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श्रीराम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में FIR दर्ज

June 25, 2026

श्रीराम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में FIR दर्ज

Posted on 25.06.2026 Time 09.36 PM , Ayodhya, Shri Ram Janmbhumi Teerth Kshetra Trust, FIR

अयोध्या, 25 जून 2026 (उप्र समाचार सेवा). विशेष जांच दल की रिपोर्ट शासन को मिलने के एक दिन बाद ही कोतवाली में तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एफआईआर दर्ज करा दी है। इसमें मंदिर के मुख्य कर्ताधर्ता रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत 8 लोगों को नामजद किया गया है। मामला गबन, धोखाधड़ी और अनियमितताओं की धाराओं में दर्ज हुआ है।

ट्रस्‍ट के सदस्‍य कृष्‍ण मोहन की श‍िकायत पर FIR दर्ज हुई है।इसमें ये नाम धमाल है।

‎रामाशंकर यादव टिन्नू
अनुकल्प मिश्र
अविनाश शुक्ला
करुणेश पांडेय
लवकुश मिश्र
रमा शंकर मिश्र
सुभाष श्रीवास्तव

June 19, 2026

ज्ञान परंपरा और गोमाता की रक्षा करते हैं अयोध्या के राजाः मुख्यमंत्री

News Posted on 19.06.2026 Friday Time 07.32 PM, Ayodhya, Yogi Adityanath, Jain Muni

*भगवान मुनि सुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल हुए सीएम योगी*

*मुख्यमंत्री ने किया ऋषभदेव जन्मभूमि द्वार एवं 101 भगवान जिनमंदिर का लोकार्पण*

*जिसका स्वयं पर अनुशासन नहीं, वह कैसे दूसरों पर शासन कर सकता हैः सीएम योगी*

*गोरक्षपीठाधीश्वर की जैन परिवारों से अपील- कम से कम एक गाय का खर्च अवश्य उठाएं*

*सीएम ने कहा- उत्तर प्रदेश की धरती पर हुआ सर्वाधिक तीर्थंकरों का प्रकटीकरण*

अयोध्या, 19 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित भगवान मुनि सुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में शामिल हुए। सीएम ने यहां ऋषभदेव जन्मभूमि द्वार एव 101 भगवान जिनमंदिर का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अयोध्या का गौरवशाली इतिहास है। अयोध्या के राजा ज्ञान परंपरा व गोमाता, दोनों की रक्षा करते हैं। सीएम ने आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं से भी अनुरोध किया कि उन्हें गोरक्षा के लिए कुछ जरूर करना चाहिए। भारत में हर परिवार का संस्कार रहा है कि पहला ग्रास गोमाता और अंतिम ग्रास श्वान के लिए होगा। शाम को घर में दीपक जलाने पर चींटियों को आटा-चीनी देते हैं। जीव मात्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना भी ‘जियो और जीने दो’ की प्रेरणा है।

*हर जैन परिवार कम से कम एक गाय का खर्च अवश्य उठाए*
गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गाय दैवीय विभूति है। सबको उसकी रक्षा, संरक्षण, संवर्धन के लिए प्रयास करना चाहिए। उन्होंने जैन परिवारों से अनुरोध किया कि संभव हो तो गोशाला को गोद लें या कुछ गायों के लिए वार्षिक सहयोग कीजिए अन्यथा साल में कम से कम एक गाय का खर्च जरूर उठाइए। दो-तीन बार गोशाला जाकर गोमाता के स्वास्थ्य को भी देखिए। गोमाता स्वस्थ रहेगी तो भारतीय संस्कृति, जैन धर्म व वैदिक सनातन धर्म सुरक्षित रहेगा। एक की सुरक्षा दूसरे की सुरक्षा में निहित है। मंजिल तक पहुंचने के रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन परंपरा एक है।

*भारत की सुरक्षा व संप्रभुता में योगदान देने वाले अभियानों से जुड़ें*
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की कि तीर्थों की पवित्रता को बनाए रखने के लिए स्वच्छता, पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण समेत हर उस अभियान का हिस्सा बनिए, जिसका भारत की सुरक्षा व संप्रभुता में योगदान हो। पीएम मोदी भी नागरिकों से कर्तव्यबोध की बात करते हैं। देश-समाज के लिए हमारा कर्तव्य क्या है, इसका ध्यान रखेंगे तो भारत व भारतीयता शाश्वत रहेगी। सीएम ने विश्वास जताया कि समाज को सद्वृत्ति की ओर अग्रसर करने में जैन समाज सहायक होगा।

