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पीएम मोदी ने 56वें ​​अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीतने पर भारतीय दल को बधाई दी

July 13, 2026

पीएम मोदी ने 56वें ​​अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीतने पर भारतीय दल को बधाई दी

 

PM Narendra Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

Posted Date:- Jul 13, 2026 News PIB

नई दिल्ली, 13 जुलाई 2026, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कोलंबिया के बुकारामंगा में आयोजित 56वें ​​अंतरराष्‍ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (आईपीएचओ) 2026 International Physics Olympiad 2026 में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय दल के कनिष्क जैन, रिद्धेश अनंत बेंडाले, ऋषित गर्ग, श्रेष्ठ सुरैया और स्वरित जोशी को बधाई दी है। #Kanish Jain #Ridhhesh Anant Bendale #Rishit Garg #Shresth Surayia #Swarit Joshi

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी यह उपलब्धि देश की युवा शक्ति की असीमित क्षमता और विज्ञान एवं अनुसंधान के प्रति उनके जुनून का एक और उदाहरण है।

श्री मोदी ने यह भी उल्लेख किया कि पिछले एक दशक में भारतीय छात्रों ने इस मंच के विभिन्न संस्करणों में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है।

प्रधानमंत्री ने X पर लिखा:

“हमारे युवाओं का शानदार प्रदर्शन!”

कोलंबिया के बुकारामंगा में आयोजित 56वें ​​अंतरराष्ट्रीय भौतिकी ओलंपियाड (आईपीएचओ) 2026 में स्वर्ण पदक जीतने के लिए कनिष्क जैन, रिद्धेश अनंत बेंडाले, ऋषित गर्ग, श्रेष्ठ सुरैया और स्वरित जोशी के भारतीय दल को हार्दिक बधाई।

उनकी यह उपलब्धि हमारे युवा शक्ति की असीमित क्षमता और विज्ञान एवं अनुसंधान के प्रति उनके जुनून का एक और उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह तथ्य भी उतना ही सराहनीय है कि पिछले दशक में हमारे छात्रों ने इस मंच के विभिन्न संस्करणों में असाधारण रूप से अच्छा प्रदर्शन किया है।

An outstanding performance by our youngsters!

Congratulations to the Indian contingent of Kanishk Jain, Riddhesh Anant Bendale, Rishit Garg, Shresth Suraiya and Svarit Joshi for winning Gold Medals at the 56th International Physics Olympiad (IPhO) 2026 held in Bucaramanga,… pic.twitter.com/oiAVLy110P

— Narendra Modi (@narendramodi) July 13, 2026

दागी होती वर्दी

Editorial

Editorial 13.07.2026 by Sarvesh Kumar Singh Editor UP Web News

खाकी की जिम्मेदारी सुरक्षा, संरक्षण और जनसहयोग की है। लेकिन हाल के दिनों में खाकी को दागी करने वाले तत्व इसमें घुस गए हैं। इससे इसकी पहचान भय पैदा करने वाले समूह की बन रही है। हालांकि अनेक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करने वाले भी पुलिसकर्मी हैं। लेकिन कुछ लोग अपने कारनामों से इस बल को बदनाम कर रहे हैं। ताजा उदाहरण आगरा और झांसी के हैं, जहां वर्दी दागी हो गई। झांसी जहां पुलिस वर्दी पहने जवान लुटेरे बन गए, वहीं आगरा में रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने अनुशासनहीनता और अपराधी प्रवृति का परिचय देकर अपने बल को शर्मसार कर दिया।

गुरुवार को झांसी में 6 लोगों ने सूरत के व्यवसाई जितेंद्र पटेल के मुंशी किशन पांचाल को लूट लिया। उनसे 24 लाख 90 हजार रुपए लूटे गए। किशन पांचाल व्यवसाई की सूखे मेवे की बिक्री के पैसों की उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में वसूली करते हैं। मामले की जांच में सामने आया कि लूटपाट करने वाले जालौन पुलिस लाइन में तैनात 3 सिपाही हैं। तीनों को हिरासत में लिया गया और एसपी जालौन ने तत्काल निलंबित कर दिया। इनके तीन अन्य साथियों की तलाश जारी है।

