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 भीमनगरी के उद्घाटन के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को दिया निमंत्रण

April 3, 2026

 भीमनगरी के उद्घाटन के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को दिया निमंत्रण

15 अप्रैल को जीआईसी ग्राउंड में होगा यह आयोजन

लोकमित्र ब्यूरो
आगरा। संविधान शिल्पी डॊ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती की तैयारियां जोरःशोर से चल रही हैं। आंबेडकर जयंती महोत्सव के अंतर्गत 15 अप्रैल को होने वाली भीमनगरी के उद्घाटन के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को बुलाए जाने की तैयारी है। विगत दिवस दिल्ली में संसद भवन में ओम बिरला को भीमनगरी में मुख्य अतिथि के रूप में आगरा आने का औपचारिक निमंत्रण दिया गया।

केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने स्वयं यह निमंत्रण सौंपते हुए लोकसभा अध्यक्ष से 15 अप्रैल को जीआईसी ग्राउंड, आगरा में होने वाले भीमनगरी समारोह के उद्घाटन में शामिल होने का आग्रह किया।

इस अवसर पर भीमनगरी समारोह आयोजन समिति के प्रमुख सदस्य भी मौजूद रहे, जिनमें राहुल सागर, …
[9:55 pm, 03/04/2026] AK Tau: शाहगंज में नगर निगम के ट्रक ने ले ली एक्टिवा सवार की जान!

आगरा, 03 अप्रैल। थाना शाहगंज क्षेत्र के अलबतिया रोड पर हरिओम वाटिका के सामने शुक्रवार को नगर निगम के ट्रक ने एक एक्टिवा सवार युवक की जान ले ली।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नगर निगम का ट्रक अलबतिया रोड की ओर से रामनगर की पुलिया की ओर जा रहा था। जबकि एक्टिवा सवार युवक रामनगर पुलिया से अलबतिया रोड की ओर जा रहा था। अचानक वह ट्रक की चपेट में आ गया और पहियों के बीच फंस गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
क्षेत्रीय लोगों ने ट्रक ड्राइवर को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

हादसे से क्षेत्रीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि नगर निगम की गाड़ियों से पिछले वर्षों में कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। जब तक नगर निगम की गाड़ियों की नियमित जांच नहीं होगी और चालकों का भी नियमित परीक्षण नहीं होगा, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।
गौरतलब है कि पूर्व में संजय प्लेस के निकट स्थित एक स्कूल की छात्रा की भी नगर निगम के ट्रक की चपेट में आकर जान जा चुकी है।

Agra कंगना रनौत केस में अदालत में हुई बहस, किसानों संबंधी बयान पर तीखे सवाल

KANGNA RANAUT

16 अप्रैल को आएगा फैसला

आगरा। हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा की सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ दर्ज किसानों के अपमान और राजद्रोह से जुड़े मामले में आज स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए में सुनवाई के दौरान जोरदार बहस हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निर्णय के लिए 16 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित कर दी है।

यह मामला हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा क्षेत्र से सांसद कंगना रनौत द्वारा किसानों को लेकर दिए गए कथित विवादित बयानों से जुड़ा है। सुनवाई स्पेशल कोर्ट एमपी-एमएलए के न्यायाधीश अनुज कुमार सिंह की अदालत में हुई, जहां लगभग ढाई से तीन घंटे तक दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस चली।

वादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा, जो स्वयं किसान पृष्ठभूमि से जुड़े हैं, ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि 26 अगस्त 2024 को दिए गए बयान में कंगना रनौत ने किसान आंदोलन को लेकर गंभीर और अपमानजनक टिप्पणियां की थीं। उन्होंने कोर्ट में अपनी खेती से जुड़े दस्तावेज (खसरा-खतौनी) भी प्रस्तुत किए और कहा कि इस बयान से करोड़ों किसानों की भावनाएं आहत हुई हैं।

बादी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, दुर्गविजय सिंह भैया, राजवीर सिंह, बीएस फौजदार, विष्णु उपाध्याय, प्रीति कुमारी, राजेंद्र गुप्ता, धीरज, अजय सागर, पवन गौतम सहित कई अधिवक्ताओं ने बहस में हिस्सा लिया। उन्होंने अदालत के समक्ष यह सवाल भी उठाया कि क्या 1947 में मिली आजादी को भीख कहना उचित है और क्या किसान आंदोलन को गलत तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया।

वहीं, कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनुसूया चौधरी ने पक्ष रखते हुए कहा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और इंटरव्यू में आंदोलन के दौरान कुछ विवादित घटनाओं का उल्लेख हुआ था, जिनके आधार पर बयान दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के दौरान अलगाववादी नारे और कुछ आपराधिक घटनाएं सामने आई थीं।

