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प्रधानमंत्री ने पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित किया

June 19, 2026

प्रधानमंत्री ने पेरिस में भारतीय समुदाय को संबोधित किया

Posted Date:- Jun 18, 2026

प्रधानमंत्री ने 18 जून 2026 को पेरिस में भारतीय समुदाय के एक विशाल जनसमूह को संबोधित किया। कार्यक्रम स्थल पर पहुँचने पर, प्रधानमंत्री का गर्मजोशी और उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया, जो अपनी मातृभूमि के प्रति प्रवासी भारतीयों के गहरे लगाव को दर्शाता है।

अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने फ्रांस के विभिन्न क्षेत्रों में भारतीय समुदाय के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय नवाचार और विचारों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और भारत-फ्रांस विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी स्वीकार किया। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत और फ्रांस के बीच लोगों के आपसी संबंध बढ़े हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में भारतीय छात्र, प्रोफेशनल और पर्यटक फ्रांस को अपना गंतव्य बना रहे हैं। उन्होंने लोगों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की। फ्रांस में यूपीआई के बढ़ते प्रभाव के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच पर्यटन के प्रवाह को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने भारत में हो रहे परिवर्तनकारी बदलावों के बारे में बात की, जिसमें समावेशी विकास और महिला-नेतृत्व वाले विकास से लेकर मानव-केंद्रित एआई और अत्याधुनिक तकनीकों के क्षेत्र में हुई प्रगति शामिल है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले 12 वर्षों में, भारत ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है। उन्होंने उल्लेख किया कि यूके और यूरोपीय संघ के साथ संपन्न व्यापार समझौते भारतीय श्रमिकों, किसानों, इनोवेटर्स और अन्य लोगों के लिए नए अवसर खोलेंगे। नीस में ‘भारत इनोवेट्स 2026’ और पेरिस में ‘विवटेक 2026’ में भारत की भागीदारी का जिक्र करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत वैश्विक समुदाय के लिए प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में पसंदीदा भागीदार बनता जा रहा है। ‘भारत इनोवेट्स’ की सफलता के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि यह मंच इनोवेशन डिप्लोमेसी का एक मॉडल है। एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी पर विस्तार से चर्चा करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत विश्वास आधारित अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाने के लिए दृढ़ता से खड़ा है, जहाँ ‘ग्लोबल साउथ’ को एक समान भागीदार के रूप में माना जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की प्रतिभा, कौशल और नवाचार डिजिटल युग की चुनौतियों का समाधान खोजने में दुनिया की मदद कर रहे हैं। अंत में, उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत की प्रगति में योगदान देने और ‘विकसित भारत’ की यात्रा में भागीदार बनने के लिए आमंत्रित किया।

यह संवाद भारत और फ्रांस के बीच मौजूद गहरे जन-संबंधों को दर्शाता है, और दुनिया भर में अपने प्रवासी भारतीयों के कल्याण, हितों और उनके साथ जुड़ाव के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।

प्रधानमंत्री ने वीवाटेक 2026 में भाग लिया

Posted Date:- Jun 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति महामहिम श्री इमैनुएल मैक्रों के साथ आज पेरिस में यूरोप के सबसे बड़े प्रौद्योगिकी और स्टार्टअप आयोजन वीवाटेक 2026 में भाग लिया।

प्रौद्योगिकी उद्यमियों, स्टार्टअप्स, निवेशकों और उद्योग जगत के नेताओं की सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अग्रणी प्रौद्योगिकियों के लिए भारत के विज़न तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत-फ्रांस सहयोग के विस्तृत होते दायरे पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी ने भारत में व्यापक परिवर्तन संभव किए हैं, जिनमें डिजिटल भुगतान, एआई-सक्षम कृषि प्रगति से लेकर अत्याधुनिक स्‍पेस एप्‍लीकेशंस तक शामिल हैं। मुख्य संबोधन के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने भारतीय स्टार्टअप्स तथा नवोन्मेषकों से संवाद किया, जो उद्योग, स्वास्थ्य सेवा, सतत् विकास और गतिशीलता के लिए अग्रणी प्रौद्योगिकियों एवं व्यावहारिक समाधानों का प्रदर्शन कर रहे थे।