*धरती का राजा होता था अयोध्या का राजा*
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिनाथ से चली यह परंपरा कहीं और की नहीं है। प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ भगवान ऋषभदेव ही हैं। अयोध्या भगवान ऋषभदेव की पावन भूमि भी है। वह धरती के पहले राजा हैं। अयोध्या का राजा धरती का राजा होता था। सीएम ने रामायण में भगवान राम व बालि के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि बालि उनसे कहता है कि तुमने मुझे धोखे से मारा है। मेरे राज्य पर तुम्हारा क्या अधिकार था, तब भगवान राम कहते हैं कि तुम्हारा कर्म ही तुम्हारी अधोगति का कारण बना है। सागर, वन से आच्छादित संपूर्ण धरा अयोध्या के राजाओं की है। भगवान ऋषभदेव के पुत्र भगवान जड़ भरत हैं, जिनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा।

*उत्तर प्रदेश की धरती पर सर्वाधिक तीर्थंकरों का प्रकटीकरण*
सीएम ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश का सौभाग्य है कि 24 में से सर्वाधिक तीर्थंकर इस धऱती पर हुए। उसमें से पांच (पहले तीर्थंकर-भगवान ऋषभदेव, दूसरे-भगवान अजितनाथ, चौथे तीर्थंकर भगवान अभिनंदननाथ, पांचवें तीर्थंकर भगवान सुमतिनाथ और 14वें भगवान अनंतनाथ) का प्रकटीकरण अयोध्या में ही हुआ। काशी में चार, श्रावस्ती में एक, हस्तिनापुर में भी तीर्थंकरों की लंबी परंपरा है। कुशीनगर में 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर ने अंतिम उपदेश देकर उस धरती को पवित्र नगरी के रूप में आशीर्वाद दिया था। बीच के कालखंड में लोगों ने उसे फाजिलनगर कर दिया था, अभी हाल में ही मैंने कहा कि वह पावागढ़ है, उसका नाम वही होगा।

*जिसका स्वयं पर अनुशासन नहीं, वह दूसरों पर कैसे शासन कर सकता है*
सीएम योगी ने कहा कि धऱती के राजा सबका संरक्षण, लालन-पालन और अनुशासन की प्रेरणा देते हैं। ‘जियो और जीने दो’ का मंत्र वही दे सकता है, जो आत्म अनुशासन से बंधा हो। नकारात्मक ताकतें आत्म अनुशासन में नहीं रह सकतीं। जिसका स्वयं पर अनुशासन नहीं है, वह दूसरों पर कैसे शासन कर सकता है? इस पवित्र परंपरा ने दुनिया को यही प्रेरणा व संदेश दिया। इस संदेश पर चलकर हम सिर्फ मनुष्य ही नहीं, बल्कि जीव और दुनिया के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त कर सकते हैं। जैन तीर्थंकरों ने साधना व वाणी से विश्व मानवता को विश्व कल्याण की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम में पीठाधीश्वर रविंद्र कीर्ति स्वामी ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने रविंद्र कीर्ति स्वामी को पुष्पगुच्छ देकर जन्मदिवस की बधाई दी। इस अवसर पर जैन साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता जी, चंदनामती माता जी, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी, विधायक वेदप्रकाश गुप्त, अमित सिंह चौहान, अभय सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष रोली सिंह, पुष्पदंत जैन, अमरचंद जैन, कैलाश चंद जैन आदि मौजूद रहे।

May 31, 2026

डिजिटल होते युग के बावजूद पेपर लेस कार्य संभव नहीं: अरविंद कुमार सिंह

*भावी पीढ़ी का पुस्तकों से दूर होना चिंताजनक: डॉ.मंजूषा*

*वरिष्ठ पत्रकार विवेकानन्द पाण्डेय की पुस्तक उठान के दिन का हुआ समारोहपूर्वक विमोचन*

