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मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान बचेगा: शिवराज सिंह चौहान

June 2, 2026

मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान बचेगा: शिवराज सिंह चौहान

  • मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान
  • रायसेन से श्री शिवराज सिंह चौहान का देशभर को संदेश: स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समृद्ध भारत
  • संतुलित खाद, सॉयल हेल्थ कार्ड और वैज्ञानिक खेती पर श्री शिवराज सिंह का जोर
  • “धरती हमारी मां है”: मिट्टी संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का श्री शिवराज सिंह ने किया आह्वान
  • गांव-गांव पहुंचेंगे वैज्ञानिक, किसानों को देंगे खेती की नई तकनीक
Posted on 02.06. 2026, Time 01.23 PM , News Source PIB

रायसेन (मध्य प्रदेश), 01 जून 2026, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जिले के ग्राम रमासिया से राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ करते हुए किसानों को साफ संदेश दिया कि मिट्टी बचेगी तो खेती बचेगी, किसान मजबूत होगा और देश समृद्ध बनेगा। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

 

1 से 30 जून तक देशभर में चलने वाले इस अभियान के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि धरती हमारी माता है और इसकी सेहत बचाना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अंधाधुंध रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग न करें, बल्कि मिट्टी की जांच के आधार पर जरूरत के अनुसार ही उर्वरकों का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि ज्यादा रासायनिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्म जीव नष्ट होते हैं, जिसका सीधा असर उत्पादन और खेती की लागत पर पड़ता है।

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि ‘खेत बचाओ अभियान’ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती माता को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प है। इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिक, कृषि विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी, कृषि विभाग की टीमें और जनप्रतिनिधि गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक करेंगे। किसानों को मिट्टी परीक्षण, संतुलित पोषण प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, आधुनिक बुवाई तकनीक, जल संरक्षण और उन्नत खेती के तरीके सिखाए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि हर किसान का सॉयल हेल्थ कार्ड बनना जरूरी है, ताकि किसान अपनी जमीन की जरूरत समझकर खाद का उपयोग करे। इससे खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहेगी। श्री चौहान ने स्पष्ट कहा कि सरकार किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध करा रही है, लेकिन इसका मतलब जरूरत से ज्यादा उपयोग नहीं है। सही मात्रा में खाद का उपयोग ही टिकाऊ खेती की कुंजी है।

 

श्री चौहान ने कहा कि खेती को लाभकारी बनाना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन, धान और दलहन फसलों के लिए क्षेत्र में विशेष प्रदर्शन किए जाएंगे। किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक बुवाई, लेजर लेवलर जैसी आधुनिक तकनीक और पानी बचाने वाली खेती के तरीके सिखाए जाएंगे। कृषि विज्ञान केंद्रों और विशेषज्ञ संस्थानों की मदद से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।

 

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने महिला सशक्तिकरण को भी अभियान से जोड़ा। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को रोजगार, आयवर्धन और स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। पात्र महिलाओं को समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और छोटे व्यवसाय शुरू करने के अवसर दिए जाएंगे, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और परिवार की आय बढ़ा सकें।

युवाओं को लेकर भी श्री चौहान ने विशेष बात कही और कहा कि उनके लिए मार्गदर्शन और तैयारी के अवसर बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास केवल सड़क, मकान और बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव में रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता के अवसर पैदा करना भी उतना ही जरूरी है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रमासिया गांव से शुरू हुआ यह अभियान आगे चलकर जनभागीदारी का बड़ा आंदोलन बनेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से गांवों में पहुंचें, किसानों को तकनीकी सहायता दें और खेती को बचाने के इस संकल्प को जमीन पर उतारें। उन्होंने किसानों, महिलाओं और युवाओं से अपील की कि वे विकास अभियानों में सक्रिय भागीदारी करें, क्योंकि सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से ही समृद्ध गांव, सशक्त किसान, आत्मनिर्भर महिलाएं और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी बहुत विज़नरी हैं, बहुत पहले बहुत दूर का सोचते हैं। ये धरती माता केवल हमारे लिए नहीं आने वाली पीढ़ियों के लिए भी है। तो इसकी हालत ऐसी ना हो जाए कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अन्न उत्पादित करने से इंकार कर दे, इसलिए माटी बची रहे, इसलिए संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, धरती के तत्वों की आवश्यकता देखते हुए करने की बात करेंगे। केवल इतना ही नहीं, नकली पेस्टीसाइड और खाद उसके खिलाफ भी अभियान चलेगा। हम इस दौरान किसानों को वहाँ की एग्रो-क्लाइमैटिक कंडीशन के हिसाब से कौन सी फसल और कौन से बीज ठीक रहेंगे, कृषि प्रणाली कैसी होनी चाहिए, बीजों का उपचार और बाकी चीजें, वो भी बताएँगे। धरती को बचाने के लिए हरित खाद भी जरूरी है, उसके बारे में भी जानकारी देंगे और विभिन्न योजनाओं का केंद्र सरकार की और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ भी इस कार्यक्रम के अंतर्गत पूरे देश में दिया जाएगा।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्रों के विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर कुपोषित बच्चों को पोषण किट भी वितरित की गई।

