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एटा में शिक्षा क्षेत्र में हो रही लूट पर नेशनल मानवाधिकार चेतना ने अतिरिक्त एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

March 10, 2026

एटा में शिक्षा क्षेत्र में हो रही लूट पर नेशनल मानवाधिकार चेतना ने अतिरिक्त एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

एटा 10 मार्च उप्रससे। मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट पर नेशनल मानवाधिकार चेतना संगठन के दर्जनों कार्यकर्ता एकत्रित हुए। उन्होंने जिले में शिक्षा के क्षेत्र में हो रही कथित लूट को लेकर जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के कार्यालय में अतिरिक्त उपजिलाधिकारी पीयूष रावत को एक लिखित ज्ञापन सौंपा।

यह ज्ञापन संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी यादव के नेतृत्व में सौंपा गया। इसमें शिक्षा के क्षेत्र में निजी संस्थानों की मनमानी पर रोक लगाने और अभिभावकों के शोषण को बंद करने की मांग की गई है। संगठन ने प्रशासन के समक्ष कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें एनसीईआरटी/सरकारी मानक से अलग महंगी किताबें अनिवार्य करने पर तत्काल रोक लगाना शामिल है। साथ ही, हर वर्ष ड्रेस बदलने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और न्यूनतम 3-5 वर्ष तक एक ही ड्रेस अनिवार्य करने की मांग की गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि किताबों व ड्रेस को किसी एक दुकान से खरीदने की बाध्यता समाप्त की जाए। सभी विद्यालयों द्वारा किताबों एवं ड्रेस से संबंधित स्पष्ट लिखित आदेश व सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर पर एक जांच समिति के गठन की मांग की गई, जिसमें अभिभावक प्रतिनिधि भी शामिल हों। नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों पर दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने और अभिभावकों के लिए गोपनीय शिकायत तंत्र लागू करने की भी मांग की गई है।

संगठन के सचिव पुष्पेंद्र यादव ने बताया कि यह ज्ञापन निजी विद्यालयों की मनमानी के विरुद्ध सौंपा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी विद्यालय मनमाने ढंग से फीस वसूल रहे हैं, कोर्स लगा रहे हैं और यूनिफॉर्म बदल रहे हैं।
चेतावनी देते हुए पुष्पेंद्र यादव ने कहा यदि उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती है, तो संगठन आंदोलन करेगा। मनमानी फीस वसूली के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोग अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दिलवा पा रहे हैं, इसलिए इन पर लगाम लगाना आवश्यक है।

मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने किया कार्यालय का औचक निरीक्षण

Santosh Kumar Singh
Gorakhpur
10/03/2026

*रिकॉर्ड रूम, अपर आयुक्त न्यायालय व विभिन्न शाखाओं में फाइलों के रखरखाव और सफाई व्यवस्था पर दिया विशेष जोर*

गोरखपुर। गोरखपुर के मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने मंगलवार को मंडलायुक्त कार्यालय के विभिन्न संभागों, केंद्रीय रिकॉर्ड रूम, अपर आयुक्त न्यायालय तथा संयुक्त कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालय की कार्यप्रणाली, फाइलों के रखरखाव तथा साफ-सफाई की व्यवस्था का गहन जायजा लिया और अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मंडलायुक्त ने निरीक्षण के दौरान विभिन्न शाखाओं में रखी फाइलों के संधारण और रिकॉर्ड के रखरखाव की स्थिति को देखा। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी महत्वपूर्ण अभिलेखों को व्यवस्थित ढंग से सुरक्षित रखा जाए ताकि आवश्यकता पड़ने पर संबंधित फाइलें आसानी से उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि कार्यालयों में रिकॉर्ड प्रबंधन की बेहतर व्यवस्था प्रशासनिक कार्यों की गति को तेज और पारदर्शी बनाती है।
निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त ने केंद्रीय रिकॉर्ड रूम का भी बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पुराने अभिलेखों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से रखा जाए तथा रिकॉर्ड रूम में साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि सरकारी अभिलेख महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं, इसलिए इनके संरक्षण में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
मंडलायुक्त ने अपर आयुक्त न्यायालय और संयुक्त कार्यालय का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने लंबित मामलों के निस्तारण की स्थिति की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि न्यायालय से जुड़े मामलों का समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि न्यायिक मामलों में अनावश्यक विलंब से आम जनता को परेशानी होती है, इसलिए सभी अधिकारी जिम्मेदारी के साथ कार्य करें।
उन्होंने कार्यालय परिसर की साफ-सफाई की व्यवस्था को भी देखा और कर्मचारियों को निर्देश दिया कि कार्यालय परिसर को स्वच्छ और व्यवस्थित रखा जाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ और व्यवस्थित कार्यस्थल से कर्मचारियों की कार्यक्षमता भी बढ़ती है और आम जनता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
मंडलायुक्त अनिल ढींगरा ने अधिकारियों और कर्मचारियों को यह भी निर्देश दिया कि कार्यालयों में अनुशासन और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए। सभी कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ करें ताकि प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।
निरीक्षण के दौरान अपर आयुक्त प्रशासन जय प्रकाश, अपर आयुक्त न्यायिक अजय राय तथा अपर आयुक्त न्यायिक राजेश श्रीवास्तव भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने मंडलायुक्त को संबंधित शाखाओं की कार्यप्रणाली और अभिलेखों के रखरखाव के बारे में जानकारी दी।
मंडलायुक्त ने अंत में अधिकारियों को निर्देश दिया कि कार्यालय की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए समय-समय पर आंतरिक समीक्षा भी की जाए, ताकि प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बनी रहे तथा आम जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकें।

