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मुरादाबाद में सांस्कृतिक महोत्सव उदीषा का उद्घाटन

January 22, 2026

मुरादाबाद में सांस्कृतिक महोत्सव उदीषा का उद्घाटन

https://x.com/Comm_Moradabad/status/2013287427574833556?t=bdt1z8vIuIKQIBv9r6NydQ&s=08

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Ashutosh Rana inUdeesha Chaupala Mahotsav Moradabad

मुरादाबाद के गांधी मैदान में उदीषा चौपाला महोत्सव का उद्घाटन एक्टर आशुतोष राना ने किया

आशुतोष राणा ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया शुभारम्भ

मुरादाबाद, 22 जनवरी 2026 (उ.प्र.समाचार सेवा)। बहुप्रतीक्षित, बहुआयामी सांस्कृतिक महोत्सव का शुभारम्भ आज अपरान्ह मण्डल के जनप्रतिनिधियों, राष्ट्रीय ख्याति के रंगमंचीय, सिने जगत और अधिकारियों की उपस्थिति में हुआ। बसंत पंचमी की पूर्व संध्या से आरम्भ हुआ साहित्योत्सव उदीषा चौपाला उत्तर प्रदेश दिवस और गणतंत्र दिवस के गौरव को समेटे हुए है। चार दिवसीय महोत्सव में जहां विविध सांस्कृतिक आयामों का आगाज होगा, वहीं विविध क्षेत्रों की प्रतिभाओं का मुरादाबाद के इस साहित्य मंच पर आगमन हो रहा है।

उदीषा चौपाला साहित्योत्सव में मंडलायुक्त मुरादाबाद आंजनेय कुमार सिंह

उदीषा साहित्यात्सव के उदघाटन समारोह में दीप प्रज्ज्वलित करते हुए मंडलायुक्त मुरादाबाद आंजनेय कुमार सिंह

दिल्ली मार्ग स्थित बुद्धि बिहार के गांधी मैदान में आयोजित हो रहे उदीषा चौपाला का विधिवत उद्घाटन अपरान्ह 2 बजे फिल्म जगत की पहचान आशुतोष राणा ने किया। इस अवसर पर विधान परिषद् सदस्य डा. जय पाल सिंह व्यस्त एवं सत्यपाल सिंह सैनी विधायक रितेश गुप्ता एवं रामवीर सिंह, महापौर विनोद अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष डा. शैफाली चौहान, मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह, पुलिस उपमहानिरीक्षक मुनिराज, स्वामी कैलाशानन्द जी महाराज, जिलाधिकारी अनुज सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सत्यपाल अंतिल, कुलपति गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय प्रो.सचिन माहेश्वरी, नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल, मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अनुभव सिंह, गुरुकुल चोटीपुरा की प्रमुख डा. सुमेधा, बाल आयोग के पूर्व अध्यक्ष डा. विशेष गुप्ता समेत नगर के अनेक गणमान्य व्यक्ति, साहित्यकार, रंगमंच कलाकर और उद्यमी उपस्थित थे।

Udeesha Chaupala

मुरादाबाद में उदीषा चौपाला के मंच पर विधान परिषद् सदस्य डा जय पाल सिंह व्यस्त, मेयर विनोद अग्रवाल और मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह का स्वागत

उदीषा में क्या है खास

उदीषा साहित्योत्सव विविध आयामी है। इसके कई मंच होंगे। इनमें साहित्य मंच पर मुरादाबाद मंडल के साहित्य और लेखन की चर्चा होगी, तो पुस्तक मेले में ख्यातिनाम साहित्यकारों, लेखकों की पुस्तकें प्रमुख प्रकाशकों के स्टाल पर मिलेंगीं। रंगमंच में भारत की विलक्षण कलाओं, गायन, मंचन से लेकर सांस्कृतिक नृत्य की प्रस्तुति होगी। इसमें खासतौर से पारसी नाटक की विधा से दर्शक एक बार परिचित होंगें तो शास्त्रीय संगीत और नृत्य के साथ ओडिसी, कथक जैसी प्रस्तुतियां भी यहां मिलेंगी। मुरादाबाद की रामलीला शैली को उदीषा के मंच पर सजीव मंचन के रूप मे देखा जा सकेगा। बरेली के राधेश्याम कथावाचक की नाटक और गायन शैली को यहां एक बार फिर जीवंत किया जाएगा।