बीते वित्त वर्ष में भारत का सब्सिडी व्यय  4,53,854 करोड़ रुपए 

  • वित्तीय वर्ष Fy 2025-2026 के लिए भारत सरकार के खाते (अनंतिम/अलेखापरीक्षित)

Posted Date:01 June, 2026 News Source PIB, New Delhi

  • वित्तीय वर्ष 2025-2026 के लिए भारत सरकार के खातों ( अस्थायी/अलेखापरीक्षितको समेकित किया गया है और रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:-

नई दिल्ली।भारत सरकार को वित्त वर्ष 2025-26 के में  33,85,982 करोड़ रुपये ( कुल प्राप्तियों के संबंधित संशोधित अनुमान 2025-26 का 99.4%) प्राप्त हुएजिसमें 26,23,264 करोड़ रुपये कर राजस्व (केंद्र के लिए शुद्ध), 6,78,961 करोड़ रुपये गैरकर राजस्व और 83,757 करोड़ रुपये गैरऋण पूंजीगत प्राप्तियां शामिल हैं। गैरऋण पूंजीगत प्राप्तियों में ऋण की वसूली (24,617 करोड़ रुपयेऔर विविध पूंजीगत प्राप्तियां (59,140 करोड़ रुपयेशामिल हैं। इस अवधि तक भारत सरकार द्वारा राज्य सरकारों को करों के हिस्से के हस्तांतरण के रूप में 13,92,971 करोड़ रुपये जारी किए गए हैंजो पिछले वर्ष की तुलना में 1,06,086 करोड़ रुपये ज़्यादा है।

 

भारत सरकार का कुल व्यय 49,05,151 करोड़ रुपये (संबंधित संशोधित अनुमान 2025-26 का 98.8%) हैजिसमें से 38,36,032 करोड़ रुपये राजस्व खाते पर और 10,69,119 करोड़ रुपये पूंजीगत खाते पर  है। कुल राजस्व व्यय में से12,42,575 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान के लिए और 4,53,854 करोड़ रुपये प्रमुख सब्सिडियों के लिए हैं।

May 31, 2026

संकल्प: खेत बचाओ अभियान एक जून से

  • धरती मां को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प, 1 जून से रायसेन से शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’
  • केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने देशभर के कृषि तंत्र को किया आह्वान, बोले- कर्मकांड नहीं, पूरी अंतरात्मा से उतरें खेतों में

Posted Date:- May 31, 2026 New Delhi

नई दिल्ली, 31 मई 2016, एक जून को मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से होने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ के राष्ट्रीय शुभारंभ से पूर्व, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ कृषि अधिकारियों तथा किसान हित में कार्यरत साथियों से वर्चुअल संवाद कर अभियान को जनभागीदारी, वैज्ञानिक दृष्टि और राष्ट्रीय दायित्व के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया। शिवराज सिंह ने इस महत्वपूर्ण अभियान में शामिल होने के लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से फोन पर चर्चा की है, वहीं वे केंद्रीय मंत्रियों और अन्य सभी जनप्रतिनिधियों से भी सहभागिता की अपील कर रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि धरती मां को बचाने, खेती का भविष्य सुरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की रक्षा करने का राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने कहा कि बढ़ता तापमान, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का असंतुलित उपयोग, मिट्टी के स्वास्थ्य में गिरावट और बदलते जलवायु संकट खेती के सामने गंभीर चुनौती बनकर खड़े हैं, इसलिए समय रहते व्यापक जागरूकता और व्यवहारिक हस्तक्षेप आवश्यक है।

