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शाकुंभरी खोल में आई अचानक बाढ़, दर्जनों वाहन बहे, दुकानें क्षतिग्रस्त

May 29, 2026

शाकुंभरी खोल में आई अचानक बाढ़, दर्जनों वाहन बहे, दुकानें क्षतिग्रस्त

Posted on 29.05.2026 Friday, Time 03.51 PM, Shakumbari Devi Mandir, Sharanpur

बेहट(सहारनपुर), 29 मई 2026, तहसील बेहट क्षेत्र स्थित सिद्धपीठ मां शाकंभरी देवी मंदिर परिसर में शुक्रवार को शाकंभरी खोल (नदी) में अचानक बाढ़ आ गई। इससे अफरा-तफरी मच गई। तेज बहाव के चलते श्रद्धालुओं में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और लोगों ने भागकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचकर जान बचाई। बताया जा रहा है कि तेज बहाव में ट्रैक्टर-ट्रॉली, कारें, बाइकें, क्रेन व जेनरेटर सहित दर्जनों वाहन बह गए। वहीं मंदिर परिसर में लगी कई दुकानें भी बाढ़ की चपेट में आ गईं। हादसे मे दो श्रद्धालुओं के बहने से मौत की भी अपुष्ट सूचना है.!

जानकारी मिलते ही एसडीएम बेहट मानवेंद्र सिंह, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, इंस्पेक्टर मिर्ज़ापुर सूबे सिंह, इंस्पेक्टर बेहट जितेंद्र कुमार दीखित सहित पुलिस व प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंच गए और राहत कार्य शुरू कर दिया गया।

हिन्दी पत्रकारिता: ध्येय यात्रा के गौरवशाली 200 वर्ष

Article Posted on 29.05.2026, Friday, by Sarvesh Kumar Singh, Hindi Patrakarita Divas