इस पर वादी पक्ष ने तीखा प्रतिवाद करते हुए कहा कि किसान आंदोलन केवल तीन कृषि कानूनों के विरोध में था और कुछ अलग घटनाओं के आधार पर पूरे आंदोलन को बदनाम करना गलत है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन घटनाओं का जिक्र किया जा रहा है, उनमें किसी किसान का नाम या प्रत्यक्ष संबंध सिद्ध नहीं हुआ।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि कोर्ट के पूर्व आदेश (16 मार्च 2026) के अनुपालन में कंगना रनौत की ओर से उनकी अधिवक्ता ने 500 रुपये का जुर्माना वादी पक्ष को अदा किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

करीब ढाई घंटे तक चली विस्तृत बहस के बाद अदालत ने दोनों पक्षों को सुनते हुए 16 अप्रैल 2026 को आदेश सुनाने की तिथि तय कर दी।

इस दौरान जिला कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन कुमार शर्मा सहित कई कांग्रेसी कार्यकर्ता भी अदालत परिसर में मौजूद रहे। मामले की अगली सुनवाई अब 16 अप्रैल को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

March 31, 2026

ताजगंज में भीषण आग से परिवार की रोजी-रोटी राख, लाखों का नुक़सान

आगरा। ताजगंज थाना क्षेत्र स्थित राठौर मंदिर के पास तुलसी चबूतरा के पीछे बस्ती में आज सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक घर में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते घर के भीतर रखा सामान और परिवार की आजीविका का मुख्य सहारा ‘राधा मोहन साड़ी सेंटर’ चंद मिनटों में लपटों की भेंट चढ़ गया।

बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार बेहद साधारण आर्थिक स्थिति में जीवनयापन करता है। परिवार का पालन-पोषण सनी नामक दुकानदार करता है, जो वर्षों से साड़ी का छोटा कारोबार कर अपने घर का खर्च चला रहा था। स्थानीय लोगों के अनुसार, सनी लंबे समय से मेहनत-मजदूरी और छोटे व्यापार के सहारे अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रहा था। अचानक लगी इस आग ने परिवार की पूरी पूंजी और भविष्य की उम्मीदों को झकझोर कर रख दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही घर से धुआं और आग की लपटें उठती दिखाई दीं, आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया। बस्ती के लोग तुरंत मौके पर जुटे और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। घटना की सूचना मिलते ही भाजपा नेता राजेश राठौर तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लेते हुए ताजगंज पुलिस प्रशासन को तुरंत अवगत कराया। साथ ही स्थानीय निवासियों ने भी बिना देर किए फायर ब्रिगेड को सूचना दी।

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और दमकलकर्मियों ने स्थानीय लोगों के सहयोग से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। समय रहते राहत कार्य शुरू होने से आग को आसपास के अन्य मकानों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

भाजपा नेता राजेश राठौर ने बताया कि पीड़ित परिवार की दुकान में करीब चार से पांच लाख रुपये का साड़ी का माल रखा हुआ था। इसके अलावा दुकान में नकद रकम भी मौजूद थी, जो आग की चपेट में आकर पूरी तरह जल गई। उन्होंने कहा कि इस हादसे में परिवार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और उनकी वर्षों की मेहनत एक झटके में राख हो गई।

हालांकि इस दर्दनाक हादसे में राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। आग के दौरान घर में मौजूद लोग समय रहते बाहर निकल आए, जिससे एक बड़ा अनर्थ टल गया। स्थानीय लोगों ने इसे भगवान की कृपा बताया और कहा कि सामान फिर से जुटाया जा सकता है, लेकिन जान बचना सबसे बड़ी राहत है।

घटना के बाद इलाके में भारी संख्या में लोग जुट गए। पीड़ित परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। बस्तीवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता, राहत सामग्री और व्यापार दोबारा शुरू करने के लिए सहयोग दिया जाए, ताकि यह गरीब परिवार फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो सके।

आगरा: 48 अश्लील वीडियो से दहला गांव

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नाबालिगों की हरकतों से मचा हड़कंप, समाज पर लगा कलंक

— पुलिस तैनात, माहौल बिगाड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी

आगरा 31 मार्च 26,  थाना खंदौली क्षेत्र के एक गांव से सामने आए 48 आपत्तिजनक वीडियो ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इन वीडियो के वायरल होने के बाद गांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्र में भी हड़कंप और शर्मिंदगी का माहौल है। सबसे गंभीर बात यह है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे लड़के-लड़कियां नाबालिग बताए जा रहे हैं, जिससे मामला सिर्फ अश्लीलता तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि यह बाल संरक्षण, साइबर अपराध और सामाजिक विघटन का बेहद संवेदनशील विषय बन जाता है।

सूत्रों के अनुसार, वायरल वीडियो में तीन से चार किशोर और किशोरियों के चेहरे साफ तौर पर कैमरे में दिखाई दे रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि ये सभी एक ही गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वीडियो की संख्या अधिक होने और उनमें एक ही क्षेत्र के नाबालिगों की मौजूदगी ने ग्रामीणों के बीच गुस्सा, दहशत और अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है।

गांव में स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए एहतियातन पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पुलिस प्रशासन ने साफ संकेत दिए हैं कि माहौल खराब करने, वीडियो फैलाने, अफवाह फैलाने या सोशल मीडिया पर इसे भड़काऊ तरीके से प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

एक साथ 48 आपत्तिजनक वीडियो का सामने आना कोई सामान्य घटना नहीं मानी जा रही। ग्रामीणों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में वीडियो कैसे बने?

