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बिजनौर: नौकरी के बहाने कश्मीर ले जा कर कराया धर्म परिवर्तन

May 20, 2026

बिजनौर: नौकरी के बहाने कश्मीर ले जा कर कराया धर्म परिवर्तन

बिजनौर, 20 मई 2026 (उत्तर प्रदेश समाचार सेवा) *नौकरी के बहाने कश्मीर ले जाकर नाबालिग युवक का कराया जबरण धर्म परिवर्तन* प्राप्त विवरण के अनुसार शहर कोतवाली थाना अंतर्गत गांव काजीवाला के सैकड़ो ग्रामीण आज पुलिस अधीक्षक बिजनौर के कार्यालय पहुंचकर धरना प्रदर्शन करते हुए गांव के ही नाबालिक को जबरन मुस्लिम धर्म परिवर्तन करने पर न्याय की मांग करने लगे। गांव काजीवाला के ग्रामीणों ने बताया कि कृष्ण कुमार के नाबालिक पुत्र विशाल को लगभग 4 वर्ष पूर्व गांव का ही वसीम नौकरी के बहाने जम्मू कश्मीर ले गया था। वहां ले जाकर उसने अपनी मीठी-मीठी बातों में विशाल को फंसा लिया। जिसके कारण वह पिछले चार वर्ष से परिवार वालों से बात नहीं करता था। 15 मई 2026 को जब विशाल के पिता कृष्ण कुमार ने विशाल से फोन पर वार्ता की तो विशाल बहुत डरा हुआ था और उसने रोते हुए अपने आप को जम्मू कश्मीर से ले जाने की पिता से गुहार लगाई तथा कहा कि मेरा जबरन धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम बना दिया गया है। इस घटना पर विशाल के पिता कृष्ण कुमार के होश उड़ गए, तो उसने गांव वालों को एकत्र करके पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर अपने बेटे को जबरन धर्म परिवर्तन कराने वालों से छुड़ाने की गुहार लगाई। भाजपा के वरिष्ठ नेता ऐश्वर्या मौसम चौधरी ने भी पुलिस अधीक्षक से इस संबंध में त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करने की मांग की। पुलिस अधीक्षक बिजनौर ने त्वरित कार्यवाही करते हुए एक दारोगा व दो सिपाहियों को हवाई जहाज से जम्मू कश्मीर भेज दिया। और विशाल से हमजा बने विशाल को कश्मीर के कुपवाड़ा थाना क्षेत्र से बरामद करने का आदेश दिया। फिलहाल पुलिस अधीक्षक बिजनौर अभिषेक झा ने वसीम और षड्यंत्रकारी लोगों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराकर विधिक कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन दिया। हिंदूवादी संगठनों के कुछ नेताओं ने बताया कि पहले भी कुछ मजदूरों को पहाड़ों की घाटी में फंसे होने पर वहां से सकुशल बिजनौर लाने का काम किया गया था।