उधर रविवार को सुबह आगरा कैंट स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने स्टेशन पर उप स्टेशन अधीक्षक को पीट दिया। उन्हें जमीन पर घसीटते हुए आरपीएफ पोस्ट में ले गए। स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर ने एक महिला यात्री की सुविधा के लिए अमृतसर एक्सप्रेस को स्टार्ट होने के बाद रुकवा दिया था। इससे नाराज होकर आरपीएफ जवानों ने महिला यात्री पर पहले चैन पुलिंग का आरोप लगाया और 1000 रुपए वसूल लिए। फिर स्टेशन उप अधीक्षक से अभद्रता की। उनके ये कहने पर कि ट्रेन उन्होंने यात्री की मदद के लिए रुकवाई थी। इससे नाराज सिपाहियों ने पहले स्टेशन पर ही नरेंद्र सिंह चाहर को पिता फिर घसीटते हुए अपनी पोस्ट में ले गए। वहां भी उनको पिता गया। इस पूरी घटना का यात्रियों ने वीडियो बना लिया और वायरल कर दिया। इसके बाद तत्काल कारवाई हुई और दो सहायक उप निरीक्षक और दो कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ जीआरपी थाने ने एफआईआर भी दर्ज कर ली गई है। इन दोनों घटनाओं से पुलिस और आरपीएफ की बहुत बदनामी हुई है। लोगों में पुलिस बल के प्रति विश्वास कम हो रहा है। बल्कि भय बढ़ रहा है। आम आदमी यह सोचने पर मजबूर है कि खाकी पहने लोग उनकी सुरक्षा के लिए हैं या उत्पीड़न के लिए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को जवानों की अनुशासनतीनता की प्रवृत्ति और आपराधिक मानसिकता पर अंकुश लगाने के लिए उपाय खोजने होंगे। इन दोनों मामलों में कड़ी करवाई भी होनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

July 12, 2026

अमेरिकी हमलों के विरोध में ईरान ने हार्मुज बंद किया

Posted on 12.07.2026 Time 11.22 PM, Tehran, Hormuj strait

ईरान के 140 सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी हमले

तेहरान, 12 जुलाई 2026, अमरीका ने आज सुबह ईरान पर फिर से हवाई हमले किए हैं। ये हमले ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक पोत पर हमला किए जाने के बाद किए गए। ईरान के हमले में पोत में आग लग गई थी और चालक दल को उसे छोड़ना पड़ा था।

अमरीकी सेंट्रल कमान ने बताया कि हमलों में ईरान के लगभग 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें मिसाइल, ड्रोन और संचार ढांचा शामिल हैं।

जवाबी कार्रवाई में ईरान ने बहरीन, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए। कतर और कुवैत ने कहा कि उन्होंने आने वाली मिसाइलों और ड्रोन को बीच में ही मार गिराया, जबकि बहरीन ने भी मिसाइल अलर्ट जारी किया। ईरान ने जॉर्डन स्थित एक अमरीकी सैन्य अड्डे पर भी हमला करने का दावा किया है।

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अगली सूचना तक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है और चेतावनी दी है कि यदि अमरीकी हमले जारी रहे तो वह भी जवाबी कार्रवाई करेगा।

उप्र में एक दिन में 35 करोड़ पौधे रोपे गए

Posted on 12.07.2026 Time 11.12 PM Lucknow, Yogi Adityanath

लखनऊ, 12 जुलाई 2026, देशभर में आज  व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से राज्यव्यापी वृक्षारोपण महा यज्ञ का शुभारंभ किया । उन्‍होंने लिंक एक्सप्रेसवे के पास पवित्र त्रिवेणी -नीम, पीपल और बरगद के वृक्षों का  रोपण किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ताल रिंग रोड के किनारे मौलश्री का एक पौधा भी लगाया। राज्य ने आज 35 करोड़ 27 लाख से अधिक पौधे लगाकर इतिहास रच दिया। “एक पेड़ मां के नाम” थीम के तहत, शाम 6 बजकर 12 मिनट तक राज्य भर में कुल 35 करोड 27 लाख नवासी हजार 926 पौधे लगाए गए। यह सरकार के 35 करोड़ के लक्ष्य से अधिक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस उपलब्धि के लिए राज्य के लोगों को बधाई दी। अभियान के तहत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जन भवन परिसर में सफेद चंदन का एक पौधा लगाया।