यह मामला सिर्फ कुछ वीडियो का नहीं, बल्कि ग्रामीण सामाजिक संरचना में बढ़ती डिजिटल अराजकता का संकेत है। जब नाबालिग लड़के-लड़कियां इस तरह कैमरे के सामने दिख रहे हों और वीडियो की संख्या दर्जनों में हो, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या बच्चों तक अश्लील कंटेंट की आसान पहुंच है? क्या कोई उन्हें उकसा, फुसला, या रिकॉर्ड कर रहा था? क्या यह सहमति से बनी सामग्री थी या दबाव/ब्लैकमेल का मामला? क्या वीडियो को किसी ने बाजारू कंटेंट की तरह तैयार कर फैलाया? क्या यह मामला सिर्फ गांव तक सीमित है या इसके तार बाहर तक जुड़े हो सकते हैं?

हालांकि, जब तक पुलिस जांच में पुष्टि न हो, तब तक किसी पोर्नोग्राफी गिरोह या अश्लील फिल्म नेटवर्क से सीधा संबंध बताना जल्दबाजी होगी। लेकिन जांच का यह एंगल बेहद गंभीर और अनिवार्य माना जा रहा है।

—–नाबालिगों का मामला, कानून बेहद सख्त

क्योंकि वीडियो में कथित रूप से नाबालिग शामिल हैं, इसलिए यह मामला बेहद गंभीर कानूनी दायरे में आता है। यदि जांच में पुष्टि होती है, तो पोक्सो एक्ट, आईटी एक्ट की संबंधित धाराएं, अश्लील सामग्री प्रसारण/वितरण से जुड़ी धाराएं, बाल अश्लीलता से जुड़े प्रावधान और वीडियो वायरल करने, शेयर करने, सेव करने वालों पर भी कार्रवाई हो सकती है। जो लोग ऐसे वीडियो देखते, डाउनलोड करते, फॉरवर्ड करते या सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं, वे भी गंभीर अपराध की जद में आ सकते हैं।

——पुलिस की चुनौती, सच, साजिश या साइबर शोषण?

पुलिस के सामने इस मामले में कई बड़े सवाल हैं। वीडियो कब और कैसे रिकॉर्ड किए गए?
वीडियो किस डिवाइस से बने? सबसे पहले किसने वायरल किए? क्या किसी ने जानबूझकर गांव की छवि खराब करने के लिए फैलाया? क्या कोई बाहरी व्यक्ति या गिरोह बच्चों तक पहुंचा? क्या नाबालिगों को ब्लैकमेल किया गया? क्या वीडियो पहले से किसी प्राइवेट ग्रुप/ऐप पर शेयर हो रहे थे? अगर पुलिस डिजिटल फॉरेंसिक जांच गहराई से करती है, तो यह मामला सिर्फ गांव की बदनामी से आगे बढ़कर एक बड़े साइबर-यौन शोषण नेटवर्क तक भी पहुँच सकता है।

—-समाज के लिए कलंक, परिवारों के लिए त्रासदी

यह घटना सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक पतन का गंभीर संकेत है।
गांव की चौपाल से लेकर घर-घर तक चर्चा है। परिवारों में शर्म, तनाव, गुस्सा और भय का माहौल है। जिन बच्चों के चेहरे वायरल वीडियो में बताए जा रहे हैं, उनके परिवारों पर मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक दबाव कई गुना बढ़ गया है।

बच्चों की काउंसलिंग, अभिभावकों की डिजिटल निगरानी, स्कूल स्तर पर साइबर जागरूकता, सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर कड़ी रोक, गांव स्तर पर सामुदायिक हस्तक्षेप, ऐसे मामलों को रोकने के लिए सबसे बड़ी जरूरत है।
इस मामले में सिर्फ एफआईआर और पुलिस बल तैनात करना काफी नहीं होगा। इसके लिए साइबर सेल को तुरंत लगाया जाए। वीडियो की डिजिटल ट्रेल निकाली जाए। वायरल करने वाले सभी मोबाइल नंबर/आईडी ट्रैक हों। नाबालिगों की पहचान गोपनीय रखी जाए। पीड़ित/संबंधित परिवारों की काउंसलिंग हो। गांव में अफवाह नियंत्रण और शांति समिति बैठक कराई जाए। स्कूल-कॉलेज स्तर पर मोबाइल और सोशल मीडिया उपयोग पर जागरूकता अभियान चले।