अयोध्या।
हिंदी पत्रकारिता के 200 गौरवशाली वर्ष के अवसर पर शहर के सिविल लाइंस स्थित एक होटल के सभागार में वरिष्ठ पत्रकार विवेकानन्द पाण्डेय की “उठान के दिन” पुस्तक का विमोचन समारोहपूर्वक आयोजित हुआ। इस दौरान पत्रकारिता परिचर्चा और संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
सोशल एक्शन फॉर प्रोग्रेसिव नेशन फाउंडेशन (सपना फाउंडेशन) की ओर से आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार व लेखक अरविंद कुमार सिंह ने कहा की संदर्भ, इतिहास और संस्मरणों को संजोने का सशक्त माध्यम पुस्तक होती है। किसी संस्मरणों को जब संजोया जाता है तब वह जीवंत हो उठते हैं। पत्रकारिता समाज के साथ इतिहास को गढ़ने का कार्य करती है। उन्होंने अपने कई संस्मरणों को साझा करते हुए विमोचित पुस्तक “उठान के दिन” को भविष्य के लिए मिल का पत्थर बताया। कहा कि डिजिटल होते युग में लेस पेपर तो संभव है, पर पेपर लेस कार्य संभव नहीं हैं। जिस दिन लेखन और पठन-पाठन बंद होगा समाज में अस्थिरता पैदा हो जाएगी।


अध्यक्षता कर रहीं राजा मोहन गर्ल्स पीजी कॉलेज (मनूचा) की प्राचार्या डॉ. मंजूषा मिश्रा ने कहा कि आज के दौर में हम पुस्तकों से दूर हो रहे हैं। जो भावी पीढ़ी के लिए बड़ी समय होगा। पुस्तकों का लेखन साहित्य के प्रति प्रेम को सहज ही प्रकट करता है। विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार त्रियुग नारायण तिवारी ने पुस्तक और पत्रकारिता के कई आयामों की विस्तार से चर्चा की। आकाशवाणी अयोध्या केंद्र के सहायक निदेशक (अभियांत्रिकी) अनिल सिंह, कार्यक्रम प्रमुख संजय धर द्विवेदी, उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के प्रदेश अध्यक्ष मणि शंकर तिवारी और एसएसवी इंटर कॉलेज के अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य शिक्षाविद डॉ. वीरेंद्र कुमार त्रिपाठी ने भी समारोह को संबोधित किया।


इसके पहले आपस प्रकाशन के संपादक- प्रकाशक डॉ. विंध्यमणि ने उठान के दिन पुस्तक की विस्तार से चर्चा की। राज्य पुरस्कार से सम्मानित अध्यापक अनूप मल्होत्रा ने स्वागत और सपना फाउंडेशन अध्यक्ष डॉ.स्वदेश मल्होत्रा ने धन्यवाद व्यक्त किया। समारोह का संचालन उठान के दिन पुस्तक के लेखक वरिष्ठ पत्रकार विवेकानंद पाण्डेय विवेक ने किया। कार्यक्रम के आरंभ में अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्वलित किया। अतिथियों को अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। समारोह में प्रमुख रूप से वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. उपेंद्र मणि त्रिपाठी, एडवोकेट शीतला पांडेय, पुलिस उपमहानिरीक्षक कार्यालय में कार्यरत खाकी वाले गुरु उप निरीक्षक रणजीत यादव, आर्ट ऑफ़ लिविंग के शिक्षक अनुज कुमार वैश्य भज्जा, शिक्षक वारिज नयन शर्मा, नंद किशोर उपाध्याय, रमाकांत पाण्डेय, शीला पाण्डेय, व्यवसायी विवेक जैन, रविंद्र कुमार पाण्डेय, भास्कर पाण्डेय, अभिज्ञान यादव, सचिन त्रिपाठी, रामकृष्ण सेवा फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष आकाश गुप्ता, बृजेंद्र दुबे, गायत्री पाण्डेय, सोनी पाण्डेय, प्रज्ञा, श्रद्धा, श्रेया, प्रिया, शशांक मिश्रा, शिवम मिश्रा, सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

April 28, 2026

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में लगी विभूतियों का संघ ने किया सम्मान

Posted on 28.04.2026 Time 10.52 PM , Tuesday, Nagpur, RSS, Shri Ram janmbhumi Ayodhya

कोई देश भारत का उद्धार नहीं करेगा, भारत सारी दुनिया का उद्धार करेगा – डॉ. मोहन भागवत जी

