टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने हेतु एबीआरएसएम के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का द्वितीय चरण – “सांसद संपर्क एवं सांसद समर्थन अभियान” शुरू
5 जुलाई तक देश के सभी राज्य सभा व लोकसभा सांसदों से संपर्क कर उन्हें ज्ञापन सौंपकर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने हेतु समर्थन करने का किया जाएगा आग्रह
लखनऊ : 22 जून। टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने हेतु देश के सभी राज्य सभा व लोकसभा सांसदों से 5 जुलाई 2026 तक सम्पर्क कर टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत लाखों शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने का आग्रह किया जाएगा।
उक्त निर्णय सोमवार को अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आभासी पटल पर आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर नारायण लाल गुप्ता ने की एवं संचालन राष्ट्रीय महामंत्री प्रोफेसर गीता भट्ट जी द्वारा किया गया। बैठक में अखिल भारतीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री मोहन राजपुरोहित सहित सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं सभी राज्यों के अध्यक्ष, महामंत्री एवं संगठन मंत्री उपस्थित रहे।
प्रदेश महामंत्री जोगेंद्र पाल सिंह ने बताया कि लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए एबीआरएसएम के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत प्रथम चरण में 18 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सहित देशभर के सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल धरना-प्रदर्शन एवं जिला अधिकारियों के माध्यम से प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री को ज्ञापन दिए गए। इससे शिक्षक समाज की भावनाएं एवं अपेक्षाएं सरकार और समाज के समक्ष प्रभावी रूप से पहुंची है।
प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर संजय मेधावी ने बताया कि एबीआरएसएम के देशव्यापी अभियान के तहत अब आंदोलन के द्वितीय चरण में “सांसद संपर्क एवं सांसद समर्थन अभियान” चलाया जाएगा जिसमें 5 जुलाई 2026 तक उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में संगठन की जिला इकाइयों द्वारा राज्य सभा व लोकसभा सांसदों से संपर्क कर उन्हें ज्ञापन सौंपकर टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत लाखों शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त कराने हेतु उनका समर्थन प्राप्त किया जाएगा।
प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष शिव शंकर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में टीईटी लागू होने की दिनांक 27 जुलाई 2011 से पहले से सेवारत 2 लाख से अधिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा एवम् आजीविका पर संकट खड़ा हो गया। शिक्षकों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है। संगठन किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय नहीं होने देगा।
प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने कहा कि संगठन पूरी शक्ति और गंभीरता के साथ प्रत्येक लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद से संपर्क कर उन्हें अवगत कराएगा कि टीईटी लागू होने से पहले से सेवारत लाखों शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपना शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, मानवीय गरिमा, शिक्षक हित व नैसर्गिक न्याय के खिलाफ है।
प्रदेश कोषाध्यक्ष नीलमणि शुक्ला ने कहा कि लाखों शिक्षकों की सेवा सुरक्षा एवम् गौरव गरिमा से जुड़ी इस गंभीर समस्या समाधान हेतु सभी सांसदों का समर्थन जरूरी है ताकि संसद के मानसून सत्र में इस समस्या पर व्यापक चर्चा हो व इस समस्या के समाधान का विधायी मार्ग प्रशस्त हो सके।
उपरोक्त जानकारी प्रदेश मीडिया प्रभारी बृजेश श्रीवास्तव ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।
