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Virbhadra महाशिवरात्रि पर वीरभद्र मंदिर में आस्था का सैलाब, प्राचीन मेले का शुभारंभ

February 15, 2026

Virbhadra महाशिवरात्रि पर वीरभद्र मंदिर में आस्था का सैलाब, प्राचीन मेले का शुभारंभ

Virbhadra Shiv Mandir

वीरभद्र ऋषिकेश शिव मंदिर

*उप्र समाचार सेवा (UPSS)
**दिनांक: 14 फरवरी 2026 | स्थान: वीरभद्र, ऋषिकेश (उत्तराखंड)**

ऋषिकेश स्थित पौराणिक वीरभद्र मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर लगने वाले वार्षिक मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। लगभग 1300 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर में दूर-दराज़ से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

मेले के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंजते इस आयोजन में स्थानीय लोगों के साथ-साथ अन्य जनपदों और राज्यों से आए श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं।

### प्रशासन अलर्ट, एसडीएम ने किया निरीक्षण

मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए एसडीएम ऋषिकेश ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा, यातायात, पेयजल, स्वच्छता और चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित हों।

पुलिस और प्रशासन द्वारा भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी, स्वास्थ्य शिविर और खोया-पाया केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि मेले का आयोजन शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न हो सके।

### आस्था, संस्कृति और परंपरा का संगम

वीरभद्र मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करता है। मेले में स्थानीय हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजन और ग्रामीण बाजार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

महाशिवरात्रि के अवसर पर आयोजित यह मेला देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध धार्मिक परंपरा और लोक आस्था का जीवंत उदाहरण है, जहां श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक सहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं

Posted on 15.02.2026 Sunday Time 09.30 AM Maha Shivaratri 

उत्तर प्रदेश समाचार सेवा और यूपी वेब न्यूज के सभी संवाददाताओं, पाठकों और विज्ञापनदाताओं को महाशिवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं 

