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तानाशाही के नाम पर: युद्ध नियंत्रण की आवश्यकता : डाॅ०राकेश सक्सेना

March 17, 2026

तानाशाही के नाम पर: युद्ध नियंत्रण की आवश्यकता : डाॅ०राकेश सक्सेना

Rakesh Saxena

Posted on 17.03.2026, Tuesday

एटा 17 मार्च उप्रससे। युद्ध आक्रामक कृत्य है जो किसी भी राष्ट्र की अस्मिता के विनाश से जोड़ता है। इस विचार को दृष्टिगत रखते हुए मानव सभ्यता के इतिहास में युद्ध एक जटिल पक्ष रहा है। समय बदलाव के साथ युद्ध की प्रवृत्ति, साधन, उद्देश्य व परिणाम में व्यापक परिवर्तन हुए। प्राचीन युद्धों में तलवार, भाला, धनुष-बाण, गदा आदि अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग होता था किन्तु आधुनिक युद्धों में टैंक, मिसाइलें, लड़ाकू विमान, परमाणु बम, ड्रोन और साइबर तकनीक जैसे अत्याधुनिक साधनों का प्रयोग होता है। प्राचीन काल में युद्ध के कुछ नैतिक नियम और मर्यादाएँ थीं। दिन में युद्ध और रात्रि में विश्राम, निहत्थे व शरणागत पर आक्रमण न करना, स्त्रियों, बच्चों व निर्दोष नागरिकों की रक्षा करना आदि नियमों का पूर्णरूपेण पालन किया जाता था किन्तु आधुनिक युद्धों में ये मर्यादाएँ तार-तार हो चुकीं हैं। युद्ध किसी भी समस्या के समाधान नहीं होते। आज के युग में युद्ध अत्यधिक विनाशकारी हो गए हैं, इसकी विभीषिका, इसका दुष्प्रभाव समूचे समाज, संस्कृति और मानव जीवन पर पड़ता है, हजारों-लाखों लोग अपने प्राण ग॔वा बैठते हैं, परिवार उजड़ जाते हैं, माताएँ अपने पुत्रों को खो देतीं हैं, बच्चे अनाथ हो जाते हैं, उद्योग धंधे नष्ट हो जाते हैं, जनता अभाव का जीवन जीने को विवश हो जाती है, भय, असुरक्षा और अशान्ति का वातावरण समाज में फैल जाता है, हिंसा व घृणा का वातावरण पनपता है।
आज भारत-पाकिस्तान, अफगान-पाकिस्तान, यूक्रेन-रूस, इजरायल-फिलिस्तीन, अमेरिका-ईरान, इजरायल-ईरान आदि देशों के युद्धों से दृष्टिगोचर हो रहा है कि दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ी है। वैश्विक राजनीति में ऊर्जा संसाधनों विशेषकर तेल का महत्वपूर्ण स्थान है। औद्योगिक विकास, सैन्य शक्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा भाग तेल पर निर्भर करता है, इसी कारण तेल -समृद्ध क्षेत्रों पर नियंत्रण को लेकर विश्व की महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा रही है। अमेरिका की विदेश नीति में तेल राजनीति की बड़ी भूमिका रही है, जिसके कारण आज वह अपनी तानाशाही दिखा रहा है। ट्रम्प नाम का पक्षी जो अमेरिका में पाया जाता है, वह सारी दुनिया पर अपनी चोंच मारना चाहता है, इसलिए उसने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को रातों-रात उठा लिया, ईरान के सर्वोच्च नेता खामनेई को मार दिया और इसी की प्रजाति वाले ने कुछ वर्षों पूर्व ईराक के सद्दाम हुसैन को मार दिया था, फिर भी दुनिया चुप है। सन् 2025 में आयोजित ब्रिक्स बैठक में अमेरिका- इजरायल के ईरान पर हमलों को लेकर निंदा की गई थी लेकिन आज संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों व संगठनों की ओर से इस तानाशाही का विरोध नहीं हो रहा है, जो चिंता का विषय है।
मध्य पूर्व विश्व का सबसे बड़ा तेल भंडार क्षेत्र है। इस क्षेत्र के सऊदी अरब, ईराक, ईरान, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात के पास विशाल तेल संसाधन हैं, इसलिए तानाशाह अमेरिका इन क्षेत्रों पर अपना प्रभाव जमाए हुए है। परस्पर इन देशों में एकजुटता का अभाव है, महाशक्तियाँ पीड़ित देशों के सहयोग हेतु आगे नहीं आ रहीं हैं, नाटो, ब्रिक्स, एससीओ पीस मिशन, शंघाई संगठन मौन साधे दूरी बनाए हुए हैं। डालर में अमेरिका के प्राण बसते हैं, उसके रक्षार्थ वह कुछ भी करता रहे, इस अहंकार को तोड़ना आवश्यक है। अमेरिका ने ईरान पर हमला करके विश्व अर्थव्यवस्था के समक्ष संकट बढ़ा दिया है और यदि युद्ध लम्बा खिचता है तो वह स्वयं भी इस संकट के घेरे में आ जाएगा। वैश्विक तेल कारोबार पर आधिपत्य जमाना किसी भी दृष्टि से न्यायोचित नहीं है। वेनेजुएला की भाँति ईरान भी अपना तेल डालर में नहीं बेच रहे थे। डालर का वर्चस्व अमेरिका कायम न रख पाए इसलिए उस पर अंकुश लगाने के लिए दुनिया के देशों को आगे आना ही होगा।

