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भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यक्रम को कार्यकर्ता सफल बनाएं: धर्मपाल सिंह

July 1, 2026

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के कार्यक्रम को कार्यकर्ता सफल बनाएं: धर्मपाल सिंह

Posted on 01.07.2026, Time 09.44 PM, Barabanki News, Bharatiya Janata Party Uttar Pradesh
लखनऊ 01 जुलाई 2026, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने बुधवार को बाराबंकी में राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवास बैठक की तैयारियों के संबंध में अवध क्षेत्र में निवास करने वाले प्रदेश पदाधिकारियों, अवध क्षेत्र के जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों तथा मंडल अध्यक्षों के साथ संवाद किया।

प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने कहा कि नितिन नवीन जी का भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में यह प्रथम लखनऊ आगमन है। यह प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए गौरव, उत्साह और प्रेरणा का अवसर है। उन्होंने आह्वान किया कि सभी कार्यकर्ता पूर्ण समर्पण, अनुशासन और उत्साह के साथ जुटें तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगमन कार्यक्रम को भव्य, दिव्य और अविस्मरणीय स्वरूप प्रदान करें। सभी जिलाध्यक्ष सुनिश्चित करें कि सभी जिलों के मंडल अध्यक्ष एवं शक्ति केंद्र संयोजक समय से लखनऊ पहुंचे।
श्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपने लखनऊ प्रवास के दौरान अवध क्षेत्र के जिलाध्यक्षों, मंडल अध्यक्षों तथा शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ संगठनात्मक संवाद करेंगे। यह संवाद संगठन को और अधिक सशक्त, सक्रिय तथा प्रभावी बनाने की दिशा में प्रेरक होगा।
श्री सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का प्रवास कार्यकर्ताओं में नवीन ऊर्जा एवं उत्साह का संचार करेगा तथा संगठनात्मक कार्यों को नई गति प्रदान करेगा। उन्होंने सभी पदाधिकारियों से संवाद करते हुए कहा कि कार्यक्रम की प्रत्येक व्यवस्था को माइक्रो मैनेजमेंट, अनुशासन और समन्वय के साथ पूर्ण करें। भारतीय जनता पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता संगठन की रीति-नीति, अनुशासन और सेवा भाव का प्रतीक है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जी का यह प्रवास संगठनात्मक दृष्टि से ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायी सिद्ध होगा।

चलते रोटावेटर की चपेट में आने से 13 वर्षीय बालक की दर्दनाक मौत

मैनपुरी। थाना एलाऊ क्षेत्र के गांव बखतपुर में खेत की जुताई के दौरान एक दर्दनाक हादसे में 13 वर्षीय बालक की मौत हो गई। हादसे के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल है। जानकारी के अनुसार गांव बखतपुर निवासी सूरज कश्यप अपने खेत में ट्रैक्टर से रोटावेटर लगाकर मक्का की जुताई करवा रहे थे। इसी दौरान उनका 13 वर्षीय पुत्र अजीत खेत पर पहुंच गया। बताया जा रहा है कि अजीत ने चलते ट्रैक्टर पर पीछे की ओर से चढ़ने का प्रयास किया, लेकिन अचानक उसका पैर फिसल गया और वह सीधे रोटावेटर की चपेट में आ गया। जब तक चालक ट्रैक्टर रोक पाता, तब तक बालक गंभीर रूप से घायल हो चुका था। हादसा होते ही खेत पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बालक को रोटावेटर से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना मिलते ही थाना अध्यक्ष अवनीश त्यागी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वहीं उपजिलाधिकारी भोगांव नीरज द्विवेदी ने भी घटनास्थल पहुंचकर परिजनों को सांत्वना दी। परिजनों की इच्छा पर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया। पंचनामा भरने की कार्रवाई पूरी करने के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया गया। गमगीन माहौल में बालक का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना था सांस्कृतिक रूप से समृद्ध भारत: नीरज सिंह

