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जीडीए की 16 कालोनियां नगर निगम को हस्तांतरित, बेहतर सुविधाओं व सुदृढ़ प्रबंधन का मार्ग प्रशस्त*

February 18, 2026

जीडीए की 16 कालोनियां नगर निगम को हस्तांतरित, बेहतर सुविधाओं व सुदृढ़ प्रबंधन का मार्ग प्रशस्त*

*संतोष कुमार सिंह*
*गोरखपुर*


*महानगर के सुनियोजित विकास की दिशा में बड़ा कदम*

गोरखपुर। महानगर के समग्र और सुनियोजित विकास की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा निर्मित 16 कालोनियों का औपचारिक रूप से गोरखपुर नगर निगम को हस्तांतरण किया गया। इस निर्णय से संबंधित क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं के विस्तार, नियमित रख-रखाव और प्रभावी शहरी प्रबंधन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
हस्तांतरण कार्यक्रम के दौरान महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, जीडीए के उपाध्यक्ष आनंद वर्धन, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल, नगर निगम एवं जीडीए के अधिकारीगण तथा जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को महानगर के सुव्यवस्थित विकास की दिशा में मील का पत्थर बताया।
अधिकारियों ने बताया कि अब इन 16 कालोनियों में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, साफ-सफाई, पेयजल, सीवर व्यवस्था और अन्य मूलभूत नागरिक सुविधाओं का संचालन व रख-रखाव नगर निगम द्वारा किया जाएगा। इससे कार्यों में समन्वय बढ़ेगा और शिकायतों के त्वरित निस्तारण में भी आसानी होगी। स्थानीय निवासियों को एक ही निकाय के माध्यम से सभी शहरी सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी।
महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य शहर को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाना है। नई कालोनियों के जुड़ने से जिम्मेदारियां बढ़ी हैं, लेकिन निगम पूरी प्रतिबद्धता के साथ नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता के माध्यम से गोरखपुर को आदर्श महानगर बनाने का संकल्प निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
जीडीए उपाध्यक्ष आनंद वर्धन ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा विकसित कालोनियों को नगर निगम को सौंपना एक सुविचारित प्रशासनिक कदम है, जिससे विकास कार्यों में एकरूपता आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सकेगा।
कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने समन्वय, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ महानगर के विकास को गति देने का संकल्प दोहराया। इस पहल को गोरखपुर के शहरी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिजर्व पुलिस लाइन में गोरखपुर पुलिस परिवार ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

Sub Inspector Santosh Kumar Gorakhpur

पुलिस उपनिरीक्षक संतोष कुमार

*सड़क दुर्घटना में उ0नि0 संतोष पासवान का असामयिक निधन**, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसपी सिटी ने दिया श्रद्धांजलि*

गोरखपुर। थाना रामगढ़ताल पर तैनात उपनिरीक्षक (उ0नि0) संतोष पासवान का सड़क दुर्घटना में असामयिक एवं दुःखद निधन हो जाने से गोरखपुर पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है। कर्तव्य निर्वहन के दौरान हुई इस दुर्घटना ने पूरे पुलिस परिवार को मर्माहत कर दिया। दिवंगत उ0नि0 संतोष पासवान को गोरखपुर पुलिस परिवार की ओर से रिजर्व पुलिस लाइन में पूरे सम्मान के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उ0नि0 संतोष पासवान अपने सहयोगी पुलिसकर्मियों के साथ महराजगंज जनपद में एक मामले में दबिश डालकर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान श्यामदेउरवा क्षेत्र में उनकी गाड़ी अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि वे गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर मिलते ही पुलिस विभाग में गहरा शोक व्याप्त हो गया।
दिवंगत उपनिरीक्षक के पार्थिव शरीर को रिजर्व पुलिस लाइन लाया गया, जहां वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कोस्तुभ सहित गोरखपुर पुलिस परिवार के अधिकारियों और कर्मचारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान दो मिनट का मौन धारण कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई तथा उन्हें औपचारिक सलामी देकर अंतिम सम्मान प्रदान किया गया। वातावरण गमगीन रहा और उपस्थित पुलिसकर्मियों की आंखें नम दिखीं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कोस्तुभ ने शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उ0नि0 संतोष पासवान एक कर्तव्यनिष्ठ, अनुशासित और साहसी अधिकारी थे। उन्होंने सदैव अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से किया। उनका असामयिक निधन पुलिस विभाग के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा पुलिस परिवार दिवंगत अधिकारी के परिजनों के साथ खड़ा है और हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।
सहकर्मियों ने बताया कि संतोष पासवान अपने सौम्य व्यवहार, टीम भावना और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। वे हमेशा कठिन परिस्थितियों में भी शांत रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन करते थे। उनके अचानक चले जाने से न केवल विभाग बल्कि उनके परिचितों और शुभचिंतकों में भी गहरा शोक है।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की सद्गति तथा शोकाकुल परिजनों को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। पुलिस परिवार ने एक स्वर में कहा कि उ0नि0 संतोष पासवान की सेवाओं और समर्पण को सदैव स्मरण रखा जाएगा।
गोरखपुर पुलिस परिवार की ओर से दिवंगत अधिकारी को शत्-शत् नमन करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनकी कर्तव्यपरायणता और सेवा भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