वंदे मातरम के 150 वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय भावना को प्रदर्शित करती थीम पर राष्ट्र भक्ति की अनुभूति आगंतुकों को होगी।

January 21, 2026

मातृशक्ति की भव्य कलश यात्रा से नगर में गूंजे राष्ट्रभक्ति के नारे

Hathras, Matra Shakti Sammelan

मातृशक्ति की भव्य कलश यात्रा से नगर में गूंजे राष्ट्रभक्ति के नारे

कार्यक्रम में उपस्थित पालिकाध्यक्ष स्वेता दिवाकर व अन्य जनप्रतिनिधि

हाथरस, 21 जनवरी 2026, दाऊजी महाराज हिन्दू सम्मेलन समिति के तत्वावधान में मातृशक्ति द्वारा हिन्दू सम्मेलनों के जनजागरण के उद्देश्य से नगर में विशाल कलश यात्रा श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ निकाली गई। कलश यात्रा में महिलाएं सिर पर कलश धारण कर राष्ट्रभक्ति और पारंपरिक गीतों की धुन पर नाचते-गाते चलती रहीं। भगवा पताकाएं लहराती रहीं और जय श्री राम, भारत माता की जय के नारों से वातावरण देशभक्ति मय हो गया।
कलश यात्रा पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय से प्रारंभ होकर घंटाघर, नजिहाई बाजार, मोती बाजार, नयागंज, चक्की बाजार, सर्कुलर रोड, कमला बाजार और रामलीला ग्राउंड होते हुए पुनः पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय पर संपन्न हुई। मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर यात्रा का स्वागत किया गया। भव्य रूप से सजी बग्घी में भारत माता के स्वरूप में सजी बाल कन्या आकर्षण का केंद्र रही, जहां-जहां यात्रा पहुंची वहां भारत माता की आरती उतारी गई।कलश यात्रा से पूर्व कार्यक्रम को संबोधित करते हुये राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ब्रजप्रान्त प्रचारक धर्मेन्द्र ने मातृशक्ति से हिन्दू सम्मेलनों में सहभागिता करने का आह्वान करते हुये कहा  कि हिंदू सम्मेलन का उद्देश्य समाज को जोड़ना, सांस्कृतिक मूल्यों को जाग्रत करना और आने वाली पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि सभ्य एव संस्कारित समाज निर्माण में मातृशक्ति  का योगदान महत्वपूर्ण होता है। मातृशक्ति संस्कृति और परंपराओं की संरक्षक होने के साथ समाज को एक नई दिशा देती है। एकजुट कर सशक्त परिवार और समाज बनाती है।  हम सभी अपनी जिम्मेदारी के लिये आगे बढ़कर आयेंगे तो निश्चित ही एक सांस्कारिक समाज के साथ सशक्त और विकसित राष्ट्र का निर्माण होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्ष  दीप्ति वार्ष्णेय ने कहा कि नारी शक्ति समाज की रीढ़ है और ऐसे आयोजनों के माध्यम से महिलाओं की सहभागिता और नेतृत्व क्षमता को नया आयाम मिलता है।
कार्यक्रम का संचालन सारिका बहन ने किया।
कलश यात्रा में महिला जनप्रतिनिधि विधायक सदर अंजुला सिंह माहौर , जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय ,पालिकाध्यक्ष स्वेता चौधरी , ब्लॉक प्रमुख हाथरस पूनम पांडेय  ने बढ़चढ़ कर भाग लिया।
इस अवसर पर रूमी अग्रवाल , ऋतु गौतम ,स्मृति पाठक , दीप्ति वार्ष्णेय ,प्रियंसी वार्ष्णेय , संध्या आर्य  ,बबली चाहर , सारिका ,प्रगति कौशिक , अखिलेश गुप्ता ,पूनम सेंगर , दीक्षा कुशवाह , माधवी सिंह ,शालनी पाठक , उषा पाठक , कवियत्री मीरा दीक्षित , दिशा कुशवाह आदि काफी संख्या में मातृशक्ति मौजूद रही।

