उत्तर प्रदेश पुलिस आज उस पुरानी छवि से बहुत आगे निकल चुकी है, जब थानों और जेलों में ब्रिटिश काल की भारी-भरकम .303 ली-एनफील्ड राइफलें चलती थीं। अब पुलिसकर्मी इंसास राइफल, ग्लॉक पिस्तौल और एके-47 जैसी आधुनिक असॉल्ट राइफलों से लैस होकर मैदान में उतरते हैं।
राज्य सरकार लगातार पुलिस बल के आधुनिकीकरण पर जोर दे रही है, जिससे कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा दोनों मजबूत हो रही हैं।
2019 में ही यूपी पुलिस ने .303 राइफलों को औपचारिक रूप से रिटायर कर दिया था। उस समय करीब 58 हजार पुरानी राइफलें प्रचलन में थीं। इनकी जगह 63 हजार इंसास और 23 हजार एसएलआर राइफलें थानों तक पहुंचाई गईं। जेल विभाग ने भी 2025 में पुरानी .303 की जगह हल्की और सटीक इंसास राइफलें अपनाईं। इससे जेल सुरक्षा कर्मियों की प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ी है।
हथियारों के आधुनिकीकरण का सिलसिला लगातार जारी है। 2025 में तीन दिनों में ही 83 करोड़ रुपये से अधिक के आधुनिक हथियारों के ऑर्डर दिए गए। इनमें 3 हजार 9 मिमी पिस्तौल, 4 हजार 5.56 मिमी कार्बाइन, 405 असॉल्ट राइफल, सब-मशीन गन, कॉम्बैट शॉटगन और पंप-एक्शन गन शामिल हैं। एसटीएफ, एटीएस और स्पेशल यूनिट्स को ग्लॉक-17, ग्लॉक-19, बरेटा पिस्तौल, थर्मल वेपन साइट, सप्रेसर और नाइट विजन उपकरण दिए जा रहे हैं। एके-47 और उसके अपग्रेडेड वर्जन भी विशेष बलों के पास उपलब्ध हैं।
केवल हथियार ही नहीं, तकनीक भी पुलिसिंग का अहम हिस्सा बन गई है। ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत प्रदेश में 11 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। डायल-112 सेवा, यक्ष ऐप, एआई आधारित क्रिमिनल डेटा सिस्टम, फेसियल रिकग्निशन और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) जाँच को तेज और सटीक बना रहे हैं। सभी जिलों में साइबर थाने स्थापित हो चुके हैं। फॉरेंसिक साइंस लैब की संख्या 4 से बढ़कर 12 हो गई है, और मोबाइल फॉरेंसिक वैन हर जिले में उपलब्ध हैं।
संचार व्यवस्था भी बदल रही है। पुराने वायरलेस सिस्टम की जगह डिजिटल नेटवर्क आ रहा है। लखनऊ कमिश्नरेट में नए रिपीटर्स से संचार रेंज 30 किलोमीटर से अधिक हो गई है। 12 जिलों में डिजिटल वायरलेस सेवा शुरू करने की योजना है। बॉडी-वॉर्न कैमरे, ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम और कमांड कंट्रोल सेंटर भी सुरक्षा को मजबूत कर रहे हैं।बजट में भी भारी वृद्धि हुई है। 2025-26 में पुलिस आधुनिकीकरण, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपकरणों के लिए आवंटन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई। नए भर्ती किए गए कर्मियों को हाइब्रिड मॉडल पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें साइबर क्राइम, एआई सिमुलेशन और आधुनिक हथियार संचालन शामिल हैं।
सरकार का दावा है कि ये बदलाव अपराधियों के लिए भय और आम नागरिकों के लिए विश्वास का माहौल बना रहे हैं। महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों में तकनीक आधारित सुरक्षा ने सफलता दिखाई है।
यूपी पुलिस अब सिर्फ बल पर नहीं, बल्कि स्मार्ट पुलिसिंग पर भरोसा कर रही है। .303 का जमाना बीत चुका है। इंसास, ग्लॉक और एके-47 के साथ आधुनिक तकनीक से लैस खाकी बल प्रदेश की सुरक्षा को नई ऊंचाई पर ले जा रहा है।
