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गोरखपुर के जटेपुर में नल से निकल रहा नाले जैसा गंदा पानी*

February 19, 2026

गोरखपुर के जटेपुर में नल से निकल रहा नाले जैसा गंदा पानी*

संतोष कुमार सिंह
गोरखपुर

*रामबाग मोहल्ले में जनस्वास्थ्य पर खतरा, शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग मौन*

गोरखपुर। नगर निगम क्षेत्र के जटेपुर उत्तरी वार्ड नंबर 27 स्थित रामबाग मोहल्ले में इन दिनों हालात बेहद चिंताजनक हो चुके हैं। यहां घरों में लगे नलों से पीने योग्य स्वच्छ जल के स्थान पर नाले जैसा गंदा, काला और बदबूदार पानी निकल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्थिति इतनी खराब है कि यह पानी न तो पीने योग्य है और न ही किसी भी घरेलू उपयोग के लायक।
मोहल्ले के निवासियों के अनुसार पिछले कई दिनों से नलों से दूषित पानी आ रहा है। दुर्गंध इतनी तेज है कि पानी को छूना भी मुश्किल हो रहा है। कई परिवार मजबूरी में बाजार से बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं, जबकि कुछ लोग दूर के हैंडपंपों से पानी ढोकर ला रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह दोहरी मार साबित हो रही है।
स्थानीय महिलाओं का कहना है कि जिस पानी से वे अपने बच्चों की प्यास बुझाती थीं, आज वही पानी बीमारी का कारण बनता दिख रहा है। बच्चों और बुजुर्गों में पेट दर्द, उल्टी, दस्त और त्वचा संबंधी शिकायतें सामने आने लगी हैं। लोगों का स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो संक्रामक बीमारियां फैलना तय है।
मोहल्लेवासियों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जलकल विभाग और संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सबसे गंभीर बात यह है कि जलकल विभाग के जीएम का फोन तक नहीं उठ रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही फोन नहीं उठाएंगे तो जनता अपनी समस्या किससे कहे?
लोगों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी है कि जनस्वास्थ्य जैसे गंभीर मुद्दे पर विभाग की यह उदासीनता अस्वीकार्य है। “हर घर जल योजना का दावा करने वाले अधिकारी क्या जटेपुर की स्थिति से अनजान हैं, या जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं? यदि पाइपलाइन में लीकेज है या सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल रहा है तो उसे तत्काल दुरुस्त करना विभाग की जिम्मेदारी है।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, हम टैक्स और पानी का बिल समय से जमा करते हैं, लेकिन बदले में हमें गंदा और बदबूदार पानी मिल रहा है। शिकायत करने पर फोन तक नहीं उठाया जाता। आखिर हमारी सुनवाई कौन करेगा?”
विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी के सेवन से हैजा, टायफाइड, डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन को इसे सामान्य तकनीकी समस्या मानकर टालना नहीं चाहिए, बल्कि इसे संभावित जनस्वास्थ्य आपात स्थिति की तरह लेना चाहिए।
मोहल्ले के लोगों ने मांग की है कि तत्काल जलकल और नगर निगम की संयुक्त टीम मौके पर भेजी जाए, पाइपलाइन की जांच हो, पानी के सैंपल की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और जब तक समस्या का स्थायी समाधान न हो, तब तक स्वच्छ पानी के टैंकरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
जनता का यह भी कहना है कि यदि अधिकारी फोन तक नहीं उठाएंगे और जमीनी हालात का जायजा नहीं लेंगे तो यह प्रशासनिक संवेदनहीनता का स्पष्ट उदाहरण होगा। रामबाग मोहल्ले के लोग फिलहाल भय और आक्रोश के बीच जीवन जी रहे हैं। अब सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग कब जागेगा और क्या जीएम जलकल जनता की पीड़ा सुनने के लिए आगे आएंगे, या हालात किसी बड़ी बीमारी के बाद ही सुधरेंगे?
जनस्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित और ठोस कार्रवाई ही प्रशासन की संवेदनशीलता की असली परीक्षा होगी।

Gorakhpur कैंप में ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखों की रोशनी गई, डीएम ने दिए जांच के आदेश

Posted on 19.02.2026, Thursday Time 05.50 PM, Santosh Kumar Singh, Gorakhpur संतोष कुमार सिंह , गोरखपुर*मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं, कई की रोशनी गई*

