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रामगढ़ताल की लहरों पर बेटियों का दमखम

May 14, 2026

रामगढ़ताल की लहरों पर बेटियों का दमखम

Posted on 14/05/2026
Time 17:13 P.M
GORAKHPUR
Santosh Kumar Singh

गोरखपुर में अस्मिता नेशनल महिला रोइंग लीग का आगाज़

​गोरखपुर 14 मई 2026 ( उप्र समाचार सेवा ) : गोरखपुर शहर का प्रसिद्ध रामगढ़ताल इन दिनों देश की बेटियों के जोश और चप्पू की गूँज से सराबोर है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में आयोजित पाँच दिवसीय अस्मिता नेशनल महिला रोइंग लीग में देशभर से आई महिला खिलाड़ी अपनी प्रतिभा और साहस का परिचय दे रही हैं।

​इस प्रतियोगिता में भारत के विभिन्न कोनों से 16 टीमें और लगभग 275 महिला खिलाड़ी शिरकत कर रही हैं। सुबह से ही ताल के शांत पानी को चीरती नौकाएं और खिलाड़ियों के बीच का अद्भुत तालमेल दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पूर्वांचल के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर महिला रोइंग प्रतियोगिता का आयोजन हो रहा है, जिससे स्थानीय खेल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है।

​प्रतियोगिता को और भी प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए भारी भरकम पुरस्कार राशि रखी गई है । ​कुल पुरस्कार राशि: ₹26,32,500 की विशाल राशि खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए तय की गई है। ​प्रथम पुरस्कार प्रत्येक वर्ग में विजेता टीम को ₹1,55,500 दिए जाएंगे , दूसरे स्थान के लिए ₹1,45,500 और तीसरे स्थान के लिए ₹1,35,500 निर्धारित हैं। ​यहाँ तक कि आठवें स्थान तक आने वाले प्रतिभागियों को भी पुरस्कार राशि (₹50,000) प्रदान की जाएगी।

​यह लीग महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। यह प्रतियोगिता 12 से 16 मई तक संचालित की जा रही है।
​भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के सहयोग से इसका आयोजन रोइंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश रोइंग एसोसिएशन और खेल विभाग इस आयोजन को प्रशासनिक और बुनियादी समर्थन दे रहे हैं।

​“अस्मिता” नाम की यह पहल न केवल महिला खिलाड़ियों को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रही है, बल्कि पूर्वांचल की बेटियों के लिए खेल की दुनिया में नई राहें भी खोल रही है। आयोजकों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से जमीनी स्तर पर छिपी खेल प्रतिभाओं को नई पहचान मिलेगी।

अनोखा है गीता प्रेस का मुख्य द्वार, यहां एक साथ होते हैं अनेक तीर्थों के दर्शन

Posted on 14/05/2026 Time 12.57 P.M Gorakhpur
Santosh Kumar Singh

गोरखपुर, 14 मई 2026 ( उप्र समाचार सेवा )
गीताप्रेस के मुख्य द्वार पर कई तीर्थों के दर्शन एक साथ हो जाते हैं। दुनिया में ऐसा कोई दूसरा द्वार नहीं है जिसमें एक साथ इतने तीर्थ के दर्शन हो सके। चारों दिशाओं से यह द्वार अनूठा दिखता है। वैसे तो गीता प्रेस की ख्याति उसकी पुस्तकों की वजह से पूरे विश्व में है, लेकिन जो लोग गीता प्रेस आते हैं वह इसके मुख्य द्वार के सामने शीश नवाना नहीं भूलते हैं।

गीता प्रेस के मुख्य द्वार पर हिंदू के साथ बौद्ध, जैन एवं सिख धर्मों के पूजा स्थलों का समावेश है। गीता प्रेस का प्रवेश द्वार भूमि से शिखर तक 13 मीटर ऊंचा है। इसकी चौड़ाई 12 मीटर है। यह द्वार खंडों में बनाया गया है। प्रथम खंड में भूमि पर स्थित खंभे हैं, जो दक्षिणभारत के सुप्रसिद्ध गुफा मंदिर, एलोरा के खंभों के आधार पर बने हैं। इसी खंड के ऊपर प्रेस का नाम तथा स्थापना काल हिंदी एवं अंग्रेजी में लिखा गया है।