सर्वेश कुमार सिंह
हिंदी पत्रकारिता यात्रा के 200 वर्ष पूर्ण कर रही है। इस यात्रा में हिंदी पत्रकारिता ने न केवल खुद को नित नए आयाम के रूप में गढ़ा बल्कि दायित्व बोध को भी बगैर थके, बगैर रुके निभाया। भाषा,शैली, व्याकरण और साहित्य को इन 200 सालों में उन्नत किया। हिंदी पत्रकारिता ने स्वातंत्र्य पूर्व काल में ध्येयपूर्ण (मिशनरी) भाव से स्वाधीनता की अलख जगाई। समाज में सुधारवादी आंदोलनों के लिए जनजागरण किया। स्त्री शिक्षा, बाल विवाह जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय नेताओं की अपील को स्वर दिया। स्वाधीन भारत में लोकतंत रक्षक की भूमिका में हिंदी पत्रकारिता सबसे आगे खड़ी हुई।
तीस मई 1826 को जब पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने कानपुर से कोलकाता जाकर पहला हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र “उदंत मार्तंड” प्रकाशित किया, तो किसी को नहीं मालूम था कि एक दिन हिंदी पत्रकारिता भारत के जन-जन, गांव-गांव, शहर-कस्बों की आवाज बन जाएगी। सूचना और संवाद का ये माध्यम समाज सुधार से लेकर, जन समस्याओं के निराकरण का माध्यम और लोकतंत्र का प्रहरी बन जाएगा।
हिंदी पत्रकारिता को पुष्पित, पल्लवित करने में अनेक महान संपादकों और साहित्यकारों ने न केवल योगदान किया, बल्कि अपने जीवन को भी इस ध्येय के लिए समर्पित कर दिया। ये सफल विकास यात्रा शून्य से शिखर तक जिन संपादकों की मेधा और अथक परिश्रम से आज यश पा रही है, उनमें पंडित जुगल किशोर शुक्ल,भारतेंदु हरिश्चंद्र, दुर्गा प्रसाद मिश्र,बाबू राव विष्णु राव पराड़कर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, माखनलाल चतुर्वेदी, गणेश शंकर विद्यार्थी, मुंशी प्रेमचंद्र, हनुमान प्रसाद पोद्दार, पंडित अटल बिहारी वाजपेयी, विद्यानिवास मिश्र, हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय, धर्मवीर भारती, राजेंद्र अवस्थी,रघुवीर सहाय, राजेंद्र यादव, शिवपूजन सहाय, बनारसी दास चतुर्वेदी,महात्मा गांधी, पंडित मदन मोहन मालवीय, प्रताप नारायण मिश्रा, वचनेश त्रिपाठी का स्मरण समीचीन है।
हिंदी पत्रकारिता के उद्भव में जिन नगरों और महानगरों के प्रबुद्ध समाज, व्यवसायियों और राज घरानों का योगदान अग्रणी है, उनमें वाराणसी सबसे महत्वपूर्ण है। कोलकाता, आगरा, कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, जबलपुर, मिर्जापुर , मेरठ, बरेली,मुरादाबाद से भी शुरुआती दौर में कई प्रमुख हिंदी पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित हुई। उत्तर प्रदेश में पहला हिंदी दैनिक हिंदुस्तान प्रतापगढ़ जनपद की रियासत काला कांकर से 1885 में राजा रामपाल सिंह ने प्रकाशित किया था। इसके संपादक पंडित मदन मोहन मालवीय थे।
हिंदी के कुछ समाचारपत्र अल्प अवधि तक प्रकाशित हुए, किंतु ये हिंदी पत्रकारिता की नींव बन गए। इनका उल्लेख किए बिना 200 साल की यात्रा का स्मरण और सिंहावलोकन अधूरा है। ये समाचार पत्र और पत्रिकाएं उदंत मार्तंड के प्रकाशन से शुरू होकर अनवरत जारी है। बनारस अखबार, सरस्वती, सुधाकर, बुद्धि प्रकाश, समाचार सुधा वर्षण, प्रजा हितैषी, कविवचन सुधा, हरिश्चंद्र चंद्रिका,,बाल बोधिनी, आनंद कादम्बिनी,ब्राह्मण, भारत मित्र, हिंदुस्तान, नवभारत, अभ्युदय, प्रताप, कर्मवीर, आज, कल्याण, पाञ्चजन्य, राष्ट्रधर्म, वीर अर्जुन, स्वदेश, भास्कर, दैनिक जागरण, अमर उजाला , हंस, विशाल भारत, धर्मयुग, दिनमान, कादम्बिनी, सारिका, अरुण का हिंदी पत्रकारिता में अतुलनीय योगदान है।
आज हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने पर जब हम उदंत मार्तंड का स्मरण कर रहे हैं। तब हमें पिछले 100 का भी स्मरण स्वाभाविक रूप से होता है। सौ वर्ष पूर्व हिंदी पत्रकारिता से जुड़ी दो घटनाएं और हुई जिन्हें याद करने से गौरव की अनुभूति होती है। वर्ष 1926 में यानी ठीक 100 साल पहले गोरखपुर से धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक चेतना को जागृत रखने के लिए “कल्याण” पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ। हालांकि पहला अंक 1926 में मुंबई से निकला, लेकिन 1927 के बाद से इसका प्रकाशन गोरखपुर से हो रहा है। हिंदी की आध्यात्मिक पत्रकारिता का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण कल्याण बना हुआ है। इस पत्रिका के 100 वर्ष में लगभग 90 विशिष्ट अंक तथा अनगिनत विशेषांक प्रकाशित हुए है। इन अंकों ने भारत के आध्यात्मिक, पौराणिक, वैदिक ज्ञान को सहेजने का काम किया है। इसके लिए जयदयाल गोयनका और हनुमान प्रसाद पोद्दार की जितनी प्रशंसा की जाय कम ही है। कल्याण भी इस वर्ष अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर रहा है।
इसी के साथ ही 1925 में “हिंदी साहित्य सम्मेलन” के तत्वावधान में “प्रथम संपादक सम्मेलन” वृंदावन (मथुरा) में हुआ था। इसे भी 101 साल पूरे हो रहे है। इस सम्मेलन में हिंदी के मूर्धन्य विद्वान और संपादक बाबू राव विष्णु राव पराड़कर जी का ऐतिहासिक भाषण हुआ। वे इस सम्मेलन के अध्यक्ष थे। उन्होंने 100 साल पहले आज की हिंदी पत्रकारिता की “दशा और दिशा” की भविष्यवाणी की थी। भविष्य के संपादकों के प्रबंधकों के प्रभाव में रहने की आशंका भी व्यक्त की थी। जो आज सच साबित हो रही है। इस संपादक सम्मेलन में पराड़कर जी ने बताया था कि “समाचार पत्र के दो मुख्य धर्म है – “एक तो समाज का चित्र खींचना और दूसरा उसे सद उपदेश देना”। हमारा दूसरा कार्य “लोक-शिक्षण हमारा सच्चा धर्म है”। इसी के द्वारा हम देश की और जनता की सच्ची सेवा कर सकते हैं। “हमें अपने पत्रों में सदा सर्व प्रकार से उच्च आदर्श को स्थान देना चाहिए”
आज की हिंदी पत्रकारिता तकनीकी युग में है। तकनीक के अनेक उपायों से सज्जित है। इससे जो मुख्य परिवर्तन हुआ है, वह दो स्तरीय है। एक प्रकाशन की कागज पर निर्भरता कम हुई है। पत्र-पत्रिकाएं डिजिटल स्वरूप में हमारे सामने है। आसानी से उपलब्ध भी है। पहुंच की गति तीव्र हुई है। हमें अब 24 घंटे इंतजार नहीं करना है, बल्कि इंटरनेट से हिंदी समाचार तत्काल मिल रहे है। ये अच्छी स्थिति है,लेकिन चिंताजनक ये है कि इस डिजिटल युग में पत्रिकाओं का युग समाप्तप्राय: हो गया है।
हमारी हिंदी की 200 साल की पत्रकारिता गौरवशाली रही है। इस गौरव को बनाए रखने और इसमें श्रीवृद्धि करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। हिंदी पत्रकारिता को शब्दों की दृष्टि से समृद्ध करने, भाषा और व्याकरण की शुद्धता को बनाए रखने की आवश्यकता है। साथ ही हिंदी पत्रकारिता की पूंजी विश्वसनीयता है। दायित्वबोध के साथ तथ्यात्मक और निष्पक्ष पत्रकारिता को अपना धर्म बनाकर हम अगली शताब्दियों को और अधिक गौरवशाली बना सकते है।
लेखक परिचय: सर्वेश कुमार सिंह,स्वतंत्र पत्रकार, लखनऊ,
संपर्क E mail : sarveshksingh61@gmail.com
Mob 9140624166

