागू किया गया
 
अब समय आ गया, जब लैब-टू-लैण्ड नहीं, बल्कि लैब-इन-लैण्ड का उपयोग किया जाए, अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता

 

लखनऊ : 08 अप्रैल, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कृषि और कृषि से सम्बन्धित क्षेत्र में असीमित सम्भावनाएं हैं। भारत की कुल कृषि योग्य भूमि में उत्तर प्रदेश का योगदान 11 प्रतिशत है, लेकिन देश के कुल खाद्यान्न का 21 प्रतिशत उत्पादन इस भूमि पर होता है। विगत 09 वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में किये गये प्रयासों के बेहतर परिणाम प्राप्त हुए हैं। कृषि विकास की दर को 08 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत पहुंचाने में सफलता प्राप्त हुई है।
मुख्यमंत्री जी आज यहां ‘विकसित कृषि-विकसित भारत/2047’ के लिए कृषि कायाकल्प हेतु कृषि वैज्ञानिकों एवं कृषि विशेषज्ञों का महासंगम-छठी उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 (08 से 10 अप्रैल, 2026) का शुभारम्भ करने के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री जी ने उत्तर प्रदेश कृषि वैज्ञानिक सम्मान योजना 2025-26 के अन्तर्गत चयनित वैज्ञानिकों को लाइफटाइम एचीवमेण्ट, विशिष्ट वैज्ञानिक, विशिष्ट महिला वैज्ञानिक, युवा वैज्ञानिक, उत्कृष्ट पी0एच0डी0 थीसिस आदि पुरस्कारों से सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री जी ने ‘विकसित कृषि-विकसित उत्तर प्रदेश/2047’, ‘उपकार कृषि प्रेरणा’, ‘उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद परिचय, गतिविधियाँ एवं भावी रणनीतियाँ’, ‘उपकार समाचार’, ‘न्यू डाइमेंशन्स ऑफ एग्रीकल्चर इन रिसर्च कोआर्डिनेशन एण्ड प्रोडक्टिविटी’, ‘उपकार सीड’, ‘छठी यू0पी0 एग्रीकल्चरल साइंस कांग्रेस सौवेनिर एण्ड एब्स्ट्रैक्ट‘ आदि पुस्तकों का विमोचन किया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद एवं इसकी सहयोगी संस्थाओं ने प्रदेश में तीन दिवसीय कृषि विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया है, इनमें भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान, उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान अकादमी तथा गो-सेवा आयोग आदि सम्मिलित हैं। इस कार्यक्रम में तीन दिनों तक कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित अलग-अलग विषयों पर चर्चा की जाएगी। उत्तर प्रदेश की आबादी देश में सर्वाधिक है। यहां देश की 16 से 17 प्रतिशत आबादी निवास करती है। यहां दुनिया की सबसे उर्वरा भूमि, सबसे अच्छा जल संसाधन है। विश्व में सर्वाधिक सिंचित भूमि का प्रतिशत भारत में तथा भारत में सर्वाधिक सिंचित भूमि का प्रतिशत उत्तर प्रदेश में है।
जब भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था में 44 से 45 प्रतिशत हिस्सा रखता था, उसका आधार भारत की कृषि, अन्नदाता किसान और कारीगर थे। यहां किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखा गया था, बल्कि वह स्वयं में कारीगर भी थे। उत्पादक किसान जब कारीगर के रूप में कार्य करता था, तो स्वयं को उद्यमी के रूप में स्थापित करता था। भारत की कृषि की गाथा उत्पादक से उद्यमी बनने की है। वैदिक काल से ही उत्तर प्रदेश इसकी भूमि रहा है। आक्रान्ताओं ने भारत की कृषि पर ही हमला नहीं किया, बल्कि यहां की उद्यमिता पर भी हमला किया था। जो किसान पहले कारीगर से उद्यमी बनने की गाथा को आगे बढ़ाता था, उसे केवल कच्चा माल