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केमिस्ट एसोसिएशन ने डीएम को ज्ञापन सौंपा

January 30, 2026

केमिस्ट एसोसिएशन ने डीएम को ज्ञापन सौंपा

बिजनौर, 30 जनवरी 2026, जिला केमिस्ट एंड ड्रजिस्ट एसोसिएशन जनपद बिजनौर इकाई द्वारा जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी को केमिस्टों की समस्याओं से संबंधित एक मांग पत्र सोपा गया। प्रतिनिधि मंडल में जिला अध्यक्ष सुबोध कुमार, केके अग्रवाल, सुनील कुमार, नाहर सिंह, डॉक्टर पुखराज सिंह मलिक, रजनीश कुमार, हितेंद्र खरबंदा, देवेश कुमार, चौधरी वीरपाल सिंह, अचल चौहान, कमर अहमद, मोहम्मद शफी आदि रहे।

हरिद्वार में बीवी जी राम जी सम्मेलन

Posted on 30.01.2026, Friday Time: 02:14 PM, By Ramchandra Kannojia, UP Web News, Haridwar 
हरिद्वार, 30 जनवरी 2026, रानीपुर विधानसभा के नवोदय नगर मंडल में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार ग्रामीण मिशन (वी बी जी राम जी ) के जिला सम्मेलन का आयोजन किया गया।
जिला सम्मेलन का उद्घाटन मंच पर आसीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने संबोधित करते हुए कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक संसद में पारित हुआ है। यह विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।इस विधेयक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जनता तक पहुंचें। इसके लिए सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है। जिससे कि इसके अंतर्गत आने वाली जानकारी जनता को दी जा सके। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य, जिला पंचायत के सदस्य इस योजना के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण नियमों को अवश्य जाने जिससे कि लोग लाभान्वित हो सके। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर योजना में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। जिससे कि मजदूरों को सुनिश्चित रोजगार मिल सके। और उनकी आजीविका में बढ़ोतरी की जा सके। उन्होंने बताया कि इस योजना में 125 दिन रोजगार की गारंटी दी गई है। और मजदूरों का वेतन साप्ताहिक दिया जाएगा।
इसमें मजदूरी का पैसा सीधे उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से डाला जाएगा।
और इसके अंतर्गत पर्यावरण, कृषि, आपदा प्रबंधन, डेयरी विभाग, पशुपालन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को जोड़ा गया है। हमारी सरकार किसान, मजदूर, गरीबों ,पिछड़ों ,अनुसूचित और अल्पसंख्यक सभी का जीवन स्तर बढ़ाना चाहती है। इसके लिए हमारी सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के द्वारा भ्रम फैला कर इस महत्वपूर्ण योजना का विरोध किया जा रहा है। हम सबका यह कर्तव्य है कि हम विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे झूठ से पर्दा उठाकर जनता को सच बताएं।
जिलाअध्यक्ष आशुतोष शर्मा ने कहा कि विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार योजना के द्वारा युवाओं को रोजगार के नए अवसर प्रदान किए जाएंगे। और देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाया जाएगा। इस योजना का लाभ लेने के लिए ईपीएफओ पर पंजीकरण करना होगा। इससे रोजगार के नए अवसर प्रदान करने के साथ-साथ इसमें काम करने वाले लोगों की आय में बढ़ोतरी होगी और रोजगार के नए अवसर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास पर आधारित विचारधारा को लेकर चल रहे हैं। जिससे आमजन लाभान्वित हो रहा है। हम सब का यह दायित्व है कि महत्वपूर्ण योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाएं और उनके लाभ के बारे में बताएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना भारत को 2047 तक विकसित भारत बनाने का है। उसमें यह योजना मील का पत्थर साबित होने जा रही है। इस अवसर पर हरिद्वार नगर विधायक मदन कौशिक ने कहा कि हमारी केंद्र और राज्य की सरकारी आम जन के लिए काम कर रही है। और बिना किसी भेदभाव के सभी को समान अवसर दिए जा रहे हैं। कांग्रेस के लोग इससे बौखलाए हुए हैं। और उनके पास कोई भी मुद्दा नहीं है। मुद्दा न होने पर यह लोग सरकार की योजनाओं को जनता के समक्ष गलत रूप में पेश कर रहे हैं। जनता सब जानती है और आने वाले चुनाव में कांग्रेस को सबक सिखा कर जवाब देगी। इस अवसर पर रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने बताया कि उत्तराखंड कि भाजपा सरकार पुष्कर सिंह धामी का नेतृत्व में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। और उत्तराखंड राज्य प्रगति की ओर अग्रसर है। हमारी सरकार हर चुनौती का डटकर सामना कर रही है। और आमजन सरकार के साथ है।
इस अवसर पर हरिद्वार महापौर किरण जैसल, जिला सह प्रभारी दीपक धमीजा ,राज्य मंत्री डॉ जयपाल सिंह चौहान , संदीप गोयल,महिला मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष रीता चमोली,प्रदेश सह मीडिया संयोजक विकास तिवारी,जिला महामंत्री हीरा सिंह बिष्ट ,संजीव चौधरी, कार्यक्रम संयोजक तरुण नैय्यर,जिला उपाध्यक्ष लव शर्मा , आशु चौधरी संदीप अग्रवाल निपेंद्र चौधरी, सीमा चौहान, रिशु चौहान, जसवीर बसेड़ा ,तेलूराम प्रधान, प्रीति गुप्ता एजाज हसन , सोहनवीर पाल विजय चौहान, धर्मेंद्र चौहान अरविंद कुशवाहा, मनोज शर्मा ,बिंदरपाल ,चीनू चौधरी अंशु कुमार ,लोकेश पाल ,देवकीनंदन पुरोहित ,सहित प्रदेश व जिला पदाधिकारी, जिला पंचायत सदस्य, बी डी सी सदस्य, ग्राम प्रधान उपस्थित रहे।

