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47 वर्षीय कलम सिंह बिष्ट ने जीती  120 किलोमीटर लम्बी ओमान  रेस !

February 8, 2026

47 वर्षीय कलम सिंह बिष्ट ने जीती  120 किलोमीटर लम्बी ओमान  रेस !

Kalam Singh Bist, Chamoli, Ex Army Person

लंबी दूरी की दौड़ का विश्व विजेता कलम सिंह बिष्ट पूर्व सैनिक

  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक ने विश्व मंच पर भारत और  उत्तराखंड का परचम  लहराया 
  • गढ़वाल राइफल के पूर्व सैनिक नायक कलम सिंह बिष्ट ने ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर कीर्तिमान बनाया है।
  • लम्बी दौड़ की श्रेणी में अभी तक मैराथन 42 किलोमीटर को सबसे लम्बी दौड़ माना जाता रहा है और यह सामान्य रोड़ पर आयोजित की जाती है। 

Posted on 08.02.2026 Sunday, Time: 09.13 AM, Report Bhupat Singh Bist, Dehradun 

देहरादून, 08 फरवरी। ओमान में आयोजित 120 किलोमीटर लम्बी अल्ट्रा ट्रेल रेस जीतकर उत्तराखंड के कलम सिंह बिष्ट ने रिकॉर्ड बनाया है। बिष्ट पूर्व सैनिक हैं, वे गढ़वाल राइफल्स से सेवानिवृत हुए हैं।

अल्ट्रा ट्रेल रेस का मार्ग पथरीला और रेगिस्तान की दुर्गमता लिए है जाना जाता है। ये दूरी नापने में नायक कलम सिंह बिष्ट ने 18 घंटे और 18 मिनट का समय दर्ज किया। इस दुर्गम रोमांचक दौड़ में 68 देश के हजारों धावक शामिल थे। चमोली गढ़वाल के मुन्दोली ग्राम निवासी कलम सिंह बचपन में 12 किलोमीटर रोजाना स्कूल की दूरी नापा करते थे।

जीवन में अभाव ने संघर्ष की प्रेरणा दी। पिता ने जोश भरा – जीतने से पहले छोड़ना नहीं है। 

नई युवा पीढ़ी को ड्रग और मोबाइल की लत से छुड़ाने के लिए पूर्व फौजी नायक कलम सिंह बिष्ट अब प्रशिक्षक की भूमिका में सुदूर गांवो में शिविर आयोजित कर रहें हैं अल्ट्रा ट्रेल रेस विजेता उत्तराखंड के युवाओं को अंतर -राष्ट्रीय खेलों में सफल देखना चाहते हैं।

प्रस्तुति – भूपत सिंह बिष्ट

February 7, 2026

धर्म-निरपेक्षता गलत शब्द, पंथ-निरपेक्षता होना चाहिएः डा मोहन भागवत

DR MOHAN BHAGWAT SRSANGHCHALAK RSS

मुम्बई में संघ यात्रा के सौ वर्ष नए क्षितिज व्याख्यान माला के पहले सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष के उपलक्ष्य में शताब्दी संवाद

Posted on : 07.02.2026 Saturday, Time: 07.59 PM, Mumbai, RSS, Dr Mohan Bhagwat #RSS100YEAR

मुम्बई, 07 फरवरी 2026, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा मोहन भागवत ने कहा है कि धर्मनिरपेक्ष शब्द गलत है। हमें इसके स्थान पर पंथ निरपेक्षता शब्द का उपयोग करना चाहिए। वे आज शनिवार को यहां “संघ यात्रा के सौ वर्ष – नए क्षितिज” व्याख्यानमाला के उपलक्ष्य में आयोजित संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

