- गुरु तेगबहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
भुवनेश्वर, 28 जुलाई 2026, रेलवे ऑडिटोरियम में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि धर्म विरोधी शक्तियों को यह लगता है कि भारत में धर्म जागृति, धर्म की रक्षा तथा समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करने वाले महापुरुषों को शारीरिक रूप से समाप्त करने से यह कार्य रुक जाएगा, पर भारत में यह संभव नहीं है। इस तरह के कृत्यों से भारत न झुकेगा न रुकेगा। आततायियों द्वारा स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी की हत्या की जाती है तो अनेक लक्ष्मणानंद सरस्वती पैदा होंगे तथा धर्म व राष्ट्र के कार्य को आगे बढ़ाएंगे क्योंकि यह मृत्युंजयी भारत है, अविनाशी भारत है।
कार्यक्रम में सरकार्यवाह ने स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘वेदांत केशरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती: कृति एवं व्यक्तित्व’ का विमोचन किया। कार्यक्रम में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती स्मृति न्यास के अध्यक्ष स्वामी जीवन मुक्तानंद पुरी जी सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन न्यास के न्यासी मनसुख लाल सेठिया ने किया।
धर्म के लिए बलिदान की गौरवशाली परंपरा
सरकार्यवाह ने कहा कि भारत में धर्म और समाज की रक्षा के लिए बलिदान देने की एक लंबी परंपरा रही है। गुरु तेग बहादुर, स्वामी श्रद्धानंद से लेकर स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती तक अनेक महापुरुषों ने धर्म और समाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में राष्ट्रहित में कार्य करने वाले लोगों पर हमले होते रहे हैं। केरल में वामपंथी हिंसा और कई राज्यों में नक्सली हिंसा के उदाहरण हैं। ऐसी घटनाएं राष्ट्र सेवा के कार्य को रोक नहीं सकतीं। इसके विपरीत, ऐसी परिस्थितियां और अधिक लोगों को समाज एवं राष्ट्र के लिए कार्य करने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी ने अपना पूरा जीवन धर्म रक्षा, समाज संगठन और सामाजिक समरसता के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने स्वयं कार्य करने के साथ-साथ हजारों ऐसे कार्यकर्ताओं को तैयार किया, जो आज भी उनके दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। स्वामी जी पर लिखी गई यह पुस्तक केवल प्रशंसा का ग्रंथ नहीं है, बल्कि उनके जीवन, विचारों और कार्यों से प्रेरणा लेने का माध्यम है। यह पुस्तक समाज को प्रेरित करने वाला महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे साहित्य की आवश्यकता इसलिए है ताकि नई पीढ़ी राष्ट्र और धर्म के लिए समर्पित महान व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण के कार्य में योगदान दे सके।
आध्यात्मिक शक्ति और सामाजिक सेवा का अद्भुत संगम
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती ने सांसारिक जीवन और मोह-माया का त्याग कर अपना पूरा जीवन वनवासी समाज के उत्थान, गौ संरक्षण, धर्म जागरण और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने समाज के दुख-दर्द को दूर करने और लोगों को मूल्यों एवं संस्कारों के मार्ग पर चलने के लिए निरंतर प्रेरित किया।
पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने पुस्तक के लिए लिखे अपने संदेश में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के लिए “वीर” और “तपस्वी” जैसे शब्दों का प्रयोग किया है, जो उनके संपूर्ण व्यक्तित्व का सटीक परिचय देते हैं। समाज में दो प्रकार के महापुरुष होते हैं जो सूर्य मंडल को भेद सकते हैं। इनमें एक वे, जो अपने तप और साधना से आध्यात्मिक ऊंचाइयों को प्राप्त करते हैं अर्थात योगी, और दूसरे वे, जो राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा के लिए वीरगति को प्राप्त होते हैं। स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती उच्च आध्यात्मिक विभूति होने के साथ साथ धर्म, समाज व राष्ट्र के लिए बलिदान दिया। उनके जीवन में दोनों गुण एक साथ दिखाई देते हैं।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत
सरकार्यवाह ने कहा कि भारत को विश्व का मार्गदर्शन करने वाली शक्ति बनाए रखने के लिए वर्तमान पीढ़ी को स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के विचारों और जीवन दर्शन से प्रेरणा लेनी होगी। स्वामी जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार, एक दर्शन और राष्ट्र जीवन को प्रेरित करने वाली शक्ति हैं। उनकी जीवनी नई पीढ़ी में राष्ट्रभाव, सांस्कृतिक चेतना और सेवा के संस्कारों को मजबूत करेगी। सरकार्यवाह जी ने गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर लोगों से आह्वान किया कि ऐसे महान गुरुओं के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेना ही उनके प्रति सच्ची गुरु दक्षिणा होगी।
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का जीवन प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ : मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती का त्याग, संघर्ष, जनजातीय समाज की सेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण से परिपूर्ण जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत बना रहेगा। महापुरुषों का जीवन केवल अतीत की घटनाओं का संग्रह नहीं होता, बल्कि वह युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक प्रकाश का कार्य करता है।