नागपुर, 27 अप्रैल 2026, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति ने श्री क्षेत्र अवधपुरी में प्रभु श्रीरामचंद्र जी के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण, जिन मान्यवरों के मार्गदर्शन में हुआ, उन प्रतिभाओं के सम्मान का कार्यक्रम आयोजित किया। अयोध्या में श्रीराम मंदिर कल्पना से भी अति भव्य बना है। हमको भी अपना काम ऐसे ही करना है। कल्पना से अधिक उत्तम, अधिक भव्य, अधिक सुंदर करना है। ताकि विश्व में धर्म की स्थापना हो। भारत का उत्थान भारत की संतान ही करेगी और कोई देश भारत का उद्धार नहीं करेगा। भारत बड़ा होकर सारी दुनिया का उद्धार करेगा। ये विधि लिखित है। उसको पूर्ण करने में हमारा हाथ लगना चाहिए।

रेशीमबाग स्थित महर्षि व्यास सभागृह में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत, गोविंददेव गिरी जी महाराज, भय्याजी जोशी (अध्यक्ष, डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति)., श्रीधर जी गाडगे (उपाध्यक्ष, डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति). उपस्थित रहे।

उन्होंने कहा कि मंदिर श्री राम जी की इच्छा से बना, जब तक सबकी लकड़ी नहीं लगती, गोवर्धन नहीं उठता। उनकी करांगुली तब तक काम नहीं करती, जब तक बाकी लोग लकड़ी नहीं लगाते। मंदिर भी ऐसे ही बना। राम मंदिर में भारतवर्ष के एक-एक व्यक्ति की लकड़ी लगी है। अब विश्व को धर्म देने वाला भारत खड़ा होना है। राम मंदिर बनने तक हिन्दुस्तान हिन्दू राष्ट्र है कहने पर हंसने वाले लोग थे। आज हंसने वाले लोग ही कह रहे हैं कि हिन्दुस्तान हिन्दुओं का देश है। हमको कहते है कि आप घोषित करो। हम कहते है घोषित करवाने की जरूरत नहीं, जो है सो है। सूरज पूरब से उगता है, ये घोषित करना चाहिए क्या? वह पूरब से ही उगता है। तो भारत हिन्दू राष्ट्र है, यह आज सबको मान्य है।

उन्होंने कहा कि विरोध मन में एक जोश पैदा करता है। उपेक्षा एक जिद पैदा करती है कि हम जो कह रहे हैं वो करके दिखाएंगे। लेकिन अनुकूलता में सुखासीनता आती है। अनुकूलता को नकार तो नहीं सकते। देश के लिए लाभ है, समाज के लिए लाभ है। परंतु उसमें अपने मन में समाधान नहीं आना चाहिए। राम राज्य केवल राजा के कारण नहीं होता। प्रजा के कारण भी होता है। मंदिर बनाने में जिन सब लोगों का योगदान हुआ, उस कृतज्ञता का ज्ञापन ही इस सत्कार समारंभ द्वारा हमने किया है। उन्होंने अपना काम किया, हमको अपना काम करना है।

मोहन भागवत जी ने कहा कि सनातन धर्म का उत्थान होने के लिए भारतवर्ष का उत्थान अवश्यम्भावी है। 150 साल पहले योगी अरविंद जी ने घोषित कर दिया है। जैसे-जैसे एक-एक लकड़ी लगेगी, वैसे-वैसे भगवान की करांगुली का बल इस संकल्प के पूर्ति के लिए प्रवाहित होता रहेगा। आप ऐसा विचार कीजिए कि 1857 से उत्थान की प्रक्रिया शुरू हो गई। 2014 में लंदन के गार्डियन ने लेख लिखा – ऑन दिस डे द इंडियंस हैव फाइनली सेड गुड बाय टू द ब्रिटिश टेक्निकली। हमने गुड बाय तो 15 अगस्त 1947 को ही कर दिया था, परंतु अभी भी हम निश्चित नहीं थे।

भारत का उत्थान होना है। लेकिन भारत क्या है? कौन सा उत्थान होना है? भारत इंडिया है क्या? इस पशोपेश में सारा समय जा रहा था। इतना बड़ा आंदोलन नहीं होता तो मंदिर बनता क्या? इतना बड़ा आंदोलन हो गया। लेकिन सत्ता में लोग राम मंदिर बनाने वाले नहीं बैठते तो राम मंदिर बनता क्या? राम मंदिर बनने का निर्णय हो गया, लेकिन नींव बनाने वाले नहीं मिलते तो आगे कैसे खड़ा होता? भारतवर्ष के एक-एक व्यक्ति की लकड़ी लगी है। तब श्री राम की करांगुली ने अपना चमत्कार दिखाया है। यह प्रक्रिया है, ये चलेगी।

