Posted on 13.05.2026 Thursday, Time 21.07 PM, Editorial by Sarvesh Kumar Singh, SP Leader statements
समाजवादी पार्टी के नेता लगातार गैर जिम्मेदाराना और विघटन पैदा करने वाले बयान देने की हिमाकत कर रहे हैं। सपा यूं तो खुद को लोहिया की विचारधारा और समाजवादी सिद्धान्तों का झंडावरदार कहते नहीं थकती किन्तु उसके नेताओं का कार्यों में बयानों में कहीं भी समाजवाद और लोहिया के विचार की झलक दिखायी नहीं देती। डा राममनोहर लोहिया जाति तोडने की बात करते थे किन्तु सपा नेता हर समया जातिवाद को बढ़ावा देने वाले बयान देते हैं और जातिवादी सोच से ग्रसित होकर ही राजनीति कर रहे हैं। इसके साथ ही वे पीडीए के नाम अन्य जातियों का अपमान कर रहे हैं। इस स्थिति से सपा का राष्ट्रीय नेतृत्व भी असहज तो है किन्तु वह कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
हाल का मामला दो घटनाओं का है। पहला समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी के उस बयान का है जिसमें उन्होंने ब्राह्मण समाज का घनघोर अपमान किया है। उन्होंने पांच मई को दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित राजीव फाउण्डेशन के पुस्तक विमोचन समारोह में अपना भाषण देते हुए ब्राह्मण समाज पर अपमानजनक टिप्पणी की। उन्होंने ब्राह्मणों के लिए बोला जाने वाला एक मुहावरा इस कार्यक्रम में सुनाया। इसमें ब्राह्मणों की तुलना वेश्या से की गई। उनके भाषण के अंश सोशल मीडिया में जारी होने के बाद और वीडियो वायरल होने से देशभर के ब्राह्मण समाज में आक्रोश फैल गया है। हालांकि उन्होंने ब्राह्मण समाज से माफी मांग ली है। किन्तु ब्राह्मण समाज में बहुत आक्रोश है। इसी मामले को लेकर मंगलवार 12 मई को उनके खिलाफ गाजियाबाद के कविनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज हो गई है।
दूसरा मामला महोबा का है जहां समाजवादी पार्टी के हमीरपुर-महोबा के सांसद अजेन्द्र सिंह लोधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी कर दी। उन्होंने प्रधानमंत्री के अपमानजनक शब्द बोले यहां तक की उन्हें गाली भी दी। इस मामले में भी महोबा कोतवाली में सांसद अजेन्द्र सिंह लोधी के खिलाफ एफआईआर हो गई है। दोनों मामले जातीय वैमनस्य और अशिष्ट व्यवहार के हैं। खास बात यह कि ये दोनों घटनाएं ऐसे व्यक्तियों द्वारा अजाम दी गई हैं जो जिम्मेदार पदों पर एक सांसद हैं दूसरे पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं। इस पार्टी के नेताओं और प्रवक्ताओं का यह व्यवहार आम है। ये किसी भी नेता या समाज पर कोई भी अभद्र टिप्पणी कर देते हैं।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि दोनों घटनाओं के बाद सपा का राष्ट्रीय नेतृत्व मौन है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव या किसी अन्य नेता की तरफ से दोनों मामलों पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है। न तो इन नेताओं को कोई नसीहत दी गई है और न ही इसके लिए राष्ट्रीय नेतृत्व ने खेद व्यक्त किया है। ऐसा लगता है कि सपा के वरिष्ठ नेताओं ने ऐसी घटनाओं से आंखें मूंद कर उनके कृत्यों को मौन सहमति प्रदान की है। इस प्रवृत्ति के कारण ही सपा के नेता इस तरह की गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी करने की हिमाकत कर पा रहे हैं। लेकिन, इन जातीय बयानों और राजनीतिक अशिष्टता भरे बयानों को जनता देख रही है। वह समय पर बखूबी इन्हें जवाब देगी।