Posted on 01.07.2026 Wednesday, Time 07.36 PM, Lakhimpur Kheri News

लखीमपुर खीरी, 01 जुलाई 2026, पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी संस्मरण पक्ष के अंतर्गत आयोजित नगर के लिगसी बैंक्विट हॉल में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह ने कहा कि भाजपा श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बताए रास्ते पर चल रही है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना था कि भारत तेज औद्योगिक विकास करे एवं सांस्कृतिक रूप से सम्राट हो

श्री मुखर्जी जब केंद्र में और उद्योग मंत्री थे उन्होंने इसके लिए पूरे देश में कल कारखानों की नींव रखी और तेजी से देश को औद्योगिक रूप से आगे बढ़ाया श्री मुखर्जी मेधावी प्रतिभा के धनी थे 33 वर्ष की आयु में भी कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने तथा 1941 में प्रगतिशील गठबंधन के तहत गठित सरकार में वित्त मंत्री रहे । 1943 से 1946 तक भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष रहे आजादी के बाद ब्रिटिश सरकार में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल रहे 6 अप्रैल 1950 को नेहरू जी से मतभेद के कारण त्यागपत्र दे दिया क्योंकि उनकी मूल भावना हिंदुत्व एवं भारतीय संस्कृति का उत्थान उनका मूल लक्ष्य था। वह देश में एक एक विधान एक निशान के प्रणेता थे कश्मीर में परमिट प्रथा की वह घोर विरोधी थे। उन्होंने परमिट प्रथा को तोड़ते हुए कश्मीर जाकर भारत का झंडा लहराया और वहीं पर उनकी दुखद मृत्यु हो गई देश के लिए शहीद हुए । उनके सपने को पूरा किया भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्होंने कश्मीर से धारा 370 को हटाकर।

सम्मेलन के द्वितीय सत्र को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय मंत्री विकास सिंह ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के प्रेरक प्रसंग को बताते हुए कहा कि वह प्रतिभा के साथ-साथ कानून के भी ज्ञाता थे।

उन्होंने पश्चिम बंगाल को पाकिस्तान में जाने से रोक और भारत को एक बनाए रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया । आज हम सब उनकी शताब्दी वर्ष मनाने के नजदीक खड़े हैं ।

सम्मेलन की तीसरे सत्र को संबोधित करते हुए भाजपा के जिला अध्यक्ष अरविंद गुप्ता ने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी विलक्षण प्रतिभा के धनी होने के साथ ही साथ कम उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय की कुलपति बने। सम्मेलन का कुशल संचालन जिला महामंत्री एवं कार्यक्रम संयोजक अनुराग मिश्रा ने किया । सम्मेलन का प्रारंभ वंदे मातरम से और समापन राष्ट्रगान से हुआ। सम्मेलन में विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह योगेश वर्मा श्रीमती मंजू त्यागी विनोद शंकर अवस्थी, सुनील सिंह शरद बाजपेई डॉक्टर हीरा श्रीवास्तव महामंत्री मनोज वर्मा महामंत्री राजेश सिंह मंच आसीन  थे।

इच्छाधारी’ आस्था का चुनावी गणित

प्रणय विक्रम सिंह

अयोध्या के संदर्भ में विपक्ष की नई-नई जागी श्रद्धा को देखकर मुझे लगा कि रामचरितमानस में तुलसीदास जी से एक बहुत बड़ी चूक हो गई है।

वे मारीच, सुबाहु और कालनेमि जैसे दिव्य भेष बदलने वाले मायावियों को त्रेतायुग में ही निपटा गए। उन्हें जरा रुकना चाहिए था। वे आज के युग में आते, तो देखते कि भेष बदलने की यह कला अब केवल राक्षसों की बपौती नहीं रही, इसका लोकतांत्रिक विकास हो चुका है और अब इसके सबसे कुशल अभ्यासकर्ता हमारे राजनेता हैं।