मुरादाबाद में यूजीसी के विरोध में प्रदर्शन, सवर्ण समाज के संगठनों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर डीएम को ज्ञापन सौंपा

Upar Casts Rally in Moradabad due to rollback UGC Rules

यूजीसी नियमों के खिलाफ मुरादाबाद कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते सवर्ण समाज के लोग
फोटो : सुहेल खां

Published on 30.01.2026, Time 10.14, Friday, Content Source : Rajesh Bhatia Moradabad, UP Web News, Image Credit: Suhail Khan

मुरादाबाद, 29 जनवरी 2026,  (उप्र समाचार सेवा)
सुप्रीम कोर्ट की रोक के बीच गुरुवार को यूजीसी के नए नियमों का जमकर विरोध हुआ। सवर्ण समाज संगठन के कार्यकर्ता अंबेडकर पार्क में एकत्रित हुए और कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की।इस नियम को विभाजनकारी मानते हुए सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
सवर्ण समाज संगठन से जुड़े लोग यूजीसी के नए नियम के खिलाफ सड़कों पर उतरे। अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, अखिल भारतीय अग्रवाल महासभा, क्षत्रिय महासभा, कायस्थ महासभा के कार्यकर्ता विरोध में उतरे और प्रदर्शन किया। सिविल लाइंस में आंबेडकर पार्क में इकट्ठा होकर कार्यकर्ताओं ने यूजीसी पर आक्रोश जताया। प्रदर्शनकारी यूजीसी गो बैक, काला कानून वापस लेने की तख्तियां लिए हुए थे। जुलूस निकालते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे कार्यकर्ताओं ने यूजीसी 2026 में विवादास्पद प्रावधानों पर कड़ा एतराज जताया।बाद में सिटी मजिस्ट्रेट विनय पांडेय को ज्ञापन सौंपा गया।

Economic Survey: कृषि विकास दर पांच वर्षों के दौरान औसत वार्षिक विकास दर 4.4 प्रतिशत

कृषि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के केंद्र में होगी : आर्थिक समीक्षा

ECONOMIC SURVEY

आर्थिक सर्वे प्रस्तुत करते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार डा वी अनन्त नागेश्वर

  • वित्तीय वर्ष 2016 से लेकर वित्तीय वर्ष 2025 के दौरान दशकीय वृद्धि दर 4.45 प्रतिशत रही, जो पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है
  • वित्तीय वर्ष 2024-25 में खाद्यानों का उत्पादन 3,577.3 लाख मिलियन टन (एलएमटी) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा
  • कृषि मूल्य वर्धन (जीवीए) में लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बागवानी क्षेत्र सबसे उज्ज्वल पक्ष के रूप में उभरा; इसका उत्पादन वित्तीय वर्ष 2013-14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 367.72 मिलियन टन पहुंचा