May 15, 2026

शिक्षा प्रेरकों ने डीम से की बकाया भुगतान की मांग

बिजनौर15 मई। (उत्तर प्रदेश समाचार सेवा) साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम सभा में खोले गए ग्राम लोक शिक्षा केदो पर संविदा पर पूर्व में रखे गए जनपद बिजनौर के शिक्षा प्रेरक अपने पुराने बकाया मानदेय के भुगतान के लिए आज जिलाधिकारी बिजनौर के कार्यलय पर एकत्रित हुए । अपना बकाया मानदेय संबंधित दो सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी बिजनौर को सौंप कर बकाया मानदेय भुगतान की मांग की। जिलाधिकारी को सौंपे मांग पत्र में साक्षरता कर्मियों ने बकाया मानदेय भुगतान एवं आयु सीमा के अंदर वाले साक्षरता कर्मियों को किसी भी विभाग में समायोजन तथा आयु पार कर चुके साक्षरता कर्मियों को बेरोजगारी भत्ता और साक्षरता जैसे महत्वपूर्ण कार्य में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले साक्षरता कर्मियों को प्राथमिकता के आधार पर आयुष्मान कार्ड बनवाने संबंधित मांग पत्र भी दिया। जिला कलेक्ट्रेट में जनपद से आए शिक्षा प्रेरको ने सरकार पर प्रेरकों को बेरोजगार करने और उनका लगभग 18 महीने का मानदेय न देने का आरोप लगाते हुए शिक्षा प्रेरकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। तथा कहा कि साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषा विभाग भारत सरकार द्वारा वर्ष 2009 -10 में पूरे प्रदेश में साक्षर भारत मिशन योजना लागू करके प्रत्येक ग्राम सभा स्तर पर एक महिला एवं एक पुरुष प्रेरक को तैनात करके 15 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों को साक्षर बनाने के लिए प्रेरित करने का कार्य दिया था। लेकिन सरकार ने जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरको के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए साक्षर भारत मिशन योजना को 31 मार्च 2018 को बंद कर दिया था। सरकार द्वारा प्रेरकों से बीएलओ से लेकर हाउसहोल्ड सर्वे और अन्य सरकारी योजनाओं में बिना किसी मानदेय के भी काम लिया गया था। इन सब के बावजूद भी अकेले जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरकों को उनका 18 माह का मानदेय आठ वर्ष बाद भी नहीं दिया गया। जिसके कारण बेरोजगारी का दंश झेल रहे प्रेरकों के परिवार में रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इस अवसर पर प्रेरक एकता कल्याण समिति (पंजीकृत) के जिला अध्यक्ष पुखराज सिंह मलिक ने कहा कि बकाया मानदेय के संबंध में भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 को साक्षरता विभाग की ऑडिट कराई गई थी। ऑडिट टीम द्वारा धनराशि के सापेक्ष वांछित साक्षरता कर्मियों का सत्यापन/ प्रमाणित विवरण निर्धारित प्रपत्र पर उपलब्ध करा कर साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत रहे साक्षरता कर्मियों का अवशेष मानदेय का भुगतान करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन भारत सरकार ने बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनके अवशेष मानदेय को 8 वर्ष बाद भी निर्गत नहीं किया। जिसके चलते बेरोजगार हो चुके शिक्षा प्रेरकों के परिवार में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। इस अवसर पर प्रेरक एकता कल्याण समिति (पंजीकृत) के जिला महामंत्री चौधरी ईशम सिंह ने भारत सरकार से मांग की कि साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्य कर चुके और बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को उनका बकाया मानदेय एक मुश्त दिलाया जाए तथा साक्षरता कर्मियों को अनुभव के आधार पर किसी भी विभाग में समायोजित किया जाए। अथवा बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को बेरोजगारी भत्ता दिलाया जाए। जनपद भर से एकत्रित हुए साक्षरता कर्मियों के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी बिजनौर के नाम दो सूत्रीय मांग पत्र देकर प्रेरकों का मानदेय एकमुश्त दिलाने एवं आयु सीमा के अंदर वाले साक्षरता कर्मियों को किसी भी विभाग में समायोजित करने की मांग के साथ-साथ आयु सीमा पर कर चुके साक्षरता कर्मियों को बेरोजगारी भत्ता एवं आयुष्मान कार्ड बनवाने की भी मांग की।

April 29, 2026

बिजनौर में शिक्षा प्रेरकों ने बकाया की मांग को लेकर धरना दिया

किरतपुर 29 अप्रैल।साक्षर भारत मिशन के तहत संविदा पर प्रत्येक ग्राम सभा में रखे गए जनपद बिजनौर के शिक्षा प्रेरकों ने बकाया मानदेय के भुगतान के लिए आज खंड शिक्षा अधिकारी किरतपुर के कार्यलय में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया। धरना स्थल पर पहुंचे उप सचिव – साक्षर भारत मिशन /खंड शिक्षा अधिकारी किरतपुर एवं खंड विकास अधिकारी किरतपुर को अपने बकाया मानदेय भुगतान संबंधित दो सूत्रीय मांग पत्र दिया।