‘विकसित भारत’ के लक्ष्य में विधायिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण: ओम बिड़ला

लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं को नियोजित गतिरोध पर चेताया

Lok Sabha Ahyaksh Om Bidla address 86th AIPOC

सदन में नियोजित गतिरोध पर दलीय नेताओं को चेताया

86वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) लखनऊ में संपन्न; लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने समापन सत्र को किया संबोधित

विधायिका को अधिक प्रभावी और जनोपयोगी बनाने के लिए ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) तैयार किया जाएगा: लोक सभा अध्यक्ष

राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जानी चाहिए: लोक सभा अध्यक्ष

Disruption नहीं, Discussion और Dialogue की संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा: लोक सभा अध्यक्ष

पीठासीन अधिकारी संविधान के प्रहरी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के संरक्षक हैं: लोक सभा अध्यक्ष

लखनऊ; 21 जनवरी, 2026: उत्तर प्रदेश विधान भवन, लखनऊ में 19 से 21 जनवरी, 2026 तक आयोजित 86वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) आज लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला के समापन भाषण के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
सम्मेलन के समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्य सभा के  उपसभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के  सभापति एवं उत्तर प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष ने अपने विचार व्यक्त किए।

अपने समापन भाषण में लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि विधायिका को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के लिए एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) तैयार किया जाएगा, जिससे देशभर के विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, संवाद की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में वृद्धि हो सके। उन्होंने इस संबंध में एक समिति के गठन की जानकारी भी दी।
श्री बिरला ने कहा कि राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विधानमंडल जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति का एक प्रभावी मंच बन सकें। उन्होंने कहा कि सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही अधिक सार्थक, गंभीर और परिणामोन्मुख चर्चा संभव होगी।

नियोजित गतिरोध लोकतंत्र के लिए हानिकारक 

लोक सभा अध्यक्ष ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी संबोधित किया। आगामी बजट सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के बारे में सवाल का जवाब देते हुए, लोक सभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में लगातार नियोजित गतिरोध और व्यवधान देश के लोकतंत्र के लिए उचित नहीं हैं। जब सदन में व्यवधान होता है, तो सबसे अधिक नुकसान उस नागरिक का होता है जिसकी समस्या पर चर्चा होनी थी। उन्होंने कहा कि हमें Disruption नहीं, बल्कि Discussion और Dialogue की संस्कृति को सुदृढ़ करना होगा।

उन्होंने सभी दलों के नेताओं व सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग देने की अपील की तथा कहा कि लोकतंत्र में लोक सर्वोपरि है, और जनता के प्रति हमारी जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर दिन और हर क्षण है।
श्री बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी केवल कार्यवाही संचालित करने वाले नहीं होते, बल्कि वे संविधान के प्रहरी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के संरक्षक होते हैं। उनकी निष्पक्षता, संवेदनशीलता और दृढ़ता ही सदन की दिशा तय करती है।

86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में कुल छह महत्वपूर्ण संकल्प पारित किए गए

संकल्प संख्या 1 – सभी पीठासीन अधिकारी अपनी-अपनी विधायिकाओं के कार्य संचालन के प्रति स्वयं को पुनः समर्पित करेंगे, ताकि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान दिया जा सके।

संकल्प संख्या 2 – सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाकर राज्य विधायी निकायों की न्यूनतम तीस (30) बैठकें प्रति वर्ष की जाएँ तथा विधायी कार्यों के लिए उपलब्ध समय और संसाधनों का रचनात्मक एवं प्रभावी उपयोग किया जाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाएं जनता के प्रति उत्तरदायी हो सकें।

