POSTED ON 0.08.2026 TIME 01.03 PM, EDITORIAL BY SARVESH KUMAR SINGH
शनिवार को देश के दो अलग-अलग स्थानों पर दो संवाद कार्यक्रम हुए। इनमें समानता यह है कि दोनों संवाद कार्यक्रम युवाओं के साथ थे। लेकिन, अंतर यह है कि दोनों के भाव, विचार और मार्गदर्शन दो ध्रुवीय थे। एक में युवाओं को सिर्फ उकसाया गया, उनके आत्मविश्वास को तोड़ा गया। उन्हें देश की व्यवस्था की कमियां बतायी गईं और हतोत्साहित किया गया। कोई समाधान नहीं, कोई भविष्य का रास्ता नहीं सुझाया गया। दूसरी ओर एक संवाद और हुआ। युवाओं की विशेषताएं, उनकी क्षमता, उनकी बुद्धिमत्ता की प्रशंसा करके भविष्य के लक्ष्य साधने के लिए प्रेरित किया। इसके लिए उन्हें प्रेरणा दी गई। यह फर्क उन दो संवादों का है, जो 8 अगस्त को हुए। इनमें एक संवाद कांग्रेस नेता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता विरोधी दल राहुल गांधी ने प्रयागराज के केपी कालेज मैदान में छात्रों और युवाओं के साथ किया। दूसरा संवाद दिल्ली के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दीक्षांत समारोह के अवसर पर छात्रों के साथ किया। दोनों संवाद के संदेश अलग-अलग हैं। एक संवाद दिशा दिखाता है एक संवाद परिवर्तन के नाम पर राष्ट्रीय आस्था में कमी करता है, कुंठा को बढावा देता है। देश ने दोनों संवाद के निहितार्थ भी समझ लिये हैं।
प्रयागराज के केपी कालेज के ऐतिहासिक मैदान में राहुल गांधी ने पूर्वांचल के छात्रों, युवाओं को आमंत्रित कर संवाद किया। इसका नाम “छात्रों की गूंज” रखा गया था। लेकिन, यहां गूंज सिर्फ राहुल गांधी की ही सुनाई दी। इसमें उन्होंने सिस्टम की खामियां बतायीं। कहा सर्टिफिकेट और डिग्रियां अहमियत खो चुकी हैं। देश के 40 करोड़ युवा आज डिग्री, रोजगार और डिजिटल के चक्रव्यूह में फंसे हुए हैं। सिस्टम युवाओं को रोजगार की बजाय सिर्फ डिग्री थमा देता है। खराब व्यवस्था ने युवाओं को चक्रव्यूह में फंसा रखा है। आज आपको बैंक से लोन नहीं मिलेगा लेकिन, अदाणी को तत्काल लाखों करोड़ मिल जाएगा। उन्होंने कोई समाधान बताने की बजाय आरएसएस को निशाना बनाया, कहा आज हर जगह आरएसएस की सोच फैलायी जा रही है। पुलिस, प्रशासन, शिक्षण संस्थान, न्यायिक व्यवस्था, मीडिया सभी जगह आरएसएस की सोच के लोगों को बैठाया जा रहा है। रोजगार के सारे दरवाजे बंद हो गए हैं। यह राहुल गांधी का छात्रों की गूंज के रूप में तीसरा राष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम था। इसके पहले ऐसे संवाद कार्यक्रम कोटा और देहरादून में हो चुके हैं।
दूसरा संवाद दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आईआईटी दिल्ली के छात्रों के साथ किया। यह अवसर था दीक्षांत समारोह का, इसमें उन्होंने छात्रों को उज्ज्वल भविष्य के सपने दिखाये और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित किया। श्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। दुनिया की स्ट्रेटेजिक इक्वेशन तेजी से बदल रही है ग्वोबल पावर बैलेंस भी प्रतिपल बदल रहा है। आपके पीछे सबसे बड़ी फोर्स है टेक्नोलाजी की स्पीड। आज कोई भी निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि अगले 20 से 30 साल की दुनिया कैसी होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया बदलेगी, टैक्नोलाजी भी बदलेगी, इंडस्ट्रीज बदलेगी, प्रोफेसंस भी बदलेंगे। लेकिन इन सबके बीच मेरी बात याद रखियेगा जो सीखेगा वो जीतेगा। जो नए चैलेंज के लिए नए सोल्यूशन खोजने का साहस रखेगा, चैलेंज उसके लिए अवसर बन जाएंगे।
मोदी ने कहा कि आईआईटी की परीक्षा में सिलेबस होता है लेकिन जिंदगी की परीक्षा का कोई सिलेबस नहीं होता। सब कुछ आउट आफ सिलेबस होता है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि लाइफ में क्यूरोसिटी बनाए रखिये, अपनी लर्निंग इंस्टिक्ट को जगाये रखिये, चेतना बनाये रखिये। केवल सवाल पूछकर मत रुकिये, उनका समाधान खोजने का साहस भी रखिये।
एक ही दिन के ये दो संवाद कार्यक्रम देश की भविष्य की राजनीति की दिशा का भी संकेत देते हैं।