वीवाटेक 2026 में भारत ‘एआई कंट्री पार्टनर’ है। यह वीवाटेक में भारत की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी भी है। इसके अंतर्गत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, हेल्थ-टेक, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों, गतिशीलता, उन्नत संगणन (कंप्‍यूटिंग) तथा अन्य क्षेत्रों में भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित करने के लिए मंडप स्थापित किए गए हैं। इस आयोजन में भारत की 80 से अधिक डीप-टेक कंपनियाँ और स्टार्टअप्स भाग ले रहे हैं।

वीवाटेक में प्रधानमंत्री की भागीदारी से भारत और फ्रांस के प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच साझेदारी और अधिक सुदृढ़ होने की अपेक्षा है। पिछले कुछ वर्षों में वीवाटेक के साथ भारत की सहभागिता निरंतर बढ़ी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने वर्ष 2021 में वीवाटेक में मुख्य भाषण दिया था; वर्ष 2022 में भारत वीवाटेक का पहला ‘कंट्री ऑफ द इयर’ बना था; और हाल ही में वीवाटेक ने बेंगलुरु टेक समिट के साथ औपचारिक सहयोग स्थापित किया है। इस वर्ष भारत की भागीदारी का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि दोनों देश वर्ष 2026 को भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के रूप में मना रहे हैं।

पेरिस में विवाटेक 2026 के दौरान प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ

Posted Date:- Jun 18, 2026

 सम्‍मानित अतिथिगण,

नवप्रवर्तक, उद्योग जगत के अग्रणी नेतागण, प्रौद्योगिकी के उत्साही साथियों, स्टार्टअप जगत से जुड़े लोगों, देवियो और सज्जनो,

नमस्कार।

बों जू,

विवाटेक के दसवें संस्करण में पेरिस आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह यूरोप का सबसे बड़ा प्रौद्योगिकी आयोजन है। विवाटेक की सफलता के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों और इसके आयोजकों को बधाई देता हूँ।

मित्रो,

वर्ष 2026 भारत और यूरोप—दोनों के लिए एक विशेष वर्ष है। वर्ष की शुरुआत में हमने ऐतिहासिक भारत–यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया। यह समझौता हमारे व्यापार और निवेश को बढ़ाएगा। साथ ही, यह प्रतिभा, प्रौद्योगिकी और पर्यटन के आदान-प्रदान के लिए अनेक द्वार खोलेगा।

इस वर्ष भारत–फ्रांस नवाचार वर्ष के शुभारंभ के साथ, फ्रांस एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा रहा है, जो भारत और यूरोप के प्रौद्योगिकी इको-सिस्‍टम को करीब ला रहा है। कुछ दिन पहले नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स’ से लेकर आज पेरिस में आयोजित विवाटेक तक, हमारे स्टार्टअप अनेक नई साझेदारियाँ स्थापित कर रहे हैं।

मित्रो,

वर्ष 2021 में, जब मैंने विवाटेक को संबोधित किया था, तब दुनिया कोविड-19 महामारी की वजह से उत्‍पन्‍न विध्‍नों का सामना कर रही थी। आज, दुनिया अलग तरह के विध्‍नों का सामना कर रही है। और मैं वही बात दोहराना चाहता हूँ जो मैंने तब विवाटेक 2021 में कही थी: जब पारंपरिक तरीके विफल हो जाते हैं, तब नवाचार मदद कर सकता है।

मित्रो,

पिछले दशक में, टेक्नोलॉजी की ताकत से भारत ने तेज़ी से बदलाव अनुभव किया है। दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणाली बनाने से लेकर विश्व के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान मंचों में से एक के विकास तक, हम वित्तीय समावेशन, शिक्षा, टेलीमेडिसिन, कृषि और अनेक अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