उन्होंने कहा कि विश्व को धर्म देने वाला भारत खड़ा होना है। संघ की 100 साल की यात्रा कैसे चली? संघ के पास तो कुछ नहीं था। ना प्रसिद्धि थी, ना सत्ता थी, ना प्रचार था, ना साधन थे। डॉ. हेडगेवार जी को अनुयायी मिले और एक श्रद्धा व विश्वास ले चले – हिन्दुस्तान हिन्दू राष्ट्र है। शुरू में लोग हंसते थे, लेकिन आज मान रहे हैं। उस समय सब लोग खिल्ली उड़ाते थे। उस समय के कार्यकर्ताओं के मन में श्रद्धा थी, डॉ. जी के वचनों पर विश्वास था, उसके कारण सब बातों के बावजूद काम करते रहे। पतवार चलाते जाएंगे, मंजिल आएगी…आएगी, मंजिल कब आएगी किसी को पता नहीं, पर पतवार चलाना छूटा नहीं। श्रद्धा विश्वास के साथ शुरू किया और करते रहे।

उन्होंने कहा कि श्री राम के गुणों का वर्णन जैसे रामायण में है, राम राज्य के आधार के नाते वैसे राम राज्य की प्रजा कैसी थी, इसका भी वर्णन है। अयोध्या में मंदिर निर्माण हो गया, उसकी व्यवस्था के लिए एक विश्वस्त मंडल बना है। पर अब, प्रत्येक मन की अयोध्या बनाकर राष्ट्र का मंदिर खड़ा करना है, वह काम हम सबको करना पड़ेगा। राम राज्य की प्रजा जैसा आचरण मेरा बने, मेरे परिवार का बने और हमारे कारण अपने समाज में उस आचरण का प्रचार प्रसार हो। प्रत्यक्ष आचरण शुरू हो। यह हम करेंगे तो भगवान की इच्छा तो है ही कि दुनिया को धर्म देने वाला भारत खड़ा होना चाहिए। कितने जल्दी होगा, यह हमको तय करना है। हम सब लोग लगेंगे तो विश्व में फैले हिन्दू समाज की इतनी शक्ति है कि अगर सोच कर शुरू करेगा तो एक दिन में कर देगा।

छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्यारोहण के बाद देश में परिवर्तन

भय्याजी जोशी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्यारोहण अवसर के बाद देश में एक परिवर्तन की प्रक्रिया गतिमान हुई थी। मुगलों का साम्राज्य समाप्त हुआ। अंग्रेजों का आगमन होना शुरू हुआ था। लेकिन एक संघर्ष का कालखंड लगभग समाप्त हुआ। उसके बाद भी स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए एक लंबा अवसर गया, राह देखनी पड़ी। यह परिवर्तन की प्रक्रिया छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्यारोहण से शुरू हुई वो नित्य गतिमान होती रही और एक-एक कदम भारत आगे बढ़ता गया। सब प्रकार के आक्रांताओं की निशानियां वेदना दायक रहती है। ऐसे सारे चिन्हों को दूर करने का प्रयास भी एक कालखंड में प्रारंभ हुआ। उसी प्रक्रिया में अयोध्या के राम जन्मभूमि के स्थान पर मंदिर निर्माण किया गया। आक्रांताओं के एक चिन्ह मिटाने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। एक संघर्ष लंबा चला है और यह छोटा संघर्ष नहीं है। 400 वर्षों के निरंतर संघर्ष, एक लाख से अधिक लोगों का बलिदान और उसके बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया। उस कानूनी प्रक्रिया के बाद उस स्थान पर मंदिर निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।

