एटा 18 जुलाई उप्रससे। जनपद में कोतवाली देहात थाना क्षेत्र के नगला मदी गांव में सरकारी स्ट्रीट लाइट लगाने को लेकर दो पक्षों में जमकर मारपीट हुई। इस दौरान लाठी-डंडे चले, जिसमें दोनों पक्षों के लगभग एक दर्जन लोग घायल हो गए। घायलों को एटा के वीरांगना अवंतीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार चल रहा है।
घटना आज शनिवार दोपहर की है। मारपीट के बाद खून से लथपथ दोनों पक्षों के लोग कोतवाली देहात पहुंचे। पुलिस ने तत्काल घायलों का मेडिकल परीक्षण करवाया और मामले की जांच पड़ताल शुरू कर दी है। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है।
घायलों में एक पक्ष से यादराम (56 वर्ष), उनके पुत्र अनुज (26 वर्ष), पुत्री सुमन (18 वर्ष) और बांकेलाल (25 वर्ष) शामिल हैं। दूसरे पक्ष से राजेश, प्रीती, माखन देवी (38 वर्ष), सुमन, मनीष और ओमपाल घायल हुए हैं। एक पक्ष के अनुज कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी छोटी बहन गोबर डालने गई थी, तभी दूसरे पक्ष के लव कुश, मनीष और विनोद ने गाली-गलौज शुरू कर दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें, उनके पिता और बहन के साथ मारपीट कर दी।
कोतवाली देहात थाना प्रभारी के. के. लोधी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों से कुल छह लोग घायल हुए हैं, जिनका मेडिकल परीक्षण करवाया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह विवाद गांव में स्ट्रीट लाइट लगाने को लेकर होना बताया गया है।

प्रधानमंत्री ने कई रेलवे स्टेशनों का भी दिया उपहार
मृत्युंजय दीक्षित
जुलाई 17, 2026 का दिन भारतीय रेलवे के लिए एक स्मरणीय दिन बन गया है क्योंकि इस दिन रेल यातायात में विकसित भारत के नये युग का सूत्रपात हुआऔर भा रत को हाइड्रोजन ट्रेन का उपहार मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेश्न से हरी झंडी दिखाकर इसका उद्घाटन किया। अब भारत उन चुनिन्दा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन हो रहा है।अभी तक जर्मनी, फ्रांस और चीन जैसे देश ही इस प्रकार की ट्रेनों का संचालन कर रहे थे ।
जींद-सोनीपत मार्ग पर चलने वाली यह ट्रेन शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली 10 कोच और 3,200 हार्स पावर क्षमता वाली दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों मे शामिल है। यह ट्रेन पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से तैयार की गई है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली इस ट्रेन में हाइड्रोजन से बिजली बनाई जाती है जिससे ट्रेन संचालित होती है। इस प्रक्रिया में केवल जलवाष्प निकलती है इसलिए इससे शून्य कार्बन उत्सर्जन होता है। यह ट्रेन डीजल ट्रेनों की तुलना में प्रदूषण नहीं फैलाती, आवाज भी कम करती है और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करती है। इसके लिए पारपंरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तरह मार्ग पर ओवरहेड बिजली लाईन की जरूरत भी नहीं होती क्योकि बिजली ट्रेन के भीतर ही तैयार होती है। ऐसी ट्रेनों के संचालन से कोयला आधारित बिजली उत्पादन पर निर्भरता कम होगी।
यह 10 कोच वाली दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेनों में शामिल है। यह अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त ट्रेन है जो बाहर से देखने में तो साधारण ट्रेनों की तरह ही लगती है किन्तु जब यात्री ट्रेन के कोच में बैठकर यात्रा करते हैं तो उन्हें एक अलग प्रकार की सुखद अनुभूति होती है। ट्रेन में आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, हाइड्रोजन लीक डिटेक्शन सिस्टम और विशेष फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है। इस ट्रेन में यात्रियों के लिए टिकट का मूल्य 5 से 25 रुपए तक रखा गया है ताकि आम से खास तक सभी वर्ग के लोग इस पूर्ण रूप से स्वदेशी तथा प्रदूषण रहित ट्रेन की आरामदायक यात्रा का लाभ उठा सकें। भारतीय रेलवे की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा में जींद से सोनीपत के बीच 89 किमी प्रतिदिन दो राउंड ट्रिप यानी कुल 356 किमी का सफर तय करेगी। यह हाइड्रोजन ट्रेन जींद सिटी, गोहाना, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भंभेवा, इसापुर खेड़ी, बुटाना, खंडराई, राबरा, लाथ, मोहाना और सोनीपत स्टेशन पर रुकेगी।
भारत की स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन अन्य देशों की तुलना में सबसे कम लागत मात्र 136 करोड़ रुपए में बनी है। ट्रेन की सामान्य ऑपरेशनल स्पीड 75 किमी प्रति घंटा होगी। ट्रायल रन के दौरान इसने 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार प्राप्त की थी। यह ट्रेन एक घंटे में 90 किमी का सफर तय कर सकती है। जबकि कई पुराने डीजल इंजन वाली ट्रेनों को इतनी दूरी तय करने में लगभग दो घंटे लग जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे में व्यापक बदलाव लाने का संकल्प लिया था जो अब धरातल पर उतरता दिख रहा है। भारतीय रेलवे आगामी वर्षों में और भी आधुनिक बनने की तैयारी कर रहा है। सरकार का लक्ष्य व संकल्प भारतीय रेलवे को अधिक सुरक्षित, तेज और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है यह हाइड्रोजन ट्रेन उसी लक्ष्य की दिशा में ले जाने वाली पहल है।