डिजिटल भुगतान पर ही गौर करिए। हमारे यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस या यूपीआई के कारण आज दुनिया में होने वाले वास्तविक समय के कुल डिजिटल लेन-देन का लगभग आधा भारत में होता है। अब आप फ्रांस में भी—एफिल टॉवर और पेरिस हवाई अड्डे जैसे स्थानों पर—यूपीआई का उपयोग कर सकते हैं।

हमारे पास विश्वस्तरीय डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के ऐसे अनेक उदाहरण हैं। डिजिलॉकर दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल दस्तावेज़ भंडार में से एक है। डिजिलॉकर के माध्यम से 70 करोड़ (700 मिलियन) उपयोगकर्ता कभी भी, कहीं भी मूल स्रोत से प्रमाणित दस्तावेज़ प्राप्त कर सकते हैं। हमने डिजिलॉकर मंच पर 2,000 से अधिक मानक दस्तावेज़ों को एकीकृत किया है। इसके कारण अब भारत में ड्राइविंग लाइसेंस या वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र जैसे कागजी दस्तावेज़ों को साथ रखने या उन्हें ढूँढ़ने की आवश्यकता नहीं रह गई है।

एक अन्य उदाहरण ‘गतिशक्ति’ प्लेटफ़ॉर्म है। टेक्नोलॉजी की मदद से, हमने जीआईएस (भौगोलिक सूचना प्रणाली) आधारित मानचित्र पर 1,600 से अधिक भौगोलिक डेटा परतों (जियोग्राफिक डेटा लेयर्स) को एक साथ जोड़ा है। हमने बुनियादी ढांचा विकास के लिए एक समेकित, डेटा-संचालित और संपूर्ण-सरकार की योजना पर आधारित योजना मंच तैयार किया है। अब जिन परियोजनाओं के सर्वेक्षण में पहले कई महीने लग जाते थे, वे कुछ ही सप्ताह में पूरे हो सकते हैं।

मित्रो,

छह वर्ष पहले हमने ‘स्वामित्व’ कार्यक्रम की शुरुआत की थी। यह इस बात का सशक्त उदाहरण है कि किस प्रकार प्रौद्योगिकी लोगों को सम्मान और आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकती है। ‘स्वामित्व’ कार्यक्रम में ड्रोन, भू-स्थानिक मानचित्रण (जियोस्पेशियल मैपिंग) और आधुनिक सर्वेक्षण तकनीक का उपयोग करके ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का आधिकारिक अभिलेख उपलब्ध कराया जाता है। अब तक लगभग दो लाख गाँवों में 3 करोड़ 10 लाख (31 मिलियन) से अधिक संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं। इससे परिवारों को अपनी संपत्ति को वित्तीय परिसंपत्ति के रूप में उपयोग करने में सहायता मिल रही है।

जहाँ एक ओर सरकार बड़े पैमाने पर जनहितकारी डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध करा रही है, वहीं दूसरी ओर हमारे स्टार्टअप हर क्षेत्र में लोगों के जीवन में बदलाव ला रहे हैं।

मित्रो,

‘सरलाबेन’ नामक एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित एप्‍लीकेशन लाखों महिला दुग्ध उत्पादक किसानों से उनकी अपनी भाषा में संवाद करता है और उन्हें पशुओं के स्वास्थ्य तथा पशुपालन प्रबंधन से संबंधित विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्रदान करता है।

भारत में महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे उर्वरकों का छिड़काव और फसलों की निगरानी कर सकें। वहीं, उपग्रहों से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर लाखों मछुआरों को सबसे संभावनाशील मत्स्य क्षेत्रों की जानकारी दी जा रही है। इससे ईंधन और समय की बचत होती है और मछली पकड़ने की मात्रा में भी वृद्धि होती है।

हमारे प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान जमीनी स्तर तक समृद्धि पहुँचा रहे हैं

मित्रो,

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से लेकर परमाणु ऊर्जा तक, भारत मानव क्षमता की नई-नई सीमाओं का विस्तार कर रहा है।

भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक उतरने वाला विश्व का पहला देश बना। हाल ही में भारत के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने ‘क्रिटिकेलिटी’ (महत्त्वपूर्ण परिचालन अवस्था) प्राप्त की है। यह उपलब्धि हमें हमारी त्रि-चरणीय परमाणु ऊर्जा परिकल्पना को साकार करने के और अधिक निकट ले आई है, जिसमें हमारे विशाल थोरियम भंडार का उपयोग भी शामिल है।