Published on 30 JAN 2026 Time: 07.48 AM, Source: PIB

नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026 (पीआईबी) .केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26  पेश करते हुए कहा कि भारतीय कृषि की स्थिति निरंतर सुदृढ़ हुई है और मुख्य रूप से इसके सहयोगी क्षेत्रों में विकास होने से इसमें लगातार प्रगति हुई है।
आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया है कि हाल के वर्षों में खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि हुई है और मवेशी, मत्स्य पालन तथा बागवानी जैसे उच्च मूल्य वाले सहयोगी क्षेत्र आय के अवसरों को बेहतर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को मज़बूत करने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आर्थिक समीक्षा में इस तथ्य को भी दर्ज किया गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान कृषि एवं सहयोगी क्षेत्रों में औसत वार्षिक विकास दर स्थिर मूल्य पर 4.4 प्रतिशत रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही के दौरान कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.5 प्रतिशत रही। दशकीय वृद्धि दर (वित्तीय वर्ष 2016-वित्तीय वर्ष 2025) 4.45 प्रतिशत रही, जो कि पिछले दशकों की तुलना में सर्वाधिक है। यह वृद्धि दर मुख्य रूप से मवेशी (7.1 प्रतिशत) और मछली पकड़ने एवं उसके पालन (8.8 प्रतिशत) के मामले में सशक्त प्रदर्शन के परिणामस्वरूप संभव हुई है। इसके बाद फसल क्षेत्र का स्थान रहा, जिसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज की गई।
वित्तीय वर्ष 2015 से लेकर वित्तीय वर्ष 2024 के दौरान पशुधन क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गयी। इसके सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में लगभग 195 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस क्षेत्र ने वर्तमान मूल्य पर 12.77 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक विकास दर (सीएजीआर) दर्ज की। मत्स्य पालन क्षेत्र ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। वर्ष 2004-14 की तुलना में 2014-2025 के दौरान मछली के उत्पादन में 140 प्रतिशत से भी अधिक (88.14 लाख टन) की वृद्धि हुई। इस प्रकार, सहयोगी क्षेत्र निरंतर विकास के एक मुख्य वाहक के रूप में उभर रहे हैं और कृषि से होने वाली आय को बढ़ाने में अहम योगदान दे रहे हैं।
भारत के खाद्यान्न उत्पादन में भी निरंतर वृद्धि हुई है और इसके कृषि वर्ष (एवाई) 2024-25 के दौरान 3,577.3 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) तक पहुंच जाने का अनुमान है, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 254.3 एलएमटी अधिक है। खाद्यान्न उत्पादन में यह बढ़ोतरी चावल, गेहूं, मक्का एवं मोटे अनाजों (श्री अन्न) की अधिक उपज के कारण संभव हुई है।
बागवानी क्षेत्र, जिसकी कृषि मूल्य वर्धन (जीवीए) में 33 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, देश की कृषि विकास यात्रा में एक उज्ज्वल पक्ष के रूप में उभरी है। वर्ष 2024-25 के दौरान, बागवानी क्षेत्र का उत्पादन 362.08 एमटी तक पहुंच गया और इसने खाद्यानों के 329.68 एमटी के अनुमानित उत्पादन को पीछे छोड़ दिया। अगस्त 2025 तक, बागवानी क्षेत्र का उत्पादन 2013-14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 367.72 मिलियन टन तक जा पहुंचा।
खाद्यान्नों के उत्पादन में यह वृद्धि बेहद व्यापक रही है। फलों का उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जियों का उत्पादन 219.67 मिलियन टन तथा अन्य बागवानी आधारित फसलों का उत्पादन 33.54 मिलियन टन रहा, जो कि कृषिगत उत्पादन एवं मूल्य में इस क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
इसके अलावा, भारत विश्व का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश बन गया है और प्याज के वैश्विक उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। सब्जियों, फलों एवं आलू के उत्पादन के मामले में भी भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है और वह प्रत्येक श्रेणी के वैश्विक उत्पादन में 12-13 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। ये उपलब्धियां बागवानी क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति, खाद्य पदार्थों की वैश्विक मांग को पूरा करने में इसकी बढ़ती भूमिका और उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन में उपलब्ध अवसरों को दर्शाती हैं।
अंत में, आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया है कि कृषि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के केंद्र में होगी, समावेशी विकास को बढ़ावा देगी और करोड़ों लोगों की आजीविका को बेहतर बनाएगी। भारत ने कृषिगत उत्पादन, खासकर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में संयुक्त रूप से महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन एवं बागवानी क्षेत्र को आगे बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है।

सात प्रतिशत वृद्धि के साथ भारत का ओद्योगिक प्रदर्शन मजबूतः निर्मला सीतारमण

बजट पूर्व आर्थिक समीक्षा संसद के दोनों सदनों प्रस्तुत

FM NIRMALA SITHARAMAN PRESENTED ECONOMIC SURVEY IN PARLIAMENT

संसद में बजट 2026-27 के पूर्व आर्थिक समीक्षा प्रस्तुत करती हुईं वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण

Published on 30 JAN 2026 Time: 07.04 AM, Source: PIB

नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026 (पीआईबी) केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26  पेश करते हुए कहा कि वित्‍त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में वास्‍तविक आधार पर उद्योग का संवर्धित सकल मूल्‍य (जीवीए) में साल दर साल 7.0 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत का औद्योगिक प्रदर्शन मजबूत बना रहा। इससे पिछले वित्‍त वर्ष (2024-25) में वृद्धि में 5.9 प्रतिशत की नरमी के बाद यह अच्‍छी बढ़ोतरी का संकेत है।
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार, वित्‍त वर्ष 26 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण जीवीए क्रमश: 7.72 और 9.13 प्रतिशत बढ़ा। इस सुधार की मुख्‍य वजह विनिर्माण क्षेत्र में जारी ढांचागत बदलाव हैं, जिनमें धीरे-धीरे मंहगे विनिर्माण खंड की ओर रुझान, कॉरिडोर आधारित विकास के माध्‍यम से औद्योगिक इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर की उपलब्‍धता में सुधार और प्रौद्योगिकी को बड़े स्‍तर पर अपनाना एवं कंपनियों का औपचारीकरण शामिल हैं।
आर्थिक समीक्षा कहती है कि भारत के कुल विनिर्माण मूल्‍य संवर्धन में मध्‍यम और उच्‍च प्रौद्योगिकी गतिविधियों की हिस्‍सेदारी 46.3 प्रतिशत हो गई। इसकी मुख्‍य वजह उत्‍पादन से जुड़े प्रोत्‍साहन (पीएलआई) योजनाएं और भारतीय सेमीकंडटर मिशन जैसी विभिन्न सरकारी पहल के साथ-साथ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स, फार्मास्‍युटिकल, रसायन और परिवहन क्षेत्रों में घरेलू क्षमता में विस्‍तार हैं। समीक्षा में 2023 में प्रतिस्‍पर्धी औद्योगिक प्रदर्शन (सीआईपी) के मामले में भारत की रैंकिंग सुधरकर 37वें पायदान पर पहुंचने के साथ देश की वैश्विक स्थिति में मजबूती की बात कही गई, जबकि 2022 में भारत 40वें पायदान पर था।
समीक्षा कहती है कि भले ही, वाणिज्यिक बैंकों की तरफ से बैंक आधारित औद्योगिक कर्ज में बढ़ोतरी वित्‍त वर्ष 24 के 9.39 प्रतिशत की तुलना में घटकर वित्‍त वर्ष 25 में 8.24 प्रतिशत रह गई, लेकिन विभिन्‍न आकलनों से वर्तमान में जारी विविधीकरण के चलते बैंकों से वित्‍त के स्रोतों के दूर होने के संकेत मिले हैं। अगस्‍त 2025 की मासिक आर्थिक समीक्षा का उल्‍लेख करते हुए समीक्षा कहती है, ‘बैंक कर्ज में कमी वाणिज्यिक क्षेत्र के वित्‍तीय संसाधनों के समग्र प्रवाह में बढोतरी से मेल खाती है। वित्‍त वर्ष 20 से वित्‍त वर्ष 25 के दौरान गैर बैंक स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए वित्‍त के प्रवाह में 17.32 की सीएजीआर बढोतरी दर्ज की गई।
मुख्‍य इनपुट उद्योग
आर्थिक समीक्षा जोर देकर कहती है कि भारत के इस्‍पात और सीमेंट क्षेत्र में दुनिया के दूसरे बड़े उत्‍पादक बने रहने के साथ मुख्‍य उद्योगों का प्रदर्शन मजबूत रहा है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा बड़ा सीमेट उत्‍पादक है। प्रति व्‍यक्ति 540 किलोग्राम के वैश्विक औसत की तुलना में भारत में सीमेंट की घरेलू खपत प्रति व्‍यक्ति लगभग 290 किलोग्राम है। समीक्षा कहती है कि सरकार का मुख्‍य रूप से राजमार्ग, रेलवे, आवासीय योजनाओं, स्‍मार्ट सिटीज जैसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और ग्रामीण विकास एवं औद्योगिक वृद्धि पर जोर है, जिससे सीमेंट की मांग में खासी बढ़ोतरी का अनुमान है।
निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र से मजबू‍त घरेलू मांग के चलते, बीते पांच साल में इस्‍पात क्षेत्र में व्‍यापक बदलाव देखने को मिला।