डा. मोहन भागवत ने कहा संघ का काम अनोखा है, पूरी दुनिया में ऐसा काम नहीं है। अब तो यह प्रत्यक्ष अनुभव हो रहा है। संघ कार्य और इसके इतिहास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अपने देश के इतिहास में तथागत बुद्ध के बाद संघ जैसा काम नहीं हुआ है। संघ के स्वयंसेवक संचलन करते हैं, लेकिन संघ पैरा-मिलिट्री संस्था नहीं है। संघ को जानना है तो संघ के अंदर आकर देखिये। संघ को जानना है तो यह जानना पड़ेगा कि संघ क्या नहीं है। संघ संगीतशाला नहीं, पोलिटिकल नहीं,.. संघ अनुभव का विषय है। संघ किसी की प्रतिक्रिया में नहीं, किसी के विरोध हेतु नहीं, अपने प्रचार के लिए नहीं, पावर के लिए नहीं. देश  में अच्छा होने के लिए संघ बना है। संघ किसी दूसरी संस्था की प्रतिस्पर्धा में नहीं निकला है, न ही किसी रिएक्शन या विरोध में निकला है। संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए। संघ को पावर नहीं चाहिए। जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएँ—उन्हें करने के लिए संघ है।

ब्रिटिश सरकार की सेफ्टी वाल योजना से बनी कांग्रेस

संघ का जो काम है, वह पूरे देश—भारतवर्ष के लिए है। उन्होने बताया कि ब्रिटिश सरकार की योजना से एक सेफ़्टी वाल के रूप में इंडियन नेशनल कांग्रेस बनी। उसी को हमारे लोगों ने आज़ादी की लड़ाई का प्रभावी हथियार बनाया। एक समाज के नाते हम एक समाज हैं क्या? इतने भेद, दकियानूसी, रूढ़ि-कुरीतियों का बोलबाला है। अशिक्षा है। इन सब से उबारकर अपने समाज को एक स्वस्थ समाज के नाते खड़ा करने की जब तक कोशिश नहीं करते, हमारे प्रयास अधूरे रहेंगे। संघ निर्माता डॉ. हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। बहुत कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा—एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फ़र्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था, उसमें सक्रियता से भाग लेना। ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे डा हेडगेवार

स्वतंत्रता संग्राम में संघ की भूमिका और डा हेडगेवार के योगदान की चर्चा करते हुए श्री भागवत ने कहा कि डॉ. हेडगेवार अनुशीलन समिति के कोर मेंबर बने। उनका कोड नाम ‘कोकीन’ था। असहयोग आंदोलन में डॉ. हेडगेवार ने हिस्सा लिया, तो उन पर राजद्रोह का केस चला। एक वर्ष सश्रम कारावास की सज़ा उन्हें हुई। न्यायाधीश ने उनके बारे में अपने फैसले में लिखा, “उनके बचाव का भाषण उनके दिए गए भाषणों से ज़्यादा ‘सेडिशियस’ था।” उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ पहले आक्रमणकर्ता नहीं थे। वे सातवें–आठवें थे।  सिकंदर के समय से ऐसा होता आ रहा है। वे मुट्ठीभर लोग हमसे श्रेष्ठ नहीं थे, फिर भी हम बार-बार मार खाते रहे। अपने समाज में कुछ कमियाँ हैं—हम अपनी एकता भूल गए, स्वार्थी बन गए। इन सब को ठीक किए बिना, समाज को एक संगठित किए बिना यह रुकेगा नहीं। इसलिए डॉ. हेडगेवार ने सोचा, “मैं एक प्रयोग करता हूँ।” विविधताओं से भरे हुए समाज को गुणवत्ता के साथ खड़ा करने के प्रयोग उन्होंने किये। जब उन्हें वह सूत्र और पद्धति मिल गई, तो उन्होंने विजयादशमी 1925 के दिन अपने घर में बैठक बुलाई और कहा—आज से अपने संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन करने वाला संघ आरंभ हो रहा है।

