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Mathura: 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न

January 25, 2026

Mathura: 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस कलेक्ट्रेट सभागार में संपन्न

Mathura Matdata Diwas

मथुरा 25 जनवरी 2026/* 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर कलेक्ट्रेट सभागार में कार्यक्रम का हुआ भव्य आयोजन। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि नगर मजिस्ट्रेट राकेश कुमार, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी मनोज खंडेलवाल, स्वीप कोऑर्डिनेटर प्रो0 पल्लवी सिंह, डीएमटी मनीष दयाल, एसएमटी डॉ0 दीनदयाल द्वारा मां सरस्वती जी की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित एवं पुष्प अर्पित कर किया गया।
              समस्त उपस्थितजनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर दिया गया संदेश सुना उसके उपरांत नगर मजिस्ट्रेट राकेश कुमार ने सभी को शपथ ग्रहण करवाई। नगर मजिस्ट्रेट राकेश कुमार ने कहा कि निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी निर्वाचन के लिए शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची अत्यंत आवश्यक है। एडीओ मनोज खंडेलवाल तथा प्रो पल्लवी सिंह ने कहा कि मतदाता अपने मतदान के प्रति जागरूक हो और सभी निर्वाचन में अपने मताधिकार का प्रयोग करें।
           डीएमटी मनीष दयाल तथा एसएमटी डॉ0 दीनदयाल ने कहा विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण अभियान 2026 के अंतर्गत शुद्ध एवं त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करने हेतु प्रशासन द्वारा कार्य किए जा रहे है।इसका लक्ष्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना है। डॉ0 अनीता मुद्गल, सीमा, गुरूप्यारी ने बेसिक शिक्षा टीम के साथ सुंदर रंगोली बनाई तथा सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। एनसीसी कैडेट्स ने इस अवसर पर कदमताल करते हुए बैंड के साथ मार्च पास्ट किया।
           स्वीप के अंतर्गत मतदाता जागरूकता में उल्लेखनीय एवं सराहनीय योगदान के लिए मनीष दयाल, डॉ0 दीनदयाल, अनीता मुद्गल आदि को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वयोवृद्ध नागरिक किरणदेवी तथा दिव्यांग मतदाता आइकॉन रामकरन को शॉल ओढ़ाकर तथा मिष्ठान भेंट कर सम्मानित किया गया। 5 नवीन युवा मतदाताओं एलिस ठाकुर,सागर अग्रवाल, खुशबू, हेमा तथा आयुषी को मतदाता पहचान पत्र वितरित किए गए। प्रत्येक तहसील से दो-दो सुपरवाइजर एवं पांच-पांच सर्वश्रेष्ठ बीएलओ को प्रमाण पत्र तथा स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
             राष्ट्रीय मतदाता दिवस के कार्यक्रमों की श्रृंखला में पोस्टर प्रतियोगिता, स्लोगन प्रतियोगिता, काव्य पाठ प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया गया जिसके विजेताओं को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण तथा मतदाता जागरूकता से संबंधित प्रदर्शनी लगाई गई। मतदाता जागरूकता रेल का भी प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से मोहन सिंह सोलंकी, राकेश अग्रवाल, राजेश कुमार, श्रुति सक्सेना तथा बड़ी संख्या में युवा और छात्र छात्राएं आदि उपस्थित रहे।
*सम्मानित होने वाले सुपरवाइजर तथा बीएलओ की सूची विधानसभावार*
छाता से शांतनु भारद्वाज, दीपक गर्ग, अमित कुमार, अवधेश कुमार, रिचा सिंह, तनुज कुशवाहा एवं विनोद कुमार।
मांट से कंचनवीर, विजेंद्र सिंह, तेजवीर, राहुल अग्रवाल, अनुज गौतम तथा तोताराम।
गोवर्धन से मुरारी लाल, नीरज नयन, मुकेश भारद्वाज, कृपाल सिंह, मिट्ठन लाल, निधि मिश्रा तथा सुरेश चंद शर्मा।
मथुरा से सुधीर सोलंकी, प्रवीण शर्मा, प्रकाश कृष्णा, रैना डंग, अशोक कुमार, रितु वशिष्ठ तथा देवकांत शर्मा।
बलदेव से आकाश गौतम, भूपेंद्र शर्मा, संजय पाठक, मानवेंद्र सिंह, अजीत गुप्ता, रूबी कुमारी तथा श्याम सुंदर।
*प्रतियोगिता विजेताओं की सूची*
पोस्टर प्रतियोगिता प्रथम पूजा सारस्वत, द्वितीय कोमल, तृतीय अबू बकर तथा वैशाली।
स्लोगन प्रतियोगिता प्रथम गौरी पांचाल, द्वितीय प्रिया, तृतीय पल्लवी शर्मा।
काव्य पाठ प्रतियोगिता प्रथम गुड़िया तथा पूजा, द्वितीय राधिका तथा सानिया, तृतीय पारी रावत तथा नेहा।

विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन,हिंदू एकता का दिया संदेश

Hindu Sammelan

हिन्दू सम्मेलन में उपस्थित जनता

हाथरस सादाबाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान में स्थानीय वासुदेव विद्या मंदिर स्कूल में विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में क्षेत्रीय नागरिक, कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत गाड़ी गोविंदाचार्य जी महाराज रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में अर्चना प्रिया आर्य उपस्थित रहीं।
संत गोविंदाचार्य जी महाराज ने कहा कि हिंदू समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाएं, संस्कार अपनाएं और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज का जागरण ही राष्ट्र निर्माण का मार्ग प्रशस्त करता है।
अर्चना प्रिया आर्य ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदू एकता सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को मजबूती देती है। उन्होंने महिलाओं और युवाओं की भूमिका को समाज के निर्माण में अहम बताया।
सम्मेलन में हिंदू संस्कृति, परंपराओं और समाज की एकजुटता पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर विधायक गुड्डू चौधरी, धर्मेंद्र गौतम, महेंद्र सिंह आचार्य जी, अरविंद चौधरी, देवेश चौधरी, राकेश वर्मा, सोम प्रकाश वार्ष्णेय, अर्जुन सिंह, पूर्व अध्यक्ष युगल किशोर अग्रवाल, चेयरमैन प्रतिनिधि राधा रमन अग्रवाल, भावना दीदी, हमवीर प्रधान, सुधीर गर्ग सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

हाथरस-अलीगढ़ मार्ग पर भीषण सड़क हादसा: 18 वर्षीय युवक की मौत, 5 घायल, CCTV में कैद लाइव दुर्घटना

हाथरस। हाथरस-अलीगढ़ मार्ग पर आज दो कारों के बीच हुई आमने-सामने की भीषण टक्कर में एक 18 वर्षीय युवक की जान चली गई जबकि पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दर्दनाक हादसा बालाजी रिसॉर्ट के सामने दोपहर करीब 3:16 बजे हुआ। घटना उस समय हुई जब पहली कार (UP81 DE 8616) बालाजी रिसॉर्ट से अलीगढ़ की ओर जा रही थी और इसे चला रहे थे अलीगढ़ निवासी आलोक कुमार शर्मा, कार में उनके साथ विजय कुमार (39) और प्रवीण गुप्ता (54) भी सवार थे। दूसरी कार (i10, UP86 N 8229) अलीगढ़ से हाथरस की तरफ आ रही थी, इसे चला रहे थे हाथरस निवासी 18 वर्षीय वंश शर्मा उर्फ कान्हा, कार में उनके साथ जतिन सारस्वत (17), प्रिंस (17), कार्तिक शर्मा (19) और नन्नू पचौरी (17) सवार थे। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी बहुत दूर जाकर गिरी और दोनों गाड़ियां बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। वंश शर्मा को गंभीर हालत में अन्य घायलों के साथ हाईवे एम्बुलेंस द्वारा अलीगढ़ के रूसा अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अन्य पांच घायलों का इलाज जारी है और कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची, मृतक और घायलों के परिजनों को तुरंत सूचित किया गया। सड़क पर लगे जाम को हटाने के लिए हाईवे क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाया गया। मामले की जांच शुरू कर दी गई है और CCTV फुटेज में टक्कर की भयावहता और लाइव दुर्घटना के फुटेज साफ देखे जा सकते हैं। स्थानीय प्रशासन ने हाईवे पर सुरक्षित ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने की चेतावनी दी है।

Hathras: डॉ. राकेश सिंह राणा के नेतृत्व में हस्ताक्षर अभियान तेज, ट्रॉमा सेंटर को चालू कराने की माँग

