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ड्रेस कोड के विरोध में सड़कों पर उतरे छात्र, एलयू में प्रदर्शन

May 25, 2026

ड्रेस कोड के विरोध में सड़कों पर उतरे छात्र, एलयू में प्रदर्शन

लखनऊ, 25 मई 2025, राज्यपाल के ड्रेस कोड संबंधी आदेश के विरोध में आज लखनऊ यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन हुआ।

 

मुख्यमंत्री ने तेरहवीं में पहुंचकर प्रतीक यादव को दी श्रद्धांजलि

Posted on 25.05.2026 Time 06.16 PM

लखनऊ, 25 मई 2026, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज प्रतीक यादव की तेरहवीं में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष श्रीमती अपर्णा यादव जी के लखनऊ स्थित आवास पर स्वर्गीय प्रतीक यादव जी की आत्मा की शांति के लिए आयोजित त्रयोदशी संस्कार कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

डीडीयू के पीएचडी छात्र शिवम कुमार यादव को मिला ‘यंग जूलॉजिस्ट अवॉर्ड’

Posted on 25/05/2026
Time 11:30 A.M
Gorakhpur
Santosh Kumar Singh

सिक्किम में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया विश्वविद्यालय का मान

​गोरखपुर: 25 मई 2026 ( उप्र समाचार सेवा) दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू) के जूलॉजी विभाग ने एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान दर्ज कराई है। विभाग के पीएचडी शोधार्थी शिवम कुमार यादव को सिक्किम में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिष्ठित ‘यंग जूलॉजिस्ट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। शिवम की इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय और गोरखपुर का नाम रोशन हुआ है।

सिक्किम अल्पाइन यूनिवर्सिटी, नामची में ‘नेचर एंड नेचुरल साइंसेज’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का जमावड़ा लगा था। इस प्रतिष्ठित मंच पर शिवम कुमार यादव ने जलीय प्रदूषण और घोंघों (मोलस्क) के व्यवहार पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। उनके इस शोध कार्य की विशेषज्ञों ने काफी सराहना की, जिसके चलते उन्हें ‘यंग जूलॉजिस्ट अवॉर्ड’ से नवाजा गया।

शिवम वर्तमान में डीडीयू के जूलॉजी विभाग में प्रोफेसर विनय कुमार सिंह की देखरेख में अपनी पीएचडी पूरी कर रहे हैं। उनका शोध मुख्य रूप से जलीय जीवों की सुरक्षा और प्लास्टिक प्रदूषण से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में केंद्रित है। शिवम की यह उपलब्धि उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का परिणाम है। इससे पहले भी उन्हें ‘यंग रिसर्चर अवॉर्ड’ जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं।

शिवम की इस बड़ी कामयाबी पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने गहरा हर्ष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह डीडीयू के लिए गौरव का क्षण है। शिवम की सफलता न केवल उनके अनुशासन और कठिन परिश्रम को दर्शाती है, बल्कि यह हमारे विश्वविद्यालय के अन्य शोधार्थियों और छात्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