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

सर्वेश कुमार सिंह 

निदेशक/संपादक

February 13, 2026

शिवरात्रि पर विशेष–सृष्टि के पालनहार हैं शिव

Barabanki Shivratri Pujan

Posted on 13.02.2026 Time 08.00 Friday, Barabanki, Shivratri, Dilip Kumar Shrivastava 
शिवरात्रि व्रतं नाम सर्व पापं प्रयाशनम्। आचाण्डाल मनुष्यापं मुक्ति प्रदायकं ।।
देवों के देव लोधेश्वर महादेव
दिलीप कुमार श्रीवास्तव
बाराबंकी । भोले भण्डारी शिव शंकर व माता पार्वती के विवाह के पीछे कई कथाएं धार्मिक ग्रंथों में पढ़ने व सुनने को मिलती है कि माँ पार्वती ने कठोर तप करके शंकर जी को प्राप्त किया था।शिवरात्रि के दिन ही भोले व पार्वती का विवाह हुआ था। उसी परम्परा को निभाते हुए हिन्दुओं द्वारा मंदिरो से भगवान शिव की बारात भव्य रूप से धूमधाम से निकाली जाती हैं। तथा धार्मिक रीति रिवाज से मंत्रोचारण के साथ शादी कराई जाती।
शिव शब्द बहुत सूक्ष्न होता है, इसके अर्थ की गरिमा इसकी गम्भीरता को प्रस्फुटित कर देती है। उसे और अधिक कल्याणकारी बना देती है। शम्भूका भावार्थ है, मंगलदायक। शंकर का तात्पय है आनन्द का स्रोत्र। यह तीनो कल्याणकारी, मंगलदायक और आनन्दधन परमात्मा की ओर इंगित करते है। भोले की इच्छा से ही रजोगुण रूपी ब्रह्मा, सत्गुण रूपी विष्णु और तमागुण रूपी रूद्र अवतरित होते है। जो कमशः सृजन, पालन और संहार का कार्य करते हैं। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। ग्रंथो के अनुसार सृष्टि के प्रारम्भ में इसी दिन मध्यरात्रि में रूद्ध के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय बेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव ताण्डव करते हुए ब्रह्माण्ड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते है। इस कारण इसे महाशिवरात्रि एवं कालरात्रि भी कहां जाता है। तीनो लोक की अपार सुन्दरी तथा शीलवती गौरा को अधीगिनी बनाने वाले शिव प्रेतो व पिशाचों से घिरे रहते है।
वैदिक ज्योतिषों के अनुसार भगवान शिव चतुर्दशी तिथि के स्वामी है, इसलिए प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि कहते है। फाल्गुन मास की चतुर्दशी महाशिवरात्रि होती है। पुराणों के अनुसार महाशिवरात्रि भगवान शिव के प्राकट्य मतान्तर से विवाहोत्सव का दिन है। शिव पुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव जी की पूजा अर्चना तथा अभिषेक अनन्त फलदायी होता है। चतुर्दशी के स्वामी शिव है. इस तिथि को रात्रि में व्रत किये जाने से इस व्रत का नाम शिवरात्रि होना सार्थक हो जाता है। यद्यपि प्रत्येक मास की कृष्ण चतुर्दशी शिवरात्रि होती है। और शिव भक्त प्रत्येक कृष्ण चतुर्दशी व्रत करते ही है, किन्तु फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी के निशीथ (अर्धरात्रि) में शिवलिंगतयोदीभूत कोटिसूर्यसमप्रभः ईशानसंहिता के इस वाक्य के अनुसार जयोतिलिंग का प्रादुभाव हुआ था. इस कारण महाशिवरात्रि मानी जाती है।
सिद्वान्त रूप से आज के सूर्योदय से कल के सूर्योदय तक रहने वाली चतुर्दशी शुद्ध और अन्य विद्वा मानी गई है। उसमें भी प्रदोष (रात्रि का आरम्भ) और निशीथ (अर्धरात्रि) की चतुर्दशी ग्रह्य होती है। अर्धरात्रि की पूजा के लिए स्कंदपुराण में लिखा है कि ‘फाल्गुन कृष्ण 14 को निशिघ्रमन्ति भूतानि शक्तयः शूलभूद् यतः। अतस्तस्यां चतुर्दशी सत्यां तप्पूजनं भवत्।। अर्थात रात्रि के समय भूत, प्रेत, पिशाच जैसी शक्तियां और स्वयं शिव शंकर भ्रमण करते है, अतः उस समय इनका पूजन करने से मनुष्य के पाप नष्ट हो जाते है। यदि (शिवरात्रि) त्रिस्पृशा (12-14-30 इन तीनो के स्पर्श की हो तो अतिधिक उत्तम होती है। पारण के लिए व्रतान्ते पारणम् तिथ्यन्ते पारणम् और तिथिमान्ते च पारणम् आदि वाक्यों के अनुसार व्रत की समाप्ति में पारण किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार शिवरात्रि के दिन ही शिव व पार्वती का विवाह हुआ था यह दिवस परमात्मा के सृस्टि
पर अवतरित होने की स्मृति दिलाता है। जो हमे ज्ञान का प्रकाश विखेर का अज्ञानता ये दूर हटाता है। शिव का अर्थ है, कल्याण। भोले भण्डारी शिव सबका कल्याण करने वाले देवो के देव महादेव है। महाशिवरात्रि पर्व पर सरल उपाय करके भी शिव को प्रसन्न किया जा सकता है। ज्योतिष गणना के अनुसार चतुर्दशी तिथि को चन्द्रमा अपनी क्षीण अवस्था में पहुँच जाता है, जिस कारण बलहीन चन्द्रमा सृष्टि को उर्जा देने में असमर्थ हो जाता है। चन्द्रमा का सीधा संबन्ध संताप प्राणी को घेर लेते है, तथा विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती। जिसके कारण कष्टो का सामना करना पड़ता है। चन्द्रमा शिव मस्तकपर सुशोभित है। अतः चन्द्रदेव की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की शरण में जाने से सारे कष्ट दूर हो जाते है। महाशिवरात्रि तिथि शिव जी को सबसे अधिक प्रिय होती है। अपनी आत्मा को शुद्ध करने के लिए शिवरात्रि व्रत ही महाव्रत कहां जाता है। इस व्रत को करने से सभी पापो का नाश होता है, साथ ही हिंसक प्रवृति बदल जाती है, निरीह जीवों पर दया भाव उत्पन्न हो जाता। इंसान संहिता में इसके महत्व का उल्लेख है।
बाराबंकी से करीब 35 कि०मी दूर स्थित लोधेश्वर महादेव Lodheshwer Mahdev Mandir Barabanki का मंदिर है, जो <तहसील रामनगर से मात्र 05 किमी दूर पर स्थित हैं। जहाँ महाशिवरात्रि के दिन लाखों शिव भक्त कांवर लेकर दर्शन करने आते हैं। महाशिवरात्रि से 15 दिन पूर्व ही हरिद्वार, बितूर, कानपुर, से गंगाजल लेकर पैदल ही लोधेश्वर पहुँचते है। इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश के साथ ही उत्तराखण्ड़, बिहार, मध्यप्रदेश, तथा हिमाचल प्रदेश से भी शिव भक्त अपने कंधो पर कांवर लेकर पैदल ही महादेवा पहुँचते है।

