सीएचसी के सामने चल रहे फर्जी क्लिनिक अप्रशिक्षित झोलाछाप मरीजों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़
लखीमपुर खीरी।नेपाल सीमा से सटे निघासन और तिकुनिया क्षेत्र में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। निघासन तहसील के दुबहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ठीक सामने और बम्भनपुर व छेदुई पतिया पीएचसी के आसपास दर्जनों अवैध अस्पताल, फर्जी क्लिनिक और बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर खुलेआम संचालित हो रहे हैं। कड़िया डागा,तिकुनिया और बेलरायां सीमा तक फैले इस अवैध नेटवर्क ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं।मरीजों की जान से खिलवाड़ स्थानीय नागरिकों और जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार, इन अवैध सेंटरों पर न तो कोई वैध रजिस्ट्रेशन है और न ही डॉक्टरों के पास कोई मान्यता प्राप्त डिग्री।अप्रशिक्षित और झोलाछाप लोग मरीजों को बेधड़क हावी एंटीबायोटिक्स, गलत दवाएं और इंजेक्शन लगा रहे हैं।
दस्तावेज़ नदारद: हालिया पड़ताल में कई क्लिनिकों से न तो क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का लाइसेंस मिला और न ही फार्मासिस्ट के प्रमाण पत्र।संक्रमण का खतरा: गुणवत्ताहीन दवाओं और असुरक्षित तरीकों से इलाज के कारण मरीजों में गंभीर संक्रमण और जटिलताएं बढ़ रही हैं। सरकारी अस्पताल के सामने समानांतर ‘दुकानें’
हैरानी की बात यह है कि ये फर्जी क्लिनिक सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के बिल्कुल नाक के नीचे फल-फूल रहे हैं। पीएचसी स्टाफ का कहना है कि वे सीमित संसाधनों में काम कर रहे हैं, लेकिन प्रशासनिक निगरानी के अभाव में यह अवैध तंत्र हावी होता जा रहा है। ये क्लिनिक इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि सिर्फ पैसे उगाहने वाली दुकानें बन चुके हैं। मरीजों की जिंदगी से खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है और जिम्मेदार अफसर आंखें मूंदे बैठे हैं।आक्रोशित स्थानीय नागरिक
जनप्रतिनिधियों में आक्रोश, जनआंदोलन की चेतावनी
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, बीजेपी नगर प्रतिनिधियों और जागरूक नागरिकों ने खीरी के जिलाधिकारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से तुरंत कड़े कदम उठाने की मांग की है। लोगों का सीधा आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग या तो इस पूरे खेल से आंखें मूंदे बैठा है या फिर सब जानते हुए भी अनजान बनने का नाटक कर रहा है। नागरिक मंचों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन अवैध सेंटरों पर छापेमारी कर सीलिंग और FIR की कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा जनआंदोलन करेंगे। प्रशासन का रुख फिलहाल, इस मामले पर स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई आधिकारिक बयान न देकर जांच के लिए समय मांगा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कब नींद से जागता है और इन ‘मौत की दुकानों’ पर ताला लटकाता है।