भारत में मंदिरों की कमी नहीं है। राम मंदिर तो स्थान-स्थान पर है। लोग प्रश्न पूछते थे कि राम मंदिर तो इतने स्थानों पर है, अयोध्या की विशेष बात क्या है? तो एक अपमान के कलंक को मिटाए बिना राष्ट्र भाव प्रबल कैसे हो सकता है? और इसलिए राष्ट्रभक्त लोग राष्ट्र का प्रबल भाव अंतकरण में रखने वाले समाज के लोग खड़े हुए। यह मंदिर हिन्दू समाज की पुनः प्रतिष्ठा का प्रतीक है। हिन्दू समाज के सम्मान की प्रतिष्ठा का प्रतीक है। इसलिए इस मंदिर का संदर्भ उत्तर प्रदेश अयोध्या वासी यहां तक सीमित नहीं है।

भगवान राम के जीवन के संदर्भ में तो हम बहुत कुछ बातें जानते ही हैं। आज भी आदर्श व्यवस्थाएं बताते समय राम राज्य की ही कल्पना को रखा जाता है। इसलिए जब कहा गया कि इस मंदिर से राष्ट्र निर्माण का कार्य तो राष्ट्र निर्माण में राज्य की भी एक भूमिका होती है। उस प्रकार का आदर्श हम सबके सामने रहे। यह अयोध्या के मंदिर का संदेश है। इसलिए केवल पत्थरों का और मजदूरों ने बनाया हुआ एक शिल्प के नाते नहीं है। शायद शिल्प के नाते भी अच्छे मंदिर भारत के अंदर होंगे। ये राष्ट्र भाव के प्रगटीकरण का एक प्रतीकात्मक शिल्प हम सबके सामने है।

गत पांच वर्षों से लगातार परिश्रम से इस भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है। स्वाभाविक रूप से जिन्होंने बड़ी ऊर्जा शक्ति लगाई, ऐसे बंधुओं का नागपुर बुलाकर उनके योगदान का सम्मान किया जाए। सम्मान तो प्रतीकात्मक होता है। काम करने वाले आज यहां पर जितने हैं, उससे 100 गुना वहां पर थे। लेकिन एक प्रतीकात्मक रूप में कुछ लोगों को यहां पर निमंत्रित किया गया।

मंदिर निर्माण में भविष्य की चुनौतियों पर भी रखा गया ध्यान

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय जी ने कहा कि विचार भी था, विश्वास भी था, लेकिन यह कल्पना नहीं थी कि ऐसा बन जाएगा। यह विचार था कि 1000 साल आयु के लिए मंदिर बनना चाहिए। अब 1000 साल की बिल्डिंग कौन सी होती है? यह तो बात जानकारी में नहीं थी। इतना ही जानते थे कि रामेश्वरम, मदुरई, तंजावुर, कोणार्क 1000 साल से खड़े हैं। उससे भी अधिक आयु से खड़े हैं। तो विचार आया कि 1000 साल के लिए अगर बनाना है तो फिर उसमें लोहा नहीं हो सकता। मंदिर में एक ग्राम लोहे का भी उपयोग नहीं है। जमीन के नीचे भी नहीं है, जमीन के ऊपर भी नहीं है। विशेषज्ञों ने कहा कि सीमेंट की आयु 150 साल से ज्यादा नहीं है। उसके बाद वह शक्तिहीन हो जाता है। बाइंडिंग फोर्स खत्म हो जाती है। तो धरती के ऊपर कंक्रीट नहीं है और धरती के नीचे कंक्रीट है तो उसमें सीमेंट न्यूनतम से न्यूनतम है। पत्थर को पत्थर से कैसे जोड़ेंगे? तो जितनी पत्थर की आयु, उतनी आयु तांबा की होती है तो तांबे से जोड़ेंगे। अब यह टेक्निक कौन जानता है? कहीं इस प्रकार की तकनीक का अध्ययन नहीं है। कोई किताब नहीं, कहीं पढ़ाया नहीं जाता। तो यहां जो कुछ हुआ सब एक प्रकार का रिसर्च भी हुआ और कार्य भी हुआ। अगर केवल हम कहेंगे कि ट्रस्ट के माध्यम से हुआ तो शायद हम सच्चाई से बहुत दूर जाएंगे।