वित्‍त वर्ष 25 में 1,047.52 मिलियन टन (एमटी) कोयला उत्‍पादन के साथ भारत का कोयला उद्योग ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया। यह उत्‍पादन बीते वित्‍त वर्ष के 997.83 एमटी की तुलना में 4.98 प्रतिशत ज्‍यादा था।
रसायन और पेट्रो-रसायन क्षेत्र की अर्थव्‍यवस्‍था के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका बनी रही, जिसने वित्‍त वर्ष 24 में समग्र विनिर्माण क्षेत्र के जीवीए में 8.1 प्रतिशत का योगदान किया।
वित्‍त वर्ष 15-25 के  दौरान वाहन उद्योग के उत्‍पादन में लगभग 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। सरकार ने भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण को प्रोत्‍साहन देने के लिए कई कदम उठाए। समीक्षा में उल्‍लेख किया गया कि सरकारी पहलों के चलते हाल के वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के पंजीकरण में खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
समीक्षा के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रणनीतिक‍ नीतिगत हस्‍तक्षेपों में ऑटोमोबाइल और वाहन कलपुर्जा उद्योग के लिए पीएलआई स्कीम (पीएलआई-ऑटो स्‍कीम), ‘नेशनल प्रोग्राम ऑन एडवांस्‍ड केमिस्‍ट्री सेल (एसीसी) बैटरी स्‍टोरेज’ के लिए पीएलआई स्‍कीम (पीएलआई एसीसी स्‍कीम), पीएम ई-ड्राइव स्‍कीम, पीएम ई-बस सेवा-पेमेंट सिक्‍योरिटी मैकेनिज्‍म (पीएसएम) स्‍कीम, स्‍कीम टू प्रमोट मै‍न्‍युफैक्‍चरिंग और इलेक्ट्रिक पैसेंजर कार्स इन इंडिया (एसएमईसी) शामिल हैं।
समीक्षा में उल्‍लेख किया गया है कि वित्‍त वर्ष 22 के सातवीं की तुलना में वित्‍त वर्ष 25 में तीसरी बड़ी निर्यात श्रेणी बनने के साथ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स सेक्‍टर हाल के वर्षों में बड़े ढांचागत बदलाव का साक्षी बना है। इस वृद्धि को घरेलू उत्‍पादन और निर्यात (चार्ट VIII. 16) में शानदार बढ़ोतरी से बल मिला है। इस बढ़ोतरी के केंद्र में मोबाइल विनिर्माण खंड रहा, जिसका उत्‍पादन मूल्‍य वित्‍त वर्ष 15 के 18,000  करोड़ रुपए से 30 गुना बढ़कर वित्‍त वर्ष 25 में 5.45 लाख करोड़ रुपए के स्‍तर पर पहुंच गया।
वॉल्‍यूम के लिहाज से दुनिया में तीसरे पायदान पर मौजूद भारत का फार्मास्‍युटिकल उद्योग वित्‍त वर्ष 25 में 191 देशों को निर्यात के साथ वैश्विक जेनेरिक्स की मांग में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। समीक्षा में उल्‍लेख किया गया है कि पिछले दशक (वित्‍त वर्ष 15 से वित्‍त वर्ष 25) में निर्यात में 7 प्रतिशत सीएजीआर बढ़ोतरी के साथ वित्‍त वर्ष 25 में फार्मास्‍युटिकल क्षेत्र का सालाना टर्नओवर 4.72 लाख करोड़ रुपए के स्‍तर पर पहुंच गया।
भविष्‍य के विकास के लिए एक रोडमैप
वैश्विक स्‍तर पर चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, लॉजिस्टिक, कारोबार में सुगमता और नवीन प्रणालियों में सुधार के साथ भारत का औद्योगिक क्षेत्र अच्‍छी तेजी का गवाह बना है। आर्थिक समीक्षा कहती है कि औद्योगीकरण के अगले दौर के लिए देश को आयात विकल्‍प पर आधारित मॉडल की तुलना में व्‍यापकता, प्रतिस्‍पर्धा, नावाचार और जीवीसी में व्‍यापक एकीकरण पर जोर देना होगा। हर खंड में पूर्ण आत्‍मनिर्भरता हासिल करने के बजाए, भारत को विविधीकरण के माध्‍यम से रणनीतिक लचीलेपन का विकास और व्‍यापक क्षमताएं हासिल करने की जरूरत है। इसके लिए आरएंडडी, प्रौद्योगिकी को अपनाने, कौशल और गुणवत्‍ता प्रणालियों में निजी क्षेत्र के निवेश को बढ़ाने की जरूरत है।
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