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भारतीय न्याय शास्त्र और यूजीसी नियमों पर रोक

January 31, 2026

भारतीय न्याय शास्त्र और यूजीसी नियमों पर रोक

प्राचीन न्याय शास्त्र के आलोक में सुप्रीम कोर्ट Supreme Court द्वारा यूजीसी पर रोक का औचित्य

Dr Chandra Prakash Sharma, Milak Rampur

डा चंद्रप्रकाश शर्मा

Article Posted & Published on : 31.01.2026, Saturday , Time: 10.11 AM By Chandra Prakash Sharma

सर्वोच्च न्यायालय Supreme Court द्वारा 29 जनवरी 2026 को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग UGC के  “समता विनियम 2026” पर रोक यूजीसी के उन नियमों पर लगाई गई है जो उच्च शिक्षा संस्थानों Higher education Institution में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के उद्देश्य बनाए गए थे।  उन्हें अस्पष्ट , दुरुपयोग की संभावना वाला और विभाजनकारी माना गया। 13 जनवरी 2026 को यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशंस 2026 Equity regulations को अधिसूचित किया गया । यह नियम उच्च शिक्षा में समानता को बढ़ावा देने के लिए था जिसमें इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर्स और कैंपस स्तरीय समितियां का गठन शामिल था।  लेकिन विवादास्पद रेगुलेशन 3(सी) ने जाति आधारित भेदभाव को केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग तक केंद्रित कर दिया और सामान्य वर्ग को इससे बाहर रखा गया जिसके कारण पूरे देश में अनेक प्रदर्शन , राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और याचिकाएं दाखिल हुई जिसके फल स्वरुप मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत Chief Justice of India Justice Surykant और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची Justice Joymalya Bagchi की पीठ ने नियमों को पूर्णतः अस्पष्ट और दुरुपयोग की संभावना वाला बताया।साथ ही पुराने 2012 नियमों को जारी रखने का आदेश दिया।

सर्वोच्च न्यायालय का स्थगन आदेश प्राचीन न्यायशास्त्र के सिद्धांतों पर कितना खरा है, इसकी समालोचना व विश्लेषण समय की आवश्यकता है। प्राचीन भारतीय न्यायशास्त्र का मूल Vedas वेदों, Upnishad उपनिषदों और Dharm Sutra धर्मसूत्रों में सन्निहित है जिसका व्यावहारिक रूप Smritiya स्मृतियों में दृष्टिगोचर होता है। लगभग 200 ईसा पूर्व की Manu Smrati मनुस्मृति जो राजनीतिक रूप से काफी विवादित है, न्याय को धर्म का प्रतिबिंब मानती है जबकि Yagvalkya Smrati याज्ञवल्क्य स्मृति अधिक वैज्ञानिक और व्यावहारिक है क्योंकि यह व्यवहार अर्थात कानून, आचार अर्थात नैतिकता और प्रायश्चित यानी दंड के प्रावधानों से सम्प्रक्त है। लगभग 300 ईसा पश्चात की Narad Smrati नारद स्मृति विशेष रूप से फॉरेंसिक कानून पर आधारित है जिसमें अदालतों, गवाहों और दंड की प्रक्रिया का वर्णन है। मनुस्मृति के अध्याय 8 में राजा को न्याय करते समय पक्षपात रहित होना चाहिए,” राजा न्याय में पक्षपात न करें चाहे वह मित्र हो या शत्रु” यहां न्याय को धर्म रक्षक माना गया है। नारद स्मृति पूरी तरह कानूनी है जिसमें 18 शीर्षकों में न्याय प्रक्रिया का वर्णन है जिसमें झूठी शिकायतों के लिए दंड का प्रावधान है। प्राचीन शास्त्रों में न्याय के सिद्धांतों में,एक स्पष्टता-कानून अस्पष्ट न हो, दूसरी निष्पक्षता- सबके लिए समान, तीसरा सामाजिक सद्भाव- कानून समाज को एकजुट रखने वाले हों और चौथा राज धर्म- न्यायाधीश निडर और निष्पक्षहो, का समावेश था। सुप्रीम कोर्ट का स्थगनादेश प्राचीन सिद्धांतों के भी पूर्णता अनुरूप है। प्राचीन न्याय शास्त्रों के प्रथम सिद्धांत स्पष्टता के दृष्टिगत मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य में ही अस्पष्ट कानून को दुरुपयोग का माध्यम माना गया है यूजीसी नियमों में रेगुलेशन 3(सी) को कोर्ट ने पूर्णता “वाग” बताया जो झूठी शिकायतों को बढ़ावा दे सकता है। नारद स्मृति में झूठी शिकायतों के लिए दंड का प्रावधान है जो यहां अनुपस्थित था।न्यायालय ने कहा कि ऐसे नियम व्यक्तिगत बदले की भावना से प्रयुक्त हो सकते हैं जो प्राचीन शास्त्रों के अनुसार न्याय की आत्मा के विरुद्ध है। यूजीसी का नियम प्राचीन न्याय शास्त्रों के द्वितीय निष्पक्षता और समानता के सिद्धांत के विपरीत है।कोर्ट ने भी अनुच्छेद 14 का उल्लेख करते हुए कहा की यह नियम केवल कुछ वर्गों को सुरक्षा देता हैं तथा सामान्य वर्ग को बाहर रखकर समानता के नियम का उल्लंघन करता है जो भेदभावपूर्ण है और समाज को विभाजित करने वाला है जबकि मनुस्मृति के अध्याय 8 के श्लोक 124 में न्याय में सबके लिए समान दंड का प्रावधान है। नारद स्मृति के अनुसार यह कानून की विफलता है। प्राचीन शास्त्रों ने सामाजिक सद्भाव व एकता को न्याय का तीसरा प्रमुख सिद्धांत माना है जो मुख्य न्यायाधीश के कथन में ध्वनित होता है कि 75 वर्षों की स्वतंत्रता के बाद भी ऐसे नियम समाज को पीछे धकेलते हैं क्योंकि इन नियमों के बाद देश में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए और लोगों में कटुता की भावना दृष्टिगोचर हुई। मुख्य न्यायाधीश का वक्तव्य याज्ञवल्क्य के उदार दृष्टिकोण से मेल खाता है। न्यायालय ने अनुच्छेद 142 (Article 142) का उपयोग कर अंतिम आदेश दिया जो प्राचीन राजधर्म से मेल खाता है जहां राजा निडर होकर न्याय करता था क्योंकि मनुस्मृति के अनुसार “राजा बिना भय या पक्षपात के निर्णय ले।” कोर्ट ने पुराने 2012 के नियमों को जारी रखा जो स्पष्ट और निष्पक्ष हैं, यह प्राचीन शास्त्रों की परंपरा का भी पालन है। भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा यूजीसी नियमों पर लगाई गई रोक वर्तमान विधि नियमों के साथ प्राचीन न्याय शास्त्रों की दृष्टि से भी पूर्णता औचित्य पूर्ण है क्योंकि यह स्पष्टतः,निष्पक्षता और सामाजिक एकता के सिद्धांतों पर आधारित है जिसका मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य,नारद स्मृति में भी उल्लेख है। इससे स्पष्ट होता है कि हमें नियम बनाते समय प्राचीन सिद्धांतों का भी अवलोकन कर उनसे भी प्रेरणा लेनी चाहिए ताकि नियम अधिक स्पष्ट ,प्रभावी और सर्वमान्य बन सकें। लेखक: डॉ.चन्द्रप्रकाश शर्मा,पूर्व सलाहकार हिन्दी, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार निवास -नसीराबाद,मिलक, रामपुर (उ.प्र.)-243701 मोबाइल -8273463656