लोक अदालत आज से, आपसी सहमति से निस्तारित होंगे केस

-राष्ट्रीय लोक अदालत 14 मार्च को
Post on 10.3.26
Tuesday, Moradabad
Rajesh Bhatia

मुरादाबाद।(उप्र समाचार सेवा)
जिले में लोक अदालत की बुधवार से शुरुआत होगी। तीन दिन चलने वाली लोक अदालत में आपसी सहमति से केसों का निस्तारण होने लगेगा। जबकि 14 मार्च राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की जाएगी। इस दौरान विभिन्न अदालतों में लंबित मामलों का निस्तारण किया जाएगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव तपस्या त्रिपाठी ने बताया कि मुरादाबाद जिले में 11 से 13 मार्च तक विशेष लोक अदालत लगाईं जा रही है।प्राधिकरण सचिव ने बताया कि मुरादाबाद जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत से पहले तीन दिवसीय विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। इसमें लघु आपराधिक वादों के निस्तारण पर जोर है। सभी अदालतों में लघु आपराधिक मामलों के निस्तारण के लिए वादों का चयन किया गया है। इनका सफल निस्तारण किया जाएगा।
प्राधिकरण सचिव ने अपील की कि इस विशेष लोक अदालत व राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर अपने वादों का निस्तारण कराएं।

कैबिनेट ने जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाया

नई दिल्ली 10 मार्च 26, मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने  नई दिल्ली में संवाददाताओं को यह जानकारी दी।
उन्‍होंने बताया  कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में जल शक्ति मंत्रालय के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके तहत जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन को बुनियादी ढांचे के निर्माण से लेकर सेवा वितरण के स्‍तर तक पुनर्गठित किया जाना है।
जल जीवन मिशन के पुनर्गठन के लिए मंत्रिमंडल ने इसके कुल परिव्यय को बढाकर 8 लाख 69 हजार करोड रुपये कर दिया है। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 3 लाख 59 हजार करोड़ रुपये की सहायता शामिल है।
सुजलम भारत की स्थापना को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने  इसके साथ ही एक समान राष्ट्रीय डिजिटल ढांचा, “सुजलम भारत”, स्थापित करने को भी मंजूरी दी है। इसके तहत प्रत्येक गांव को एक विशिष्ट सुजल गांव/सेवा क्षेत्र आईडी आवंटित की जाएगी। इससे स्रोत से नल तक संपूर्ण पेयजल आपूर्ति प्रणाली का डिजिटल मानचित्रण किया जाएगा।
मदुरै हवाई अड्डे का दर्जा अंतरराष्ट्रीय 
मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु के मदुरै हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे का दर्जा देने का फैसला किया है। मदुरै शहर में स्थित मदुरै हवाई अड्डा राज्य के सबसे पुराने हवाई अड्डों में से एक है। यह दक्षिणी तमिलनाडु के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार और पर्यटन तथा तीर्थयात्रा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। मदुरै हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय दर्जा देने से क्षेत्रीय संपर्क बढ़ेगा, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में आर्थिक विकास को गति मिलेगी। अंतर्राष्ट्रीय तीर्थयात्रियों और व्यवसायों को आकर्षित करने की हवाई अड्डे की क्षमता शहर के ऐतिहासिक महत्व के अनुरूप है।
जेवर हवाई अड्डे तक पहुंच के लिए धनराशि 
इस बीच, मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के दिल्ली-फरीदाबाद-बल्लभगढ़-सोहना सेक्‍शन से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोडने के लिए ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी परियोजना के लिए 3 हजार 630 करोड 77 लाख रुपये मंजूर किए हैं। कुल करीब साढ़े 31 किलोमीटर लंबा यह गलियारा दक्षिण दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक सीधे और तीव्र गति का संपर्क जरिया बनेगा। इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे से जुड़ेगा उज्जैन 
आर्थिक मामलों की समिति ने एनएच-752डी के बदनवार-पेटलावाद-थंदला-तिमरवानी खंड से 80दशमलव45 किलोमीटर लंबे चार-लेन कॉरिडोर के विकास को भी मंजूरी दी है। इसपर कुल 3 हजार 839 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत आएगी। यह कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर तिमरवानी इंटरचेंज से जोड़ेगा। प्रस्तावित चार-लेन कॉरिडोर परियोजना का प्रमुख उद्देश्य यात्रा को सुगम बनाने के साथ ही  यात्रा समय में लगभग एक घंटे की कमी लाना है।
कैबिनेट समिति ने रेल मंत्रालय की दो परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत 4 हजार 474 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं में सैंथिया-पाकुर चौथी लाइन और संतरागाछी-खड़गपुर चौथी लाइन बनाया जाना शामिल हैं। इससे भारतीय रेल की परिचालन दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में सुधार होगा।

उत्तराखंड: विधानसभा में “देवभूमि परिवार विधेयक-2026” पेश

देहरादून, 10उत्तराखंड सरकार ने बजट सत्र के दौरान आज विधानसभा में “देवभूमि परिवार विधेयक-2026” पेश किया। इसका उद्देश्‍य जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन है। इस विधेयक के पारित हो जाने पर राज्य में एक एकीकृत और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस तैयार किया जा सकेगा। इसमें परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य को मुखिया के रूप में दर्ज किया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों में दर्ज लाभार्थियों के डेटा को एक साथ जोड़ा जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी। वर्तमान में सभी सरकारी विभाग अलग-अलग लाभार्थी डेटाबेस इस्तेमाल करते हैं, जिससे आंकड़ों में दोहराव, पुनः सत्यापन की जटिलताएं और समन्वय की कमी जैसी समस्याएं आती हैं।

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