ध्यान, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी में प्रवाहित हुआ रामचन्द्र मिशन आश्रम

शाहजहांपुर में बसंत उत्सव–2026 का शुभारंभ

Dada Ji D Patel, Ramchandra Mission

ध्यान करते दादा जी

Posted on 13.02.2026 Time 06.29 Friday, Shahjahanpur, Ramchandra Mission, Meditation, DADA ji, Dhyan Sadhana

शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और मार्गदर्शन में राम चन्द्र मिशन आश्रम की पुण्य धरा पर आज बीस दिवसीय बसंत उत्सव–2026 का शुभारंभ पूर्ण दिव्यता, भव्यता और आध्यात्मिक उल्लास के अनुपम वातावरण में हुआ। प्रातःकालीन साधना से प्रारंभ हुआ यह महोत्सव मानो साधकों की चेतना को नवप्रकाश से आलोकित करने का विराट यज्ञ बन गया। देश–विदेश से आये हजारों अभ्यासियों ने एकात्म भाव से सामूहिक ध्यान-साधना कर मानव कल्याण और विश्व शांति के लिए मंगल कामना कीं।

Ramchandra Mission Shahjahanpur

Ramchandra मिशन

उत्सव का शुभारंभ सुबह के ध्यान सत्र के साथ हुआ, जिसमें वातावरण शांति, श्रद्धा और साधना की दिव्य तरंगों से गुंजायमान हो उठा। इस पावन अवसर पर श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के वैश्विक मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ ने अपने प्रेरक संदेश में बसंत पंचमी के आध्यात्मिक रहस्य को उद्घाटित करते हुए कहा कि बसंत केवल ऋतु परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि चेतना के नवीकरण का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि सहज मार्ग के साधकों के लिए बसंत पंचमी केवल प्राकृतिक उल्लास का पर्व नहीं, बल्कि एक दिव्य स्मृति और चेतना का उत्सव है। इसी पावन तिथि को दिव्य प्रकाश ने पृथ्वी पर अवतरण का संकल्प लिया था। वर्ष 1873 की बसंत पंचमी को फतेहगढ़ में एक ऐसी महान आत्मा का अवतरण हुआ, जिसने मानवता की आध्यात्मिक यात्रा को नवीन दिशा प्रदान की। वही महापुरुष आगे चलकर ‘लालाजी महाराज’ के नाम से विख्यात हुए। संसार उस समय उनके महत्त्व से अनभिज्ञ था, क्योंकि महान आत्माएं प्रायः बिना किसी उद्घोष के सामान्य मानव रूप में प्रकट होती हैं। परंतु प्रकृति ने उस दिवस मानव जाति को मौन वचन दिया था कि चेतना का पुनरुत्थान एक नई ज्योति के रूप में प्रकट होगा।
दाजी ने कहा कि लालाजी महाराज के माध्यम से मानवता को एक विस्मृत आध्यात्मिक धरोहर प्राणाहुति का पवित्र विज्ञान पुनः प्राप्त हुआ, जिसे ‘प्राणस्य प्राणः’, अर्थात जीवन के मूल तत्व का संचार कहा गया है। यह सूक्ष्म, गूढ़ और दिव्य विद्या मानव अंतःकरण में ईश्वरीय चेतना के संचार का माध्यम बनी। उन्होंने उल्लेख किया कि यह परंपरा सर्वप्रथम अयोध्या में भगवान श्रीरामचन्द्र से तिहत्तर पीढ़ी पूर्व पूज्य ऋषभदेवजी महाराज द्वारा प्रतिपादित की गई थी।


पूज्य दाजी ने मिशन के अभ्यासियों से आह्वान किया कि वे इस बसंत उत्सव को केवल एक पर्व के रूप में न देखें, बल्कि इसे आत्म-परिष्कार, अंतर्मुखी साधना और चेतना के उत्कर्ष का अवसर बनाएं। उन्होंने कहा कि जैसे बसंत ऋतु में प्रकृति अपने पुराने आवरण को त्यागकर नव सृजन की ओर अग्रसर होती है, वैसे ही अभ्यासी को भी अपने भीतर की जड़ताओं को त्यागकर प्रेम, करुणा और शांति के पुष्प खिलाने चाहिए।
बसंत उत्सव में संपूर्ण आश्रम परिसर में श्रद्धा, साधना और शांति का दिव्य वातावरण दिखाई दिया ।यह उत्सव आने वाले बीस दिनों तक साधना, सेवा और सत्संग के माध्यम से मानव चेतना को उन्नत करने का अनुपम अवसर प्रदान करेगा।
सायंकाल में भी ध्यान सत्र में दाजी ने ध्यान कराया।
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February 12, 2026