गंगा दशहरा और भारतीय लोकजीवन की परम्पराएँ – डाॅ० राकेश सक्सेना

Rakesh Saxena

एटा 25 मई उप्रससे। गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह भारतीय लोकजीवन, धार्मिक चेतना और सामाजिक समरसता का अद्भुत पर्व है। मान्यता है कि इसी दिन राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं थीं। स्कंदपुराण के अनुसार– ‘ ज्येष्ठे मासि शुक्ल पक्षे दशम्यां हस्तसंयुते। हरते दश पापानि तस्माद् दशहरा स्मृतम्।। ‘ अर्थात् ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा स्नान दस प्रकार के पापों ( हिंसा, चोरी, व्यभिचार, कटु वचन, झूठ, चुगली, बकवास, परद्रव्य चिंतन, दूसरों का बुरा सोचना, नास्तिकता ) का नाश करता है इसलिए इसे दशहरा कहा गया। भारतीय लोकजीवन में पर्व धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं होते, वे सामुदायिक जीवन, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक निरंतरता के वाहक होते हैं। गंगा दशहरा भी इसी परम्परा का जीवंत उदाहरण है।
लोकआस्था के इस पर्व पर लाखों श्रद्धालु मंत्रोच्चार के साथ गंगा स्नान करते हैं, गंगा में दीप प्रवाहित किए जाते हैं। यह दीपदान श्रद्धा, आशा और आत्मिक प्रकाश का प्रतीक है। गंगा आरती के समय घंटों, शंखों और मंत्रों की ध्वनि वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएँ लोकगीतों व भजनों को गाती हैं तथा परिवार के सुख -समृद्धि की कामना करतीं हैं।इस पर्व पर जलदान, अन्नदान,वस्त्रदान की परम्परा का निर्वाह किया जाता है। ज्येष्ठ मास की प्रचण्ड गर्मी में पथिकों को शीतल जल, शर्बत पिलाया जाता है, जो भारतीय समाज की करुणा और सहअस्तित्व की भावना को दर्शाती है। हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, पटना, गढ़मुक्तेश्वर आदि अनेक स्थानों पर मेले लगते हैं जो भारतीय लोकसंस्कृति के जीवंत केन्द्र होते हैं। यहाँ पर लोककला, लोकसंगीत, हस्तशिल्प और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। गंगातट पर बड़े-बड़े भव्य पण्डालों में गंगा अवतरण की कथा, भजन, कीर्तन की परम्परा लोकजीवन को धार्मिक चेतना से जोड़ती है।
गंगा भारतीय सभ्यता का प्रमुख केन्द्र रही है। इसने अपने तटों पर केवल नगर ही नहीं बसाए अपितु कृषि, व्यापार और परिवहन को भी विकसित किया। इसी कारण गंगा को भारतीय संस्कृति की जीवन रेखा कहा जाता है। उत्तर भारत की सांस्कृतिक चेतना में गंगा का विशेष योगदान रहा है। कवि और साहित्यकारों ने भी इसको भारतीय संस्कृति की आत्मा कहा है। यह पर्व अमीर-गरीब, जाति-वर्ग और क्षेत्रीय भेद को मिटाकर वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को सशक्त करता है। भारतीय लोकजीवन में गंगा को माँ कहा जाता है। यह मातृभाव भारतीय संस्कृति की संवेदनशीलता का द्योतक है।
आधुनिक भौतिकवादी, उपभोक्तावादी युग में गंगा दशहरा मनुष्य को प्रकृति, आस्था और समाज से जोड़ने का अवसर प्रदान करता है। आज गंगा प्रदूषण एक गम्भीर समस्या बन चुकी है अत: अपनी आस्था के साथ इस पर्व को गंगा संरक्षण संकल्प दिवस बनाने की आवश्यकता है। यदि गंगा स्वच्छ व अविरल रहेगी तभी भारतीय संस्कृति की यह धारा जीवित रहेगी। सरकार द्वारा नमामि गंगे जैसी योजनाएँ संचालित हैं किन्तु जनसहभागिता के अभाव में सफलता पाना सम्भव नहीं है। गंगा में कचरा न डालना, प्लास्टिक का उपयोग न करना, जल संरक्षण करना, स्वच्छता बनाए रखना आदि बातों का प्रत्येक नागरिक को संकल्प लेना चाहिए। पापों को धोने वाले इस पवित्र नीर में जहर न घोलें! इसके आँचल को स्वच्छ और साफ रहने दें।

सरकारी स्कूलों और भवनों में चोरी करने वाला गिरोह गिरफ्तार, 09 आरोपी सलाखों के पीछे

Posted on 25/05/2026
Time 15:30 P.M
Gorakhpur
Santosh Kumar Singh

​गोरखपुर : 25 मई 2026 ( उप्र समाचार सेवा) पीपीगंज थाना पुलिस ने सरकारी भवनों और विद्यालयों को निशाना बनाने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस गिरोह के 09 सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में चोरी का सामान बरामद किया है। बरामद सामानों की अनुमानित कीमत करीब 3,10,000 रुपये बताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार, पिछले कुछ समय से क्षेत्र के सरकारी स्कूलों और कार्यालयों में चोरी की घटनाएं बढ़ गई थीं। 08 अप्रैल 2026 को प्राथमिक विद्यालय ताललिखिया के प्रधानाध्यापक ने तहरीर दी थी कि विद्यालय से गैस सिलेंडर, चूल्हा, राशन और लोहे का सामान चोरी हो गया है। इसके बाद 22 मई 2026 को बैरघट्टा पंचायत भवन से कंप्यूटर और प्रिंटर चोरी होने की सूचना मिली। इन मामलों में थाना पीपीगंज में मुकदमे दर्ज कर पुलिस जांच में जुटी थी।

पुलिस अधीक्षक उत्तरी के मार्गदर्शन और क्षेत्राधिकारी कैम्पियरगंज के पर्यवेक्षण में पुलिस टीम ने जाल बिछाया और गिरोह के 09 सदस्यों—रमेश उर्फ सूईत, अनिल, प्रवीण यादव, सन्नी गौड़, गंगा सागर मद्देशिया, गोपीचंद मद्देशिया, बाल मुकुन्द उर्फ मक्कू, यशपाल उर्फ मुन्ना और शेषमणि निषाद को गिरफ्तार किया।

आरोपियों के पास से पुलिस ने ​05 गैस सिलेंडर, ​04 एलईडी टीवी, ​01 एचपी मॉनिटर व 01 फोक्सी यूपीएस, ​01 प्रिंटर, कीबोर्ड और माउस, ​01 मोबाइल फोन बरामद किया है।

पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि वे गैंग बनाकर आर्थिक लाभ के लिए सरकारी भवनों और स्कूलों को निशाना बनाते थे। वे मुख्य रूप से रात के समय सरकारी भवनों के दरवाजों की कुंडी काटकर अंदर घुसते थे और कीमती सामान चुराकर उसे बेच देते थे। पुलिस के अनुसार, इन आरोपियों के पास से सहजनवां और कैम्पियरगंज थाना क्षेत्रों में दर्जनो चोरी के मामलों का माल भी बरामद हुआ है।
​पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की विधिक कार्यवाही शुरू कर दी है।

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