मंदिर निर्माण का दायित्व एलएंडटी ने लिया, उन्होंने कम से कम 250 वेंडर्स का सहयोग लिया और इन सब वेंडर्स के साथ 6000 कारीगर अपने-अपने स्थानों पर अयोध्या में काम करते रहे। यह समाज के स्वैच्छिक समर्पण से बना हुआ स्थान है। सबका योगदान है, 42 दिन में 10 करोड़ लोगों ने योगदान दिया। लगभग एक लाख कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर हाथ फैलाया, और शायद हिन्दुस्तान का पहला प्रयोग माना जाएगा कि 42 दिन में 3000 करोड़ बैंक में आ गया। स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक की कम से कम 25,000 ब्रांच बैंक शाखाओं के माध्यम से धन ट्रांसफर होकर अयोध्या पहुंचा। मंदिर निर्माण के लिए समाज ने धन दिया है।

यह हिन्दुस्तान के गौरव का मंदिर है। आपके सम्मान का मंदिर है और हम सबको अपने को भाग्यशाली ही मानना चाहिए कि हमारे रहते हुए यह काम पूरा हुआ।

 

राम मंदिर यह पूर्णाहुति नही, अभी राम राज्य लाना है

गोविंददेव गिरी जी महाराज ने कहा कि डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति ने यद्यपि इसे सम्मान कहा होगा। हम पूज्य डॉक्टर जी के प्रसाद के रूप में उसका स्वीकार करते हैं। पूज्य डॉक्टर जी की प्रेरणा 100 वर्षों से कार्य कर रही है और उसी के फलीभूत हम आज उस ऊंचाई तक पहुंच गए हैं, जहां पहुंचना बहुत कठिन लगता था। बहुत कठिन लगता था क्योंकि वातावरण इस प्रकार का था। भगवान श्री राम का मंदिर बनाने का प्रयास तो हम लोग कर रहे थे। लेकिन ऐसे-ऐसे लोग सत्ता में बैठे थे जो सर्वोच्च न्यायालय में जाकर एफिडेविट दे रहे थे कि भगवान श्री राम काल्पनिक हैं। भगवान श्री राम हुए ही नहीं और रामसेतु भी मैनमेड नहीं है। भगवान श्री राम के अस्तित्व को नकारने, उनको काल्पनिक बताने जैसे वातावरण से यहां तक कि जो अत्यंत कठिन यात्रा हो सकी है। इसका कारण केवल और केवल संघ की शिक्षा और संघ की दीक्षा है। संघ ने हम लोगों को सहना सिखाया। सह करके भी प्रलोभनों से दूर रहना सिखाया। यह सिखाया कि जो कुछ करना है, वह अपने लिए नहीं करना है।

तेरा वैभव अमर रहे मां हम दिन चार रहें न रहें, इस प्रकार के मंत्र को लेकर प्रयास करने वाले अगणित लोग एक शताब्दी तक काम करते रहे हैं। मंदिर का निर्माण केवल मंदिर निर्माण की प्रक्रिया  आरंभ हुआ, उससे नहीं हुआ है। एक शताब्दी तक जो यज्ञ चला है, उस यज्ञ की पूर्णाहुति के रूप में यह मंदिर खड़ा हुआ है। प्रतिनिधि के रूप में याद करना चाहता हूं। हमारे परम पूज्य अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी, हमारे सभी संतों के प्रतिनिधि हैं, प्रतीक हैं। इसलिए हम अपनी वाणी से उनका पूजन करते हैं। हम अपनी वाणी से उनका अभिनंदन करते हैं।

आजकल मैं अपनी कथा में कहते रहता हूं, मंदिर भव्य बनाएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। यह तो हो गया। राम राज्य भी लाएंगे, यह अभी तक हम लोगों का कार्य बाकी है। राम जी का मंदिर यह पूर्णाहुति नहीं है। यह वाक्य का पूर्ण विराम नहीं है। अत्यंत बुद्धिमत्ता के साथ राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र का जो न्यास बनाया गया, उसमें भी यह बात उल्लेखित है कि हम लोगों को आगे जो प्रयास करना है, वह राम राज्य के लिए करना है और इसलिए जिनका सम्मान किया गया, उन लोगों को यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि यह अंतरिम है, इंटरवल का प्रसाद है। आगे हम लोगों को अभी तक बहुत काम करना है। यह अब तक का प्रसाद है और आगे के लिए पाथेय है। यह मार्गक्रमण हम लोगों को करना ही होगा।