Rakesh Singh Rana

डा राकेश राणा का हस्ताक्षर अभियान तेज

हाथरस। सिकंदराराऊ ट्रॉमा सेंटर को सुचारु एवं पूर्ण रूप से संचालित कराए जाने की माँग को लेकर चल रहा जनआंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में 25 जनवरी 2026 को ग्राम टाटी डांडिया, मुबारकपुर एवं टीकरी कला में हस्ताक्षर अभियान के तहत व्यापक जनसंपर्क किया गया, जहां ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हस्ताक्षर कर आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। अभियान के दौरान लोगों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गहरी नाराजगी देखने को मिली।
इस अवसर पर पूर्व विधान परिषद सदस्य डॉ. राकेश सिंह राणा ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण लगातार जानें जा रही हैं। यह स्थिति शासन-प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि वर्षों पहले ट्रॉमा सेंटर की इमारत बनकर तैयार हो चुकी है, बावजूद इसके आज तक उसे मानकों के अनुरूप पूर्ण रूप से संचालित नहीं किया गया, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
डॉ. राणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल या व्यक्तिगत स्वार्थ से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह आम जनता के जीवन और भविष्य की लड़ाई है। जब तक सिकंदराराऊ ट्रॉमा सेंटर पूरी क्षमता के साथ चालू नहीं हो जाता, तब तक यह जनआंदोलन निरंतर और और अधिक मजबूती के साथ जारी रहेगा।
ग्रामीणों ने भी एक स्वर में ट्रॉमा सेंटर को तत्काल चालू करने की माँग करते हुए कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ जनता का अधिकार हैं, न कि सरकार की कृपा। हस्ताक्षर अभियान में पवन पुंडीर, जोगिंदर सिंह, देवेंद्र सिंह, शालू राजभान सिंह, राम बहादुर सिंह, नरेंद्र सिंह, अशोक, वीरपाल सिंह, घीमर, वीरेश लोधी, अरुण दीक्षित, राकेश शर्मा, राजपाल बघेल, पूर्व प्रधान धर्मेंद्र सिसोदिया, शिवम दीक्षित, रूम सिंह प्रधान, रिंकू शर्मा, मोहन अहेरिया, राजीव शर्मा, शालू शर्मा, धर्मवीर सिंह पुंडीर, शाहिद खान, रमेश चंद दीक्षित, पिंकी सिसोदिया, शीलू सिसोदिया एवं भूपेंद्र सिसोदिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

गणतंत्र के 77 वर्ष: उपलब्धियाँ, चुनौतियाँ और भविष्य का संकल्प

 