गोरखपुर, 19 फरवरी। जिले के सिकरीगंज स्थित एक निजी अस्पताल में आयोजित मोतियाबिंद ऑपरेशन कैंप के बाद सामने आए गंभीर संक्रमण ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑपरेशन के बाद कई मरीजों की हालत बिगड़ गई, जिनमें से नौ मरीजों की आंखें निकालनी पड़ीं, जबकि कई अन्य की आंखों की रोशनी चली गई। यह मामला सामने आते ही प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि 1 फरवरी को न्यू राजेश हाइटेक हॉस्पिटल में आई कैंप आयोजित किया गया था, जिसमें करीब 30 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन किया गया। परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर ही कई मरीजों की आंखों में तेज दर्द, सूजन, खून आना और मवाद जैसी शिकायतें शुरू हो गईं। धीरे-धीरे स्थिति इतनी बिगड़ी कि 18 मरीजों में गंभीर संक्रमण पाया गया।
इन्दारी निवासी संजय सिंह ने बताया कि वे अपने पिता का ऑपरेशन कराने अस्पताल गए थे। ऑपरेशन के बाद आंख से लगातार खून आने लगा। पहले वाराणसी ले जाया गया, फिर दिल्ली तक इलाज कराया गया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। अंततः डॉक्टरों ने आंख निकालने की सलाह दी। संजय सिंह का कहना है कि उनके परिवार के दो लोगों का ऑपरेशन हुआ था और दोनों की स्थिति गंभीर हो गई।
इसी तरह रेखा नामक महिला ने बताया कि उनकी सास का ऑपरेशन भी इसी कैंप में हुआ था। ऑपरेशन के बाद आंख में तेज दर्द और मवाद की शिकायत शुरू हो गई। उन्होंने कहा कि 18 मरीजों की हालत बिगड़ने की जानकारी है और कई लोग अलग-अलग शहरों में इलाज करा रहे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई मरीजों को गोरखपुर से बाहर दिल्ली, लखनऊ और वाराणसी के सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच और कल्चर रिपोर्ट में गंभीर संक्रमण की पुष्टि हुई है।
मामले की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हुआ। जिलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि सिकरीगंज के एक निजी अस्पताल में आंख के ऑपरेशन के बाद संक्रमण की बात सामने आई है। पीड़ित मरीजों का अलग-अलग स्थानों पर इलाज चल रहा है। कुछ मरीजों को गंभीर संक्रमण हुआ है। अस्पताल को सील कर दिया गया है और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई और पंजीकरण निरस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बताया कि 4 फरवरी को जानकारी मिली कि 1 फरवरी को 30 ऑपरेशन किए गए थे। कई मरीजों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद जिला स्तरीय कमेटी गठित कर जांच शुरू की गई। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम ने भी अस्पताल का निरीक्षण किया। प्रथम दृष्टया मामला गंभीर संक्रमण का प्रतीत हो रहा है। एहतियातन अस्पताल के नेत्र विभाग को सील कर दिया गया है और संबंधित ऑपरेशन थिएटर की जांच की जा रही है।
इस घटना ने निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था और ऑपरेशन प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि लापरवाही और संक्रमण नियंत्रण में कमी के कारण यह स्थिति बनी। कई परिवारों की जिंदगी में अंधेरा छा गया है।
फिलहाल पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच जारी है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पीड़ित परिवार न्याय और उचित उपचार की उम्मीद में हैं। यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री “बजट पर युवा संवाद कार्यक्रम” में हुए शामिल*

*संतोष कुमार सिंह*
*गोरखपुर*

गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी वे भारतीय जनता युवा मोर्चा द्वारा योगिराज बाबा गंभीर नाथ प्रेक्षागृह में आयोजित “बजट पर युवा संवाद कार्यक्रम” में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया।आम बजट 2026-27 को लेकर यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें स्कूल और कॉलेजों से आए हुए छात्रों ने हिस्सा लिया।

केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट के बजट में बढ़ोतरी की गई है, ताकि हमारे नौजवान देश के विकास में अपना योगदान दे सकें। वर्तमान में एनीमेशन ग्राफिक्स AI का चलन है। कंटेंट क्रिएशन के लिए युवाओं को अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि कंटेंट क्रिएशन के लिए युवाओं को अवसर मिलेगा। आज युवाओं को इस बजट को समझने की जरूरत है। बजट के विषयों को ठीक से समझें और उसे जन-जन तक पहुंचाएं।

गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस में युवती से दुष्कर्म के आरोपी टीटीई पर 10 हजार का इनाम घोषित*

 

*संतोष कुमार सिंह*
*गोरखपुर*

गोरखपुर-अहमदाबाद एक्सप्रेस ट्रेन में एक युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी टीटीई पर 10 हजार रुपये का इनाम रखा गया है। गोरखपुर के रेलवे जीआरपी एसपी लक्ष्मी निवास मिश्र ने जानकारी दी कि आरोपी फरार टीटीई राहुल कुमार, एनईआर के वाराणसी डिवीजन में कार्यरत है।उसे बर्खास्त करने के लिए विभाग को पत्र भेजा गया है, और वह घटना के बाद से फरार है।