बोलने से पहले सोचना चाहिए, और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए’ – यह संस्कार केवल पुस्तकालय ही दे सकता है: अमित शाह

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण पुस्तकालय का लोकार्पण किया

किसी देश का भविष्य कृषि, बाज़ार या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में जुटने वाली युवाओं की भीड़ से तय होता है

राष्ट्र निर्माण और उसे वैभव दिलाने वाली हर गतिविधि का मूल है ज्ञान और विवेक, और यह केवल पुस्तकालय ही दे सकता है

गृह मंत्री जी ने युवाओं से आह्वान किया कि – एक बार पुस्तकालय से जुड़िए, पढ़ने की आदत बनते ही अच्छे-बुरे का विवेक स्वयं जाग जाएगा

गांधीनगर के प्रत्येक गाँव में पुस्तकालय खोल उन्हें बड़े पुस्तकालय से लिंक किया गया, अब गाँव का बच्चा पुस्तकालय में जिस पुस्तक का नाम लिखता है, वह पुस्तक उसी गाँव में उसे उपलब्ध हो जाती है

Posted Date:- Jul 11, 2026 पीआईबी

नई दिल्ली 11 जुलाई 2026, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का लोकार्पण किया। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC) के अध्यक्ष केशव चंद्र सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि किसी देश का भविष्य कृषि, बाज़ार या उद्योग से नहीं, बल्कि उसके पुस्तकालयों में जुटने वाली युवाओं की भीड़ से तय होता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र को आगे बढ़ाने वाली, राष्ट्र-निर्माण और राष्ट्र को वैभव दिलाने वाली सारी गतिविधियों का मूल ज्ञान एवं विवेक में होता है। यह ज्ञान सिर्फ एक पुस्तकालय ही दे सकता है।

श्री शाह ने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे एक बार पुस्तकालय से अवश्य जुड़ें। पढ़ने की आदत बनते ही अच्छे-बुरे का विवेक स्वयं जाग जाएगा। गृह मंत्री ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिस छोटे से कस्बे में वह पैदा हुए और उनका बचपन बीता, वहाँ एक समृद्ध पुस्तकालय था। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय के माध्यम से कब उनकी अध्ययन यात्रा वेदों और उपनिषदों तक पहुंच गई, उन्हें पता नहीं चला।

 

 

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज सभागार में उन्होंने एक वाक्य लिखा देखा कि “बोलने से पहले सोचना चाहिए, क्योंकि शब्द कभी वापस नहीं आते।” उन्होंने कहा कि कोई भी वाक्य बोलने से पहले सोचना चाहिए और सोचने से पहले पढ़ना चाहिए कि क्या सोचना है, और यह संस्कार सिर्फ पुस्तकालय से ही मिल सकता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि पुस्तकालय का उनके जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र में उन्होंने एक छोटा सा प्रयोग किया है। उनके संसदीय क्षेत्र के लगभग हर गाँव में एक पुस्तकालय खोला गया है, जिनमें लगभग 3-4 हजार पुस्तकें हैं। इन पुस्तकालयों को मुख्य पुस्तकालय से लिंक किया गया है, जिसमें सवा लाख पुस्तकें हैं। इसके अलावा, चार मोबाइल वैन भी चलाई गई हैं। उन्होंने कहा कि गांवों के बच्चे पुस्तकालय में अपनी पसंद की पुस्तक का नाम लिख कर उसे मँगवाने का अनुरोध करते हैं, और हर शुक्रवार के दिन बच्चों को उनकी पसंद की पुस्तक गांव में ही उपलब्ध कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि हमने हर पुस्तकालय को स्कूलों से जोड़ने का प्रयास किया है।