मित्रो,

दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स के साथ भारत दुनिया के सबसे जीवंत स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। मैं आप सभी से भारत पवेलियन का अवश्य दौरा करने का आग्रह करता हूँ।

यहाँ आपको भारत की अपार ऊर्जा का अनुभव मिलेगा। चाहे वह दुनिया का पहला सिंगल-पीस 3डी प्रिंटेड रॉकेट इंजन हो, उन्नत जेनेटिक-इंजीनियरिंग आधारित उपचार हों, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का पता लगाने वाले एआई समाधान हों, या साइबर और नेटवर्क सुरक्षा को बेहतर बनाने वाली तकनीकें हों—स्वायत्त रोबोट, स्मार्ट शहर और मोबिलिटी समाधान भी शामिल हैं।

आप ये सभी नवाचार भारत पवेलियन में देखेंगे। विभिन्न क्षेत्रों में हमारे स्टार्टअप प्रेरणादायक तरीके से नवाचार कर रहे हैं।

मित्रो,

जब प्रौद्योगिकी की बात होती है, नवाचार के साथ-साथ सबसे महत्वपूर्ण उसकी पहुँच है। प्रौद्योगिकी तभी प्रगति का माध्यम बन सकती है जब उसका लोकतंत्रीकरण हो। भारत का मानना है कि व्यवधान के इस युग में प्रौद्योगिकी का लाभ सभी को मिलना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को ही लें। एआई को जीवन को बेहतर बनाना चाहिए, पहुँच का विस्तार करना चाहिए, विकास को गति देनी चाहिए और साथ ही हमारे ग्रह को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायता करनी चाहिए। विवाटेक 2026 में एआई देश भागीदार के रूप में हमारी भागीदारी इसी कल्‍पना को दर्शाती है। भारत के लिए एआई का अर्थ है—“सभी को समाहित करने वाला (ऑल इन्क्लूसिव)”।

मित्रो,

भारत एक खुला समाज है और दुनिया का सबसे बड़ा प्रतिभा-समूह (टैलेंट पूल) है। हम नियमों को सरल बना रहे हैं और कारोबार में सुगमता सुनिश्चित कर रहे हैं। नवाचार से लेकर व्यावसायीकरण तक, हम 50 अरब डॉलर से अधिक के लक्षित प्रोत्साहनों के माध्यम से निजी उद्यमों को सहयोग दे रहे हैं। साथ ही, हम दुनिया के सबसे किफायती डेटा और कम लागत वाली हरित ऊर्जा भी उपलब्ध करा रहे हैं।

हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है। हमारी सरकार सक्षम बनाएगी और उद्योग नवाचार करेगा। स्टार्टअप्स परिवर्तन लाएंगे और वैश्विक साझेदार हमारे साथ मिलकर विस्तार करेंगे। साथ मिलकर हम पहले से कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ेंगे। मैं इस सभा में उपस्थित सभी लोगों से नेतृत्व करने का आह्वान करता हूँ।

भारत के साथ काम कीजिए और सभी के लिए परिणाम दीजिए।

धन्यवाद। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

June 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति से मुलाकात की

Posted Date:- Jun 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति महामहिम श्री डोनाल्ड जे. ट्रम्प से मुलाकात की।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति ट्रम्प के उन प्रयासों की सराहना की, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने और व्यापक क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बहाल करने पर एक सहमति बनी है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता और अबाधित वाणिज्य को बनाए रखने के महत्व तथा नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