धरना स्थल पर एकत्र हुए विकास खंड किरतपुर के शिक्षा प्रेरको ने सरकार पर प्रेरकों को बेरोजगार करने और उनका लगभग 18 महीने का मानदेय न देने का आरोप लगाते हुए शिक्षा प्रेरकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। तथा कहा कि साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषा विभाग भारत सरकार द्वारा वर्ष 2009 -10 में पूरे प्रदेश में साक्षर भारत मिशन योजना लागू करके प्रत्येक ग्राम सभा पर एक महिला एवं एक पुरुष प्रेरक को तैनात करके 15 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों को साक्षर बनाने के लिए प्रेरित करने का कार्य दिया था। लेकिन सरकार ने जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरको के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए साक्षर भारत मिशन योजना को 31 मार्च 2018 को बंद कर दिया था। सरकार द्वारा प्रेरकों से बीएलओ से लेकर हाउसहोल्ड सर्वे और अन्य सरकारी योजनाओं में भी काम लिया गया था। इन सब के बावजूद भी अकेले जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरकों को उनका 18 माह का मानदेय आठ वर्ष बाद भी नहीं दिया गया। जिसके कारण बेरोजगारी का दंश झेल रहे प्रेरकों के परिवार में रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इस अवसर पर प्रेरक एकता कल्याण समिति (पंजीकृत) के जिला अध्यक्ष पुखराज सिंह मलिक ने बताया कि बकाया मानदेय के संबंध में भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 को साक्षरता विभाग की ऑडिट कराई गई थी। ऑडिट टीम द्वारा धनराशि के सापेक्ष वांछित साक्षरता कर्मियों का सत्यापन/ प्रमाणित विवरण निर्धारित प्रपत्र पर उपलब्ध करा कर साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत रहे साक्षरता कर्मियों का अवशेष मानदेय का भुगतान करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन भारत सरकार ने बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनके अवशेष मानदेय 8 वर्ष बाद भी निर्गत नहीं किया। जिसके चलते बेरोजगार हो चुके शिक्षा प्रेरकों के परिवार में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। धरना स्थल पर पहुंचे प्रेरक एकता कल्याण समिति के जिला अध्यक्ष श्री पुखराज सिंह मलिक ने भारत सरकार से मांग की कि साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्य कर चुके और बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को उनका बकाया मानदेय एक मुफ्त दिलाया जाए तथा साक्षरता कर्मियों को अनुभव के आधार पर किसी भी विभाग में समायोजित किया जाए। अथवा बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को बेरोजगारी भत्ता दिलाया जाए। साक्षरता कर्मियों ने इस अवसर पर उप बेसिक शिक्षा अधिकारी किरतपुर एवं खंड विकास अधिकारी किरतपुर को प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम दो सूत्रीय मांग पत्र देकर प्रेरकों का मानदेय एकमुश्त दिलाने एवं साक्षरता कर्मियों को किसी भी विभाग में समायोजित करने की मांग की। ब्लॉक अध्यक्ष बाबूराम सिंह की अध्यक्षता एवं महिपाल सिंह के संचालन में संपन्न सांकेतिक धरना प्रदर्शन में सर्वश्री चौधरी ईशम सिंह (जिला महामंत्री), रविंद्र सिंह, अंजार अहमद, बाबूराम सिंह, महिपाल सिंह, मनीराम सिंह, तारा सिंह, दिलशाद आलम, कनक देवी, मनोहरी देवी, शबनम परवीन, नाजिया परवीन, भीम सिंह, भूपेंद्र सिंह आदि सैकड़ो प्रेरक उपस्थित रहे।