– डॉ. सत्यवान सौरभ
Satywan Saurabh, Writer

सत्यवान सौरभ, लेखक, स्वतंत्र पत्रकार

भारत का गणतंत्र आज 77 वर्ष का हो चुका है। 26 जनवरी 1950 को लागू हुए संविधान ने एक नई भारत की नींव रखी, जो स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों से प्रेरित थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से हमने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की—साहित्य, खेल, कृषि, विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर आर्थिक-सैन्य क्षमता तक। विविध संस्कृति को मजबूत करते हुए राष्ट्र ने वैश्विक पटल पर अपनी पहचान बनाई। चंद्रयान मिशनों से अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी बने, यूपीआई जैसी डिजिटल क्रांति ने भुगतान व्यवस्था बदल दी, जबकि ओलंपिक-एशियाड में पदकों की बौछार ने खेलक्षेत्र में नई ऊंचाइयां छुईं। आज विश्व भारत को चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में देखता है, जहां सात से आठ प्रतिशत की विकास दर ने गरीबी उन्मूलन में योगदान दिया। लेकिन यह यात्रा सहज नहीं रही। आंतरिक चुनौतियां, सीमापार खतरे और सामाजिक विषमताएं बनी रहीं। गणतंत्र दिवस पर आत्मचिंतन आवश्यक है: हमने क्या पाया, क्या खोया और भविष्य के लिए क्या संकल्प लें?
भारत की पहली और सबसे बड़ी चुनौती थी—विविधता में एकता। महाद्वीप के आकार का यह देश सौ तीस करोड़ से अधिक लोगों, सैकड़ों भाषाओं-बोलियों, विविध धर्मों-संस्कृतियों का मेल था। स्वतंत्रता के समय आशंका थी कि यह एकजुट नहीं रहेगा। विभाजन की त्रासदी ने आशंकाओं को बल दिया, लाखों जानें गईं, लेकिन संविधान ने संघीय ढांचे से एकता सुनिश्चित की। अनुच्छेद एक ने ‘भारत एक अखंड राज्य’ घोषित किया। भाषाई राज्यों का पुनर्गठन, एकीकृत न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं ने क्षेत्रीय आकांक्षाओं को मुख्यधारा से जोड़ा। नक्सलवाद, अलगाववाद जैसी चुनौतियों के बावजूद हमने एकता बनाए रखी। पिछले 25 वर्षों में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना, पूर्वोत्तर में शांति प्रक्रियाएं इसका प्रमाण हैं। आज ‘एक देश, एक राशन’ जैसी योजनाएं विविधता को शक्ति बना रही हैं। यह उपलब्धि कम नहीं—विश्व के अधिकांश बहुलवादी देश टूट चुके, लेकिन भारत अटल खड़ा है।
दूसरी चुनौती थी—लोकतंत्र को जीवंत बनाना। संविधान ने वयस्क मताधिकार, मौलिक अधिकार, धर्मनिरपेक्षता प्रदान की। संसदीय प्रणाली अपनाई, जो ब्रिटिश मॉडल से प्रेरित किंतु भारतीय आवश्यकताओं के अनुरूप। नेहरू युग से चली आ रही परंपरा में अठारह लोकसभा चुनाव शांतिपूर्ण हुए। न्यायपालिका ने जनहित याचिका के माध्यम से गरीबों के अधिकार स्थापित किए—विशाखा दिशानिर्देशों से महिला सुरक्षा, शिक्षा का अधिकार से शिक्षा का अधिकार। महिला आरक्षण ने पंचायती राज में तैंतीस से पचास प्रतिशत क्रांति लाई, जो राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की प्रतीक्षा कर रहा। सूचना का अधिकार ने पारदर्शिता बढ़ाई, जबकि वस्तु एवं सेवा कर ने आर्थिक एकीकरण किया। चुनौतियां रहीं—आपातकाल जैसे काले अध्याय, लेकिन संस्थाओं ने पुनरुद्धार किया। आज त्रस्तंभ मजबूत हैं: चुनाव आयोग निष्पक्ष, भारतीय रिज़र्व बैंक आर्थिक स्थिरता का प्रहरी। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र ने साबित किया कि गरीबी और निरक्षरता के बावजूद प्रजातंत्र फल-फूल सकता है।
तीसरी चुनौती थी विकास। 1947 में सकल घरेलू उत्पाद दो लाख तीस हजार करोड़ था, आज चार सौ लाख करोड़ से अधिक। हरित क्रांति ने अन्न भंडार भरे, सफेद क्रांति ने दूध उत्पादन में विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसरो के सौ से अधिक उपग्रह मिशन, कोविशील्ड वैक्सीन ने आत्मनिर्भरता दिखाई। डिजिटल भारत ने सौ करोड़ से अधिक आधार कार्ड जोड़े, जबकि स्टार्टअप भारत ने एक लाख से अधिक स्टार्टअप जन्मे। सामाजिक मोर्चे पर राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम ने अस्सी करोड़ को सस्ता अनाज दिया, स्वच्छ भारत ने बारह करोड़ शौचालय बनाए। आयुष्मान भारत ने पचास करोड़ गरीबों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया। लेकिन असमानता बनी—ऊपर दस प्रतिशत के पास सत्तावन प्रतिशत संपत्ति, जबकि निचले पचास प्रतिशत के पास तीन प्रतिशत। ग्रामीण-शहरी खाई, किसान आत्महत्याएं चिंताजनक। फिर भी, गरीबी रेखा से बाहर पच्चीस करोड़ लोग निकले—यह गर्व का विषय।
गणतंत्र की उपलब्धियां गर्व का कारण हैं, किंतु खोया भी बहुत। भ्रष्टाचार ने जड़ें जमा लीं—दो जी, कोयला आवंटन जैसी घोटालों ने अरबों लूटे। चुनावी बॉन्ड पर सवाल, नोटबंदी के बाद काला धन वापसी असफल। महिला असुरक्षा चरम पर—निर्भया से हाथरस तक बलात्कार की घटनाएं थम नहीं रही। जातिगत हिंसा, दलित अत्याचार जारी। किसान संकट गहरा: न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग, कर्जमाफी नाकाफी। युवा बेरोजगारी तीनों प्रतिशत पर, असंतोष से हिंसा भड़क रही। प्रदूषण घातक, प्रांतीयता का जहर बरकरार। अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर दुरुपयोग। नक्सलवाद, आतंकवाद बने सिरदर्द। ये घाव भारत माता को रक्तरंजित कर रहे।
खोया भले हो, लेकिन हल संभव। भ्रष्टाचार पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण ने रिसाव रोका। महिला सुरक्षा हेतु फास्ट-ट्रैक कोर्ट, निर्भया कोष उपयोग बढ़ाएं। किसानों के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान उत्पादक संगठन मजबूत करें। रोजगार हेतु कौशल भारत, आत्मनिर्भर तीन से दस करोड़ नौकरियां सृजित संभव। सामाजिक सद्भाव हेतु संविधान जागरण अभियान चलाएं। प्रदूषण पर विद्युत वाहन नीति, नमामि गंगे को गति। पंचायती राज को सशक्त बनाएं—महिला प्रतिनिधित्व से स्थानीय शासन मजबूत। युवाओं को मुख्यधारा जोड़ें। कृत्रिम बुद्धिमत्ता-बिग डेटा से नफरत फैलाव रोका जा सकता। 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करने हेतु एकजुट हों।
गणतंत्र दिवस मात्र परेड-झंडारोहण नहीं, आत्मचिंतन का अवसर। हमने एकता, लोकतंत्र, विकास पाया; भ्रष्टाचार, असमानता खोया। लेकिन युवा शक्ति हमारा हथियार। आशावादी रहें—भारतीय मॉडल अपनाएं। राष्ट्रपिता गांधी, संविधान निर्माता अम्बेडकर के सिद्धांतों पर चलें। गणतंत्र को कंटीली झाड़ियों से निकालें, उज्ज्वल भविष्य बनाएं। जय हिंद, जय भारत!
(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)
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