उत्पन्न करने का अधिकार दिया गया। यहां का कच्चा माल बाहर जाता था। वैल्यू एडीशन का लाभ विदेशियों को मिलता था। हमारा उत्पादक किसान ऋणी बन गया। हमारी कारीगर उद्यमी से बेरोजगार हो गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम‘ बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय के आनन्द मठ उपन्यास का एक हिस्सा है। यह बंगाल की त्रासदी पर आधारित गीत है। बंगाल में पड़े अकाल के दौरान लोग भूख से मर रहे थे। वहां के जमींदार महेन्द्रनाथ के परिवार को भी संकट का सामना करना पड़ा। इस कालक्रम की परिणति संन्यासी विद्रोह के रूप में हुई। आनन्द मठ में औपनिवेशिक काल के शोषण की पूरी गाथा समाहित है। जब भारत के उत्पादक किसान को ऋणी बना दिया जाता है, तो उसका परिणाम अकाल की त्रासदी के रूप में देखने को मिलता है। इन सभी बिन्दुओं पर विचार करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश के अन्नदाता किसानों में कृषि क्षेत्र की सम्भावनाओं को धरातल पर उतारकर दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने का सामर्थ्य है। दूसरों पर निर्भरता किंकर्तव्यविमूढ़ की स्थिति उत्पन्न करती है। वैदिककालीन भारत में जब उत्पादक व उद्यमिता की इकाइयां किसानों के पास थीं, तब हमारे गांव आत्मनिर्भर होते थे। एक साजिश के तहत उस आत्मनिर्भर इकाई को भंग किया गया। उस समय ऐसा कोई ईकोसिस्टम तैयार नहीं किया गया, जो प्रत्येक सम-विषम परिस्थितियों में टॉप-टू-बॉटम प्रत्येक कड़ी को जोड़ते हुए चुनौतियों का सामना कर सके।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में ‘खेती की बात खेत पर’ कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया। इसके अन्तर्गत प्रदेश के कुछ क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान वहां तीसरी फसल देखने को मिली। किसानों ने संवाद के दौरान बताया कि उन्हें मक्का की खेती से प्रति एकड़ 01 लाख रुपये बचत हो रही है। जिस प्रदेश में बिजली, पानी, बीज, प्रोक्योरमेण्ट सेण्टर आदि के अभाव में पहले एक फसल प्राप्त करने में किसान परेशान था, आज वहां तीसरी फसल उत्पादित हो रही है। पहले प्रदेश के कृषि विज्ञान केन्द्र बदहाल थे, आज उन कृषि विज्ञान केन्द्रों पर प्रत्येक सप्ताह गोष्ठियां व किसानों के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। डेमोन्स्ट्रेशन के माध्यम से किसानों को अवगत कराया जाता है कि कौन सा कृषि कार्य किस रूप में हो और उसके क्या परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के आपसी समन्वय से कृषि वैज्ञानिकों की क्षमताओं में वृद्धि का कार्य आगे बढ़ा है। राज्य सरकार ने किसानों और कृषि को एजेण्डे का हिस्सा बनाया है। जिस उत्तर प्रदेश में पहले कई वर्षों से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हुआ था, आज किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान किया जाता है। गन्ना किसानों के खाते में अब तक 02 लाख 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक धनराशि डी0बी0टी0 के माध्यम से प्रेषित की जा चुकी है। प्रदेश में जो चीनी मिलें पहले बन्द हो रही थीं, आज वह सुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में काम कर रहीं हैं। देश के कुल गन्ना का 55 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश कर रहा है। यहां एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग पौने 02 लाख करोड़ लीटर तक पहुंच चुका