लोकसभा में नेता विरोधी दल राहुल गांधी ने 03 जून को दिल्ली में एक विस्मयकारी और रहस्यमय बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत में भयंकर “आर्थिक सुनामी” आने वाली है। इसके साथ ही कहा कि “एक साल के भीतर मोदी जी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे”। उनकी पहली बात राजनीतिक दल के आकलन के रूप में देखी जा सकती है। किंतु दूसरी बात “विस्मय और रहस्य” पैदा करती है। इससे भी ज्यादा ये किसी “गहरे षडयंत्र” की ओर इशारा करती है। क्योंकि उन्होंने अपने भाषण में ये नहीं कहा कि एक साल में भाजपा सरकार गिर जाएगी, बल्कि ये कहा कि “मोदी जी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे”। इसका आशय तो ये है कि बीजेपी सरकार रहेगी,लेकिन मोदी जी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे। यही बात षडयंत्र की ओर इशारा करती है। क्या मोदी जी के खिलाफ कोई साजिश रची गई है। जिसकी जानकारी राहुल गांधी को है। राहुल गांधी ने अपने इसी भाषण में देश में “इमरजेंसी” लगने की भी आशंका व्यक्त की है। उन्होंने ये भी कहा कि इंटेलीजेंस के बड़े लोग उन्हें रिपोर्ट दे रहे है। आखिर वे रिपोर्ट क्या है? देश जानना चाहता है।
दरअसल भारत में कई राजनीतिक दल ऐसे है जो लगातार पराजय से हताश और निराश है। ये दल राजनैतिक सफलता की लालसा में कुछ भी करने और किसी भी सीमा तक जाने को तैयार है। ऐसी ही पार्टी है कांग्रेस। ये अब मोदी जी और भाजपा से राजनीतिक मुकाबला नहीं कर पा रही है। जब कोई दल या व्यक्ति स्थापित सिद्धांतों और मानदंडों का पालन करके सफलता अर्जित नहीं कर पाता है तो वह षडयंत्र का सहारा लेता है। मोदी जी के “एक साल के भीतर प्रधानमंत्री नहीं रहने की बात” किसी ऐसे ही षडयंत्र का हिस्सा तो नहीं? प्रश्न गंभीर और चिंतनीय है। न केवल भारत सरकार और भाजपा के लिए बल्कि इस देश के करोड़ों देशवासियों के लिए भी।
राहुल गांधी बुधवार को दिल्ली के इंदिरा भवन में “आदिवासी कांग्रेस” के सम्मेलन को जब संबोधित कर रहे थे, तो उन्होंने आर्थिक सुनामी की आशंका के साथ ये भी कहा कि देश का सिस्टम कोलैप्स कर चुका है। प्रोटेक्शन सिस्टम खत्म हो गया है। इलेक्शन कमीशन, अधिकारी सब डरे हुए है। इंस्टीट्यूशनल रिवॉल्ट हो रहा है। ये सब बातें कह कर वे न केवल दुनिया के सामने भारत की छवि धूमिल कर रहे हैं, बल्कि पश्चिम एशिया के अभूतपूर्व संकट के दौरान भारत को कमजोर बता कर राष्ट्रीय संकट खड़ा कर रहे है। भारत इस समय गंभीर ऊर्जा आपूर्ति की चुनौती का सामना कर रहा है। इसके लिए नए नए आपूर्तिकर्ता देशों की तलाश जारी है। तब भारत को मजबूत अर्थव्यवस्था दर्शाया जाना जरूरी है। नेता विरोधी दल होने के बावजूद राहुल गांधी ये भूल गए कि वर्तमान ऊर्जा संकट और अर्थव्यवस्था को स्थिर तथा अधिक मजबूत बनाने की चुनौती भारत की है न कि भाजपा की। इसे कांग्रेस और भाजपा के रूप में नहीं बल्कि देश के रूप में देखने की जरूरत है। यदि दुनिया में ये संदेश जायेगा कि भारत का सिस्टम कोलैप्स कर गया है, भयंकर आर्थिक सुनामी आने वाली है, तो कौन सा देश तेल गैस हमें देगा? यह संकट किसी राजनीतिक दल या किसी नेता विशेष का नहीं बल्कि, भारत के 140 करोड़ देशवासियों का होगा।
दरअसल राष्ट्र की मुख्यधारा और राष्ट्रीय हितों की अनदेखी करना राहुल गांधी की आदत बन गई है। गत वर्ष जुलाई में जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “इंडिया की इकॉनमी एक डेड इकॉनमी” है, तो पूरे देश में अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ गुस्सा था। उस समय भी 31 जुलाई 2025 को राहुल गांधी ने एक्स (पूर्ववर्ती ट्विटर) पर लिखकर ट्रंप की बात का समर्थन किया था। उन्होंने लिखा कि “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अलावा सब जानते है कि भारत की अर्थव्यवस्था मृत हो चुकी है”। हालांकि उनके इस बयान की देशभर में निंदा हुई और कांग्रेस की किरकिरी हुई। मगर ये राहुल गांधी है जो न समझने को तैयार है और न ही राजनीतिक परिपक्वता लाने को। खैर नुकसान उनके बयानों से कुछ अंश में देश का तो होता ही है, बल्कि उनकी पार्टी का ज्यादा होता है।
कांग्रेस को अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए अपने इस बड़बोले नेता पर लगाम कसनी चाहिए। लेकिन फिर वहीं प्रश्न आखिर घंटी बांधेगा कौन ?
लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।
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