Web News

www.upwebnews.com

सिकंदराराऊ में रेलवे ट्रैक पर मिला युवक का शव, मानसिक रूप से था परेशान

March 7, 2026

सिकंदराराऊ में रेलवे ट्रैक पर मिला युवक का शव, मानसिक रूप से था परेशान

हाथरस। जनपद हाथरस के सिकंदराराऊ कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार देर रात रेलवे ट्रैक पर एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई।
मृतक की पहचान गांव रामपुर चटोल निवासी बृजेश कुमार (25) पुत्र दुर्गपाल सिंह के रूप में हुई है। बताया गया है कि बृजेश पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान चल रहा था और गुरुवार शाम को घर से बिना बताए कहीं चला गया था।
देर रात उसका शव पूर्वोत्तर रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिससे परिवार में गहरा शोक व्याप्त है

सादाबाद में तेज रफ्तार ट्रक ने साइकिल सवार किशोर को कुचला, मौके पर दर्दनाक मौत

हाथरस। सादाबाद क्षेत्र के एदलपुर बरी चौराहे के पास एक तेज रफ्तार ट्रक ने साइकिल सवार किशोर को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
जानकारी के अनुसार 14 वर्षीय शौर्य चौधरी साइकिल से मीरपुर की ओर जा रहा था। तभी पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसकी साइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक का पहिया किशोर के सिर के ऊपर से गुजर गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक के पिता की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सिकंदराराऊ में रेलवे ट्रैक पर मिला युवक का शव, मानसिक रूप से था परेशान
हाथरस। जनपद हाथरस के सिकंदराराऊ कोतवाली क्षेत्र में गुरुवार देर रात रेलवे ट्रैक पर एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई।
मृतक की पहचान गांव रामपुर चटोल निवासी बृजेश कुमार (25) पुत्र दुर्गपाल सिंह के रूप में हुई है। बताया गया है कि बृजेश पिछले कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान चल रहा था और गुरुवार शाम को घर से बिना बताए कहीं चला गया था।
देर रात उसका शव पूर्वोत्तर रेलवे ट्रैक पर पड़ा मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिससे परिवार में गहरा शोक व्याप्त है

सादाबाद में होली के दिन भीषण सड़क हादसा, NSG कमांडो की मौत, तीन साथी गंभीर घायल

हाथरस। जनपद हाथरस के सादाबाद कोतवाली क्षेत्र में होली के दिन एक भीषण सड़क हादसे में NSG कमांडो की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनके तीन साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना गुरुवार देर रात करीब 3 बजे पल्हावत गांव के पास हुई।
बताया गया है कि मथुरा के राया क्षेत्र निवासी NSG कमांडो योगेंद्र सिंह उर्फ भूरा (32) अपने तीन दोस्तों के साथ थार गाड़ी से हाथरस में होली खेलकर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी गाड़ी अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े नीम के पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी के गेट और पहिए तक अलग हो गए।
हादसे में योगेंद्र सिंह की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद विष्णु कुमार (28), सत्यवीर सिंह (32) और जीतू (30) गंभीर रूप से घायल हो गए। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को तत्काल सादाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें आगरा और अलीगढ़ रेफर कर दिया गया।