श्री चौहान ने बताया कि 1 जून को रायसेन जिले के रामसिया गांव से प्रारंभ हो रहा राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, प्राकृतिक खेती, फसल चयन, जल संरक्षण, हरी खाद, कम वर्षा की स्थिति में वैकल्पिक कृषि पद्धतियों तथा नकली खाद-बीज और पेस्टिसाइड की पहचान जैसे विषयों पर जागरूक करेगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल सलाह देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि खेत स्तर पर डेमो, वैज्ञानिक प्रमाण और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से किसानों का विश्वास मजबूत करना होगा। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि देशभर में 30 जून तक का विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि कौन अधिकारी, वैज्ञानिक, संस्थान या टीम किस तिथि को किस गाँव में जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि हर जिले का कार्यक्रम पूर्व नियोजित हो, डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग हो, स्थानीय स्तर पर समुचित व्यवस्थाएँ सुनिश्चित हों और अभियान के हर चरण में प्रभावी समन्वय दिखाई दे।

श्री चौहान ने राज्यों के कृषि विभागों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस अभियान को सफल बनाने के लिए केंद्र, राज्य, आईसीएआर, कृषि विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान केंद्र, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और किसान हितैषी संस्थाएँ एकजुट होकर कार्य करें। उन्होंने सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी अभियान से जोड़ने तथा प्राकृतिक खेती व टिकाऊ कृषि के व्यवहारिक नमूने प्रस्तुत करने पर बल दिया।

श्री शिवराज सिंह ने कहा कि अभियान को बहुउद्देश्यीय स्वरूप देते हुए किसान क्रेडिट कार्ड, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, सॉयल हेल्थ कार्ड, मिनी बीज किट, दलहन-तिलहन मिशन तथा कृषि यंत्रीकरण जैसी योजनाओं का लाभ भी किसानों तक पहुँचाया जाए, इससे खेत बचाने के साथ-साथ किसान की आय, जागरूकता और कृषि प्रबंधन क्षमता को भी मजबूत किया जा सकेगा।

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने प्रचार-प्रसार पर जोर देकर इसे अभियान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि यह देशहित का कार्यक्रम है और इसकी जानकारी जितनी तेजी से गाँव-गाँव पहुँचेगी, अभियान उतना ही प्रभावशाली बनेगा। उन्होंने अधिकारियों और वैज्ञानिकों से कहा कि वे बिना संकोच मीडिया से संवाद करें, क्योंकि यह अभियान धरती, खेती और अन्नदाता के भविष्य से जुड़ा हुआ है।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास व्यक्त किया कि जैसे पूर्व में विकसित कृषि संकल्प अभियान ने व्यापक प्रभाव छोड़ा, उसी प्रकार ‘खेत बचाओ अभियान’ भी देशव्यापी जनजागरण और कृषि सुधार का सफल अध्याय बनेगा। उन्होंने सभी साथियों से आह्वान किया कि वे पूरी निष्ठा, तैयारी और संवेदनशीलता के साथ गाँव-गाँव पहुँचकर किसानों को सही जानकारी दें और धरती माँ के संरक्षण का यह संकल्प जनआंदोलन में बदलें। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह स्वयं भी इस अभियान के दौरान विभिन्न राज्यों में गांवों में जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगे।

इस वर्चुअल संवाद के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण सचिव श्री अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने भी विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, आईसीएआर संस्थानों के निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक, राज्यों के कृषि विभागों के अधिकारी तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

Budhha: भगवान बुद्ध के दो शिष्यों के अवशेष मंगोलिया में स्थापित

भगवान बुद्ध के प्रमुख शिष्यों के पवित्र अवशेष मंगोलिया में स्थापित किए गए

गंडांटेगचेनलिंग  मठ में “वेसेल्स ऑफ लाइट” प्रदर्शनी का उद्घाटन

Posted on- May 31, 2026,

उलानबातर, 31 मई 2026, भारत-मंगोलिया के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्यों, अर्हत सारिपुत्र और अर्हत महामोग्गलाना के पवित्र अवशेषों को बुद्ध पूर्णिमा (बैसाखी) 2026 के अवसर पर मंगोलिया के उलानबातर स्थित गंडांटेगचेनलिंग मठ में विधिपूर्वक स्थापित किया गया।

31 मई से 10 जून 2026 तक चलने वाली दस दिवसीय प्रदर्शनी के लिए भारत से लाए गए पवित्र अवशेषों को हजारों भक्तों और संघ के सदस्यों ने अत्यंत श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया। प्रदर्शनी का उद्घाटन असम के माननीय राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, मंगोलिया में भारत के राजदूत महामहिम श्री अतुल मलहारी गोत्सर्वे, मंगोलिया सरकार के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों, प्रख्यात बौद्ध नेताओं, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) के प्रतिनिधियों, श्रीलंका के महाबोधि सोसाइटी और बौद्ध जगत के विभिन्न विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में किया गया।