Sarvesh Kumar Singh Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

Sarvesh Kumar Singh
Senior Journalist, Lucknow Uttar Pradesh

काशी,दुर्गियाना ट्रेनों से बरामद अनाधिकृत पानी 43 पेटियां जब्त

-मुरादाबाद स्टेशन पर चला ट्रेनों में बेटिकट चेकिंग अभियान
गन्दगी फैलाने वालों पर भी कार्यवाही

Post on 28.5.26
Thursday Moradabad
Rajesh Bhatia,Time 9.00 pm
मुरादाबाद, उप्र समाचार सेवा
गर्मी के सीजन में बढ़ी भीड़
को देखते हुए यात्री सुविधा के लिए गुरुवार को डीआरएम के निर्देश पर व्यापक अभियान चलाया गया।ट्रेनों में चेकिंग से लेकर प्लेटफॉर्म,स्टेशन परिसर में अभियान चला।अभियान के दौरान ट्रेनों में अवैध रूप से लाया जा रहा अनाधिकृत पानी की 43 पेटियां(कार्टन)को बरामद किया गया।हालांकि इस बीच पाकर मौके से वेंडर फरार हो गया। पानी की पेटियों को जब्त कर लिया गया।
गुरुवार को डीआरएम विनीता श्रीवास्तव के निर्देश पर रेलवे स्टेशन पर चेकिंग अभियान चलाया गया।सीनियर डीसीएम महेश यादव के निर्देश पर एसीएम एचएस मीना,टिकट चेकिंग स्टाफ ने मुरादाबाद में कई ट्रेनों को खंगाला। इस दौरान पहुंची काशी विश्वनाथ 15128 व दुर्गियाना एक्सप्रेस 12358 में अनाधिकृत पानी की पेटियों के ढेर लगे थे।दोनों गाड़ियों में कोचों के दरवाजे पर पानी के कार्टन,बोतलें होने से आवाजाही भी तंग हो रही थी। पानी का‌ वेंडर के सामने न आने से रेलवे ने सारी पेटियां उतरवा लीं और 43 पेटियों को जब्त कर लिया।
इसके अलावा टिकट चेकिंग टीम ने अभियान के दौरान ट्रेनों में सघन चेकिंग की।चेकिंग में बेटिकट 12 यात्रियों को पकड़ा। इनसे किराया व जुर्माना समेत
5870 रुपये,36 अनियमित यात्रियों से 21,230 रुपए वसूले
गए। स्टेशन परिसर में गंदगी फैलाने पर दस यात्रियों पर 3500 रुपए जुर्माना लगाया गया। अभियान में रेलवे ने कुल तीस हजार 600 रुपए का राजस्व मिला।