Shahjahanpur साधना की सुवास से दमका Ramchandra Mission रामचंद्र मिशन आश्रम

ध्यान, प्रेम और करुणा की त्रिवेणी में प्रवाहित हुआ बसंतोत्सव

शाहजहांपुर आश्रम पहुंचने पर दाजी का भव्य स्वागत

Ramchandra Mission Shahjahanpur

Posted on 12.02.2026 Time 04.05 PM Thursday 
(संजीव गुप्ता उ. प.समाचार शाहजहांपुर से)
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और करुणामय मार्गदर्शन में आयोजित बीस दिवसीय बसंत उत्सव का शुभारंभ कल गुरुवार आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो रहा है।
पूज्य दाजी का आज दोपहर करीब 12 बजे शाहजहांपुर आश्रम आगमन हुआ।
यहां पहुंचने पर बाबूजी महाराज के सुपुत्र सर्वेश चंद्रा, मिशन के संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल,ए के गर्ग, उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, माधोगोपाल अग्रवाल, राजगोपाल अग्रवाल , श्री गोपाल अग्रवाल, अमिता चंद्रा, रामचंद्र मिशन आश्रम में बसंत उत्सव का शुभारंभ आज से
शाहजहांपुर आश्रम पहुंचने पर दाजी का भव्य स्वागत
शाहजहांपुर। श्री राम चन्द्र मिशन के अध्यक्ष एवं हार्टफुलनेस मेडीटेशन के मार्गदर्शक पूज्य गुरुदेव कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ के सान्निध्य और करुणामय मार्गदर्शन में आयोजित बीस दिवसीय बसंत उत्सव का शुभारंभ कल गुरुवार आध्यात्मिक उल्लास के साथ हो रहा है।
पूज्य दाजी का आज दोपहर करीब 12 बजे शाहजहांपुर आश्रम आगमन हुआ।
यहां पहुंचने पर बाबूजी महाराज के सुपुत्र सर्वेश चंद्रा, मिशन के संयुक्त सचिव अर्जुन अग्रवाल,ए के गर्ग, उत्तर प्रदेश प्रभारी अनुपम अग्रवाल, माधोगोपाल अग्रवाल, राजगोपाल अग्रवाल , श्री गोपाल अग्रवाल, अमिता चंद्रा, बाबूजी के प्रपौत्र विनीत चंद्रा सुयश सिन्हा, सुमन अग्रवाल, ममता अग्रवाल, सौमेंद्र त्यागी, सहित सैकड़ों अभ्यासियों और छोटे छोटे बच्चों ने फूल भेंटकर ने उनका भव्य स्वागत किया ।
पूज्य दाजी के आगमन से आश्रम परिसर मानो साधना की सुवास और चेतना की उजास से आलोकित हो उठा। वातावरण में शांति, प्रेम और आत्मिक ऊर्जा का ऐसा संगम दृष्टिगोचर हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को भीतर तक स्पंदित कर दिया।
यहां पहुंचने के बाद दाजी पूरे आश्रम का निरीक्षण किया।
उत्सव में सहभागिता हेतु देश के विभिन्न प्रांतों सहित विदेशों से भी हजारों अभ्यासी शाहजहांपुर आश्रम पहुँच रहे हैं।
शाम को पूज्य दाजी ने उपस्थितअभ्यासियों को ध्यान कराया।

रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन पर दिन भर अभ्यासियों का तांता लगा
शाहजहांपुर । श्री राम चन्द्र मिशन आश्रम में मनाये जा रहे बसंत उत्सव के लिए देश विदेश से अभ्यासियों के आने का सिलसिला मंगलवार रात से ही शुरू हो गया जो बुधवार देर रात तक जारी रहा। रेलवे और बस स्टेशन से मिशन के स्वंय सेवकों ने अभ्यासियों को बस द्वारा आश्रम पहुंचाया।
#daaji #heartfulness #meditation #kanhashantivanam
@everyone

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