सुना है, कल तक जो लोग भगवान राम को केवल एक अदालती एफेडेविट का ‘काल्पनिक पात्र’ मानते थे, आज वे चुनाव की आहट सुनते ही हाथ में आस्था का नया-नवेला थर्मामीटर लेकर घूम रहे हैं। वे ट्विटर पर अयोध्या को ‘अनुपम और अनुकरणीय धार्मिक नगरी’ बनाने की वैसी ही पवित्र कसमें खा रहे हैं, जैसी कसमें एक जेबकतरा अपनी ईमानदारी सिद्ध करने के लिए कोट कचहरी में खाता है।

इस दिव्य और त्वरित हृदय परिवर्तन को देखकर मुझे गिरगिटों की मानसिक स्थिति पर तरस आता है। बेचारे डिप्रेशन में होंगे कि जिस हुनर के लिए वे सदियों से बदनाम थे, उसमें कुछ सैफई ब्रांड समाजवादी इंसानों ने पीएचडी कर ली और उन्हें कहीं का नहीं छोड़ा।

आखिर कोई उस राम-नाम का जाप इतनी पवित्रता से कैसे कर सकता है, जिसके राजनीतिक कुनबे का पूरा इतिहास ही राम-विरोध की खाद पर फला-फूला हो?

आजकल वे फीता लेकर निकले हैं। पूछ रहे हैं कि *अयोध्या से गोरखपुर कितनी दूर है?* नेताजी, दूरी नापने का यह शौक नया है। पर आप गलत नक्शा देख रहे हैं। अयोध्या से गोरखपुर की दूरी तो उतनी ही है, जितनी *सत्य और सनातन* के बीच होती है। यानी दोनों आपस में जुड़े हैं। पर आपके ‘पारिवारिक सिंडिकेट’ और रामराज्य के बीच की दूरी अनंत है, जिसे नापने के लिए आपके पास न तो नैतिक पैमाना है और न ही वैसा चरित्र। अच्छा होता कि आप इस दूरी को नापने से पहले यह बता पाते कि राम के प्रति आपकी खानदानी नफरत और आपके वोटबैंक के लालच के बीच कुल कितने किलोमीटर का फासला है?

जब आदमी को अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती दिखती है, तो उसे इतिहास की कड़वी यादें भूलने का ‘अल्जाइमर’ रोग हो जाता है। लेकिन जनता की याददाश्त बहुत क्रूर होती है, नेताजी। जनता को आज भी याद है कि जब आपके पूज्य पिताजी की हुकूमत थी, तब अयोध्या की पावन गलियों में कोई भजन नहीं गूंज रहा था, बल्कि निहत्थे रामभक्तों का खून बह रहा था। तब आपकी सरकारी मशीनरी मंदिर के पत्थरों को ज़ब्त करने में वैसी ही मुस्तैदी दिखा रही थी, जैसी मुस्तैदी कोई डकैत माल समेटने में दिखाता है। और उसी पावन दौर में, पुलिस थानों और जेलों में कृष्ण जन्माष्टमी मनाने पर ऐसा प्रतिबंध था, मानो कंस खुद लखनऊ के सचिवालय में आकर बैठ गया हो।

जो लोग कल तक रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा के निमंत्रण पत्र को अछूत मानकर ठुकरा रहे थे, आज वे ‘सियाराम-धाम’ के पुनरुद्धार का ठेका लेने की बात कर रहे हैं। यह वैसा ही है जैसे बिल्ली चूहों की सुरक्षा के लिए एक सर्वदलीय समिति बनाने का प्रस्ताव रखे।

राम की सेवा के लिए ‘भेष’ और ‘ट्वीट’ बदलने की नहीं, ‘भाव’ बदलने की जरूरत होती है। पर आपके पास तो वही पुराना हलफनामा है, जो आपने कभी सर्वोच्च न्यायालय में जमा किया था। आपकी पूरी राजनीतिक पूंजी ही यही रही है कि जब तक सत्ता में रहो, हिंदुओं की आध्यात्मिक भावनाओं को वैसे ही कुचलो जैसे रास्ते का कंकड़ कुचला जाता है, और जब चुनाव आ जाएं, तो माथे पर एक लंबा सा छद्म टीका लगाकर ‘इच्छाधारी रामभक्त’ की मुद्रा में जनता को सम्मोहित करने निकल पड़ो।

