बजट पूर्व आर्थिक समीक्षा संसद के दोनों सदनों प्रस्तुत

संसद में बजट 2026-27 के पूर्व आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत करती हुईं वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण
Published on 30 JAN 2026 Time: 07.04 AM, Source: PIB

संसद में बजट 2026-27 के पूर्व आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत करती हुईं वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण
Published on 30 JAN 2026 Time: 07.04 AM, Source: PIB
आज के दौर में पत्रकारिता बड़ी जिम्मेदारी-अरूण शर्मा
समाज को सही दिशा देने में पत्रकारों की बड़ी भूमिका-आदेश चौहान
पत्रकार समाज का आईना हैं-किरण जैसल
Published on 29.01.2026, Thursday, 09:51 PM, Report by Ramchandra Kannojia, Haridwar, UP Samachar Sewa
हरिद्वार, 29 जनवरी (उत्तर प्रदेश समाचार सेवा)। उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन का रजत जयंती समारोह आयोजित किया गया। प्रेस क्लब सभागार में आयोजित पत्रकार यूनियन के रजत जयंती समारोह में पत्रकारिता के मूल्यों, सामाजिक सरोकारों और भविष्य की दिशा पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां शारदा की स्तुति के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कथावाचक रविदेव शास्त्री ने की। मुख्य अतिथि के रूप में रानीपुर विधायक आदेश चौहान तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन रजनीकांत शुक्ला ने किया। जिलाध्यक्ष संजय आर्य ने यूनियन के गठन से लेकर वर्तमान तक की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने सदैव जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों की आवाज़ को बुलंद किया है। कार्यक्रम संयोजक डा.हिमांशु द्विवेदी ने सभी अतिथियों, पत्रकार साथियों और गणमान्य नागरिकों का पटका पहनाकर स्वागत किया। विशिष्ट अतिथि प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा ने यूनियन के 25 वर्षों के संघर्ष, उपलब्धियों और पत्रकार हितों के लिए किए गए आंदोलनों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में पत्रकारिता एक बड़ी जिम्मेदारी है। जिसमें सत्य, निष्पक्षता और सामाजिक प्रतिबद्धता सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे मानकों और मर्यादाओं का पालन करते हुए निर्भीक और ईमानदार पत्रकारिता करें। उन्होंने बताया कि यूनियन लगातार पत्रकारों के अधिकारों, सुरक्षा और सम्मान के लिए संघर्षरत है। मुख्य अतिथि विधायक आदेश चौहान ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं और समाज को दिशा देने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। विधायक आदेश चौहान ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तराखंड राज्य का गठन संभव हो पाया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में हो रहे विकास कार्यों की भी सराहना की। मेयर किरण जैसल ने समारोह में उपस्थित पत्रकारों को रजत जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पत्रकार समाज का आईना हैं और उनकी लेखनी समाज को जागरूक करने का कार्य करती है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी एवं प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु शंकर करौरी महादेव ने ऑडियो संदेश के माध्यम से यूनियन को 25 वर्ष पूर्ण होने पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं और पत्रकारों की भूमिका की सराहना की। प्रेस क्लब अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने सभी अतिथियों, पत्रकारों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह समारोह पत्रकारिता के मूल्यों को सशक्त करने वाला रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे स्वामी रविदेव शास्त्री ने कहा कि बदलते समय में पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियां हैं। लेकिन श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने सदैव सामाजिक सरोकारों को प्राथमिकता दी है। इस अवसर पर जगदीश लाल पाहवा, डा.विशाल गर्ग, विजयपाल बघेल ग्रीन मैन, नितिन गौतम, लोकेंद्र अंतवाल, विजयपाल सिंह, प्रेस क्लब महामंत्री दीपक मिश्रा सहित शहर के अनेक प्रतिष्ठित नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं डा.हिमांशु द्विवेदी, अमित कुमार गुप्ता, मनोज कुमार खन्ना, राजकुमार पाल, संजय शर्मा, गगनदीप गोस्वामी, सुनील दत्त पांडे, रामचंद्र कनौजिया, दीपक नौटियाल, सुभाष कपिल, रोहित सिखोला, मनोज रावत, लव शर्मा, महेश पारिक, ऋषि सचदेवा, विपिन शर्मा, संदीप गोयल, संजय संतोषी, संजय रावल, जगदीश प्रेमी, अनिरुद्ध भाटी, संजय चौहान, सुनील शेट्टी, नरेंद्र ढीला, गौरव चक्रपाणि, देशप्रेमी, रामकुमार शर्मा, देवेश शर्मा, सुमित तिवारी, कुलदीप अग्रवाल, आशु शर्मा सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।
नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026, विवादित यूजीसी नियमों पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। इस मामले पर अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
नियमों के खिलाफ दायर रिट याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमालया बागची ने की। अग्रिम निर्णय तक यूजीसी के 2012 में अधिसूचित नियम ही लागू रहेंगे। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया है।
ज्ञातव्य है कि 13 जनवरी को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने विनियम 2026 जारी किए थे। इनकी धारा 3 सी पर विवाद था। इस मामले को लेकर अधिवक्ता विनीत जिंदल ने याचिका दायर की थी।
UGC Rules stayed by Supreme court
जानकारी के अनुसार अजित पवार आज सुबह बारामती में एक मीटिंग के लिए गए थे। सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर उनका प्राइवेट चार्टर विमान लैंडिंग करते समय दुर्घटना ग्रस्त हो गया। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए अजित पवार, उनके पीएसओ, सहयोगी, दो क्रू मेंबर और एक अन्य को गंभीर रूप से घायल अवस्था में चिकित्सालय लाया गया, जहां चिकित्सकों ने सभी को मृत घोषित कर दिया।
#अजित पवार #Ajit Pawar #Planecresh
नई दिल्ली, 27 जनवरी 2026, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी अधिसूचना “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्धन हेतु) विनियम, 2026” का उद्देश्य महत्वपूर्ण है, परंतु इन विनियमों में स्पष्टता और संतुलन अत्यंत आवश्यक है।अभाविप मानती है कि यूजीसी तथा सभी शैक्षणिक संस्थानों को लोकतंत्र में अंतर्निहित भावना को अक्षुण्ण रखना चाहिए, जहाँ प्रत्येक नागरिक के पास समान अधिकार हों और भारत भेदभाव मुक्त तथा समता युक्त बने।
अभाविप सदैव ही शैक्षिक परिसरों में सकारात्मक और समतायुक्त परिवेश बनाने की दिशा में कार्य करती रही है और लोकतांत्रिक मूल्यों के संवर्धन की पक्षधर रही है। आगामी वर्षों में ‘विकसित भारत’ की संकल्पना को सिद्ध करने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता है। यूजीसी के इस समता संबंधी विनियम के कुछ प्रावधानों और शब्दावली को लेकर समाज, विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच जो अस्पष्टता और भ्रांतियाँ उत्पन्न हो रही हैं, इनपर यूजीसी को त्वरित संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्यवाही करनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की विभाजनकारी स्थिति उत्पन्न न हो सके। ध्यातव्य हो, यह विषय वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है अतः अभाविप मानती है कि यूजीसी को इस संदर्भ में अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए न्यायालय में शीघ्र हलफनामा दाखिल करना चाहिए।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि, “शैक्षणिक परिसरों में सौहार्द एवं समानता सुनिश्चित किया जाना अनिवार्य है, जिसके लिए अभाविप ने सदैव प्रयास किए हैं। शैक्षणिक परिसरों में सभी वर्गों के लिए सामाजिक समानता होनी चाहिए तथा परिसरों में किसी भी प्रकार के भेदभावों के लिए कोई स्थान नहीं हैं। इस विनियम को लेकर विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं हितधारकों के मध्य भ्रांतियाँ व्याप्त हैं, जिन पर यूजीसी को सभी हितधारकों से संवाद करते हुए संबंधित भ्रांतियों को दूर करने हेतु तत्काल स्पष्टीकरण देना चाहिए। लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने तथा सभी विद्यार्थियों के लिए भेदभाव-मुक्त वातावरण सुनिश्चित करने हेतु समाज के सभी वर्गों के सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