है, जो देश में नम्बर एक है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में संचालित 122 चीनी मिलों में 106 या 107 चीनी मिलें ऐसी हैं, जो छठें-सातवें दिन गन्ना मूल्य का भुगतान कर देती हैं। लोग नई चीनी मिलें स्थापित करने के लिए आगे आ रहे हैं। अच्छे बीज आने, समय पर बीमारी चिन्हित कर समाधान का रास्ता निकालने तथा टिश्यू कल्चर जैसी नई तकनीक अपनाने से प्रदेश में गन्ना उत्पादन बढ़ा है। हम सभी के समक्ष भारत की प्राचीन पद्धति अपनाते हुए अपने उत्पाद को पोषण से जोड़ने तथा फर्टिलाइजर के स्थान पर नेचुरल व जैविक खेती अपनाने की चुनौती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए कार्य को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। किसानों को तकनीक का प्रयोग करते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन करने पर जोर देना चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज भारत को खाद्य संकट से जूझना नहीं पड़ रहा है। यहां प्रचुर मात्रा में खाद्य पदार्थों का उत्पादन हो रहा है। वर्ष 2014 से पूर्व, देश में किसान आत्महत्या कर रहे थे। आज किसान की आत्महत्या के मामले शून्य हो चुके हैं। किसान की आमदमी कई गुना बढ़ी है। यह परिवर्तन हम सभी को देखने को मिल रहा है। वर्ष 2017 से पूर्व, प्रदेश के किसानों व आमजन में सरकार के प्रति विश्वास का अभाव था। किसान विभिन्न प्रकार की प्रताड़नाओं से परेशान होकर पलायन को मजबूर थे। अन्नदाता किसान केवल चुनावी मुद्दा रह जाता था। लागत अधिक तथा उत्पादन कम होता था। प्रोक्योरमेण्टर सेण्टर न होने से बिचौलिये हावी थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2017 के पश्चात प्रदेश सरकार के प्रयासों से कृषि तथा किसानों के हित में स्पष्ट नीति बनाई गयी। इसके अन्तर्गत सरकार किसान को बीज प्रदान करने से लेकर उसके उत्पाद को खरीदने तथा उसे वैल्यू एडीशन के साथ जोड़ने का कार्य कर रही है। क्रय केन्द्रों के माध्यम से किसानों को एम0एस0पी0 के रूप में लागत का डेढ़ गुना अधिक मूल्य उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश सरकार पहले से ही सरकारी ट्यूबवेलों और नहरों से निःशुल्क पानी उपलब्ध करा रही है। इसके साथ ही, 16 लाख ऐसे ट्यूबवेलों, जिसका संचालन किसान बिजली कनेक्शन लेकर करता था, जिससे उन्हें बिजली का बिल चुकाना पड़ता था। प्रदेश सरकार ने ऐसे ट्यूबवेलों के बिजली बिल को माफ करते हुए 03 हजार करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन को भुगतान किया। जिन 23 लाख ट्यूबवेलों में बिजली के कनेक्शन नहीं है, उन्हें सोलर पैनल से जोड़ने की कार्यवाही आगे बढ़ायी जा रही है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में नहरों का जाल बिछाया जा रहा है। वर्ष 1972 में सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना बनायी गयी थी। वर्ष 1977 में इस परियोजना का शिलान्यास किया गया था, परन्तु वह पूर्ण नहीं हो सकी थी। प्रदेश सरकार के प्रयासों से वर्ष 2021 में इसे पूर्ण कराया गया। आज इसके माध्यम से 14 लाख हेक्टेयर खेतों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। इसी प्रकार धनराशि, इच्छा शक्ति, एजेण्डे में कृषि व किसान के अभाव के कारण पहले से अधूरी पड़ी कई अन्य परियोजनाओं को पूर्ण करने का कार्य किया गया।