समाज के वंचित और अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के कल्याण के लिए स्वामी जी की निष्ठापूर्ण साधना तथा राष्ट्र चेतना के प्रसार का कार्य भारतीय संस्कृति और सामाजिक जीवन को सदैव समृद्ध करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जीवन पर आधारित यह पुस्तक भविष्य में स्कूलों और कॉलेजों के पुस्तकालयों में उपलब्ध होगी तथा विद्यार्थियों को उनके आदर्शों और विचारों से प्रेरणा प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती केवल एक संत नहीं थे, बल्कि कंधमाल के वनवासी भाइयों और बहनों के लिए सुरक्षा कवच तथा जागृत आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक थे। चकापाड़ा और जलेशपट्टा आश्रमों के माध्यम से स्वामी जी ने वनवासी बालिकाओं की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। स्वामी जी ने अवैध धर्मांतरण, गौ-हत्या और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती जी के जन्म शताब्दी वर्ष समारोह की शुरुआत 21 अगस्त से होगी। इस अवसर पर ओडिशा के विभिन्न गांवों और देश के विश्वविद्यालयों में सेमिनार एवं कार्यशालाओं के माध्यम से उनके विचारों और आदर्शों का प्रसार किया जाएगा।
वर्ष 2008 में जन्माष्टमी की रात हुई स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या का उल्लेख करते हुए तत्कालीन सरकार पर विफलता और तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति नायडू आयोग की रिपोर्ट और संबंधित फाइलों का लोक सेवा भवन से गायब होना एक “सुनियोजित षड्यंत्र” है। इन गायब फाइलों की जांच का जिम्मा क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। जांच के बाद वास्तविक तथ्य सामने आएंगे और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या के पीछे जो भी दोषी होंगे, उन्हें किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग का अनुसरण करना ही सच्ची श्रद्धांजलि – धर्मेंद्र प्रधान
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पूज्य वेदांत केसरी स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके दिखाए मार्ग और सेवा कार्यों का अनुसरण किया जाए। जिन मूल्यों, समाजसेवा और राष्ट्रसेवा के लिए स्वामी जी ने अपना जीवन समर्पित किया, उन्हें आत्मसात कर ओडिशा को आगे ले जाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
चार दशक पुरानी घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन ओडिशा के मुख्यमंत्री डॉ. हरेकृष्ण महताब कंधमाल क्षेत्र में तेजी से हो रहे धर्मांतरण को लेकर अत्यंत चिंतित थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए महताब ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी भूपेन बसु के माध्यम से संदेश भेजकर आग्रह किया था कि कोई संत तत्काल फुलबाणी (वर्तमान कंधमाल जिला) भेजा जाए। उनका मानना था कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो क्षेत्र की सामाजिक और सांस्कृतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रकाशित पुस्तक केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक महान व्यक्तित्व की तपस्या, संघर्ष और समर्पण का अमूल्य दस्तावेज है। ऐसी पुस्तक की आवश्यकता लंबे समय से अनुभव की जा रही थी, जिसकी पूर्ति अब हुई है।
उन्होंने कहा कि स्वामी जी पूरे ओडिशा और सनातन समाज में अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के केंद्र हैं। स्वामी जी केवल आध्यात्मिक साधना तक सीमित नहीं थे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई, सामाजिक विकास और जनकल्याण के कार्यों में भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। जन्माष्टमी की रात हुई उनकी निर्मम हत्या की घटना आज भी लोगों को झकझोर देती है।
उन्होंने कहा कि स्वामी जी स्वयं एक दीपक की तरह जलकर दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाते रहे। उनके द्वारा दिखाए गए मूल्यों, सेवा कार्यों और सत्य के मार्ग को अपनाना तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान देना ही उनके प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर स्वामी जी के जीवन और साधना को पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करने वाले लेखक द्वय बिपिन बिहारी नंद और बांच्छानिधि पंडा भी उपस्थित थे।
Bhubaneswar, 28th July, 2026: At the book release function held at Railway Auditorium, Dattatreya Hosabale ji, Sarkaryavah of Rashtriya Swayamsevak Sangh said that anti-Dharma forces feel that in India, awakening of Dharma, protection of Dharma and physical elimination of great men working for society and nation will stop this work, but in India it is not possible. India will not be cowed down or deterred by such acts. If Swami Laxmanananda Saraswati ji is killed by terrorists, many Laxmanananda Saraswatis will be born and will carry forward the work of Dharma and the nation because this is Mrityunjayee Bharat, indestructible Bharat. At the event, Sarkaryavah released the book “Vedanta Keshari Swami Laxmanananda Saraswati: Kriti and Personality” published by Swami Laxmanananda Saraswati Smriti Nyas. Chief Minister of Odisha Mohan Charan Majhi, Member of Parliament from Sambalpur Dharmendra Pradhan, Chairman of Swami Laxmanananda Saraswati Smriti Nyas Swami Jeevan Muktananda Puri Ji along with a large number of saints, social workers and dignitaries were present on the occasion. The programme was compered by Mansukh Lal Sethia, trustee of the trust.