संकल्प संख्या 3 – विधायी कार्यों की सुगमता बढ़ाने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को निरंतर सुदृढ़ किया जाएगा, जिससे जनता और उनकी विधायिकाओं के बीच प्रभावी संपर्क स्थापित हो सके तथा सार्थक सहभागी शासन सुनिश्चित किया जा सके।

संकल्प संख्या 4 – सहभागी शासन की सभी संस्थाओं को आदर्श नेतृत्व प्रदान करना निरंतर जारी रखना, ताकि राष्ट्र की लोकतांत्रिक परंपराएँ और मूल्य और अधिक गहरे तथा सशक्त बन सकें।

संकल्प संख्या 5 – डिजिटल प्रौद्योगिकी के कुशल उपयोग के क्षेत्र में सांसदों एवं विधायकों की क्षमता निर्माण का निरंतर समर्थन तथा विधायिकाओं में होने वाली बहसों और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु शोध एवं अनुसंधान सहायता को सुदृढ़ करना।

संकल्प संख्या 6 – विधायी निकायों के कार्य संपादन का वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर मूल्यांकन एवं तुलनात्मक आकलन (बेंचमार्किंग) करने हेतु एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) का निर्माण, जिससे जनहित में अधिक उत्तरदायित्व के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने हेतु अनुकूल वातावरण स्थापित हो सके।

तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई।
• पारदर्शी, कुशल एवं नागरिक-केंद्रित विधायी प्रक्रियाओं हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग,
• विधायकों की क्षमता-वृद्धि द्वारा कार्यकुशलता में सुधार एवं लोकतांत्रिक शासन को सुदृढ़ करना, तथा
• जनता के प्रति विधायिकाओं की जवाबदेही।

इस सम्मेलन में देश के 24 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से 36 पीठासीन अधिकारियों ने भागीदारी की। इस प्रकार सहभागिता की दृष्टि से 86वाँ AIPOC अब तक का सबसे बड़ा सम्मेलन रहा।
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन जैसे मंच लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच सहयोग को बढ़ाते हैं, आपसी समन्वय को मजबूत करते हैं और शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
श्री बिरला ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश विधान सभा, विधान परिषद, लोक सभा एवं राज्य सभा सचिवालय, तथा सभी प्रतिभागी पीठासीन अधिकारियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया।

January 20, 2026

एटा में चार हत्याओं का कातिल निकला दबा कारोबारी बेटा, 5 साल के मासूम ने दी 4 चिताओं को मुखाग्नि

Kotwali Etah

पुलिस की गिरफ्त में चार हत्याओं का आरोपित

एटा 20 जनवरी उप्रससे। कोतवाली नगर क्षेत्र में दवा कारोबारी बेटा ही अपने मां-बाप, पत्नी और बेटी का कातिल निकला है। पुलिस ने मंगलवार को 24 घंटे के भीतर हत्याकांड का खुलासा कर दिया।

 

अलीगढ़ रेंज के DIG प्रभाकर चौधरी ने बताया- कमल सिंह शाक्य ने ही पिता, मां, पत्नी और छोटी बेटी की बेरहमी से हत्या की थी। बेटी की शादी अगले महीने 11 फरवरी को तय थी। शादी चंडीगढ़ में अनुराग सक्सेना से होनी थी। शादी के लिए चार लाख का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। पत्नी कमल सिंह को ताना मारती थी। इसी बात को लेकर सोमवार दोपहर कमल का पत्नी से झगड़ा हुआ था। गुस्से में उसने पहले पत्नी की हत्या की। बाद में माता-पिता और बड़ी बेटी को भी मार दिया। कमल खुद को भी खत्म करना चाहता था।

 

हत्याकांड का खुलासा करते हुए डीआईजी अलीगढ़ प्रभाकर चौधरी ने पुलिस लाइन में अहम 4 बातें बताईं-

1- कमल सिंह ने पिता डॉ. गंगा सिंह शाक्य, मां श्यामा देवी, पत्नी रत्ना देवी और बेटी ज्योति की ईंट से कुचल कर हत्या की थी।

2-बेटी ज्योति शाक्य का चंडीगढ़ में नौकरी करने वाले अनुराग सक्सेना से अफेयर था। वह इंटरकास्ट मैरिज करना चाहती थी।