हिन्दू समाज के संगठन के अलावा संघ कुछ नहीं करेगा

संघ की कार्य पद्यति को बताते हुए डा मोहन भागवत ने आगे कहा कि संघ ने पहले से तय किया – सम्पूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है। देश में जितने अच्छे काम हो रहे हैं, वो ठीक से चलें और गतंव्य तक पहुंचे इसीलिए संघ है। एक लाख तीस हज़ार से अधिक छोटे-बड़े सेवा कार्य बिना सरकारी पैसा लिए, समाज के सहयोग से अपना पैसा खर्च करके स्वयंसेवक करते हैं। शाखा क्या है? एक घंटे का समय निकालना, सब भूलकर भगवा झंडे के तले अपने भारत का विचार मन में रखते हुए, उसके प्रति भक्ति मन में रखते हुए खड़े होना. जो शाखा में आए हैं, वे कौन हैं, किस जात-पात के हैं, क्या नाम है, कितना कमाते हैं, कितना पढ़े हैं—इस पर विचार नहीं नहीं करना; बल्कि ये मानना कि वे हमारे अपने हैं। ऐसे उनके साथ मिलकर शरीर, मन, बुद्धि को शक्तिशाली बनाने वाले व्यायाम प्रतिदिन करना।

गुरु नानक देव जी ने हिन्दुस्थान शब्द का प्रयोग अपनी वाणी में किया

संघ का मानना है कि भारत में सब हिंदू ही हैं और कोई नहीं है। हिंदू यानी क्या है? हिंदू कहने से हम इसे रिलिजन न मानें; यह किसी विशेष समुदाय का नाम नहीं है। इसे पूजा-कर्मकांड न मानें। हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि विशेषण है। बाबर का पंजाब पर आक्रमण हुआ। श्री गुरु नानक देव जी ने देश में सब अत्याचार देखा, तो उन्होंने लिखा, “खुरासान खसमाना कीआ, हिंदुस्तानु डराइआ। आपै दोसु न देई करता, जमु करि मुगलु चड़ाइआ॥” गुरु नानक जी ने अपनी वाणी में ‘हिंदुस्थान’ का प्रयोग किया है। उन्होंने लिखा है कि इतने अत्याचार हुए कि न हिंदू महिलाओं का शील बचा, न मुस्लिम महिलाओं की अस्मत बची। बाकी सब बदल जाता है, लेकिन हिंदुस्थान का सनातन स्वभाव नहीं बदला।

सबसे प्राचीन होने के नाते हम अग्रज हैं

भारत धर्म-प्राण देश है। हम जानते हैं सब एक हैं। सबको साथ चलना है, किसी को छोड़ना नहीं है। धर्म-निरपेक्षता गलत शब्द है; पंथ-निरपेक्षता होना चाहिए। दुनिया को धर्म देकर, देश का उपकार करने के लिए, बिना अहंकार के भारत का जन्म है। संस्कृति हम सबको जोड़ती है। भाषाएँ अनेक हैं, देवी-देवता अनेक हैं। खान-पान, रीति-रिवाज अलग-अलग हैं। दस हजार–पंद्रह हजार वर्षों से यह चलता आ रहा है, आधुनिक दौर में भी। परंतु उसके ऊपर, इसके परे हम सबकी एक पहचान है—उसे हम हिंदू कहते हैं। भारत भूगोल का नाम नहीं, स्वभाव का नाम है। सबसे प्राचीन होने के नाते हम अग्रज हैं। दुनिया के लोग आएँगे और हमारा चरित्र देखेंगे, हमसे सीखेंगे। हम दुनिया की महाशक्ति नहीं बनेंगे; हम विश्वगुरु बनेंगे। हम भाषण और दादागिरी से नहीं, बल्कि नेतृत्व से सिखाएँगे। हम शिवाजी नहीं हो सकते, लेकिन शिवाजी महाराज के नक्शेकदम पर चल सकते हैं।

February 5, 2026

इंडो-यूएस ट्रेड डील: कृषि और डेयरी पर कोई समझौता नहीं, किसान हित पूरी तरह सुरक्षित –  शिवराज सिंह चौहान

‘किसान हित सर्वोपरि’, मुख्य अनाज, मिलेट्स, फल और डेयरी उत्पादों पर कोई खतरा नहीं – श्री चौहान

टैरिफ घटने से चावल, मसाले और टेक्सटाइल निर्यात को मिलेगा बल, कपास किसानों की आय बढ़ेगी – श्री शिवराज सिंह