संक्षिप्त इतिहास – भारत में पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई के बोरीबंदर स्टेशन से ठाणे के बीच चलाई गई थी। यह ट्रेन 34 किमी की दूरी तय करती थी इसमें 14 डिब्बे थे1 960 में भारतीय रेलवे ने डीजल इंजनों को अपनाना शुरू किया। इन इंजनों की मदद से लंबी दूरी की ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। मालगाड़ियों की क्षमता बढ़ी और रेलवे का विस्तार पहले की तुलना में तीव्रगति से हुआ। इसके पश्चात रेलवे में विद्युतीकरण का युग आया जिसमें बिजली से चलने वाले इंजन डीजल की तुलना में अधिक तीव्र ,कम प्रदूषण फैलाने वाले और ऊर्जा की दृष्टि से अधिक किफायती सिद्ध हुए। अब समय पूरी तरह से बदल चुका है। अब यात्रियों को सुविधाएं देने के लिए बेहतर तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, वंदेभारत एक्सप्रेस जैसी हाईस्पीड ट्रेनों,आधुनिक कोच, आटोमेटिक सिग्नल सिस्टम, कवच सुरक्षा प्रणाली, डिजिटल टिकटिंग और बेहतर स्टेशन सुविधाएं रेलवे को नई पहचान दे रही हैं। आगामी समय में बुलेट ट्रेनों की रफ्तार भी भारतीय जनमानस देखने वाला है। केवल यात्रियों के लिए ही नहीं भारतीय रेल अब माल ढुलाई के लिए भी आधुनिक ट्रेनों का संचालन कर रही है।
हाइड्रोजन ट्रेन के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जींद और पंजाब के जालंधर से रेलवे की विकास व बदलाव की कहानी बताई और साथ ही कांग्रेस सहित समस्त विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए राजनैतिक संदेश भी दिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जो काम आज हो रहे हैं वो काम तो 30 -40 वर्ष पहले ही हो जाने चाहिए थे लेकिन पहले की सरकारों में यह काम प्राथमिकता में थे ही नहीं। इस पर पहले की सरकारें चर्चा ही नहीं करती थी। 2014 के बाद भाजपा सरकार ने स्थितियों को बदलना शुरू किया। आज पूरे भारत में रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है। अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत 1300 स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है आज ऐसे ही 75 स्टेशनों का लोकार्पण हुआ है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अमृतसर -वाराणसी के बीच चलने वाली संत रविदास एक्सप्रेस ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई।
प्रेषक – मृत्युंजय दीक्षित
फोन नं. – 9198571540
देवरिया। पुलिस महानिदेशक, राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) उत्तर प्रदेश प्रकाश डी. ने शनिवार को देवरिया रेलवे स्टेशन स्थित जीआरपी थाना एवं रेलवे परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने थाना परिसर, मालखाना, शस्त्रागार, अभिलेखों तथा सुरक्षा व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान पुलिस महानिदेशक ने शस्त्रों के रख-रखाव, साफ-सफाई और उनकी नियमित जांच पर विशेष बल देते हुए कहा कि पुलिस के हथियार केवल संसाधन नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनका रख-रखाव पूरी जिम्मेदारी और निर्धारित मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए।
उन्होंने रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि जीआरपी के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को पूरी सतर्कता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिया कि स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय तथा ट्रेनों में लगातार गश्त बढ़ाई जाए, संदिग्ध व्यक्तियों एवं लावारिस वस्तुओं पर विशेष नजर रखी जाए तथा महिला, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के प्रति विशेष सजगता बरती जाए।
अपने संबोधन में पुलिस महानिदेशक प्रकाश डी. ने कहा, “रेलवे प्रतिदिन लाखों यात्रियों की जीवनरेखा है। ऐसे में जीआरपी की जिम्मेदारी केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक यात्री को सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी ईमानदारी, अनुशासन और सतर्कता के साथ अपनी ड्यूटी निभाएं। किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। जनता का विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है और उसे बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।”
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के साथ-साथ यात्रियों से शालीन व्यवहार किया जाए, ताकि पुलिस की सकारात्मक छवि और जनविश्वास मजबूत हो।
इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक आनंद कुमार पांडेय सहित जीआरपी एवं स्थानीय पुलिस के कई अधिकारी उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पुलिस महानिदेशक को स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था, अपराध नियंत्रण तथा यात्री सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी भी दी।