3- कमल इंटरकास्ट मैरिज के लिए तैयार था। 11 फरवरी को शादी होनी थी। लेकिन कमल 4 लाख रुपए जुटा नहीं पा रहा था।

4- पत्नी रत्ना उसे 4 लाख रुपए जुटा न पाने के लिए ताना मारती थी। झगड़े में वह आपा खो बैठा और हत्याएं कर दीं।

 

 

CCTV फुटेज से खुला राज

 

कमल सिंह शाक्य सोमवार दोपहर खाना खाने घर आया था। CCTV फुटेज के अनुसार, दिन के 12.40 पर आरोपी कमल सिंह शाक्य घर में गया और 1.55 पर घर से बाहर निकला। इसी बीच आरोपी ने हत्या को अंजाम दिया। पहले पत्नी, फिर बेटी, फिर मां और आखिर में पिता को मारा। पिता को सबूत छिपाने के लिए मारा। परिवार के मुखिया गंगा सिंह पिछले दो वर्षों से कैंसर से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था।

 

डीआईजी ने बताया- CCTV, CDR, मेडिकल रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्य के आधार पर कमल सिंह की गिरफ्तारी हुई है। उन्होंने कहा कि इसमें 80 फीसदी साक्ष्य साइंटिफिक एवीडेंस के थे। हत्या के बाद आरोपी कमल सिंह ने घर में खून के छींटे धोए और मेडिकल स्टोर पर चला गया। आरोपी खुद को भी खत्म करना चाह रहा था, लेकिन तभी उसकी बड़ी बेटी लक्ष्मी का फोन आ गया और उसने उनको बुला लिया। आगे की जांच के लिए 4 सदस्यों की टीम गठित की गयी है। जिसमें सीओ सिटी शामिल हैं।

 

पुलिस सुरक्षा के बीच चारों शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। जहां 5 साल के देवांश ने अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। मासूम देवांश ने अपने दादा-दादी, मां और बड़ी बहन के शवों को मुखाग्नि दी।

 

तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमॉर्टम, सिर-चेहरे कुचलकर हत्या की पुष्टि

 

तीन डॉक्टरों के पैनल ने चारों शवों का पोस्टमॉर्टम किया। इनमें डॉ. राजीव किशोर, डॉ. उत्सव जैन और डॉ. श्वेता राजपूत शामिल थे।

 

डॉक्टरों ने बताया कि हमलावरों ने पहले पत्नी रत्ना देवी की हत्या की। इसके बाद बेटी ज्योति को बेरहमी से मारा गया। जब बुजुर्ग मां श्यामा देवी बीच-बचाव के लिए आईं, तो उन पर भी सिलसिलेवार हमले किए गए और उन्हें भी मौत के घाट उतार दिया गया। तीनों महिलाओं के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान मिले।

 

 

कमल सिंह करता रहा पुलिस को गुमराह

 

आरोपी कमल सिंह चार हत्याएं करने के बाद पुलिस को गुमराह करता रहा। उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उसने बताया था- दोपहर एक बजे के आसपास मैं अपने मेडिकल स्टोर से खाना खाने घर आया था। दुकान पर बड़ी बेटी लक्ष्मी को बिठाकर आया था। उस समय घर पर सबकुछ ठीक था। सभी लोग घर पर थे। खाना खाने के बाद मैं मेडिकल स्टोर चला गया। वहां से मार्केट चला गया। मेरा बेटा स्कूल से लौटा तो कमरे में पंखा चल रहा था। उसने बरामदे में अपने शूज उतारे और कहने लगा कि ठंड में पंखा कौन चला रहा है। जब कोई जवाब नहीं मिला तो अंदर जाकर देखा। अंदर का मंजर देख उसकी चीख निकल पड़ी। उसने शोर मचाकर लोगों को बुलाया तब हत्याकांड का पता चला।

 