May 28, 2026

मथुरा – महोली में चुनावी रंजिश को लेकर दो पक्षों में पथराव और फायरिंग, कई घायल 

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
मथुरा।थाना हाईवे क्षेत्र के अंतर्गत वार्ड संख्या 59 के महोली गांव में गुरुवार को चुनावी रंजिश और पुराने विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। अधिक मास परिक्रमा मार्ग पर प्याऊ लगाने और प्रसाद वितरण को लेकर पार्षद प्रतिनिधि राजवीर सिंह और स्थानीय निवासी चंद्रपाल के पक्ष आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया और दोनों पक्षों के बीच जमकर ईंट-पत्थर चलने लगे।
करीब आधे घंटे तक दोनों ओर से पथराव होता रहा। इसके बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया जिसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। गोलीबारी और पथराव से पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। परिक्रमा मार्ग पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाई। घटना के दौरान कई लोग घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार और एसपी सिटी राजीव कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने गांव और आसपास के क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है तथा उपद्रवियों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और वीडियो फुटेज के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग पर बड़ी कार्रवाई, 18 सीनियर छात्र सस्पेंड, लगा भारी जुर्माना

Posted on 28/05/2026
Time 19:25 P.M
Gorakhpur
Santosh Kumar Singh

​गोरखपुर: 28 मई 2026 ( उप्र समाचार सेवा) बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग का मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। 2025 बैच के जूनियर छात्रों को प्रताड़ित करने के आरोप में कॉलेज प्रशासन ने 18 सीनियर छात्रों को एक महीने के लिए निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है और उन पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

​शिकायत के अनुसार, 12 से 14 मई की रात राजेंद्र हॉस्टल में सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। पीड़ित छात्रों ने आरोप लगाया कि सीनियर छात्र अक्सर हॉस्टल में आकर उन्हें घंटों तक जबरन खड़ा रखते हैं, उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और उन्हें डराते-धमकाते हैं।

​यह गंभीर मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़ित छात्रों ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) और यूजीसी (UGC) को ईमेल के जरिए लिखित शिकायत भेजी। ईमेल में रैगिंग करने वाले 18 छात्रों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज थे। इस शिकायत के बाद NMC ने कॉलेज प्रशासन को तत्काल जांच कर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

NMC के सख्त निर्देशों के बाद प्रिंसिपल डॉ. रामकुमार जायसवाल की अध्यक्षता में एंटी-रैगिंग कमेटी की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई। घटना की पुष्टि होने और पूछताछ के बाद प्रशासन ने दोषी पाए गए 18 सीनियर छात्रों को एक महीने के लिए कॉलेज से सस्पेंड कर दिया गया। इनमें 2024 बैच के 10 छात्र, तथा 2023 और 2022 बैच के छात्र शामिल हैं। प्रत्येक दोषी छात्र पर 25,000 रुपये का आर्थिक दंड लगाया गया है। इसी मामले में सीनियरों का साथ देने वाले 5 अन्य छात्रों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। वहीं, दो रेजिडेंट छात्राओं को चेतावनी नोटिस (Warning Notice) जारी किया गया है।
कॉलेज प्रशासन ने सभी आरोपी छात्रों के अभिभावकों को बुलाकर उन्हें सख्त हिदायत दी है और चेतावनी दी है कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति होने पर कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
​बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि संस्थान में रैगिंग के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है और छात्रों के अनुशासन व सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। ​

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