भगवान श्री राम हमारे राष्ट्र जीवन के सर्वोच्च आदर्श है। आसेतु हिमालय संपूर्ण भारत को बांधने वाला यदि कोई एक शब्द है तो वह शब्द राम ही हो सकता है। प्रभु ने सबको जोड़ कर अपना कार्य किया। लेकिन यह कार्य करते समय भगवान को भी तपना पड़ा। भगवान को भी बहुत बहुत कष्ट झेलने पड़े। उनको भी वनवास सहना पड़ा। इसीलिए राम बन गए। भगवान श्री राम के सारे गुणों की परीक्षा उनके वनवास काल में होती है।

संघ देशभक्ति पढ़ाने वाला एक खुला विश्वविद्यालय है और इसलिए इस देश की सेवा करना, इस देश की भक्ति करना या एकमात्र मंत्र देकर और सारे स्वयंसेवक अपने-अपने क्षेत्रों में जो-जो काम करते रहे हैं, उन कामों ने अब रंग लाया है। लेकिन अभी बहुत कुछ बाकी है। जो पाया वो अच्छा है, लेकिन जो खोया उसको भी भूल नहीं जाएं। ऐसा विचार करके सतत अभी भी कार्य करते रहना पड़ेगा।

इन विभूतियों का हुआ सम्मान

1). श्री नृपेन्द्र जी मिश्र, 2). श्री जगदीश जी आफळे, 3). श्री गिरीश जी सहस्त्रभोजनी, 4). श्री जगन्नाथ जी गुळवे, 5). श्री आशिष जी सोमपुरा, 6). श्री निखिल जी सोमपुरा, 7). श्री अरुण जी योगिराज, 8). श्री जय काकतीकर जी, 9). श्री मनिष जी त्रिपाठी, 10). श्री सत्यनारायण जी पाण्डे, 11). श्री अनिल जी सुतार, 12). श्री केशव जी शर्मा, 13). श्री विनोद जी शुक्ला, 14). श्री राजीव जी दुबे, 15). श्री मनीष जी दाधीच, 16). श्री विनोद जी मेहता, 17). श्री अंकुर जी जैन, 18). श्री राजू कुमार सिंह जी, 19). श्री ए. वी. एस. सूर्या श्रीनिवास जी, 20). श्री नरेश जी मालवीय, 21). श्री परेश जी सोमपुरा, 22). श्री नाथ अय्यर जी, 23). श्री संजय जी तिवारी, 24). श्री शरद बाबू जी, 25). श्री अनिल जी मिश्र, 26). श्री गोपाल जी, 27). श्री चम्पतराय जी, 28). पू. गोविंददेव गिरी महाराज जी, 29). श्री वासुदेव जी कामत, 30). श्री रमजानभाई जी

 

March 28, 2026

Ayodhya Yaja Fire: यज्ञ पंडाल में लगी आग, कोई जनहानि नहीं

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Posted on 28.03.2026 Time 04.13 PM Saturday, Ayodhya

अयोध्या, 28 मार्च 26, सरयू तट पर किए जा रहे लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के अंतिम दिन पंडाल में आग लग गई। पंडाल पूरी तरह जलकर राख हो गया। किसी जनहानि की सूचना नहीं है।

जानकारी के अनुसार प्रदेश के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने सरयू तट पर 1251 कुण्डी लक्ष्मी नारायण महायज्ञ आयोजित किया। आज यज्ञ का अंतिम दिन था। याद स्थल पर मंत्री के साथ स्थानीय विधायक अभय सिंह और अनेक बीजेपी नेता मौजूद थे।

यज्ञ की समाप्ति के बाद पंडाल में आग लग गई। इससे पूरा पंडाल धू धू कर जल उठा। हालांकि आग लगने से पहले लोग वहां से निकल चुके थे। फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंच कर आग पर काबू पाया।

मंत्री दयाशंकर सिंह का कहना है कि यज्ञ पूर्ण होने के बाद आग लगी है। पूर्ण आहुति भी हो चुकी थी।अगले कारणों की जांच कराई जाएगी।

Ayodhya, March 28 A fire broke out at the pandal on the last day of the Laxmi Narayan Mahayagya being performed on the banks of the Saryu, on March 26. The pandal was completely burnt to ashes. No casualty has been reported. State Transport Minister Dayashankar Singh organised 1251 Kundi Laxmi Narayan Mahayagya at Saryu beach. Today was the last day of the Yajna. Local MLA Abhay Singh and several BJP leaders accompanied the minister at the memorial site.

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