नारी: शक्ति, संवेदना और सृजन -डाॅ० राकेश सक्सेना


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर

एटा 06 मार्च उप्रससे। सृष्टि के विकास में नर और नारी दोनों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। प्रकृतिस्वरूपा होने के कारण सृष्टि पहले से ही रहस्यात्मक थी किन्तु इसको गंभीरतम बनाने में नर-नारी का मिथुनस्वरूप सहायक सिद्ध हुआ। अपने पौरुष, साहस,शौर्य और तेज के कारण यदि नर एक भिन्न वर्ग में आ गया तो नारी भी अपनी दया, त्याग, उदारता, सहनशीलता, सुकुमारता और धैर्य के कारण एक अलग वर्ग में समझी जाने लगी। चुम्बक और धातु की तरह ये दोनों एक-दूसरे से आकृष्ट होने लगे, इसी कारण मानव जीवन में नर और नारी का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध है। नारी के बिना नर और नर के बिना नारी दोनों अपूर्ण हैं। नर यदि अग्नि है तो नारी ईंधन। नर यदि समुद्र है तो नारी किनारा। नर यदि दीपक है तो नारी प्रकाश। नर यदि वृक्ष है तो नारी उसका फल। दोनों का अपने-अपने स्थान पर महत्व है।
यौन आकर्षण को प्रजनन प्रेरणा के नाम से मानव जगत में पुकारा जाता है। प्रजनन जीव का महत्वपूर्ण कार्य है। गर्भ धारण करके संतान को जन्म देना,उसका पालन-पोषण करना मुख्यतः नारी का ही काम है,जो मानव जीवन की निरंतरता का आधार है। यह केवल जैविक प्रक्रिया नहीं बल्कि सृष्टि चक्र को आगे बढ़ाने वाली सृजनात्मक शक्ति है। प्रकृति ने नारी को मातृत्व का अद्भुत गुण प्रदान किया है। याज्ञवल्क्य मुनि का कथन है कि जिस तरह चने अथवा सीप का आधा दल दूसरे से मिलकर पूर्ण होता है उसी प्रकार पुरुष के सामने का खाली आकाश नारी के साथ मिलने से पूर्ण होता है। प्रकृति की इस मनोरम पुत्री ने अपने सौन्दर्य,व्यक्तित्व और कृतित्व के विविध रूपों से नर का पोषण किया है। माता, पत्नी, भगिनी, पुत्री, सखी, सेविका, परिचारिका, तपस्विनी आदि भूमिकाओं में नारी ने हमेशा ही संवेदनशीलता और समर्पण का परिचय दिया है। वह शक्ति,करुणा और सृजन का समन्वित रूप है।
भारतीय समाज व साहित्य में नारी को देवी के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। भारतीय आदर्श जैसे विद्या का आदर्श सरस्वती, धन का लक्ष्मी में, पराक्रम का दुर्गा में, सौन्दर्य का रति में, पवित्रता का गंगा आदि नारी में ही समाहित है। इसीलिए महर्षि मनु ने कहा- ‘ यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता ‘ अर्थात् जहाँ नारी का पूजन होता है वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ आदर नहीं होता वहाँ सभी कार्य विफल होते हैं, इसी अर्थ में फिर एक स्थान पर उन्होंने कहा-‘ शोचन्ति जाम यो यत्र विनश्यत्पाशु तत्कुलम् ‘ अर्थात् जिस घर में स्त्रियाँ शोक करतीं हैं, वह शीघ्र ही नष्ट होता है। कहने का तात्पर्य यह है कि शक्ति, समृद्धि और ज्ञान की अधिष्ठात्री नारी केवल कोमलता नहीं अपितु साहस और आत्मबल की धनी है। आधुनिक युग में शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, अंतरिक्ष और खेल आदि क्षेत्रों में भी वह शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण दिखाई दे रही है। शक्ति के साथ ही उसके हृदय में संवेदना, ममता और सहानुभूति का प्रवाह है जो परिवार,समाज और संस्कृति को मानवीय आधार प्रदान करती है। वह सम्बन्धों का निर्वाह ही नहीं करती बल्कि आत्मीयता से सींचती भी है। उसकी संवेदना का प्रथम रूप मातृत्व में ही दिखाई देता है जहाँ शिशु की पीड़ा को वह बिना शब्दों के ही समझ लेती है। परिवार को एकसूत्र में बाँधने का कार्य भी नारी ही करती है। आज की नारी शिक्षा और आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ रही है। वह अपने कार्यस्थल पर नेतृत्व करते हुए मानवीय मूल्यों को वरीयता प्रदान करती है, प्रेम की भाषा बोलती है, करुणा की ज्योति जलाए रखती है।
सृष्टि के मूल में नारी वह चेतना है जिसके बिना जीवन की कल्पना ही अधूरी है। वह जन्मदायिनी शक्ति के साथ हमारी संस्कृति, आदर्श और मूल्यों की भी सर्जक है, परिवार की शिक्षिका है। अपनी सृजनात्मक प्रतिभा से नारी ने साहित्य,चित्रकला, संगीत, नृत्य, नाट्यों, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रशासन, शिक्षा आदि सभी क्षेत्रों में नारी की सृजनशीलता हमारे समाज को नई दृष्टि प्रदान कर रही है। कहने का तात्पर्य यह है कि नारी शक्ति है क्योंकि वह संघर्ष में मुस्कुराती है, नारी संवेदना है क्योंकि वह टूटे सम्बन्धों को जोड़ती है,नारी सृजन है क्योंकि वह भविष्य को जन्म देती है। वह परिवार तक ही सीमित नहीं है अपितु समाज व राष्ट्र के उत्थान की प्रेरक शक्ति है। उसको जिस क्षेत्र में दायित्व सौंपा गया है वहाँ वह पुरुषों की तुलना में सफल व सक्षम सिद्ध हो रही है। उसने समाज को सोचने के लिए विवश कर दिया है कि वह नारी के प्रति अपना दृष्टिकोण बदले! उसको शिक्षित, स्वावलंबी, सुयोग्य, समुन्नत बनाने पर ध्यान दे।

डाॅ०राकेश सक्सेना, पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष, 68, शान्तीनगर, एटा ( उ०प्र० ) 207001*

एटा में युवाओं ने जान जोखिम में डालकर नाले में डूब रहे गोवंश को बचाया

एटा 06 मार्च उप्रससे। कोतवाली नगर क्षेत्र स्थित कैलाश मंदिर के पीछे रेवाड़ी मोहल्ला में एक गोवंश नाले में गिर गया। स्थानीय युवाओं ने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाला।

शुक्रवार को गोवंश को नाले में डूबता देख स्थानीय निवासी सचिन कश्यप ने अपने दोस्तों गब्बर बघेल, प्रदीप राजपूत, मनोज पाराशर, चंदन सक्सेना, दिनेश राजपूत और सतीश राजपूत को मौके पर बुलाया। सभी ने मिलकर कड़ी मशक्कत से गोवंश को नाले से बाहर निकाला।

सचिन कश्यप ने बताया कि वे सभी दोस्त वहां से गुजर रहे थे, तभी गोवंश नाले में डूबता हुआ दिखाई दिया। उन्होंने तुरंत नगर पालिका को फोन किया, लेकिन जेसीबी नहीं पहुंची। गोवंश की जान खतरे में थी, इसलिए उन्होंने बिना देरी किए अपने दोस्तों की मदद से उसे सुरक्षित बाहर निकालने का फैसला किया। सचिन और उनके दोस्तों द्वारा किए गए इस सराहनीय कार्य की स्थानीय लोगों ने जमकर प्रशंसा की है।

« Newer PostsOlder Posts »