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि किसानों की फसलों को जानवरों से बचाने के लिए सोलर फेन्सिंग उपलब्ध करायी जा रही है। देश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में 16 लाख गोवंश के लिए 7,700 निराश्रित गोआश्रय स्थलों का निर्माण किया गया है। प्रदेश सरकार प्रत्येक गाय के भरण-पोषण के लिए 1,500 रुपये प्रतिमाह उपलब्ध करा रही है। उत्तर प्रदेश का यह मॉडल देश में लागू किया जा रहा है। आज बुन्देलखण्ड से अन्ना प्रथा समाप्त हो चुकी है। गोसेवा आयोग को इस दिशा में और अधिक प्रयास करने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। प्रत्येक किसान को फार्मर रजिस्ट्री की व्यवस्था से जोड़ना आवश्यक है। अंश निर्धारण के कार्यक्रम को समय पर आगे बढ़ाना चाहिए, जिससे तकनीक माध्यम से लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समय से प्राप्त हो सके।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस तीन दिवसीय आयोजन में प्रोडक्शन को प्रोडक्टिविटी से जोड़ने तथा प्रोडक्टिविटी को प्रॉफिटेबिलिटी में बदलने तथा प्रॉफिटेबिलिटी से प्रॉस्पेरिटी प्राप्त करने पर चर्चा अवश्य करें, ताकि अन्नदाता किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ उनमें खुशहाली भी लाई जा सके। अन्नदाता किसान खुशहाल होगा, तो समाज और देश भी खुशहाल होगा। तकनीक से कृषि और किसानों की एफिशिएन्सी में वृद्धि की जा सकती है। कृषि में जहां ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए छिड़काव किया जाता है, वहां एक जैसी खेती दिखाई देती है, लेकिन जहां बेतरतीब तरीके से छिड़काव किया जाता है, वहां विषमता दिखाई देती है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस समय असमय बरसात, अतिवृष्टि, ओलावृष्टि, आंधी-तूफान के कारण अन्नदाता किसानों की खेतों में खड़ी फसल नष्ट हुई हैं। आज कृषि से जुड़े इन सभी मुद्दों के सम्बन्ध में एक बैठक की गई है। इस सम्बन्ध में सरकार ने व्यापक कार्ययोजना आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में किसी भी आपदा में जनहानि होने अथवा अन्नदाता किसान, बटाईदार या उसके परिवार के किसी सदस्य के दुर्घटना की चपेट में आने पर तत्काल राहत देने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के अन्तर्गत पीड़ित परिवार को 05 लाख रुपये उपलब्ध कराया जाता है। यह सहायता 24 घण्टे के भीतर अन्नदाता किसानों को मिलनी चाहिए। राहत कोष से पशु हानि पर भी धनराशि तत्काल उपलब्ध होनी चाहिए।
यदि किसी किसान या नागरिक का आवास अग्निकाण्ड, तूफान, अतिवृष्टि की चपेट में आ गया है, तो उसे तत्काल मुख्यमंत्री आवास योजना के अन्तर्गत एक आवास उपलब्ध कराया जाए। हमारा प्रयास होना चाहिए कि अतिवृष्टि व ओलावृष्टि से किसानों को हुए नुकसान को बीमा कम्पनियां कम्पनसेट करें। सरकार के स्तर से प्रत्येक पीड़ित किसान की हर सम्भव सहायता करने के लिए प्रत्येक जिलाधिकारी को आदेश जारी किये गये हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि खेती प्रक्रिया में तकनीक का उपयोग कर पूर्वानुमान के आधार पर कई कार्यों को आसान किया जा सकता हैं। 05 वर्ष पूर्व मीरजापुर और सोनभद्र में आकाशीय बिजली से एक दिन में 30 मौतें हुई थीं। प्रदेश सरकार ने जनपद सोनभद्र में अर्लीवॉर्निंग सिस्टम लगवाया। अर्लीवॉर्निंग सिस्टम से 03 घण्टे पूर्व  सूचना देकर लोगों को जागरूक किया जा सकता हैं। सोनभद्र व मीरजापुर में इसके अच्छे परिणाम सामने आए। जहां एक दिन में 30 मौतें होती थीं, आज वहां यदा-कदा एक या दो मौतें होती हैं। टेक्नोलॉजी इस दिशा में अच्छी भूमिका का निर्वहन कर रही है।