जानकारी के अनुसार, टीटीई ने एक एनसीसी कैडेट युवती के साथ दुष्कर्म किया। युवती परीक्षा देने मऊ गई थी और लौटते समय भीड़ के कारण वह टिकट नहीं ले सकी। इस वजह से वह एसी कोच में खड़ी थी। आरोपी ने उसे सीट दिलाने के बहाने अपने केबिन में बुलाया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया। एसपी जीआरपी लक्ष्मी निवास मिश्रा ने बताया कि युवती की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी की तलाश के लिए पुलिस टीम गठित की गई है। यह घटना रविवार को हुई थी। युवती अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस ट्रेन से मऊ से लौट रही थी। टीटीई ने उसे टिकट बनाने और सीट देने के बहाने केबिन में बुलाया। पहले सामान्य बातचीत की, लेकिन फिर उसने अश्लील हरकतें शुरू कर दीं। जब युवती ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे धमकी दी और दुष्कर्म किया। यह घटना इंदारा और देवरिया के बीच हुई।
घटना के बाद युवती ने 112 पर फोन किया, जिससे टीटीई देवरिया में ट्रेन से उतरकर भाग गया। जीआरपी पुलिस ने बताया कि पीड़ित युवती ने शिकायत दर्ज कराई है। वह गोरखपुर में किराए के कमरे में रहकर भर्ती की तैयारी कर रही थी और एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट परीक्षा देने मऊ गई थी। परीक्षा के बाद लौटते समय स्टेशन पर भीड़ के कारण वह टिकट नहीं ले सकी थी।
युवती का आरोप है कि टीटीई ने केबिन में बैठाने के बाद दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। सामान्य बातचीत के कुछ समय बाद उसका व्यवहार बदल गया और उसने दुष्कर्म किया। जब युवती ने विरोध किया, तो आरोपी ने बिना टिकट यात्रा का मामला बनाकर कार्रवाई की धमकी दी। पीड़िता ने शोर मचाया और 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचित किया। जैसे ही मामला सामने आया, आरोपी टीटीई देवरिया स्टेशन पर ट्रेन से उतरकर भाग गया।

डॉ कोस्तुभ ने सुनी फरियाद मुख्यमंत्री योगी

*”आदित्यनाथ* *लखनऊ से कर रहे सीधी* *निगरानी, संबंधित अधिकारियों को तत्काल निस्तारण के निर्देश*


गोरखपुर। आमजन की शिकायतों के त्वरित समाधान को लेकर गोरखपुर पुलिस प्रशासन पूरी सक्रियता के साथ कार्य करता नजर आया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. कोस्तुभ ने अपने कार्यालय में पहुंचे फरियादियों की समस्याएं की सुनीं और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए। खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ से की जा रही थी।
एसएसपी कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग विभिन्न समस्याओं को लेकर पहुंचे। इनमें भूमि विवाद से जुड़े पुलिस प्रकरण, मुकदमे में कार्रवाई की मांग, लंबित विवेचना, पारिवारिक विवाद, मारपीट, साइबर अपराध, धोखाधड़ी तथा थाना स्तर पर सुनवाई न होने जैसी शिकायतें प्रमुख रहीं। डॉ. कोस्तुभ ने प्रत्येक फरियादी की बात गंभीरता से सुनी और संबंधित क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी या विवेचक को फोन पर निर्देशित किया।
जनसुनवाई के दौरान कई मामलों में एसएसपी ने संबंधित अधिकारी को सीधे फोन मिलाकर शिकायतकर्ता से बात कराई, ताकि समस्या की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिया कि प्रकरण का निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी पीड़ित को अनावश्यक रूप से थाने के चक्कर न लगाने पड़ें।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ से की जा रही थी। मुख्यमंत्री ने कुछ मामलों में स्वयं संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और तत्परता अनिवार्य है। पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी के चलते पुलिस अधिकारियों में अतिरिक्त सक्रियता देखी गई। जिन मामलों में लापरवाही की आशंका जताई गई, उनमें तत्काल रिपोर्ट तलब की गई। एसएसपी डॉ. कोस्तुभ ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक शिकायत का विधिवत पंजीकरण किया जाएगा और उसकी प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को निर्देश दिया कि जनसुनवाई से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए।
एसएसपी ने यह भी कहा कि फरियादियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनकी समस्या को पूरी संवेदनशीलता से सुना जाए। पुलिस का उद्देश्य केवल मुकदमा दर्ज करना नहीं, बल्कि पीड़ित को वास्तविक राहत दिलाना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
जनसुनवाई में आए कई फरियादियों ने मौके पर ही अपनी शिकायतों पर कार्रवाई शुरू होने पर संतोष व्यक्त किया। कुछ मामलों में तत्काल निर्देश जारी किए गए, तो कुछ में निर्धारित समयसीमा तय कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
गोरखपुर एसएसपी कार्यालय में यह जनसुनवाई न केवल शिकायतों के समाधान का माध्यम बनी, बल्कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास को भी मजबूत करती नजर आई। मुख्यमंत्री की निगरानी और एसएसपी की सक्रियता से यह स्पष्ट संदेश गया कि शासन और पुलिस प्रशासन आमजन को त्वरित न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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