Editorial 22 May 26, Time 11.05 AM
सर्वेश कुमार सिंह
जब भी किसी वर्ग को अपमानित किया जाएगा, या उसके अस्तित्व को चुनौती दी जाएगी तो प्रतिक्रिया और प्रतिकार जरूर होगा। इसी प्रतिक्रिया का एक डिजिटल स्वरूप है कॉकरोच जनता पार्टी। लेकिन क्या ये युवाओं के आक्रोश को प्रतिध्वनि देने का सही और सक्षम मार्ग है। क्या ये पार्टी युवाओं के सपनो को उनकी आकांक्षाओं को साकार रूप देने की सही दिशा है। सवाल अनेक है, लेकिन युवा और खासकर बेरोजगार नाराज है, उनपर सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने गैर जरूरी टिप्पणी की है। एक मामले की सुनवाई करते हुए 15 मई को न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने युवाओं की तुलना कॉकरोच से कर दी। उन्होंने कहा कि कुछ युवा बेरोजगार, फर्जी डिग्रियां लेकर मीडिया, सोशल मीडिया में घुस जाते है, या एक्टिविस्ट बन जाते है और कॉकरोच की तरह सिस्टम पर हमला करते है। इस टिप्पणी ने युवाओं, बेरोजगारों, मीडिया से जुड़े लोगों को आहत किया। उन्होंने खुद को अपमानित महसूस किया। वैसे आम तौर पर जजों की ये आदत हो गई है कि वे केस की सुनवाई के दौरान अपने ज्ञान का प्रकटीकरण करते हुए टिप्पणियां करते है । विषय पर टिप्पणी तो उचित है किंतु कभी कभी विषय इतर टिप्पणी विवाद खड़ा कर देती है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। हालांकि सीजेआई ने अपनी टिप्पणी पर स्पष्टीकरण भी दिया। लेकिन जो संदेश जाना था वह तो चला गया।
अब इसकी प्रतिक्रिया और प्रतिशोध का पक्ष सामने आया। इस बयान में प्रमुख रूप से मीडिया क्षेत्र की अवहेलना और उपेक्षा का भाव निहित था। लेकिन मीडिया पक्ष से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। प्रतिक्रिया आई एक आईटी और सोशल मीडिया व्यवसाई की ओर से, इनका नाम है, अभिजीत दीपके। इन्होंने अपने व्यावसायिक अनुभव का लाभ उठाकर एक पार्टी बना दी और नाम रखा कॉकरोच जनता पार्टी। ये काम यू तो सीजेआई के बयान के अगले ही दिन यानि कि 16 मई को कर दिया। इस डिजिटल अभियान को चार दिन में बड़ी सफलता मिली। इंस्टाग्राम पर सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के 140 लाख फॉलोअर्स हो गए। एक्स (पूर्ववर्ती ट्विटर) पर भी भारी समर्थन मिला है। लेकिन भारत सरकार के अनुरोध पर 21 मई को सीजेपी का एक्स अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया। अब उन्होंने नया अकाउंट बनाया है। कुल मिलकर कॉकरोच जनता पार्टी को गिजिटल समर्थन बढ़ रहा है।
इस जिजिटल पार्टी के संस्थापक दीपके ने सक्रिय राजनीति करने की घोषणा की है। वे डिजिटल आक्रोश को यथार्थ राजनीतिक परिणाम में बदलना चाहते है। लेकिन क्या वे इसमें सफल होंगे। ये राजनीति का अभिनव प्रयोग होगा। किंतु इस अभियान का मूल्यांकन वास्तव में जनता करेगी। हमारे लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी है। हमारे वोटर चाहे वे शहरी हों या ग्रामीण,उच्च शिक्षित हों या अल्पशिक्षित, युवा हों या बुजुर्ग, महिला हों या पुरुष ये सभी सही और गलत के चयन का विवेक रखते है। ये तथ्य भारत के मतदाताओं ने समय समय पर साबित किया है।कॉकरोच जनता पार्टी को इसी परीक्षा से गुजरना होगा। अभिजीत के अभियान की सफलता या असफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि वे क्या अतीत की अपनी छवि से उबर पाते है या नहीं। क्योंकि वे आम आदमी पार्टी के डिजिटल कैंपेनर रहे है। उन पर केजरीवाल का प्रभाव कितना दृष्टि गोचर होगा। क्या वे इस अभियान को राहुल गांधी, अखिलेश यादव और केजरीवाल की राजनीतिक भाषा और सोच से पृथक रख पाते है या नहीं। अगर उनकी पार्टी की राजनीतिक सोच, दिशा और भाषा विपक्ष का प्रतिबिंब बनी तो , तो हाल कांग्रेस, आप जैसा ही होगा। हां अगर उन्होंने सच्चाई से युवाओं और बेरोजगारों के आक्रोश को स्वर दिया तो परिणाम सकारात्मक हो सकते है। उनके अभियान को विपक्ष का टूल किट अभियान कहा जाने लगा है। इसमें कितनी सच्चाई है ये समय आने पर स्पष्ट होगा। यदि ऐसा नहीं है तो अभिजीत दीपके युवाओं की आशा की किरण बन सकते है।



