Editorial 17.06.2026 Sunday by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News
एक पखवाड़े से पाकिस्तान के बलात कब्जे वाला कश्मीर अशांत है। पुलिस और पाकिसनी रेंजरों की क्रूर और दमनात्मक कार्रवाई से अब तक 53 नागरिक मरे जा चुके है। दमन चक्र इसके बाद भी जारी है। कश्मीर के इस हिस्से के लोग जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएसी) के नेतृत्व में आंदोलनरत है। हम भारतवासी और हमारी सरकार का स्पष्ट मत है और यह तथ्यात्मक सच्चाई भी है कि संपूर्ण जम्मू कश्मीर, लद्दाख क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है। हम संयुक्त राष्ट्र महासभा में अनेक बार पाकिस्तान को इस विषय पर लताड़ चुके है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थाई प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने पाकिस्तान को फिर इस मुद्दे पर लताड़ा था। जब पाकिस्तान ने कश्मीर का राग अलाप दिया था। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पीओके में हो रहीं घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने हिंसा और दमन की निंदा की तथा खा अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ये सब देख रहा है। ये बयान मात्र औपचारिकता है। वास्तव में पाक अधिकृत कश्मीर के नागरिकों को भारत से सक्रिय सहयोग की अपेक्षा है। उनकी उम्मीद की किरण सिर्फ भारत है। आखिर जब समूचा जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तो वहां के नागरिक भी भारतीय है। उनकी रक्षा करना हमारा धर्म है। इस धर्म को निभाने के लिए हमें सक्रिय हस्तक्षेप करना चाहिए।
पाकिस्तान इस क्षेत्र की शासन व्यवस्था बदलना चाहता है। वह इस इलाके की सरकार को हटाकर सीधे इस्लामाबाद का नियंत्रण चाहता है। एक तरह से पूरा शासन सैन्य सरकार के रूप में स्थापित करने के प्रयास में है। पाक अधिकृत कश्मीर बेहद गरीबी,बेरोजगारी की मार झेल रहा है। मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव है। पाकिस्तान ने इस 78 हजार वर्ग किमी के क्षेत्र पर कब्जा तो कर लिया पर इसका विकास नहीं किया। शिक्षा,सड़क,उद्योग सभी का अभाव है। इन मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर और जुलाई के चुनाव के विरोध में ज्वाइंट आवामी एक्शन कमेटी आंदोलनरत है। पाकिस्तान के कब्जे के बाद इस क्षेत्र के लिए ऐसा कानून बनाया गया, जिससे विधान सभा में बाहरी हस्तक्षेप बना रहे। यहां की विधानसभा में 45 सीटे है इन्हें 12 शरणार्थियों के लिए आरक्षित है। इन सीटों पर मनोनयन करके पाकिस्तान सरकार अन्य प्रांतों और गैर कश्मीरियों को घुसा देती है। इससे यहां के लोगों में भारी आक्रोश है। आंदोलन का एक मुख्य मुद्दा ये भी है।
जम्मू कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी पर पाकिस्तान ने प्रतिबंध लगा दिया है। इसे आतंकवाद विरोधी कानून में प्रतिबंधित किया है। इस संगठन ने गत मंगलवार को लॉक डाउन का आह्वान किया था। इसके एक दिन पहले 8 जून को ही पुलिस ने रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी, जिससे 11 लोग मौके पर ही मारे गए और 50 लोग घायल हुए। अभी तक एक सप्ताह में 53 निर्दोष लोग पुलिस ने मार दिए हैं। पिछले साल अक्टूबर 2025 में प्रदर्शन में 6 लोग मारे गए। मई 2924 में लांग मार्च के दौरान भी पुलिस ने गोली चलाई इसमें 3 लोगों की मृत्यु हुई। पाकिस्तान के सुरक्षा बल कश्मीरियों को विदेशी मानकर उनका जनसंहार कर रहे है। उन्हें उनके जान मॉल से कोई सहानुभूति नहीं है। क्योंकि वे मानते है कि ये सब भारतीय ही है।
ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। अत: पाक अधिकृत कश्मीर के भारतीय नागरिकों को नैतिक समर्थन के साथ साथ, प्रत्यक्ष और सार्थक समर्थन भी दिया जाय। आवश्यकता सीधे हस्तक्षेप कर अपना कश्मीर वापस लेने की है।