March 16, 2026

कानपुर में निरंकारी संत संगम 22 से

Nirankari Sant Sudhiksha

एटा के हजारो अनुयाई उत्तर प्रदेश के कानपुर में राज्य स्तरीय निरंकारी संत समागम में संदेशों का करेंगे श्रवण

एटा 16 मार्च उप्रससे। सतगुरु माता सुदीक्षा एवं निरंकारी राजपिता रमित की दिव्य एवं करुणामयी छत्रछाया में 22 मार्च को कानपुर के निराला नगर स्थित रेलवे ग्राउंड (पराग डेयरी के समीप) में उत्तर प्रदेश का भव्य राज्य स्तरीय निरंकारी संत समागम श्रद्धा, समरसता और आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित किया जाएगा। यह पावन आयोजन मानवता, विश्वबंधुत्व और आध्यात्मिक जागृति का प्रेरणास्रोत बनेगा।

मीडिया सहायक अमित कुमार ने बताया कि प्रातः 11:00 बजे से दोपहर 4:00 बजे तक चलने वाले इस दिव्य समागम में उत्तर प्रदेश के इस राज्य स्तरीय संत समागम में जिला एटा के अवागढ़, कलियान पुर, जलेसर, धुमरी जैथरा अलीगंज, निधौली कला आदि विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु भक्त एकत्रित होकर सतगुरु के अमृतमय संदेशों का श्रवण करेंगे। सत्संग की इस पावन वाणी से मानव जीवन में प्रेम, सहअस्तित्व, करुणा और वैश्विक भाईचारे की भावना को नया आलोक प्राप्त होगा। समागम स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए लंगर, प्याऊ, चिकित्सा सेवा, पार्किंग तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ अत्यंत सुव्यवस्थित रूप से सुनिश्चित की जा रही हैं। सभी भक्तजन सेवा-भाव, अनुशासन और समर्पण के साथ स्थल को स्वच्छ, सुंदर और भक्तिमय वातावरण से परिपूर्ण बनाने में निरंतर सक्रिय हैं। आयोजन की सफलता हेतु स्थानीय प्रशासन भी सहयोग प्रदान कर रहा है।

इस दिव्य समागम की पूर्व बेला में युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से 20 एवं 21 मार्च को ‘निरंकारी यूथ सिम्पोजियम’ का आयोजन किया जाएगा, जिसका मुख्य विषय ‘द सिक्स एलीमेंट्स’- छः तत्व रहेगा। इस प्रेरणादायी मंच पर लघु नाटक, भक्ति-गीत, पैनल चर्चा और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को आध्यात्मिकता, अनुशासन, आत्मिक संतुलन, मानवीय मूल्यों, सकारात्मक चिंतन तथा रचनात्मक नेतृत्व के प्रति प्रेरित किया जाएगा।
निसंदेह, प्रेम, एकता, सहअस्तित्व और विश्वबंधुत्व के दिव्य संदेश से ओत-प्रोत यह संत समागम श्रद्धालुओं के जीवन में नई प्रेरणा, आत्मिक शांति और आनंद का आलोक प्रस्फुटित करेगा। इस पावन अवसर पर सभी श्रद्धालु भक्तों, नगरवासियों, बुद्धिजीवियों तथा प्रभुप्रेमी जनों को सादर आमंत्रित किया गया है कि वे इस आध्यात्मिक संगम में सहभागी बनकर सतगुरु कृपा का लाभ प्राप्त करें।

एटा में किसानों ने समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन

एटा 16 मार्च उप्रससे। जिले के कलेक्ट्रेट स्थित धरना स्थल पर अखिल भारतीय जनहित किसान संघ के पदाधिकारियों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को तीन अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। यह प्रदर्शन संगठन के संरक्षक अभिलाख सिंह यादव के नेतृत्व में हुआ।