गृह मंत्री ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम से समर्पित यह पुस्तकालय युवाओं के ज्ञान और चिंतन का नया केंद्र बनेगा। उन्होंने दिल्ली सरकार से आग्रह किया कि वह दिल्ली के सभी पुस्तकालयों को आपस में लिंक करें और स्कूलों को इनसे जोड़ने के लिए एक ठोस योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि एक कार्ययोजना बनाकर पुस्तक प्रेमियों को पुस्तकालयों से जोड़ने का प्रयास होना चाहिए। उन्होंने जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय के कर्मियों से भी आग्रह किया कि वे नई दिल्ली के आसपास के 10 विधानसभा क्षेत्रों के सभी स्कूलों से संपर्क कर युवाओं को पुस्तकालय से जोड़ें और उन्हें यहाँ आने के लिए प्रेरित करें। एक बार जब युवा पढ़ने की आदत बना लेंगे, तो वह स्वयं आगे बढ़ेंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान सागर में गोता लगाने का साहस देता है और सागर के नीचे पड़े मोतियों व रत्नों को चुनकर ऊपर लाने की प्रेरणा भी देता है। ज्ञान सागर के गोते से निकले ये मोती और रत्न ही व्यक्तित्व को निखारते हैं, देश को आगे बढ़ाते हैं, देश को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाते हैं, देश को संस्कारित, शिक्षित और सुरक्षित बनाते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्यकार रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी को पढ़े बिना इस देश की आत्मा, संस्कृति, स्वाभिमान और संघर्ष को नहीं जाना जा सकता, और पुस्तकालय इसमें सबसे मज़बूत ज़रिया बन सकता है।

गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय भवन में 30,000 से अधिक पुस्तकों का संग्रह है। यहां रिसर्च करने वालों के लिए अलग व्यवस्था है, बहुउद्देशीय आधुनिक सभागार है, आधुनिक रीडिंग एरिया है, किड्स जोन है, रिसर्च सेंटर है और ई-लाइब्रेरी है, जिसमें 1 करोड़ पुस्तकें ऑनलाइन पढ़ी जा सकती हैं। वाई-फाई फ्री है। कई मॉनिटर लगाए गए हैं, जहां पुस्तकालय में अध्ययन के लिए आने वाले लोग नोट्स ले सकते हैं, डाउनलोड कर सकते हैं और अपनी विचार प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यहाँ आरएफआईडी आधारित अत्याधुनिक पुस्तक प्रबंधन प्रणाली लागू है। ओपेक कैटलॉग के माध्यम से नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया से भी जुड़ाव होगा। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय में युवा अपनी रुचि के विषय चुनें और उन महानुभावों को पढ़ें, जिन्होंने अपना पूरा जीवन उन विषयों पर लगाया है। उन्होंने कहा कि इस पुस्तकालय में 1 करोड़ ई-बुक्स उपलब्ध हैं। यह दिल्ली के युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है कि उन्हें मुफ़्त में 1 करोड़ ई-बुक्स और 32,000 भौतिक पुस्तकों का एक्सेस होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि जयप्रकाश नारायण (जेपी) एक ऐसे विचारक और क्रांतिकारी थे, जिन्होंने जीवन में अनेक विचारधाराओं को अपनाया और हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने का प्रयास किया। वे भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख सेनानी थे। आजादी के बाद उन्होंने सरकार में शामिल होने से इनकार कर दिया। समाजवाद अपनाया, समाजवादी कांग्रेस बनाई, विनोबा भावे के भूदान आंदोलन और सर्वोदय विचारधारा को गांव-गांव तक फैलाया। चंबल क्षेत्र में 250 से अधिक डाकुओं को सरेंडर कराया और चार राज्यों के 22 जिलों में डकैती की समस्या समाप्त की। श्री शाह ने कहा कि इमरजेंसी के समय जेपी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री का डटकर विरोध किया, बिहार-गुजरात में छात्र आंदोलनों का नेतृत्व किया और ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान दिया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान जेपी, अटल जी, अडवाणी जी सहित हजारों नेताओं को जेल में डाला गया। तब दिनकर जी का नारा “अंधेरे में एक प्रकाश, जयप्रकाश” पूरे देश में गूंजा। 1977 के चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री रायबरेली से हारीं और पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। उन्होंने कहा कि जेपी ने पूरी जिंदगी लोकतंत्र की रक्षा की।

गृह मंत्री ने दिल्ली के सभी किशोरों और युवाओं से अपील की कि वे ज्ञान की पिपासा तृप्त करने के माध्यम के रूप में शुरू किए गए जयप्रकाश नारायण सार्वजनिक पुस्तकालय का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने युवाओं से कहा कि वे पुस्तकालय का लाभ उठाकर अपने जीवन को निखारें और देश को वर्ष 2047 तक आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें।

 

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