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20 माह बाद भी ध्वस्तीकरण आदेश बेअसर, भू-माफिया को संरक्षण देने के आरोपों से घिरा प्रशासन

August 2, 2026

20 माह बाद भी ध्वस्तीकरण आदेश बेअसर, भू-माफिया को संरक्षण देने के आरोपों से घिरा प्रशासन

एसडीएम सदर के आदेश के अनुपालन न होने पर उठे सवाल, अवैध निर्माण, फर्जी दस्तावेज और कर चोरी के गंभीर आरोप

हाथरस। जनपद हाथरस में प्रशासनिक कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विनियमित क्षेत्र एसडीएम सदर द्वारा पारित एक चर्चित ध्वस्तीकरण आदेश का लगभग 20 माह बाद भी अनुपालन न होने से जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। आरोप है कि अलीगढ़ रोड स्थित औद्योगिक आस्थान के भूखंड संख्या C-20/21 (H-20/21) पर बने कथित अवैध रिहायशी निर्माण को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण अब तक ध्वस्त नहीं किया गया।बताया गया है कि एसडीएम सदर एवं नियत प्राधिकारी द्वारा 12 नवंबर 2024 को उक्त निर्माण को ध्वस्त करने का अंतिम आदेश पारित किया गया था। इसके बावजूद लंबे समय बाद भी आदेश केवल कागजों तक सीमित है और मौके पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में कई विभागों के नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि औद्योगिक भूखंड पर परशुराम कॉलोनी की बाह्य रजिस्ट्री का कथित रूप से कूटरचित उपयोग कर प्रतिभा गर्ग के नाम 14 किलोवाट का घरेलू विद्युत कनेक्शन (खाता संख्या-2192241000) स्वीकृत कराया गया।इसी प्रकार राज्य कर विभाग के अभिलेखों के अनुसार, उपायुक्त राज्य कर के पत्रांक 350 दिनांक 28 अक्टूबर 2025 में उल्लेख है कि ‘पिंकी रबड़ उद्योग प्रा. लि.’ (GSTIN: 09AAACP1518K1ZF) का पंजीकरण 1 जनवरी 2022 से निरस्त है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि निरस्त जीएसटी फर्म की आड़ में औद्योगिक भूखंड का अवैध रूप से आवासीय उपयोग किया जा रहा है तथा कर चोरी भी की जा रही है।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि औद्योगिक आस्थान के मूल आवंटन की शर्तों का उल्लंघन करते हुए भूखंड का उपयोग औद्योगिक के बजाय रिहायशी उद्देश्य से किया जा रहा है।प्रकरण के शिकायतकर्ता राजीव कुमार वार्ष्णेय , पुत्र स्व. बनारसीदास, निवासी धर्मकुंज, पुराना मिल कम्पाउंड, हाथरस ने जिलाधिकारी सहित उच्चाधिकारियों को ज्ञापन देकर मांग की है कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के निष्पादन प्रावधानों के तहत पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध निर्माण को तत्काल ध्वस्त कराया जाए।ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विद्युत कनेक्शन लेने तथा कथित कर चोरी के मामले में अरुण गर्ग, अभय गर्ग एवं प्रतिभा गर्ग सहित यदि जांच में कोई अधिकारी संलिप्त पाया जाए तो उनके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS-2023) की धारा 318(4), 336(3), 340(2), 338 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत नामजद एफआईआर दर्ज कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।स्थानीय लोगों एवं सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब सक्षम प्राधिकारी का अंतिम आदेश भी महीनों तक लागू नहीं हो पा रहा है तो शासन की जीरो टॉलरेंस नीति और “कानून का राज” जैसे दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई करता है तो दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और यदि शिकायतें निराधार हैं तो प्रशासन को भी सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस बहुचर्चित प्रकरण में न्यायालयीन आदेश का अनुपालन कर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराता है या यह मामला भी फाइलों तक सीमित रह जाता है।