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Mathura News चौमुहां में धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम जयंती

April 19, 2026

Mathura News चौमुहां में धूमधाम से मनाई गई भगवान परशुराम जयंती

मथुरा(चौमुहां) कस्बा चौमुहां में भगवान परशुराम जयंती बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाई गई। इस अवसर पर ब्राह्मण समाज के विप्र बंधुओं ने भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज के कोषाध्यक्ष हेमंत शर्मा ने सभी विप्र बंधुओं का हृदय से स्वागत किया। अध्यक्षता कर रहे हुकम चंद शर्मा ने भगवान परशुराम को आदर्श बताते हुए उनके पदचिह्नों पर चलने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर रमाकांत गौड़ ने भगवान परशुराम के अवतार एवं उनकी शक्तियों का वर्णन करते हुए उन्हें जीवन में अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में ब्राह्मण समाज चौमुहां के अध्यक्ष यतेंद्र कुमार भारद्वाज ने सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में राहुल शर्मा, गौरव दीक्षित, लखन शर्मा, कुक्की पंडित, सुनील शर्मा, भानू मेंबर, हरीश शर्मा, खेमचंद शर्मा, गणेश शर्मा, छोटू, मोनू पंडित, त्रिनेत्र मोहन सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

लोजपा (रामविलास) की वर्चुअल बैठक, संगठन मजबूती पर दिया गया जोर

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Mathura Samachar

मथुरा। अतुल कुमार जिंदल।लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पश्चिम उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष पवन कुमार वर्मा द्वारा एक जूम मीटिंग आयोजित की गई, जिसमें संगठन को मजबूत बनाने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में पवन कुमार वर्मा ने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रत्येक जिले में प्रदेश अध्यक्ष का दौरा किया जाएगा। साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रभारी एवं सांसद अरुण भारती का भी प्रदेशभर में दौरा प्रस्तावित है।
उन्होंने सभी प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और महानगर अध्यक्षों से आह्वान किया कि वे मिलकर बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करें, ताकि पार्टी की पकड़ जमीनी स्तर पर सुदृढ़ हो सके।
बैठक में यह भी बताया गया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसे ध्यान में रखते हुए संगठन विस्तार और मजबूती को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
इस वर्चुअल बैठक में पश्चिम उत्तर प्रदेश के प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष सहित कई कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।

महिला आरक्षण: नारी शक्ति या सत्ता का नया मुखौटा?