मेरी की एक बात हमेशा याद रखिएगा भैयाजी, आप भगवान को धोखा दे सकते हैं क्योंकि वे घट-घट वासी होकर भी चुप रहते हैं, पर जनता को नहीं, क्योंकि वह सब देखकर सही समय पर ईवीएम का बटन दबाती है।

सुना है, आपने तो अयोध्या का राजा ही बदल दिया। जबकि सभी सनातनियों के लिए त्रेता युग से आज तक अयोध्या के राजा श्री रामचन्द्र जी हैं। जो काम लंका का रावण अपनी पूरी दस खोपड़ियों की ताकत लगाकर नहीं कर पाया, वह आपने अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए बड़ी सरलता से कर दिया। कई दिनों तक संसद में अपने बगल में उनको बैठाकर घुमाते रहे। राम से इतनी घृणा कि उन्हें अयोध्या के राजा के रूप में स्वीकार करने में आपकी छाती फटने लगती है, इसलिए आपने प्रतीकों का नया बाज़ार सजा लिया। आपका यह दोहरा चरित्र और अतीत उत्तर प्रदेश के हर रामभक्त के सीने में एक गहरे घाव की तरह आज भी टीस रहा है।

याद रखिए, इतिहास की स्याही बहुत पक्की होती है, वह आपके इन बनावटी और सुगठित ट्वीट्स के ‘थूक’ से नहीं धुलेगी। 10 नवंबर 1990 का वह अंधकारमय काला दिन, निहत्थों का रक्तपात, थानों में जन्माष्टमी पर पाबंदी और पावन पत्थरों का अपमान, यह सब आपके माथे पर वो अमिट कलंक हैं, जिन्हें धोने के लिए यदि आप सरयू का पूरा पानी भी इस्तेमाल कर लें, तो भी कम पड़ेगा।

अयोध्या अब सज चुकी है, दिव्य और भव्य हो चुकी है। वहां अब आपके पाखंड का कोहरा नहीं, बल्कि प्रभु राम का ‘परम प्रकाश’ जगमगा रहा है। और इतिहास गवाह है कि जब प्रकाश उदित होता है, तो अंधेरे के व्यापारियों का विसर्जन अपने आप हो जाता है। आपका भी होना निश्चित है।

एटा में जेल से इलाज के लिए आया बंदी फरार, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

एटा 30 जून उप्रससे। जिला मेडिकल कॉलेज में मंगलवार दोपहर के बाद उस समय हड़कंप मच गया, जब इलाज के लिए पुलिस अभिरक्षा में लाया गया एक अभियुक्त पुलिसकर्मियों को चकमा देकर फरार हो गया। अभियुक्त के भागने से मौजूद पुलिसकर्मियों में अफरा तफरी मच गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल मेडिकल कॉलेज परिसर की घेराबंदी कर दी। फरार अभियुक्त की तलाश शुरू की गई और कुछ ही देर बाद पुलिस टीम ने उसे दौड़कर दोबारा हिरासत में ले लिया। अभियुक्त के दोबारा पकड़े जाने के बाद पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली। हालांकि, इस घटना ने मेडिकल कॉलेज में पुलिस सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि अभियुक्त किन परिस्थितियों में पुलिस को चकमा देकर भागने में सफल रहा। इस घटना को लेकर मेडिकल कॉलेज परिसर और शहर में दिनभर चर्चाएं होती रहीं।

जेल अधीक्षक अनिकेषिता श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि अनुपम उर्फ बटकन पुत्र ओमवीर सिंह उम्र करीब 23 वर्ष निवासी थाना मलावन को सीने में जदर्द की समस्या होने पर उपचार के मेडिकल कॉलेज भेजा गया था 29 जून को जेल में प्रवेश किया था। जहां से उसने भागने का प्रयास किया है। पुलिस कर्मियों ने दबोच लिया है।

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