March 30, 2026

आक्रोश: आगरा में जाट महापुरुषों की प्रतिमा नहीं

आगरा को आजाद कराने वाले महाराजा सूरजमल और महाराजा जवाहर सिंह जैसे वीरों की यहां प्रतिमा तक नहीं

—– जाट महासभा फिर जताया आक्रोश, प्रभारी मंत्री को दिया ज्ञापन

आगरा। सदियों तक मुगल शासन के अधीन रहे आगरा को आजादी दिलाने वाले वीरों की स्मृति आज भी उपेक्षा का शिकार है। अजेय भरतपुर रियासत के महान योद्धा महाराजा सूरजमल और उनके पुत्र महाराजा जवाहर सिंह द्वारा 12 जून 1761 को आगरा किले पर कब्जा कर मुगलिया सत्ता से मुक्ति दिलाने के बावजूद आज तक उनकी एक प्रतिमा तक स्थापित नहीं हो सकी है। इस मुद्दे को लेकर अखिल भारतीय जाट महासभा ने तीखा आक्रोश जताते हुए सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

जाट महासभा के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने बताया कि महाराजा सूरजमल, महाराजा जवाहर सिंह, महाराजा रणजीत सिंह और महाराजा रतन सिंह ने करीब 13 वर्षों तक आगरा किले पर शासन कर ब्रज क्षेत्र की जनता को मुगल अत्याचारों से राहत दिलाई थी। इसके बावजूद उनकी ऐतिहासिक भूमिका को नजरअंदाज किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।

—-2020 से लंबित मांग, अब तक नहीं कोई ठोस कदम

अखिल भारतीय जाट महासभा द्वारा वर्ष 2020 से लगातार तत्कालीन और वर्तमान महापौर तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ज्ञापन देकर आगरा किले के सामने महाराजा सूरजमल और महाराजा जवाहर सिंह की अश्वारोही प्रतिमा स्थापित करने की मांग की जा रही है। 22 अप्रैल 2025 को राष्ट्रीय लोकदल के विधायक डॉ. अजय कुमार के माध्यम से भी मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा गया था।

इसके बाद संस्कृति एवं पर्यटन विभाग उत्तर प्रदेश के निदेशक द्वारा 31 जुलाई 2025 को पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी आगरा से 10 बिंदुओं पर आख्या मांगी गई, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई या रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

इसी क्रम में जाट महासभा के जिला अध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर ने भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत पौनियां के साथ सर्किट हाउस में प्रदेश के पर्यटन एवं आगरा के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह से मुलाकात कर उन्हें अनुरोध पत्र सौंपा।
पत्र में मांग की गई कि महाराजा सूरजमल और महाराजा जवाहर सिंह की अश्वारोही प्रतिमा आगरा किले के सामने स्थापित कर उनके योगदान को सम्मान दिया जाए।

महासभा ने निर्माणाधीन सिकंदरा मेट्रो स्टेशन का नाम वीर योद्धा रामकी चाहर के नाम पर रखने की भी मांग उठाई।
बताया गया कि रामकी चाहर और राजाराम जाट ने सिकंदरा पर कब्जा कर अकबर की कब्र को ध्वस्त किया था और उसकी अस्थियों को यमुना में प्रवाहित किया था। यह कदम मुगल शासक औरंगजेब द्वारा वीर गोकुला जाट की 1 जनवरी 1671 को आगरा कोतवाली में अमानवीय हत्या के विरोध में उठाया गया था।

—बलिदान देने वालों की स्मृति भी सुरक्षित नहीं

जाट महासभा ने इस पूरे मामले पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि जिन वीरों ने ब्रज और आगरा की जनता को मुगलों के अत्याचार से मुक्ति दिलाई, आज उनकी स्मृति को संरक्षित करने के लिए शासन-प्रशासन के पास समय नहीं है। यहां तक कि पर्यटन विभाग के पत्र पर भी कोई कार्रवाई नहीं होना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

प्रभारी मंत्री से मुलाकात के दौरान पूर्व ब्लॉक प्रमुख एवं युवा जाट महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष यशपाल राणा, अकोला के पूर्व ब्लॉक प्रमुख व जिला संयोजक देवेंद्र चाहर, फतेहपुर सीकरी के पूर्व उप प्रमुख भूदेव सिंह प्रधान, महानगर अध्यक्ष गजेंद्र नरवार (पूर्व पार्षद), महामंत्री लोकेश चौधरी, पूर्व पार्षद कर्मवीर चाहर सहित कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।

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