अभिलाख सिंह यादव ने बताया कि वे देश के किसानों, युवाओं और बेरोजगारों की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपने आए हैं। उन्होंने भारत-अमेरिका डील पर सरकार से पुनर्विचार कर उसे समाप्त करने की मांग की। साथ ही, किसानों को एमएसपी गारंटी लागू कर फसलों का उचित मूल्य दिलाने की बात कही। हाल ही में हुई गैस की किल्लत और आलू की फसल के कम दामों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कम दाम मिलने के कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से इन समस्याओं पर विचार कर समाधान निकालने का आग्रह किया। इसके अतिरिक्त, विद्युत विभाग के निजीकरण का मुद्दा भी उठाया गया।
निधौली, जलेसर क्षेत्र के दर्जनों गांवों में खारे पानी की समस्या के कारण मीठे पानी की किल्लत का मुद्दा भी उठाया गया। किसानों ने जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल पहुंचाने की व्यवस्था जल्द सुनिश्चित करने की मांग की। ज्ञापन सौंपने वालों में अनिल कुमार, रमेश चंद्र, अवनीश यादव, राजेश कुमार, राजकुमार, हिरदेश कुमार, भूदेव, शिशुपाल सिंह, अवधेश कुमार, नीतेश कुमार, राजवती और करिश्मा सहित कई अन्य पदाधिकारी शामिल थे।

March 15, 2026

एटा में पुलिस ने दहेज हत्या के आरोपी को दबोचा, वैधानिक कार्रवाई जारी

एटा 15 मार्च उप्रससे। जनपद में अलीगंज पुलिस ने दहेज हत्या के एक मामले में वांछित चल रहे अभियुक्त दीपक पुत्र जनवेश को रविवार दोपहर के समय दाउदगंज मोड़ से गिरफ्तार किया।

यह गिरफ्तारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा के निर्देश पर वांछित अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई। अभियुक्त दीपक थाना अलीगंज में पंजीकृत मु0अ0सं0 37/2026, धारा 80 (2)/85 बीएनएस और 3/4 डी0पी एक्ट के तहत वांछित था।

दीपक अकबरपुर कोट, थाना अलीगंज, जनपद एटा का निवासी है। पुलिस ने गिरफ्तार अभियुक्त के खिलाफ आवश्यक वैधानिक कार्रवाई कर जेल भेज दिया।
गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक जयवीर सिंह, कांस्टेबल विनय कुमार और कांस्टेबल अमरजीत सिंह शामिल थे।

एटा में तेज हवा और बारिश से फसलों को भारी नुकसान, किसान चिंतित

एटा 15 मार्च उप्रससे। जनपद में कस्बा सहित अलीगंज क्षेत्र में हुई तेज बारिश और हवाओं के कारण किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। गेहूं की फसल गिरकर बिछ गई है, जबकि सरसों और तंबाकू की फसल पर भी इसका भारी असर पड़ा है। अचानक बदले मौसम से किसान काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं। क्षेत्र के किसानों के अनुसार तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल खेतों में गिर गई है। इस समय गेहूं की फसल पकने की स्थिति में है, ऐसे में फसल के बिछ जाने से दाना पतला होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे पैदावार में भारी कमी आ सकती है। किसानों का कहना है कि यदि मौसम इसी तरह बना रहा तो गेहूं की उपज आधी रह सकती है। वहीं सरसों की फसल भी पूरी तरह पक चुकी थी। कुछ किसानों ने सरसों की कटाई कर ली थी, जबकि कई खेतों में अभी कटाई बाकी थी। बारिश के कारण खेतों में कटी पड़ी सरसों भीग गई है, जिससे दाने खराब होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं जिन खेतों में अभी सरसों की कटाई नहीं हुई थी, वहां भी फसल गिरने से नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। सबसे अधिक नुकसान तंबाकू की फसल में बताया जा रहा है। किसानों का कहना है कि जो तंबाकू की पत्तियां पहले ही काट ली गई थीं, वे बारिश के कारण भीग गई हैं और उनका रंग बदल सकता है। इससे बाजार में उनकी कीमत आधी तक रह जाने की संभावना है। वहीं जो तंबाकू की फसल अभी खेतों में खड़ी है, उसमें भी करीब 25 प्रतिशत तक पैदावार घटने का अनुमान लगाया जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि इसी तरह लगातार बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रहा तो खेती पर पूरी तरह निर्भर किसानों के सामने बड़ी आर्थिक समस्या खड़ी हो जाएगी। किसानों ने सरकार से फसलों के नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग भी की है।

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