इस प्रदर्शनी की घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति महामहिम श्री उखनागिन खुरेलसुख की भारत यात्रा के दौरान की थी। यह पहल भगवान बुद्ध की शिक्षाओं में निहित भारत और मंगोलिया के बीच साझा किए गए गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाती है।

सभा को संबोधित करते हुए असम के राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने इस अवसर को ऐतिहासिक क्षण बताया और कहा कि ये पवित्र अवशेष ज्ञान के जीवंत प्रकाश का प्रतीक हैं, जो शांति, करुणा और सद्भाव का सार्वभौमिक संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि सांची के पवित्र स्तूपों में सदियों से संरक्षित अर्हत सारिपुत्र और अर्हत महामोग्गलाना के अवशेष भारत की सबसे अनमोल सभ्यतागत धरोहरों में से हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंगोलिया में इनका प्रदर्शन दोनों देशों के बीच विश्वास, आदर और मित्रता का एक गहरा प्रतीक है।

भारत-मंगोलिया की अटूट साझेदारी का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस कथन को याद किया कि भारत और मंगोलिया सदियों से बौद्ध धर्म के माध्यम से जुड़े हुए “आध्यात्मिक पड़ोसी” हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रदर्शनी ऐसे महत्वपूर्ण समय में आयोजित हो रही है जब दोनों देश राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए, मंगोलिया में भारत के राजदूत महामहिम श्री अतुल मलहारी गोत्सुर्वे ने भगवान बुद्ध की शांति, सद्भाव, सामाजिक न्याय और तर्कसंगत चिंतन की शिक्षाओं की शाश्वत प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत और मंगोलिया, रणनीतिक साझेदार और आध्यात्मिक भाई-बहन के रूप में, पवित्र कंजूर पांडुलिपियों के उपहार, वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन, एशियाई बौद्ध शिखर सम्मेलन, बौद्ध पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और नालंदा विश्वविद्यालय और गंडांटेगचेनलिंग मठ के बीच अकादमिक सहयोग जैसी पहल के माध्यम से बौद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन में सहयोग को और गहरा कर रहे हैं।

राजदूत ने इस बात पर जोर दिया कि अर्हत सारिपुत्र और अर्हत महामोग्गलाना के अवशेष इससे पहले केवल एक बार 2024 में थाईलैंड गए थे, इसलिए मंगोलिया में यह प्रदर्शनी एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रोटोकॉल और सुरक्षा के लिहाज से राष्ट्राध्यक्ष का दर्जा प्राप्त ये अवशेष भारतीय वायु सेना के विशेष IL-76 (गजराज) विमान से मंगोलिया पहुंचे थे।

Sacred Relics of Major Disciples of Lord Buddha Inauguration of “Vessels of Light” Exhibition at Gandantegchenling Monastery in Mongolia

Posted on – May 31, 2026,

Ulaanbaatar, 31 May 2026 As a significant achievement in Indo-Mongolian cultural and spiritual relations, the sacred relics of two major disciples of Lord Buddha, Arhat Sariputra and Arhat Mahamoggalana, were ceremoniously installed at Gandantegchenling Monastery in Ulaanbaatar, Mongolia on the occasion of Buddha Purnima (Baisakhi) 2026. The holy relics brought from India for the ten-day exhibition running from 31 May to 10 June 2026 were received with utmost reverence by thousands of devotees and members of the Sangha. The exhibition was inaugurated by the Hon’ble Governor of Assam, Shri Laxman Prasad Acharya, Ambassador of India to Mongolia,

May 26, 2026

डेमोग्राफिक चेंज पर हाई लेवल कमेटी गठित

Amit Shah Home Minister

https://x.com/AmitShah/status/2059216835590103418?s=20

  • भारत  सरकार ने ’High-Level Committee on Demographic Change’ का गठन किया
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 15 अगस्त 2025 को ‘High-powered Demography Mission’ की घोषणा की थी
  • केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, घुसपैठ और अन्य कारणों से Unnatural Demographic Change किसी भी राष्ट्र के वर्तमान व भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है
  • जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में बनी इस कमिटी में जनगणना आयुक्त के साथ श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (Retd IAS), श्री बालाजी श्रीवास्तव (Retd IPS) और डॉ. शमिका रवि समिति के सदस्य होंगे
  • Demographic Change हमारी संप्रभुता के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना में गंभीर बदलाव और जनजातीय समाज के संरक्षण से जुड़ी एक गंभीर समस्या है
  • यह कमिटी, अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे demographic changes का व्यापक मूल्यांकन करेगी
  • समिति, धार्मिक एवं सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों के pattern का विश्लेषण करेगी तथा इसका सुनियोजित और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करेगी
  • समिति एक वर्ष के अंदर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, आवश्यकता होने पर समिति के कार्यकाल को छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है