 (आरक्षण, नैतिकता और राजनीति का असली सवाल)
Dr Priyanka Saurabh Writer, Poet
– डॉ. प्रियंका सौरभ
देश में जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ, तो इसे “ऐतिहासिक” बताया गया, संसद में तालियां बजीं और महिला सशक्तिकरण के नए युग की घोषणा की गई, लेकिन इस पूरे उत्सव के बीच एक असहज सवाल लगातार सिर उठाता रहा—क्या सच में महिलाओं के लिए राजनीति के दरवाजे खुले हैं, या केवल एक नया प्रतीकात्मक फ्रेम तैयार किया गया है जिसमें वही पुरानी सत्ता की तस्वीर फिट कर दी जाएगी। भारतीय राजनीति का चरित्र आदर्शवाद जितना नहीं, उससे कहीं अधिक यथार्थवादी और कई बार कठोर भी रहा है, जहां सिद्धांतों से ज्यादा समीकरण काम करते हैं और नैतिकता अक्सर सत्ता की सुविधा के हिसाब से बदलती रहती है, ऐसे में यह उम्मीद करना कि केवल आरक्षण से व्यवस्था का चरित्र बदल जाएगा, शायद एक भोला विश्वास हो सकता है। महिलाओं की राजनीति में भागीदारी बढ़नी चाहिए, यह एक बुनियादी लोकतांत्रिक आवश्यकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह भागीदारी वास्तविक सशक्तिकरण में बदलेगी या फिर वही सत्ता संरचना उन्हें अपने ढांचे में ढाल लेगी, जैसा वह हर नए प्रवेशकर्ता के साथ करती आई है। राजनीति में प्रवेश का रास्ता आज भी बेहद जटिल है, जहां परिवार, पूंजी, संपर्क और दलगत निष्ठा का दबाव काम करता है, और महिलाओं के लिए यह राह और अधिक कठिन हो जाती है क्योंकि उन्हें सामाजिक बंधनों, चरित्र पर सवाल और अवसरों की कमी जैसे अतिरिक्त अवरोधों से गुजरना पड़ता है, ऐसे में यह मान लेना कि हर महिला जो आगे बढ़ेगी वह केवल समझौतों के रास्ते ही बढ़ेगी, यह न केवल सरलीकरण है बल्कि उन हजारों महिलाओं के संघर्ष का अपमान भी है जो अपनी मेहनत और योग्यता से जगह बना रही हैं।
असल समस्या यह है कि जिस सिस्टम में यह आरक्षण लागू हो रहा है, वह खुद पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं है, राजनीतिक दलों के भीतर लोकतंत्र की कमी, टिकट वितरण में अपारदर्शिता और नेतृत्व का केंद्रीकरण यह सुनिश्चित करता है कि अवसर योग्यता से अधिक नजदीकियों के आधार पर बांटे जाते हैं, ऐसे में अगर महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित भी हो जाती हैं, तो यह जरूरी नहीं कि वे वास्तव में स्वतंत्र और सशक्त प्रतिनिधि बनकर उभरें, बल्कि यह भी संभव है कि वे उसी सत्ता खेल का हिस्सा बन जाएं जहां निर्णय कहीं और होते हैं और चेहरे कहीं और दिखते हैं। यही कारण है कि इस कानून को लेकर आशा के साथ-साथ आशंका भी स्वाभाविक है, क्योंकि अगर संरचना नहीं बदली, तो परिणाम भी वैसा ही रहेगा जैसा अब तक रहा है। राजनीति में नैतिकता का सवाल भी इस बहस के केंद्र में है, क्योंकि सत्ता के गलियारों में “संपर्क” और “समझौते” की संस्कृति लंबे समय से मौजूद है, और यह केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम में फैली हुई है, ऐसे में अगर इस संस्कृति को चुनौती नहीं दी गई, तो आरक्षण भी उसी ढांचे में समाहित होकर अपना मूल उद्देश्य खो सकता है।
यह भी समझना जरूरी है कि प्रतिनिधित्व बढ़ाने से परिवर्तन की गारंटी नहीं मिलती, कई बार नए लोग भी पुराने ढर्रे पर चलने लगते हैं क्योंकि व्यवस्था उन्हें वैसा बनने के लिए मजबूर करती है, इसलिए किसी भी सुधार का मूल्यांकन केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उसके प्रभाव के आधार पर किया जाना चाहिए, क्या महिलाओं की संख्या बढ़ने से नीतियों में संवेदनशीलता आएगी, क्या सामाजिक मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी, या फिर राजनीति केवल नए चेहरों के साथ पुरानी दिशा में चलती रहेगी, यह एक खुला सवाल है जिसका जवाब समय ही देगा। इस पूरे परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण तत्व जवाबदेही है, अगर कोई भी व्यक्ति, चाहे वह पुरुष हो या महिला, सत्ता का दुरुपयोग करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि हमारे संस्थान स्वतंत्र और मजबूत हों, जो बिना राजनीतिक दबाव के काम कर सकें, दुर्भाग्य से आज अपराध और राजनीति का गठजोड़ एक गंभीर समस्या बन चुका है, जहां कई मामलों में आरोपियों को संरक्षण मिलता है और पीड़ितों की आवाज दबा दी जाती है, ऐसे में यह उम्मीद करना कि केवल आरक्षण इस समस्या को खत्म कर देगा, यथार्थवादी नहीं है।
समाधान के रूप में हमें व्यापक सुधारों की जरूरत है, राजनीतिक दलों के भीतर पारदर्शिता लानी होगी, टिकट वितरण के स्पष्ट और निष्पक्ष मानदंड तय करने होंगे, महिलाओं के लिए सुरक्षित और स्वतंत्र शिकायत तंत्र विकसित करना होगा ताकि वे बिना डर के अपनी बात रख सकें, साथ ही उन्हें केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधि के रूप में नहीं बल्कि सक्षम और प्रशिक्षित नेतृत्व के रूप में तैयार करना होगा, इसके लिए राजनीतिक शिक्षा, संसाधन और संस्थागत समर्थन जरूरी है, और सबसे महत्वपूर्ण, समाज की मानसिकता में बदलाव लाना होगा क्योंकि जब तक महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिलेगा, तब तक कोई भी कानून अपने उद्देश्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर पाएगा। अंततः यह समझना होगा कि देश की समस्याओं का समाधान केवल सीटों की संख्या बढ़ाने में नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में है, क्योंकि एक सशक्त समाज ही एक सशक्त लोकतंत्र की नींव रख सकता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक अवसर है, लेकिन यह अवसर तभी सार्थक होगा जब इसे ईमानदारी और दूरदर्शिता के साथ लागू किया जाएगा, अन्यथा यह भी एक नया मुखौटा बनकर रह जाएगा, जिसके पीछे वही पुरानी सत्ता की तस्वीर छिपी होगी।