सेटेलाइट के माध्यम से भूमि और मौसम की निगरानी की जानकारी और समय पर व्यापक प्रचार-प्रसार की सुविधा दी जा रही है। प्रदेश में वेदर रडार लगाए जा रहे हैं। ‘इण्टरनेट ऑफ थिंग्स‘ के माध्यम से सेन्सर द्वारा मिट्टी की नमी और पोषण का डाटा एकत्र कर किसान लाभान्वित हो सकते हैं। कृषि में आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस उपयोगी हो सकती है। तकनीक के माध्यम से फसल का रियल टाइम विश्लेषण, रोगों की समय से पहचान तथा उत्पादन का पूर्वानुमान किया जा सकता हैं। बायोटेक्नोलॉजी के माध्यम से अच्छी उत्पादकता वाले बीजों को प्राप्त किया जा सकता हैं।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग कर जलवायु परिवर्तन के परिप्रेक्ष्य के अनुरूप फसलों की उन्नत किस्मों को विकसित कर सकते हैं। कृषि में डिजिटल एग्रीकल्चर प्लेटफॉर्म अर्थात किसान को बाजार से जोड़ने की कार्रवाई के अन्तर्गत मौसम और कीमत की जानकारी उपलब्ध करायी जा सकती है। यह आवश्यक नहीं कि किसान क्रय केन्द्र में अपनी उपज लेकर आएं। किसानों को बाजार में अच्छा दाम मिलने पर अपनी उपज बेचने की स्वतंत्रता दी गई है।
प्रदेश में ‘वन नेशन वन मण्डी’ के नियम को लागू किया गया है। मण्डी शुल्क को आधे से भी कम किया गया है। ए0आई0 आधारित डिजिटल स्वॉयल हेल्थ कार्ड के माध्यम से प्रत्येक किसान को जानकारी प्राप्त हो। किसानों को सीधे मोबाइल पर सलाह और समाधान उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा भूमिका का निर्वहन किया जा रहा है। इन कार्यां को और बड़े स्केल पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि अब समय आ गया है जब लैब-टू-लैण्ड नहीं बल्कि लैब-इन-लैण्ड का उपयोग किया जाए। पहले लैब-टू-लैण्ड के माध्यम से प्रयोगशाला से तकनीक निकाल कर खेती में प्रयोग की जाती थी। अब खेतों को ही प्रयोगशाला बनाने की दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। हमें ऐसी देशी पद्धति विकसित करनी पड़ेगी, जिसके बारे में प्रधानमंत्री जी बार-बार कहते हैं। वह पद्धति प्राकृतिक खेती है।
यह तीन दिवसीय कांग्रेस निश्चित ही अपने लक्ष्यों तक पहुंचेगी। अच्छे शोध पत्रों को प्राप्त कर एक्शन टेकन प्लान आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि प्रदेश के अन्नदाता किसान इससे लाभान्वित हो सकें। प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्र तथा कृषि विश्वविद्यालयों को भी इस अभियान से जोड़ने की आवश्यकता है। एक कृषि विज्ञान केन्द्र में कृषि के 06-07 सेक्टरों के वैज्ञानिक होते हैं। इस गोष्ठी में सम्बन्धित वैज्ञानिकों को बुलाया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद ‘उपकार‘ से सम्बन्धित लघु फिल्म प्रदर्शित की गयी।
कार्यक्रम को कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह ओलख, उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता तथा उत्तर प्रदेश कृषि अनुसन्धान परिषद के अध्यक्ष कैप्टन (सेवानिवृत्त) विकास गुप्ता ने भी सम्बोधित किया।
इस अवसर पर प्रमुख सचिव कृषि श्री रविन्द्र, महानिदेशक उपकार डॉ0 संजय सिंह, महानिदेशक इक्रीसैट डॉ0 हिमांशु पाठक, भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान, लखनऊ के निदेशक डॉ0 दिनेश सिंह सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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