मुनि सुधासागर महाराज के सानिध्य में उमडेगा श्रद्धा का सैलाव 

अतिशय क्षेत्र सेरोन देवगढ जहाजपुर में पंचकल्याणक महामहोत्सव सुनिश्चित

उप्रससे, अजय बरया

जजितपुर। जैन समाज का महत्वपूर्ण महामहोत्सव श्रीमजिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव ललितपुर जिले के अतिशय क्षेत्र सतोदय तीर्थ सेरोन, देवोदय तीर्थ देवगढ़ एवं शान्तोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में तीर्थ चक्रवर्ती निर्यापक मुनि सुधासागर महराज के सानिध्य में आयोजित किया जाना सुनिश्चित हुआ। जिसको लेकर जैन समाज उत्साहित है और आयोजन की सफलता हेतु दिगम्बर जैन समाज पंचायत समिति ललितपुर ने स्वंयसेवी संस्थाओं के साथ रणनीति बनाई।

 

प्रतिष्ठाचार्य बालब्रह्मचारी प्रदीप जैन सुयश के अनुसार ललितपुर जिले में तीर्थचक्रवर्ती निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज के सानिध्य में सतोदय तीर्थसेरोन में  4मार्च से 8 मार्च 26 तक, देवोदय तीर्थ देवगढ़ में 28 मार्च से 2 अप्रेल 26 एवं शान्तोदय तीर्थ चांदपुर जहाजपुर में अप्रैल माह 2026 में पंचकल्याणक महोत्सव होगा। प्रतिष्ठा महोत्सव में तीनों क्षेत्रों में मूलनायक भगवान शन्तिनाथ के अतिरिक्त अनेक प्रतिमाओं की  प्राण प्रतिष्ठित की जाएगी। उक्त आयोजन को लेकर जैन समाज काफी समय से प्रतीक्षारत रही और निरंतर महाराज श्री से आयोजन के लिए निवेदन करती रही। ललितपुर जनपद के निकवर्ती क्षेत्र तीर्थोदय तीर्थ गोलाकोट में विरजित निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महराज के सम्मुख जैन समाज के श्रेष्ठजनों एवं दिगम्बर जैन पंचायत के पदाधिकारियों ने निवेदन किया जिसकी स्वीकृति मिलते ही समाज में उत्साह की लहर दौड़ गई।

 

आयोजन को लेकर सावरकर चौक स्थित जैन अटामंदिर के सभागार में महत्वपूर्ण बैठक जैन पंचायत अध्यक्ष डॉ अक्षय टड़या की अध्यक्ष एवं समाजा श्रेष्ठी शीलचन्द अनोरा के मुख्यतिष्य सम्पन हुई और ललितपुर जिले में निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के आगमन एवं उनके सानिध्य में आयोजित होने वाले पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव की व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। जिसमें प्रमुख रूप से देवोदय तीर्थ के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल संजीव जैन सीए सतीश जैन बजाज, मनोज जैन बबीना, अरविन्द जैन आष्टीकल्स, धन्यकुमार जैन एड, भूपेन्द्र जैन सिद्धि समूह, अखिलेश गदयाना, रवि जैन चुनगी आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर प्रमुख रूप से स्वतन्त्र मोदी, सुरेश बाबू जैन,विजय जैन लागोन, संजय मोदी, संजीव जैन ममता स्पोर्ट, आनंद जैन एलआईसी, सनत जैन खजुरिया, सौरभ जैन सीए, प्रमात जैन लागीन, अजय जैन जखोरा, अनिल जैन डोगरा, राजेश जैन चन्द्रा सिधेश्वर जमोरिया आदि मौजूद रहे। सभा का संचालन महामंत्री आकाश जैन द्वारा किया गया। मीडिया प्रभारी अक्षय अलया के अनुसार निर्यापक श्रमण मुनि सुधासागर महाराज के आशीर्वाद से उद्घारित ललितपुर जनपद के प्रमुख तीर्थक्षेत्र मूर्तिकला की धरोहर अतिशय क्षेत्र देवगढ, सतोदय तीर्थ सेरोन, शान्तोदय तीर्थ चांदपुर जहाज में मूलनायक भगवान शान्तिनाथ की प्रतिष्ठ

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