छह माह के बेटे से बिछुड़ी मां, ससुराल पक्ष पर मारपीट व बच्चे को छीनने का आरोप

हाथरस। शहर के खोड़ा हजारी क्षेत्र की रहने वाली ममता ने अपने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए न्याय की गुहार लगाई है। पीड़िता का कहना है कि उसका 6 साल का बेटा उससे छीन लिया गया है, जिसके लिए वह दर-दर भटकने को मजबूर है।ममता के अनुसार उसकी शादी 4 दिसम्बर 2024 को मथुरा निवासी सचिन के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही पति और ससुराल पक्ष द्वारा दहेज में गाड़ी की मांग को लेकर उसे प्रताड़ित किया जाने लगा। पीड़िता ने आरोप लगाया कि कई बार उसके साथ मारपीट भी की गई।पीड़िता का कहना है कि ससुराल वालों ने मारपीट करते हुए उसके बच्चे को जबरन छीन लिया और उसे घर से निकाल दिया। इतना ही नहीं, आरोप है कि दबाव बनाकर उसका वीडियो भी बनाया गया, जिसमें उससे जबरन तलाक की बात कबूल कराई गई।ममता ने बताया कि उसने इस संबंध में हाथरस के महिला थाने में शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़िता ने प्रशासन से अपने बच्चे को वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Hathras News विहिप बैठक में धर्मांतरण व ‘लव जिहाद’ पर सख्त कानून की मांग

फोटो -धर्मांतरण के खिलाफ बैठक करते  पदाधिकारी

हाथरस। प्रखंड सासनी में विश्व हिंदू परिषद की एक बैठक दयानंद बाल विद्यालय में आयोजित की गई, जिसमें धर्मांतरण और तथाकथित ‘लव जिहाद’ के मुद्दों पर चर्चा करते हुए सख्त कानून बनाने की मांग उठाई गई।बैठक को संबोधित करते हुए जिला उपाध्यक्ष डॉ. अमित भार्गव ने कहा कि इन विषयों पर गंभीरता से कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठित समूहों द्वारा सुनियोजित तरीके से ऐसे मामलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही युवतियों को सतर्क रहने की सलाह भी दी गई।बजरंग दल के संयोजक अंकित उपाध्याय और सहसंयोजक विक्की कुशवाहा ने कहा कि इन मामलों को रोकने के लिए मौजूदा कानूनों को और अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए, ताकि दोषियों में भय बना रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष योगेश वार्ष्णेय ने की, जबकि संचालन प्रखंड मंत्री जगदीश प्रसाद शर्मा ने किया। बैठक में विभिन्न पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे और संगठन की ओर से समाज में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया गया।इस दौरान विद्याभूषण गर्ग, हेमंत कौशल, सचिन भार्गव, जयपाल सिंह कुशवाह, जितेंद्र सिंह सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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