दोनों नेताओं ने फरवरी 2025 में वाशिंगटन डी.सी. में हुई अपनी बैठक के बाद से भारत-अमेरिका कॉम्पैक्ट (कॉम्पैक्ट: कैटलाइजिंग अपॉर्चुनिटीज फॉर मिलिट्री पार्टनरशिप, एक्सेलरेटेड कॉमर्स एंड टेक्नोलॉजी) के तहत हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने रक्षा, रणनीतिक तकनीकों, ऊर्जा और द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्रों में हुई मुख्य प्रगति का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने एक अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में वार्ता में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर विशेष संतोष व्यक्त किया और अपने अधिकारियों को जल्द-से-जल्द एक संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यावसायिक रूप से सार्थक समझौते की दिशा में काम करने का निर्देश दिया। इस सिलसिले में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि, श्री जेमिसन ग्रीर अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने तथा दोनों देशों एवं उनके नागरिकों के पारस्परिक लाभ के लिए सभी क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

जी 7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का संबोधन

प्रधानमंत्री ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में “सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास की ओर बढ़ने” पर सत्र को संबोधित किया

Posted Date:- Jun 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में “सभी के लिए संतुलित, साझा और टिकाऊ आर्थिक विकास की ओर बढ़ने” पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।

शिखर सम्मेलन में साझा और टिकाऊ विकास पर विशेष रूप से ध्‍यान देने की सराहना करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया अनिश्चितताओं से प्रभावित है, टिकाऊ विकास का संदेश दुनिया भर में सार्थक रूप से स्वीकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विकास का मतलब सिर्फ़ सकल घरेलू उत्‍पाद (जीडीपी) या व्यापार के आंकड़े नहीं होने चाहिए, बल्कि लोगों के समावेश और भलाई पर इसका वास्तविक असर पड़ना चाहिए। इस संदर्भ में, उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास” के सिद्धांतों पर आधारित भारत की समावेशी विकास की गाथा पर प्रकाश डाला।

प्रधानमंत्री ने कहा कि समावेशी विकास का भारत का मंत्र उसकी अंतरराष्ट्रीय सहभागिताओं का भी मार्गदर्शन करता है, जिसका स्पष्ट प्रतिबिंब भारत की जी-20 अध्यक्षता में “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” के आदर्श वाक्य के रूप में देखने को मिला। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार का दृष्टिकोण भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) की परिकल्पना का भी आधार रहा है, जिसका उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाना, निवेश और रोजगार के अवसर सृजित करना तथा नवाचार को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि संकटों और संघर्षों का वैश्विक दक्षिण के देशों पर गंभीर और प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने इन देशों पर पड़ने वाले बोझ को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता और सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों को ऐसे सहायता तंत्र विकसित करने चाहिए, जो विकासशील देशों को आर्थिक लचीलापन प्रदान कर सकें।

प्रधानमंत्री ने अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीपीय देशों को जोड़ने वाली संपर्क परियोजनाओं पर भी विचार करने का आग्रह किया, जो आईएमईसी की तर्ज पर विकसित की जा सकें। इस कल्‍पना को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री ने “सम्‍पर्क और व्यापार में तेजी लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय लामबंदी साझेदारी” या इम्‍पैक्‍ट के गठन का सुझाव रखा जिसमें जी-7 की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ के स्वामित्व को जोड़ा जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने स्थिर, विश्वसनीय और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि एकीकरण, साझेदारी और साझा प्रगति में भारत के विश्वास ने उसे जी-7 सदस्य देशों तथा अनेक अन्य देशों के साथ व्यापार समझौते करने के लिए प्रेरित किया है।

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Prime Minister’s Office

प्रधानमंत्री ने फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान, ‘इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित किया

Posted Date:- Jun 18, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज फ्रांस के एवियन में जी7 शिखर सम्मेलन में “इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसे लोगों को सशक्त बनाने वाला भी होना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक सोच के साथ भारत ने हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के ‘मानव’ (MANAV) विजन को रेखांकित किया, जो इस बात पर जोर देता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।

इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक देशों के पास ऐसी एआई मॉडल तक पहुँच होनी चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और उन्हें साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए। इस संबंध में, उन्होंने चार सुझाव दिए: एआई सिस्टम को ‘सेफ-बाय-डिजाइन’ (निर्माण के स्तर पर ही सुरक्षित) होना चाहिए; एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए; डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग होना चाहिए और एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों तक पहुँचना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।

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