Posted Date:- May 26, 2026, News Source PIB

नई दिल्ली, 26 मई 2026, भारत सरकार ने अवैध आप्रवास और अन्य असामान्य कारणों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से निपटने के उपायों पर सुझाव देने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2025 को “High-powered Demography Mission” की घोषणा की थी। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर, 2025 को इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी थी।

समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) होंगे और जनगणना आयुक्त के अतिरिक्त 03 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ, श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त आईएएस), श्री बालाजी श्रीवास्तव, (सेवानिवृत्त आईपीएस) और डॉ. शमिका रवि, समिति के सदस्य होंगे। संयुक्त सचिव (Foreigners-I), गृह मंत्रालय, समिति के सदस्य सचिव होंगे। यह समिति एक वर्ष के अंदर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और आवश्यकता होने पर गृह मंत्रालय द्वारा समिति के कार्यकाल को छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में कहा “घुसपैठ और अन्य कारणों से Unnatural Demographic Change किसी भी राष्ट्र के वर्तमान व भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए 15 अगस्त 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘High-Level Committee on Demographic Change’ की घोषणा की थी। मुझे बताते हुए हर्ष हो रहा है कि सरकार ने इस कमिटी का गठन कर लिया है। जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में बनी इस कमिटी में जनगणना आयुक्त के साथ श्री दुर्गा शंकर मिश्रा (Retd IAS), श्री बालाजी श्रीवास्तव (Retd IPS) और डॉ. शमिका रवि समिति के सदस्य होंगे। संयुक्त सचिव (Foreigners-I), गृह मंत्रालय, इस समिति के सदस्य सचिव होंगे। Demographic Change हमारी संप्रभुता के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना में गंभीर बदलाव और जनजातीय समाज के संरक्षण से जुड़ी एक गंभीर समस्या है। यह कमिटी, अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे demographic changes का व्यापक मूल्यांकन करेगी और धार्मिक एवं सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों के pattern का विश्लेषण करेगी तथा इसका सुनियोजित और समयबद्ध समाधान प्रस्तुत करेगी।“

यह उच्चस्तरीय समिति अवैध आप्रवास और अन्य असामान्य कारणों से देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाले जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का वैज्ञानिक रूप से आकलन करेगी, उनके कारणों का विश्लेषण करेगी और उचित नीति, विधायी और प्रशासनिक उपायों की सिफारिश करेगी। समिति की प्रस्तावित संरचना और कार्यक्षेत्र (terms of Reference) इस प्रकार हैं-

(i)       अवैध आप्रवास सहित जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों पर व्यापक विचार करना।

(ii)      ऐसे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के संभावित कारणों का अध्ययन करना, जैसे सीमा पार गतिविधियाँ (अवैध आप्रवास सहित), आर्थिक अवसर और अन्य सामाजिक-पर्यावरणीय कारक।

(iii)     इन परिवर्तनों के पीछे अन्तर्निहित कारकों की पहचान करना, जिसमें अवैध आप्रवास, असामान्य बसावट पैटर्न और नियोजित प्रवास शामिल हैं।

(iv)     धार्मिक या सामाजिक समुदायों के स्तर पर संरचनात्मक जनसंख्या परिवर्तनों का विश्लेषण करना, विशेष रूप से समान रुझानों से अलग होने पर।

(v)      देश में पहले से ही रहने वाले अवैध आप्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए एक सुव्यवस्थित और स्थायी परिचालन प्रणाली की सिफारिश करना।

(vi)     ऐसे रुझानों की निरंतर निगरानी के लिए सीमा प्रबंधनजनसंख्या स्थिरीकरण और पहचान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए एक उपयुक्त संस्थागत तंत्र की सिफारिश करना।

(vii)    अवैध आप्रवास और परिणामी जनसांख्यिकीय असंतुलन से संबंधित मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक नीतिगत ढांचा प्रस्तावित करना।

(viii)   समिति जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न चुनौतियों, जिनमें अवैध आप्रवास भी शामिल है, से निपटने के लिए किसी अन्य उपाय, जिसे वह उचित समझे, की सिफारिश कर सकती है।

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