शिवराज सिंह चौहान

केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान

Posted on :05 FEB 2026 , 10.36 PM by PIB Delhi

नई दिल्ली, भारत-यूएस ट्रेड डील को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे भ्रामक आरोपों के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया है कि इस समझौते में भारतीय कृषि, विशेषकर कृषि और डेयरी सेक्टर के हितों से कोई समझौता नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि यह डील प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में डिप्लोमेसी, डेवलपमेंट और डिग्निटी का नया उदाहरण है और प्रधानमंत्री जी ने शुरू से साफ कर दिया था कि किसान हित सर्वोपरि हैं।

दिल्ली में आज मीडिया से चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारे मुख्य अनाज, फल, प्रमुख फसलें, मिलेट्स और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और भारतीय कृषि या डेयरी पर किसी तरह का खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों के हित पूरी तरह संरक्षित हैं और इस समझौते से उल्टा भारत के किसानों को नए अवसर मिलेंगे।

छोटे किसानों की चिंता और यूएस फार्म प्रोडक्ट्स पर स्थिति स्पष्ट

इस आशंका पर कि देश की 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर है और छोटे किसानों पर असर पड़ सकता है, केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि कोई “बड़ी चीज़” भारत के बाजार में अचानक नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि हमारी सभी मुख्य फसलें, मुख्य अनाज, फल और डेयरी उत्पाद सुरक्षित हैं और किसी भी ऐसे क्षेत्र के लिए बाजार नहीं खोला गया है, जो भारतीय किसानों के लिए नुकसानदेह हो सके।

यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी के उस ट्वीट से पैदा संशय पर, जिसमें अमेरिकी फार्म प्रोडक्ट्स के ज़्यादा भारत आने की बात कही गई थी, श्री चौहान ने कहा कि वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल ने संसद में पूरे तथ्य स्पष्ट कर दिए हैं और वे स्वयं भी दोहरा रहे हैं कि छोटे और बड़े, सभी भारतीय किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं और मुख्य कृषि उत्पादों के लिए बाजार इस प्रकार नहीं खोला गया है कि किसानों पर दबाव बने।

चावलमसाले और टेक्सटाइल निर्यात को नया बल

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि भारत पहले से ही अमेरिका सहित विभिन्न देशों को चावल का बड़ा निर्यातक है और हाल के आंकड़ों के अनुसार लगभग 63,000 करोड़ रुपये के चावल का निर्यात किया गया था।

उन्होंने कहा कि टैरिफ कम होने से हमारे चावल, मसालों और टेक्सटाइल के निर्यात को बल मिलेगा और जब टेक्सटाइल एक्सपोर्ट बढ़ेगा तो इसका सीधा लाभ कपास उगाने वाले हमारे किसानों को होगा। श्री चौहान ने कहा कि यह समझौता समग्र रूप से भारत के किसानों के हित में है और विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाने के बावजूद तथ्य यही हैं कि किसान हित सुरक्षित हैं और निर्यात के नए अवसर खुल रहे हैं।

अगर विपक्ष बोलने ही नहीं देगा तो समझाया कैसे जाएगा

जब यह सवाल उठा कि विपक्ष कह रहा है कि अगर ट्रेड डील कर रहे हैं तो सरकार आकर फाइन प्रिंट को संसद और देश के सामने समझाए, तो कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने दोहराया कि डील की सारी डिटेल्स समय पर सामने आएंगी, लेकिन उसका मूल साफ है – किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित हैं

किसान अन्नदाताकिसानों की सेवा भगवान की पूजा

कृषि मंत्री ने चिंता जताई कि कृषि का क्षेत्र इतना बड़ा है कि किसी भी तरह की अफवाह से किसानों में अनावश्यक चिंता और बेचैनी पैदा हो सकती है, इसलिए सरकार की ओर से स्पष्ट आश्वासन देना जरूरी है। उन्होंने कहा, “मैं एक बार फिर कहना चाहता हूँ, किसान अन्नदाता हैं, अन्नदाता मतलब जीवनदाता। उनके हित ही देश के हित हैं और वे हित सुरक्षित हैं।”