April 22, 2026

शिक्षा प्रेरकों ने की बकाया भुगतान की मांग

बिजनौर 22 अप्रैल।साक्षर भारत मिशन के तहत संविदा पर प्रत्येक ग्राम सभा में रखे गए जनपद बिजनौर के शिक्षा प्रेरकों ने बकाया मानदेय के भुगतान के लिए आज सचिव- साक्षर भारत मिशन / जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के प्रांगण में सांकेतिक धरना देकर अपने बकाया मानदेय भुगतान की मांग की। धरना स्थल पर एकत्र हुए जनपद बिजनौर के शिक्षा प्रेरको ने सरकार पर प्रेरकों को बेरोजगार करने और उनका लगभग 18 महीने का मानदेय न देने का आरोप लगाते हुए शिक्षा प्रेरकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। तथा कहा कि साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषा विभाग भारत सरकार द्वारा वर्ष 2009 -10 में पूरे प्रदेश में साक्षर भारत मिशन योजना लागू करके प्रत्येक ग्राम सभा पर एक महिला एवं एक पुरुष प्रेरक को तैनात करके 15 वर्ष से ऊपर की उम्र के लोगों को साक्षर बनाने के लिए प्रेरित करने का कार्य दिया था। लेकिन सरकार ने जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरको के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए साक्षर भारत मिशन योजना को 31 मार्च 2018 को बंद कर दिया था। सरकार द्वारा प्रेरकों से बीएलओ से लेकर हाउसहोल्ड सर्वे और अन्य सरकारी योजनाओं में भी काम लिया गया था। इन सब के बावजूद भी अकेले जनपद बिजनौर के लगभग 2250 प्रेरकों को उनका 18 माह का मानदेय आठ वर्ष बाद भी नहीं दिया गया। जिसके कारण बेरोजगारी का दंश झेल रहे प्रेरकों के परिवार में रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गई है। इस अवसर पर प्रेरक एकता कल्याण समिति (पंजीकृत) के जिला अध्यक्ष पुखराज सिंह मलिक ने बताया कि बकाया मानदेय के संबंध में भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2017-18 को साक्षरता विभाग की ऑडिट कराई गई थी। ऑडिट टीम द्वारा धनराशि के सापेक्ष वांछित साक्षरता कर्मियों का सत्यापन/ प्रमाणित विवरण निर्धारित प्रपत्र पर उपलब्ध करा कर साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यरत रहे साक्षरता कर्मियों का अवशेष मानदेय का भुगतान करने का अनुरोध किया गया था। लेकिन भारत सरकार ने बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनके अवशेष मानदेय 8 वर्ष बाद भी निर्गत नहीं किया। जिसके चलते बेरोजगार हो चुके शिक्षा प्रेरकों के परिवार में आर्थिक संकट पैदा हो गया है। प्रेरक एकता कल्याण समिति के जिला अध्यक्ष श्री पुखराज सिंह मलिक ने भारत सरकार से मांग की की साक्षर भारत मिशन कार्यक्रम के अंतर्गत कार्य कर चुके और बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को उनका बकाया मानदेय एक मुफ्त दिलाया जाए तथा साक्षरता कर्मियों को अनुभव के आधार पर किसी भी विभाग में समायोजित किया जाए। अथवा बेरोजगार हो चुके साक्षरता कर्मियों को बेरोजगारी भत्ता दिलाया जाए। साक्षरता कर्मियों ने इस अवसर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम दो सूत्रीय मांग पत्र देकर प्रेरकों का मानदेय एकमुश्त दिलाने एवं साक्षरता कर्मियों को किसी भी विभाग में समायोजित करने की मांग की। जिला अध्यक्ष पुखराज सिंह मलिक की अध्यक्षता एवं चौधरी ईशम सिंह के संचालन में संपन्न सांकेतिक धरना प्रदर्शन में सर्वश्री वृक्षपाल सिंह, महिपाल सिंह, विपिन कुमार, वंदना, अरविंद शर्मा ,वीर सिंह, ब्रह्मपाल सिंह, लिखेनद्र सिंह, नवनीत कुमार नरेश कुमार, सलोनी, कनक देवी मनोहरी देवी शबनम परवीन नाजिया परवीन निप्पल गौरव त्यागी भूपेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।

April 18, 2026

Bijnore: हाइवे पर वृक्षारोपण की मांग

बिजनौर। अंतरराष्ट्रीय जाट संसद के प्रदेश सचिव एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत संगठन के जिला अध्यक्ष डॉ विकुल मलिक ने भारत सरकार के केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव एवं उत्तर प्रदेश सरकार में वन, पर्यावरण, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ अरुण कुमार सक्सेना को एक-एक पत्र भेज कर जनपद बिजनौर से निकल रहे पानीपत खटीमा नेशनल हाईवे एवं जनपद से गुजर रहे सभी हाईवे के दोनों ओर 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कराने की मांग की है। श्री विकुल मलिक ने अपने पत्र में कहा कि हाईवे निर्माण कंपनीयो द्वारा हाईवे निर्माण एवं चौड़ीकरण के लिए जनपद बिजनौर की सभी सड़कों पर से छायादार वृक्षों को संबंधित विभाग से कटवा दिया गया था। जिसके कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। सड़कों पर छायादार वृक्षों के न होने से एक ओर जहां प्रदूषण को बढ़ावा मिल रहा है वही दो पहिया वाहन चालकों को एवं अन्य यात्रियों को यात्रा करते समय झुलसने वाली भारी गर्मी झेलनी पड़ रही है। श्री विकुल मलिक ने जनपद बिजनौर की समस्त स्वयंसेवी संस्थाओं से भी अपील की है कि वह भी अभी से विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून 2026 को जनपद बिजनौर की वृक्षों रहित हो चुकी सड़कों पर वृक्षारोपण करने का मन बनाने का प्रयास करें।

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