दूसरा खंड द्वार का मुख्य खंड है। द्वार का मुख्य आकर्षण इस खंड पर बना संगमरमर से बनाया चार घोड़ों का रथ है, जिस पर भगवान श्रीकृष्ण एवं अर्जुन विराजमान हैं। इस रथ का वजन लगभग 15 कुंतल है। यह मूर्ति जयपुर से बनवाकर मंगाई गई थी। तीसरे खंड में चंद्रमा के चित्र के साथ तमाम मंदिरों के दर्शन होते हैं।

गीता प्रेस के मुख्य द्वार में अजंता जलगांव, एलोरा औरंगाबाद, दक्षिणेश्वर कोलकाता, काशी विश्वनाथ वाराणसी, द्वारिकाधीश मंदिर मथुरा, जगन्नाथ मंदिर पुरी उड़ीसा, लिंगराज मंदिर भुवनेश्वर, श्रीराम जानकी मंदिर जनकपुर, सूर्य मंदिर कोणार्कं, मीनाक्षी मंदिर मदुरा, स्वर्ण मंदिर अमृतसर, खजुराहो, सांची, आबू राजस्थान, महाकाल उज्जैन, केदारनाथ उत्तराखंड, बुद्ध गया बिहार के दर्शन लोगों को होते हैं।

फरियादियों की समस्याएं सुनकर डीएम ने दिए त्वरित निस्तारण के निर्देश

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
13/05/2029

गोरखपुर। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने कलेक्ट्रेट स्थित अपने कार्यालय में पहुंचे फरियादियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। इस दौरान जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने भूमि विवाद, राजस्व संबंधित मामलों, पेंशन, आवास, बिजली, जलनिकासी, सड़क तथा अन्य जनहित से जुड़ी समस्याएं डीएम के समक्ष रखीं।
जिलाधिकारी ने एक-एक फरियादी की बात ध्यानपूर्वक सुनते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को मौके पर ही फोन कर समस्याओं के शीघ्र समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा कि शिकायतों के निस्तारण में किसी प्रकार की लापरवाही या ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी और प्रत्येक प्रकरण का गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए।
डीएम दीपक मीणा ने यह भी निर्देशित किया कि जिन मामलों में जांच की आवश्यकता है, उनमें पारदर्शिता के साथ जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और पात्र व्यक्तियों को योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप आम जनता को त्वरित न्याय और राहत मिलनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा की जाए और शिकायतों का निस्तारण तय समय सीमा के भीतर किया जाए। साथ ही फरियादियों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी स्वयं पहल करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।

अब सुबह 7:30 बजे से मिल सकेंगे बंदी, परिजनों को नहीं करना होगा घंटों इंतजार

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
13/05/2026

​गोरखपुर जेल प्रशासन की बड़ी पहल:

​गोरखपुर। जिला कारागार गोरखपुर में बंदियों और उनके परिजनों के लिए मुलाकात की व्यवस्था को अब अधिक सुगम और सरल बना दिया गया है। जेल प्रशासन ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मुलाकात के समय में महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिससे अब परिजनों को चिलचिलाती धूप या लंबी कतारों में घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

​अब तक जेल में बंदियों से मुलाकात की प्रक्रिया सुबह 11:00 बजे के बाद शुरू होती थी। इस व्यवस्था के कारण दूर-दराज के गांवों और अन्य जिलों से आने वाले परिजनों का पूरा दिन जेल परिसर में ही बीत जाता था। भीड़ अधिक होने के कारण कई बार शाम तक लोगों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था।
​जेल प्रशासन ने इस समस्या का संज्ञान लेते हुए अब मुलाकात का समय सुबह 7:30 बजे से निर्धारित कर दिया है।

​जेल अधीक्षक दिलीप पाण्डेय ने बताया कि जेल में प्रतिदिन औसतन 200 से अधिक बंदियों से मिलने के लिए लगभग 500 परिजन पहुंचते हैं। पुरानी व्यवस्था में देरी से प्रक्रिया शुरू होने के कारण परिजनों को भारी असुविधा होती थी। इसे देखते हुए अब सुबह की पाली में भी मुलाकात शुरू करने का निर्णय लिया गया है, ताकि लोग समय से अपने घर वापस जा सकें।

​नई व्यवस्था के फायदे:

​सुबह जल्दी मुलाकात होने से परिजनों का पूरा दिन खराब नहीं होगा।
​दो पालियों में काम होने से जेल गेट पर एक साथ होने वाली भीड़ कम होगी। सुबह के ठंडे समय में प्रक्रिया शुरू होने से बुजुर्गों और बच्चों के साथ आने वाले परिजनों को राहत मिलेगी।
​जेल प्रशासन के इस फैसले की स्थानीय लोगों और बंदियों के परिजनों ने काफी सराहना की है। अब जेल परिसर में लंबी कतारों और अव्यवस्था से काफी हद तक निजात मिलने की उम्मीद है।

मृतक के नाम पर फर्जी व्यक्ति खड़ा कर कराई रजिस्ट्री

Santosh Kumar Singh Gorakhpur
13/05/2026

बाहर नौकरी कर रहे जमीन मालिक की गैरमौजूदगी का उठाया फायदा,

सविता त्रिपाठी पर उठे सवाल, मृतक के नाम पर करोड़ों की संपत्ति का सौदा कराने का दावा

डीएम से गुहार के बाद प्रेस क्लब में फूटा परिवार का दर्द, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

गोरखपुर। जनपद में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न केवल रजिस्ट्री प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर चिंता जताई है। आरोप है कि वर्ष 1996 में मृत हो चुके बृज गोपाल दास शाह के नाम पर वर्ष 2016 में जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। इस पूरे प्रकरण में सविता त्रिपाठी का नाम सामने आ रहा है, जिन पर मृत व्यक्ति को जीवित दिखाकर संपत्ति अपने नाम कराने का आरोप लगाया गया है।
मामला कैंपियरगंज क्षेत्र के अलगटपुर स्थित लगभग चार एकड़ मूल्यवान जमीन से जुड़ा हुआ है। पीड़ित परिवार का कहना है कि जमीन के वास्तविक मालिक उस समय अन्य प्रदेश में नौकरी कर रहे थे, जिसका फायदा उठाकर कथित रूप से यह फर्जीवाड़ा किया गया। आरोप है कि मृतक के नाम से मिलता-जुलता एक व्यक्ति खड़ा कर रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कराई गई।
परिजनों के अनुसार, बृज गोपाल दास शाह की मृत्यु वर्ष 1996 में हो चुकी थी, जिसका प्रमाण सरकारी अभिलेखों में दर्ज है। इसके बावजूद वर्ष 2016 में “बृज गोपाल” नाम के आधार पर रजिस्ट्री कराई गई। उनका कहना है कि दस्तावेजों में नाम की समानता का लाभ उठाकर और पहचान संबंधी कागजातों में हेरफेर कर यह पूरा खेल रचा गया।
परिवार का यह भी कहना है कि इस मामले की जांच पूर्व में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक स्तर से कराई जा चुकी है, जिसमें यह पुष्टि हो चुकी है कि “बृज गोपाल दास” और “बृज गोपाल दास शाह” एक ही व्यक्ति हैं और उनकी मृत्यु 1996 में ही हो गई थी। ऐसे में 2016 में उनके नाम से रजिस्ट्री होना गंभीर सवाल खड़े करता है।
न्याय की मांग को लेकर मृतक के परिजन—पोता, पोती, दामाद एवं अन्य परिजन—जिलाधिकारी दीपक मीणा से मिल चुके हैं और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिजनों ने डीएम को दिए गए प्रार्थना पत्र में फर्जी रजिस्ट्री को निरस्त करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की है।
इसके बाद गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में विजय कृष्ण गर्ग, श्रीमती प्रियमबदा गर्ग, महेंद्र अग्रवाल और सुरेंद्र अग्रवाल सहित अन्य परिजन मौजूद रहे। प्रेस वार्ता के दौरान परिजनों ने भावुक होते हुए कहा, “अगर हमारे मृत बाबा जिंदा हैं, तो उन्हें सामने लाकर खड़ा कर दीजिए। जिनका हमने वर्ष 1996 में अंतिम संस्कार किया, वह अचानक 2016 में जिंदा कैसे हो गए?”
पीड़ित परिवार ने इस पूरे प्रकरण में राजेश यादव पुत्र बैजनाथ यादव, निवासी तिलक नगर, गोरखनाथ को मास्टरमाइंड बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूरे फर्जीवाड़े की साजिश रचने और उसे अंजाम तक पहुंचाने में उक्त व्यक्ति की मुख्य भूमिका रही है।
पीड़ित परिवार ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर प्रभावी रोक लग सके।

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