February 17, 2026

जौनसार-बावर की पहचान से जुड़े नाम विवाद पर हाईकोर्ट गंभीर, राज्य से मांगा जवाब

उप्र समाचार सेवा (UPSS)
दिनांक: 17 फरवरी 2026 | स्थान: वीरभद्र, ऋषिकेश (उत्तराखंड)
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने जौनसार-बावर क्षेत्र के लोगों की जातीय पहचान से जुड़े ‘जौनसारी’ और ‘जनसारी’ नामकरण विवाद को महत्वपूर्ण मानते हुए राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने कहा कि यह मामला मात्र वर्तनी की त्रुटि नहीं, बल्कि एक पूरे समुदाय के अधिकारों और सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच से संबंधित है।

गजट की गलती से बढ़ी समस्या
राज्य गठन के समय जारी केंद्र सरकार के आधिकारिक गजट में “Jaunsari” के स्थान पर “Jansari” दर्ज हो गया था। इस त्रुटि के चलते संबंधित समुदाय को केंद्रीय योजनाओं का लाभ लेने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

न्यायालय के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा है कि:
इस गलती को सुधारने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए?
केंद्र सरकार से इस संबंध में क्या पत्राचार या प्रगति हुई?
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न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर हुई ऐसी त्रुटियां सामाजिक और संवैधानिक प्रभाव डाल सकती हैं, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है।

जनहित याचिका का आधार
यह याचिका विकासनगर निवासी द्वारा दायर की गई, जिसमें कहा गया कि गलत नामांकन के कारण जौनसारी समुदाय की आधिकारिक पहचान प्रभावित हो रही है और योजनाओं का लाभ मिलने में अड़चनें आ रही हैं।

आगे की कार्यवाही
अब राज्य सरकार को निर्धारित समय सीमा में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि केंद्र स्तर पर संशोधन की प्रक्रिया शुरू हुई है या नहीं।
इस मामले को जनजातीय अधिकारों और प्रशासनिक शुद्धता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न के रूप में देखा जा रहा है।

पुलिस की स्कॉर्पियो श्यामदेउरवा में दुर्घटनाग्रस्त, दारोगा की मौत; पांच घायल

Sub Inspector Santosh Kumar Gorakhpur

पुलिस उपनिरीक्षक संतोष कुमार

Posted on 17.02.2026 Tuesday, Time 02.20 PM, Gorakhpur

गोरखपुर। महराजगंज से दबिश देकर लौट रही गोरखपुर पुलिस की टीम की स्कॉर्पियो श्यामदेउरवा क्षेत्र में दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। वाहन अनियंत्रित होकर पहले डिवाइडर से टकराया और फिर सड़क किनारे पेड़ से जा भिड़ा। इस दुर्घटना में दारोगा संतोष कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एसएसआई रमेश चंद्र कुशवाहा, महिला दारोगा गीता समेत पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस टीम महराजगंज में एक मामले में दबिश देकर वापस गोरखपुर लौट रही थी। देर रात श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र में अचानक वाहन अनियंत्रित हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि स्कॉर्पियो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। आसपास के लोगों की सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को तत्काल अस्पताल भिजवाया।
सभी घायलों का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में चल रहा है। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हालचाल लिया।
पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। प्राथमिक तौर पर वाहन के अनियंत्रित होने को हादसे की वजह माना जा रहा है। मृतक दारोगा के परिजनों को सूचना दे दी गई है और आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।

February 16, 2026

संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पर आधारित है – डॉ. मोहन भागवत जी

गोरखपुर, 15 फरवरी 2026। संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गोरक्ष प्रांत की ओर से तारामंडल स्थित बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ की दृष्टि पूर्णतया भारतीय चिंतन पद्धति से ही विकसित हुई है। आज समाज में संघ से अपेक्षाएँ बढ़ी हैं। विश्व के पास ऐसा कोई तरीका नहीं है जो समाज को सुख और शांति दे सके। इसलिए वह भी हमारी तरफ आशा भरी नजरों से देख रहा है। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष में पाश्चात्य चिंतन का प्रभाव पड़‌ने लगा था, जिसने भारतीय ज्ञान परम्परा को खण्डित करने का प्रयत्न किया और अपने चिंतन को स्थापित करने का प्रयास किया। किन्तु उनकी चिंतन पद्धति अधूरी थी। भारतीय ज्ञान परम्परा पर आधारित हमारी चिंतन पद्धति ही समाज में उत्पन्न शंकाओं का समाधान कर सकती है।

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