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने भावुक शब्दों में कहा कि किसानों की सेवा सरकार के लिए भगवान की पूजा के समान है और मोदी सरकार हर कदम पर किसान के पक्ष में खड़ी रहेगी।

February 4, 2026

अमेरिका के साथ समझौते में कृषि हित सुरक्षित

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में यूएस डील की जानकारी दी और इसे दोनों पक्षों के लिए लाभकारी बताया

UP Web News

यूपी वेब न्यूज

Posted on 04.02.2026, Wednesday Time: 03.55 PM, Lok Sabha Minister Piyush Goel

नई दिल्ली, 04 फरवरी 2026, भारतीय उत्पादों पर अमरीका द्वारा टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने की घोषणा के बाद दूसरे दिन वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में अमेरिका के साथ डील की जानकारी देते हुए इसे दोनों पक्षों के लिए लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि हम कृषि और डेयरी क्षेत्र में भारत के हित सुरक्षित रखने में सफल रहे हैं।

पीयूष गोयल ने कहा कि फरवरी, 2025 में पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद से भारत और अमेरिका पारस्परिक और लाभकारी व्यापार समझौते को लेकर नियमित रूप से चर्चा करते रहे हैं। दोनों पक्षों के वार्ताकारों ने पिछले एक वर्ष में कई स्तरों पर गहन बातचीत की है। विपक्ष के कड़े अवरोध के बीच गोयल ने कहा कि भारत अपने कृषि और दुग्ध क्षेत्र के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है।

मंत्री ने कहा कि अमेरिकी क्षेत्र के भी कुछ संवेदनशील क्षेत्र थे और 2 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय मानकों और अन्य बिंदुओं पर फोन पर चर्चा की। इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति ने भारत से अमेरिकी आयात पर टैरिफ की दर घटाकर 50 से 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।

February 3, 2026

संघ के 100 वर्ष की यात्रा पर सरसंघचालक भागवत का संवाद 7 फरवरी से

  • 100 वर्ष की संघ यात्रा व पंच परिवर्तन के संकल्प पर प्रमुख जनों से संवाद करेंगे सरसंघचालक मोहन भागवत जी
  • मुंबई में 07, 08 फरवरी को शताब्दी वर्ष के निमित्त व्याख्यानमाला – ‘संघ यात्रा के १०० वर्ष – नए क्षितिज’

Posted on: 03.02.2026, Tuesday, Time: 07.07 PM, RSS Rashtriya Swayamsevak Sangh, Mumbai Samvad, Sarsanghchalak Dr Mohan Bhagwat 

RSS Press Conference in Mumbai, Sunil Ambedkar

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर मुंबई में पत्रकारों से वार्ता करते हुए

मुंबई, ३ फरवरी २०२६। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त होने वाली “संघ यात्रा के १०० वर्ष : नए क्षितिज” व्याख्यानमाला (मुंबई) की विस्तृत जानकारी दी। आज प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में सुनील जी के साथ कोकण प्रांत संघचालक अर्जुन चांदेकर जी भी उपस्थित थे।
शताब्दी वर्ष के निमित्त अखिल भारतीय योजना के अंतर्गत दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता में इसी प्रकार की व्याख्यानमालाएं आयोजित हुई हैं, मुंबई व्याख्यानमाला इस श्रृंखला की अंतिम व्याख्यानमाला होगी। पिछली सभी व्याख्यानमालाओं को उत्साहवर्धक प्रतिसाद मिला है।
उन्होंने बताया कि वर्ळी स्थित नेहरू सेंटर सभागार में ७ और ८ फरवरी को व्याख्यानमाला का आयोजन होगा, जिसमें ४ सत्र रहेंगे। पहले दिन दोपहर ३:३० से शाम ७:३० बजे तक २ सत्र होंगे, जिसमें सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का उद्बोधन होगा। दूसरे दिन स

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