January 30, 2026

एटा में अलंकार अग्निहोत्री का न्यायालय परिसर में स्वागत

एटा 30 जनवरी उप्रससे। जनपद न्यायालय परिसर में बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार का शुक्रवार को अधिवक्ता श्यामवीर सिंह सोलंकी के चेंबर पर एक जनसमूह द्वारा भव्य स्वागत किया गया। यह स्वागत उनके द्वारा यूजीसी (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन) की नीतियों के विरोध में दिए गए इस्तीफे तथा सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्देशों के पश्चात हुआ।

अग्निहोत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उनका इस्तीफा एक प्रतीकात्मक कदम था और यह लड़ाई अभी जारी रहेगी। उन्होंने कहा, “अभी लड़ाई बहुत है आगे और लड़नी है, हम सबको तैयार रहना है।” उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुए उस दिशा में काम करने का आह्वान किया जिससे शैक्षणिक संस्थानों में समानता और न्याय सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर उपस्थित समर्थकों ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर खुशी जाहिर की और मीडिया कर्मियों का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने इस मुद्दे को व्यापक पहचान दिलाई।
स्वागत करने वालो में ठाकुर अनिल सोलंकी जिला अध्यक्ष भारतीय मीडिया फाउंडेशन नेशनल एटा, अशोक सिकरवार एडवोकेट, श्याम बीर सिंह सोलंकी एडवोकेट, वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञानेंद्र गौतम, वरिष्ठ अधिवक्ता निशकांत शर्मा एडवोकेट, मनोज पचोरी एडवोकेट, राजाराम यादव एडवोकेट, श्री मती ज्योति सोलंकी एडवोकेट, दीपक शर्मा एडवोकेट, सौरभ चौहान एडवोकेट, जसवीर सिंह एडवोकेट, राजेश मिश्रा एडवोकेट, राजेश सोलंकी एडवोकेट, राजीव सोलंकी किसान नेता आदि अधिवक्ताओं ने स्वागत किया।

पूर्वोत्तर में धर्मांतरण रोका जाए: स्वामी यतींद्रानंद गिरि

Swami Yatindranand Giri meet to Himant Vishva Sharma, Chief Minister Assam

असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा से मिले जीवनदीप आश्रम रुड़की के वरिष्ठ महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरि

गोहाटी (असम), 30 जनवरी 2026, वरिष्ठ महामंडलेश्वर जीवनदीप आश्रम रूड़की के पीठाधीश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरि जी महाराज ने पूर्वोत्तर भारत का प्रवास करते समय आज असम के मुख्यमंत्री हेमन्त विश्व शर्मा तथा असम के राज्यपाल लक्ष्मणप्रसाद आचार्य से भेंट की तथा
असम राज्य में गाय माता के संवर्धन एवं गौरक्षा हेतु गोशालाओं को अनुदान देने का प्रस्ताव भी रखा , साथ ही पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ती हुई ईसाई मिशनरियों के प्रभाव को रोकने एवं धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी की है। महामंडलेश्वर जी का पूर्वोत्तर भारत की इस धार्मिक यात्रा में अरुणाचल असम मेघालय के जनजातीय समाज मैं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर विशेष सनातन हिन्दू सम्मेलन आयोजित किए गए

विधायक वही सफल जो खुद को जनता का व्यक्ति समझे: सतीश महाना

Published on 30.01.2025 , Friday, Time: 02:46 PM, UP Assembly New

हिमाचल प्रदेश की सार्वजनिक उपक्रम समिति का उत्तर प्रदेश विधान सभा का भ्रमण

हिमाचल प्रदेश विधान सभा की सार्वजनिक उपक्रम और निगम समिति के सभापति किशोरीलाल का स्वागत करते हुए विधान सभा अध्यक्ष सतीश महाना

लखनऊ, 30 जनवरी। उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका और जनसेवा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “लोकतंत्र में वही विधायक सफल होता है जो स्वयं को जनता का व्यक्ति समझे, केवल विधायक बनकर नहीं। जनता से ऐसा जीवंत और आत्मीय जुड़ाव होना चाहिए कि लोग आपसे मिलने को उत्सुक हों, न कि किसी मजबूरी में। यदि कभी जनता में असंतोष दिखाई दे, तो जनप्रतिनिधि को धैर्य, संयम और संवेदनशीलता के साथ उनकी बात सुननी चाहिए।”
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से हिमाचल प्रदेश विधानसभा की सार्वजनिक उपक्रम एवं निगम संयुक्त समिति ने शिष्टाचार भेंट की। यह समिति किशोरी लाल  के सभापतित्व में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ सात सदस्यीय दल के रूप में उत्तर प्रदेश विधानसभा के भ्रमण पर आई थी।
इस अवसर पर श्री महाना जी ने कहा कि “हर विधायक की वास्तविक योग्यता जनता का विश्वास है। जनता के कारण ही हम सभी यहाँ बैठे हैं। जो जनप्रतिनिधि अपने पाँच वर्ष के कार्यकाल में निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करते हैं, उन्हें चुनाव के समय कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता।”
उन्होंने राजनीति को लेकर बनी नकारात्मक धारणाओं पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सकारात्मक अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि आज का विधायक सक्षम, उत्तरदायी और जनहित के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध होता है।
हिमाचल प्रदेश से आई समिति ने उत्तर प्रदेश विधानसभा में हुए व्यवस्थागत एवं संरचनात्मक परिवर्तनों की सराहना करते हुए इन्हें अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया। भ्रमण के दौरान समिति के सदस्यों ने विधानसभा की कार्यप्रणाली को निकट से समझा और अपने अनुभव साझा किए।

पुण्य तिथि पर सीएम योगी ने बापू को किया नमन

Mahatma Gandhi

पुण्य तिथि पर महात्मा गांधी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्राद्ध सुमन अर्पित किए

  • मुख्यमंत्री ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
  • मुख्यमंत्री ने किया आमजन से बापू के आदर्शों को अपनाने का आह्वान

Published on 30.01.2026, Friday Time: 02:33 , UP News

लखनऊ, 30 जनवरी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में स्थापित गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। श्रद्धा व सम्मान के वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर बापू को नमन किया। इसके बाद कुछ क्षण मौन रहकर उन्होंने राष्ट्रपिता को स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर भी बापू को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए आमजन से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।

भजनों से गूंजा कार्यक्रम स्थल
श्रद्धांजलि समारोह के दौरान स्कूली बच्चों द्वारा महात्मा गांधी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति दी गई। ‘रघुपति राघव राजाराम’ सहित अन्य भजनों की मधुर धुनों से जीपीओ पार्क गूंज उठा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एकाग्रता के साथ लगभग 15 मिनट तक बैठकर भजनों को सुना। इस दौरान उन्होंने न केवल बच्चों की प्रस्तुति की सराहना की, बल्कि गांधी प्रतिमा के समक्ष सभी स्कूली बच्चों के साथ फोटो भी खिंचाई।

सत्य और अहिंसा का संदेश
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर बापू को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, ‘राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। श्रद्धेय बापू का सत्यनिष्ठ आचरण, अहिंसा की उनकी अडिग साधना और मानवता के प्रति अनन्य करुणा, संपूर्ण विश्व को सदैव आलोकित करती रहेगी। आइए, बापू के आदर्शों को आत्मसात कर समृद्ध, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।’

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, रामचंद्र प्रधान, भाजपा के महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी आदि मौजूद रहे। सभी ने राष्ट्रपिता के चित्र व प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

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